भाभी की छुपी चुदास किरायेदार ने बुझाई

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Chudasi bhabhi sex story, Kirayedar/tenant sex story: हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम रेखा है, मैं एक अच्छे परिवार से हूँ, लेकिन मैं बहुत चालू लड़की हूँ, जो हर पल में रोमांच और मजे की तलाश में रहती हूँ। मुझे लड़कों के साथ घूमना बहुत अच्छा लगता है, उनकी नजरों में वो आकर्षण देखकर मेरे अंदर एक अलग ही उत्तेजना जाग जाती है। मेरी सारी सहेलियाँ भी मेरी तरह चालू हैं, हम सब मिलकर ऐसी बातें करती हैं जो किसी को पता चले तो हंगामा हो जाए।

मैं अपनी नयी हिंदी सेक्स कहानी लेकर हाजिर हूँ, जो मेरे जीवन की एक सच्ची घटना पर आधारित है और इसमें हर पल की उत्तेजना को मैंने महसूस किया है। मैं अपनी इस चुदाई की कहानी में आपको बताऊँगी कि कैसे मैंने अपने किरायेदार से अपनी चूत और गाँड की आग को शांत किया, वो हर स्पर्श, हर चुंबन और हर धक्के की गर्माहट आज भी मेरे शरीर में सिहरन पैदा कर देती है। हम दोनों को जब भी मौका मिलता है, तो हम दोनों लोग कैसे सेक्स कर लेते हैं, वो चोरी-छिपे मिलन की वो मिठास जो मेरी रगों में दौड़ जाती है।

अब मेरी शादी हो चुकी है, जो मेरे जीवन में एक नया मोड़ लाई, लेकिन मेरी वो चालू प्रवृत्ति अभी भी वैसी की वैसी है। मेरे पति सर्विस करते हैं, वो दिनभर काम में व्यस्त रहते हैं और शाम को थककर घर आते हैं। मेरे अभी कोई बच्चा नहीं हुआ है, जिससे घर में थोड़ी खालीपन महसूस होता है, लेकिन वो खालीपन मैं अपनी इच्छाओं से भरती हूँ। मेरा घर काफी बड़ा है, जिस वजह से मेरे पति ने चार पोर्शन किराए पर दिए हुए हैं, और ये किरायेदार मेरे लिए एक नया अवसर बन गए। सभी के घरों में सर्विस क्लास के लोग ही थे, जो सुबह-सुबह निकल जाते और शाम को लौटते, उनकी दिनचर्या मेरे लिए एक सुनहरा मौका थी। किरायेदारों में पति लोग जॉब पर चले जाते थे और उनकी पत्नियाँ या तो घरों में ही होती थीं, या उनमें से कुछ अपने काम-काज के चलते घर से बाहर निकल जाती थीं, जिससे घर की हवा में एक तरह की शांति और एकांत फैल जाता था।

इस तरह से दिन में मेरा पूरा घर लगभग सुनसान ही रहता था, सिर्फ हवा की सरसराहट और मेरी धड़कनों की आवाज सुनाई देती थी, जो मेरी उत्तेजना को और बढ़ा देती थी।

वैसे मैं अपने सभी किरायेदारों से भी बहुत अच्छे से बात करती हूँ, उनके साथ हँसी-मजाक और छोटी-मोटी बातें करके समय काटती हूँ, लेकिन क्या करूँ, जब मेरी चूत में खुजली होती है, तो अपने किरायेदार से ही चुदवाने की सोचने लगती हूँ, वो कल्पना मेरे मन में ऐसी आग लगा देती है कि मैं बेचैन हो जाती हूँ।

मेरे पति वैसे तो बिस्तर में बहुत मस्त हैं, उनकी मजबूत बाजुओं में मुझे घेरकर वो जो प्यार करते हैं, वो अद्भुत है, लेकिन जब भी उनको मौका मिलता था, तो वो मेरी चुदाई कर लेते थे, उनकी हर हरकत में वो जुनून होता है जो मुझे पागल कर देता है। लेकिन मुझे तो रोज सेक्स करने का मन करता था और मेरे पति ऑफिस में काम की वजह से मुझे सप्ताह में एक-दो बार ही चोदते थे, जिससे मेरी चुदाई ठीक से नहीं हो पाती थी, और मेरी वो प्यास अधूरी रह जाती थी, जो रातों में मुझे तड़पाती रहती थी।

