दोस्त के पति ने मुझे कार में चोद डाला

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Car Backseat sex story – Wife’s friend sex story: मेरा नाम गौतमी है, मैं 28 साल की हूँ, शादीशुदा हूँ और अपनी जिंदगी में सब कुछ सामान्य चल रहा था, जब तक वो रात नहीं आई।

पार्टी खत्म हो चुकी थी, घड़ी में रात के दो बज रहे थे, मेरी सबसे अच्छी दोस्त ने अपने पति रोहन से कहा कि मुझे घर छोड़ आए क्योंकि इतनी देर में अकेले जाना सुरक्षित नहीं, रोहन ने मुस्कुराते हुए हाँ कहा और हम दोनों उसकी कार में बैठ गए।

मैंने लाल बनारसी साड़ी पहनी हुई थी, गहरा और टाइट ब्लाउज मेरे भरे हुए स्तनों को और उभार दे रहा था, साड़ी का पल्लू मेरे कंधे पर अच्छे से टिका हुआ था, रोहन की नजरें ड्राइविंग करते हुए रियरव्यू मिरर से बार-बार मेरे चेहरे, होंठों और गले पर रुक रही थीं, मैंने उसकी नजरें पकड़ीं और हल्की मुस्कान दे दी।

कार चल पड़ी, पहले कुछ देर सामान्य बातें हुईं, पार्टी में किसने क्या पहना, किसने कितना पीया, फिर रोहन ने अचानक कहा, गौतमी तुम्हारी पुरानी इंस्टा फोटोज देखी थीं, कॉलेज टाइम की, तुम तो बहुत वाइल्ड लगती थीं, कितने बॉयफ्रेंड थे ना, उसकी आवाज में शरारत थी।

मैं हंस पड़ी और बोली, अरे तुम्हारी बीवी भी कम नहीं थी कॉलेज के दिनों में, दोनों हंसने लगे और बात पुराने सेक्सुअल किस्सों तक पहुँच गई।

मैंने बताया कि एक बार कॉलेज हॉस्टल की छत पर किसी के साथ पूरी रात कैसे बिताई थी, रोहन ने बताया कि उसकी बीवी के साथ पहली बार कार में ही हुआ था, कितना रिस्की और मजेदार था, कार के अंदर माहौल गर्म होने लगा, मेरी सांसें थोड़ी तेज हो रही थीं, रोहन बार-बार अपनी सीट पर असहज सा हिल रहा था।

अचानक उसने स्पीड कम की और धीमी कामुक आवाज में बोला, गौतमी ये सब सुनकर तो बहुत हार्ड हो गया हूँ, काश कोई होती जो इसका ख्याल रखती, मेरी चूत में मीठी सिहरन दौड़ गई, मैंने कहा, रोको कार अभी।

सड़क पूरी तरह सुनसान थी, रोहन ने कार साइड में लगाई, मैंने अपना दाहिना हाथ उसकी जांघ पर रखा और धीरे से ऊपर सरकाया, पैंट के ऊपर से ही उसका लंड सख्त और गरम महसूस हुआ, मैंने हल्का दबाया, रोहन ने सिसकारी भरी, आह्ह गौतमी।

मैंने जिप नीचे की, हाथ अंदर डाला और मोटा तपता लंड बाहर निकाला, टिप पर चिपचिपा रस पहले से लगा था, मैंने अपनी हथेली पर थूक दिया, खूब सारा गाढ़ा थूक, फिर उसे लंड पर अच्छे से मला, थूक से पूरा लंड चमकने लगा, फिसलन हो गई, मैं धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगी, रोहन सीट पर पीछे टिक गया, आँखें बंद कर लीं, उसकी कमर मेरे हाथ की लय में हल्की हिल रही थी।

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ओह्ह गौतमी थूक लगाकर कितना अच्छा फील हो रहा है, और तेज करो, उसने कराहते हुए कहा, मैंने फिर हथेली पर थूक डाला और स्पीड बढ़ा दी, कभी टिप को अंगूठे से रगड़ती, कभी थूक से गीली मुट्ठी पूरी लंबाई पर फिराती, फिसलन की आवाज आ रही थी, चप चप चप, उसका लंड मेरे हाथ में और फूलने लगा, कुछ मिनट बाद उसकी सांसें उखड़ने लगीं, गौतमी आने वाला है, मैंने और तेज किया, थूक और रस मिलकर लंड को पूरी तरह गीला कर चुके थे, वो जोर से कराहा, आह्ह्ह्ह और गरम वीर्य की धारें मेरे गीले हाथ पर गिरने लगीं।

मैंने अपना नेपकिन निकाला, पहले अपना हाथ पोंछा, फिर उसके लंड को प्यार से साफ किया, आखिरी बूंद भी सोखी और मुस्कुराकर उसे थमा दिया, ये रखो याद के लिए।

रोहन ने मेरी आँखों में देखा, फिर मुझे खींचकर अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए, पहला किस हल्का था, मैंने होंठ खोल दिए, अगले पल उसकी जीभ मेरे मुंह में घुस आई, हम पागलों की तरह एक-दूसरे को चूम रहे थे, उसका एक हाथ मेरी कमर पर, दूसरा मेरी गर्दन पर, मैंने उसके बालों में उँगलियाँ डाल दीं, किस इतना लंबा चला कि सांस लेने के लिए अलग होना पड़ा।

अलग हुए तो दोनों हांफ रहे थे, रोहन ने मेरी साड़ी का पल्लू धीरे से साइड किया, फिर आगे की प्लेट्स को हाथ से पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर उठाना शुरू किया, पहले घुटनों तक, फिर जांघों तक, आखिर में पेटीकोट के साथ कमर तक ऊपर सरका दिया, साड़ी और पेटीकोट अब मेरी कमर पर इकट्ठे हो गए थे, मेरी पैंटी पूरी तरह दिख रही थी, रोहन ने पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत सहलाने लगा, मेरी पैंटी पहले से भीगी हुई थी, उसने क्लिट पर दबाव डाला, मैं सिसकारी, उम्म्म रोहन।

उसने पैंटी के ऊपर से रगड़ना शुरू किया, मेरी चूत और गीली होती गई, मैंने भी उसका लंड फिर हाथ में लिया, अब आधा खड़ा था, हम एक-दूसरे को सहला रहे थे, फिर किस करने लगे, उसकी उँगलियाँ पैंटी के किनारे से अंदर घुसने लगीं, लेकिन पहले वो पैंटी के ऊपर से ही जोर-जोर से रगड़ता रहा, मेरी चूत पूरी तरह गर्म हो चुकी थी।

गौतमी पैंटी उतारो ना, उसने फुसफुसाया, मैंने अपनी गांड थोड़ी ऊपर उठाई ताकि पैंटी आसानी से उतर सके, रोहन ने पैंटी के किनारे पकड़े और नीचे सरका दी, मैंने भी गांड उठाकर पूरी मदद की, पैंटी पैरों से निकालकर मैंने खुद गियर हैंडल पर टांग दी, अब मेरी चूत पूरी तरह नंगी थी, रोहन ने दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं, आह्ह्ह रोहन कितना अच्छा, मैं कराही, वो उँगलियाँ अंदर-बाहर कर रहा था, अंगूठे से क्लिट रगड़ रहा था, मैं उसका लंड सहला रही थी, अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था।

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हम फिर गहरे किस में डूब गए, उसकी जीभ मेरे मुंह में नाच रही थी, मैंने उसकी जीभ चूसी, कुछ देर बाद मेरी चूत सिकुड़ने लगी, आह इह्ह ओह्ह रोहन, मैं झड़ गई, मेरी चूत ने उसकी उँगलियों को जोर से निचोड़ा, रस की धार निकली।

कुछ देर और ऐसे ही खेलते रहे, फिर रोहन ने कान में फुसफुसाया, गौतमी बैकसीट पर चलें, यहाँ ज्यादा जगह है, मैंने हाँ कहा, मैंने पहले साड़ी और पेटीकोट को धीरे-धीरे नीचे सरकाकर सामान्य किया, प्लेट्स थोड़ा ठीक कीं, पल्लू कंधे पर डाला, फिर दरवाजा खोलकर बाहर निकली, साड़ी संभालते हुए पीछे की सीट पर गई और बैठ गई, रोहन भी आ गया, बैकसीट बड़ी और आरामदायक थी।