मैं सुबह से घर का सब काम कर लेती हूँ और जब घर के लोग जॉब करने चले जाते हैं, तो मैं घर में अकेली रह जाती हूँ, वो अकेलापन मेरे शरीर की हर नस में एक मीठी सी जलन पैदा कर देता है। मैं दोपहर में अपने किरायेदारों से बात करती हूँ, उनकी आवाजें सुनकर मेरे मन में तरह-तरह की कल्पनाएँ घूमने लगती हैं। उनमें से ज्यादातर स्त्रियाँ घर से जब निकल जाती थीं, तब मैं बड़ा ही बोर फील करने लगती थी, लेकिन वो बोरियत जल्दी ही उत्तेजना में बदल जाती थी जब मैं सुरेश के बारे में सोचती।

मेरी सहेलियों की तो मौज थी, क्योंकि वो लोग अपने घर पर ही अपने बॉयफ्रेंड को या पड़ोसी को बुलाकर चुदवा लेती थीं, उनकी कहानियाँ सुनकर मेरी चूत गीली हो जाती थी और मैं भी वैसा ही कुछ करने की सोचती।

मेरे किरायेदारों में एक लड़का भी रहता है, जो मेरी नजरों में सबसे आकर्षक था। उसका नाम सुरेश है, वो अभी अकेला है, उसके चेहरे पर वो मासूमियत और आँखों में वो शरारत थी जो मुझे खींचती थी। उसकी शादी नहीं हुई है, जिससे वो और भी फ्री लगता था। हम दोनों में जल्दी ही दोस्ती की तरह रिश्ता बन गया था, वो छोटी-छोटी बातों से शुरू होकर गहरी हो गया था। मैं उसे बहुत पसंद करने लगी थी, उसकी मुस्कान देखकर मेरे दिल की धड़कन तेज हो जाती थी। हम दोनों एक-दूसरे से मजाक भी करते रहते थे, वो मजाक कभी-कभी इतने डबल मीनिंग वाले होते कि मेरे गाल लाल हो जाते। वैसे सुरेश अच्छा लड़का था, उसकी सादगी और मजबूती का मिश्रण मुझे पागल कर देता था।

चूँकि वो लड़का रात को जॉब करने जाता है, इसलिए मैं उससे दोपहर में बात कर लेती हूँ, वो दोपहर की वो बातें मेरे दिन को रोमांचक बना देती थीं। मैं जब भी कपड़े सुखाने के लिए जाती थी, तो सुरेश भी मेरे पीछे आता था और हम दोनों लोग छत पर बातें कर लेते थे, छत की गर्म हवा और उसकी निकटता से मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ जाती थी।

जब उससे मेरी बातचीत ज्यादा होने लगी, तो वो लड़का मुझे देखकर डबल मीनिंग वाली बातें बोलने लगा था, वो बातें सुनकर मेरी चूत में हलचल मच जाती थी। उसे मैंने ही छूट दे दी थी, इसलिए वो और भी ज्यादा बिंदास हो गया था, और मैं भी उसकी उन बातों का मजा लेती थी। मुझे वो अपने लिए एक शिकार जैसा लगता था, लेकिन असल में मैं खुद उसके जाल में फँस रही थी। मैं उसको अपने हुस्न की जाल में फँसाने की सोचने लगी, अपने शरीर की हर अदा से उसे लुभाने की कोशिश करती।

सुरेश मुझे अच्छा लगने लगा था, तब भी मैं अभी उसको अपने घर भी नहीं बुला सकती थी, क्योंकि डर था कि कहीं कोई देख न ले। इसलिए मैं उससे बात करके ही मजे ले लेती थी, वो बातें मेरी रातों को गर्म कर देती थीं। धीरे-धीरे मेरा और सुरेश का रिश्ता प्यार में बदलने लगा, वो प्यार जो निषिद्ध था लेकिन उतना ही मीठा।

वैसे तो मैं हमेशा सलवार सूट पहनती हूँ, जो मेरे शरीर को ढकता है लेकिन मेरी कर्व्स को हाइलाइट करता है। जब बहुत गर्मी होती थी, तो मैं मैक्सी भी पहन लेती थी, जो मेरे शरीर से चिपककर मेरी हर आउटलाइन को दिखाती थी। मैक्सी में मेरी चूची और गाँड का आकार बिल्कुल साफ दिखाई देता था, और गर्म हवा में वो हल्का सा उड़कर और भी ज्यादा आकर्षक लगता था। सुरेश मुझे मैक्सी में बहुत घूर-घूर कर देखता था, उसकी नजरें मेरे शरीर पर रेंगती हुई महसूस होती थीं। सुरेश कभी-कभी मुझसे बात करते-करते मेरी मैक्सी के अंदर देखता था, तो उसको मेरी चूची दिख जाती थी, और मैं जानबूझकर झुकती ताकि वो और देख सके। वो मेरी चूचियों को देखने के लिए ही मुझसे करीब होकर बात करता था, उसकी साँसें मेरे चेहरे पर लगतीं और मैं गर्म हो जाती। मैं भी उसको अपनी तरफ आकर्षित करने लगी थी, तो मैं उसको अब सब कुछ पहले से ज्यादा दिखाती थी, अपनी मैक्सी को थोड़ा सा सरकाकर या झुककर। वो भी मेरे पीछे पहले से ज्यादा आने लगा था, जैसे वो मेरी खुशबू को सूंघता हुआ। मैं ये जानती थी कि मेरा जिस्म सुरेश को पसंद है, और वो पसंद मुझे और ज्यादा उत्तेजित करती थी।