बैकसीट पर बैठते ही मैंने खुद साड़ी का पल्लू फिर साइड किया, फिर आगे की प्लेट्स को एक-एक करके ऊपर उठाना शुरू किया, पहले घुटनों तक, फिर जांघों तक, आखिर में पेटीकोट के साथ कमर तक ऊपर सरका दिया, मेरी चूत फिर से पूरी तरह खुल गई और चमक रही थी, रोहन ने अपना लंड बाहर निकाला, मैंने उसे हाथ में लिया और फिर थूक डालकर गीला किया।

वो मेरे ब्लाउज के हुक खोलने लगा, एक-एक करके सारे हुक खुले, ब्लाउज खुल गया, ब्रा ऊपर सरका दी, मेरे भरे स्तन बाहर आ गए, रोहन ने उन्हें मुट्ठी में भरा, मसला, निप्पल मुंह में लेकर चूसा, दांतों से हल्का काटा, आह्ह रोहन और जोर से, मैं कराह रही थी।

फिर मैं झुककर उसका लंड मुंह में लिया, मुंह में खूब थूक भरा और लंड पर गिराया, जीभ से चाटा, टिप पर चूमी, ग्ग्ग्ग ग्ग्ग्ग गी गी गों गों गोग, मैं गले तक ले रही थी, रोहन मेरे बाल पकड़कर हल्के धक्के मार रहा था, ओह्ह फक गौतमी कितना अच्छा चूस रही हो, उसकी कराहट से मैं और गर्म हो गई।

कुछ देर बाद उसने मुझे गोद में बिठा लिया, मैंने साड़ी और पेटीकोट को और ऊपर सरकाकर कमर के ऊपर अच्छे से रख लिया ताकि बीच में न आएं, फिर उसका मोटा लंड अपनी चूत पर सेट किया, धीरे-धीरे बैठ गई, पूरा अंदर तक घुस गया, आआह्ह्ह्ह रोहन, हम दोनों ने लंबी कराहत भरी, मैं उसके ऊपर उछलने लगी, वो नीचे से जोर-जोर से धक्के मार रहा था।

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उसके हाथ मेरे स्तनों को मसल रहे थे, निप्पल खींच रहे थे, वो मेरी गर्दन चूम रहा था, कान में फुसफुसा रहा था, कितनी टाइट और रसीली है तेरी चूत गौतमी, मैं तेज उछल रही थी, साड़ी का कपड़ा कमर पर इकट्ठा होकर हिल रहा था, आह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह रोहन और तेज, कार हिल रही थी, कांच पर धुंध जम गई थी।

15-20 मिनट तक यही चला, मैं उसके लैप में, वो नीचे से पेलता रहा, मैं दो बार झड़ चुकी थी, आखिर वो बोला, गौतमी निकालूँ बाहर, मैंने और तेज उछलकर जवाब दिया, वो अंदर ही झड़ गया, गरम वीर्य की तेज धारें मेरी चूत के सबसे अंदर पहुंचीं, ऊऊ ऊइईई रोहन, मैं भी तीसरी बार झड़ गई।

हम थककर लिपट गए, कुछ देर और किस किया, पसीना पोंछा, फिर मैंने साड़ी और पेटीकोट धीरे-धीरे नीचे सरकाकर ठीक किया, प्लेट्स सेट कीं, पल्लू कंधे पर डाला, ब्लाउज के हुक बंद किए, मैंने अपनी गीली पैंटी फिर पहन ली, रोहन ने मुझे घर छोड़ा, जाते वक्त बोला, गौतमी प्लीज आई-पिल ले लेना, सॉरी कंडोम नहीं था, मैंने मुस्कुराकर कहा, कोई बात नहीं रोहन, दरवाजा बंद किया और अंदर चली गई, चूत में अभी भी उसकी गर्मी और चिपचिपाहट महसूस हो रही थी, मन कर रहा था कि फिर कब मिलेंगे।

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