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हम दोनों लोग कभी-कभी एक-दूसरे से बात नहीं कर पाते थे, तो एक-दूसरे को देखकर स्माइल कर देते थे, वो स्माइल में एक वादा छिपा होता था। हम दोनों की इस स्माइल में एक गहरा अर्थ छिपा होता था, जो बस मुझे या सुरेश को ही समझ आता था, वो अर्थ था इच्छा का, प्यास का।

किरायदारों से किराया उगाहने के मुझे ही उनके पास जाना पड़ता था, और वो जाना मेरे लिए एक बहाना बन जाता था सुरेश से मिलने का। सुरेश की सबसे अच्छी बात ये लगती थी कि वो समय से अपना किराया मुझे दे देता था, इसलिए मैं भी उसको किराए में छूट कर देती थी, और वो छूट के बदले में वो मुझे और ज्यादा ध्यान देता। मैं कभी-कभी सुरेश से बात करने के लिए उसके रूम में भी चली जाती थी, उसके रूम की वो मर्दानी खुशबू मुझे मदहोश कर देती थी। मैं देखती थी कि वो अपना रूम भी अच्छे से रखता था और मेरे पति भी उससे खुश रहते थे, जिससे कोई शक नहीं होता। उससे हम लोगों को कोई शिकायत नहीं थी, वो परफेक्ट किरायेदार था मेरे लिए।

उस दिन घर में कोई नहीं था, घर की वो खामोशी मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी। दो किराएदार अपने परिवार के साथ बाहर गए हुए थे और एक महाशय अपनी ड्यूटी पर गए थे, उनके जाने की आवाज अभी भी मेरे कानों में गूँज रही थी। उनकी बीवी भी दोपहर में किसी जगह पर काम करने जाती थी, और आज वो भी चली गयी थी। उस दिन मुझे बड़ी चुदास चढ़ी थी, मेरी चूत में वो जलन थी जो सहन नहीं हो रही थी। मैं नहाकर छत पर कपड़े सुखाने के लिए गयी, नहाने के बाद मेरी त्वचा पर पानी की बूँदें चमक रही थीं और गर्म हवा उन्हें सुखा रही थी।

मैं कपड़े सुखा रही थी, तभी सुरेश ने मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया, उसकी मजबूत बाजुओं की पकड़ से मेरे शरीर में currents दौड़ गए। मैं उसको मना करने लगी, पर वो मान नहीं रहा था, मेरी मना में भी वो कमजोरी थी जो उसे रोक नहीं पा रही थी। उसने मुझसे बोला, “भाभी, मैं आपके जिस्म का दीवाना हो गया हूँ। मुझे भी पता है कि आप मुझे पसंद करती हो,” उसकी आवाज में वो जुनून था जो मेरी रगों में आग लगा रहा था।

उसकी ये बात सच थी कि मैं भी सुरेश को पसंद करने लगी थी, उसकी हर बात, हर स्पर्श मुझे अच्छा लगता था। वो मुझे किस करने लगा, उसके होंठों की गर्माहट मेरे होंठों पर लगते ही मैं पिघलने लगी। मैं खड़ी-खड़ी उसे मना तो कर रही थी, पर मुझे उसका मुझे चूमना बड़ा ही अच्छा लग रहा था, वो चुंबन इतना गहरा था कि मेरी साँसें रुक रही थीं।

कुछ ही देर में मेरा विरोध खत्म हो गया और मैं उसे सहयोग करने लगी, मेरी जीभ उसकी जीभ से मिलकर एक नृत्य कर रही थी। अब उसने मुझे किस करते हुए मेरी चूची को दबा दिया, तो मैं भी एकदम से गर्म हो गयी, उस दबाव से मेरी चूचियाँ सख्त हो गयीं और निप्पल्स में सिहरन दौड़ गयी। अब मैं भी उसको किस करने लगी, मेरे हाथ उसकी पीठ पर घूम रहे थे, उसकी शर्ट के नीचे उसकी गर्म त्वचा को छूते हुए।

कुछ देर मैंने उसको किस करने के बाद अपने से अलग कर दिया क्योंकि कभी-कभी मेरे पड़ोस के लोग भी छत पर अपना कपड़े सुखाने के लिए आ जाते हैं, और उनकी आने की आहट से मुझे डर लग रहा था। अगर कोई पड़ोसी मुझे मेरे किरायेदार के साथ किस करते हुए देख लेता, तो मेरी बदनामी हो जाती थी, और वो बदनामी का डर मुझे रोमांच भी दे रहा था।

मैं अपने रूम में आ गयी, मेरे पैर काँप रहे थे उत्तेजना से। मैं रूम में आकर सुरेश के साथ किस वाले पल को याद करने लगी और मेरी चूत गर्म होने लगी, वो यादें मेरी चूत को गीला कर रही थीं, मैं महसूस कर रही थी वो नमी अपनी जाँघों पर। मुझे भी सुरेश के साथ सेक्स करने का मन कर रहा था, वो मन इतना तेज था कि मैं खुद को रोक नहीं पा रही थी। मैं ये सब याद करते हुए लेटी थी कि तभी सुरेश मेरे रूम का दरवाजा खटखटाने लगा, वो खटखटाहट मेरी धड़कनों से मिल गयी थी।

मैंने पूछा, “कौन है?”

उधर से सुरेश की आवाज आई, “मैं हूँ भाभी जी,” उसकी आवाज में वो हड़बड़ी थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

मैंने दरवाजा खोला, तो सुरेश अंदर आकर मुझे किस करने लगा और मेरी चूची को दबाने लगा, उसके हाथों की वो सख्ती मेरी चूचियों को मसल रही थी, दर्द और मजा का मिश्रण।

मैं उससे बोली कि आप अपने रूम में जाओ, मैं अभी आपके रूम में ही आती हूँ, मेरी आवाज में वो कंपकंपी थी जो मेरी उत्तेजना बता रही थी।

इस पर वो मान गया, लेकिन जाते-जाते उसने मुझे एक गहरा किस किया जो मेरे होंठों को सुन्न कर गया।

मैं कुछ देर के बाद सुरेश के रूम में चली गयी, मेरे कदम तेज थे लेकिन दिल की धड़कन और तेज। मैंने देखा कि सुरेश इस वक्त केवल एक अंडरवियर में था और उसका लंड अंडरवियर में खड़ा था, वो उभार देखकर मेरी चूत में हलचल मच गयी। वो मुझे खींचकर अपने रूम में बिस्तर पर ले गया और मुझे बिस्तर पर धक्का देकर लिटा दिया, उस धक्के में एक रफनेस थी जो मुझे पसंद आई। वो दौड़कर अपने रूम का दरवाजा बंद करके वापस आ गया और मुझे किस करने लगा, उसके होंठ मेरे होंठों पर, गर्दन पर, कंधों पर घूम रहे थे, हर चुंबन से मेरी त्वचा जल रही थी।

इस वक्त मैं एकदम फ्री थी, मेरे मन में कोई डर नहीं था, सिर्फ इच्छा थी। मेरे घर के सभी लोग जॉब करने गए थे और बाकी बचा एक किरायेदार और उसकी पत्नी भी जॉब पर गए हुए थे, घर की वो पूर्ण शांति हमें और ज्यादा बोल्ड बना रही थी।

सुरेश ने मुझे किस करने के बाद मेरी मैक्सी को निकाल दिया और मैं ब्रा और पेंटी में हो गयी, मैक्सी सरकते हुए मेरी त्वचा पर रगड़ खा रही थी, जो उत्तेजना बढ़ा रही थी। उसने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूची को बहुत देर तक मसला, उसके हाथों की गर्माहट ब्रा के कपड़े से होकर मेरी चूचियों तक पहुँच रही थी, मैं सिसकार रही थी हल्के से। उसके बाद वो मेरी पेंटी को चाटने लगा, उसकी जीभ की गर्म नमी पेंटी पर लग रही थी, जो मेरी चूत की गर्मी को और बढ़ा रही थी। मेरी चूत से पानी निकल रहा था, जिससे मेरी पेंटी भीग गयी थी, वो गीलापन मुझे महसूस हो रहा था और सुरेश की जीभ उसे और गीला कर रही थी।

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सुरेश अपना लंड पकड़कर मुठ मारने लगा और उसके बाद उसने मेरी ब्रा और पेंटी निकाल दिया, ब्रा खुलते ही मेरी चूचियाँ आजाद हो गयीं और हल्के से उछलीं, पेंटी सरकते हुए मेरी जाँघों पर एक ट्रेल छोड़ गयी। अब मैं उसके सामने नंगी हो गयी थी, मेरी नंगी त्वचा पर कमरे की हवा लग रही थी, जो मेरे निप्पल्स को और सख्त कर रही थी। मेरे बड़ी-बड़ी चूचियों को देखकर वो एकदम से मचल गया, उसकी आँखों में वो भूख थी जो मुझे और गर्म कर रही थी। वो मेरी एक चूची को चूसने लगा और दूसरी को मसलने लगा, उसके मुँह की गर्माहट और जीभ की चालाकी से मेरी चूची में currents दौड़ रहे थे, मैं उसके बालों में उंगलियाँ फेर रही थी। उसके बाद वो मेरी दूसरी चूची को चूसने लगा और पहली को मसलने लगा, वो alternation से मेरी उत्तेजना चरम पर पहुँच रही थी।

इसके बाद वो नीचे को हुआ और मेरी चूत को चाटने लगा, उसकी जीभ मेरी चूत की फाँकों पर घूम रही थी, हर lick से मेरी चूत से और रस निकल रहा था, वो स्वाद उसे पागल कर रहा था। मैं मादक सिसकारियाँ ले रही थी, “आह्ह… ह्ह्ह… सुरेश, ऐसे ही चाटो… ऊऊ… इतना अच्छा लग रहा है, तुम्हारी जीभ कितनी नरम है, और गहरा चाटो… आह… इह्ह… ओह्ह,” मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। मैं एकदम से चुदाई के लिए बेचैन हो गयी थी, लेकिन मैं और foreplay चाहती थी, वो चाटते हुए मेरी क्लिट को चूस रहा था, जो मुझे पागल कर रहा था। वो मेरी चूत चाटने के बाद मेरी चूत में उंगली करने लगा, उसकी उंगली की रफ़ सर्फेस मेरी चूत की दीवारों पर रगड़ रही थी, हर इन-आउट से ‘स्लच… स्लच…’ की आवाज आ रही थी। मेरी चूत में हल्के-हल्के बाल थे, जिससे उसे मजा आ रहा था, वो उन बालों को सहलाते हुए उंगली कर रहा था।

शुरुआती बातचीत के बाद हम दोनों लोग एक-दूसरे से बात करते समय एडल्ट जोक और सेक्स के टॉपिक पर भी बात करते रहते थे, इसलिए हम दोनों लोग एक-दूसरे का साथ अच्छे से दे रहे थे, वो बातें अब असल में बदल रही थीं, जो हमें और करीब ला रही थीं।

वो मेरी चूत में उंगली करने के बाद मुझे अपना लंड चूसने के लिए बोलने लगा, उसकी आवाज में वो मिन्नत थी। लेकिन मैंने उसको लंड चूसने के लिए मना कर दिया, “नहीं सुरेश, अभी नहीं… पहले मुझे चोदो, मैं इतनी गर्म हो गयी हूँ, लेकिन पहले और चाटो, मुझे और उत्तेजित करो,” मैंने कहा, लेकिन अंदर से मैं भी चाहती थी। वो मन मारकर मान गया, लेकिन उसने मेरी जाँघों को चूमना शुरू कर दिया, मेरी आंतरिक जाँघों पर उसके होंठों की गर्माहट से मैं तड़प रही थी। उसके बाद वो मेरी चूत में दुबारा उंगली करने लगा, अब दो उंगलियाँ डालकर, जो मेरी चूत को फैला रही थीं, दर्द और मजा का मिश्रण।

मेरी चूत से पानी निकलने लगा था, वो रस उसके हाथों पर लग रहा था, चिपचिपा और गर्म। मैं उत्तेजित होकर उसको अपनी चूत में और अंदर तक उंगली करने के लिए बोल रही थी, “सुरेश, और अंदर… आह्ह… ह्ह्ह… ऐसे ही… ऊईई… इतना मजा आ रहा है, मत रुको, और एक उंगली डालो… आह… इह्ह… ओह्ह,” मेरी आवाज काँप रही थी। वो जोर-जोर से मेरी चूत में उंगली करने लगा था, उसकी स्पीड से मेरी चूत की दीवारें थरथरा रही थीं। मैं भी जोर-जोर से सिसकारियाँ लेने लगी थी, “आह्ह… ह्ह्ह… सुरेश, तुम्हारी उंगली कितनी अच्छी लग रही है… ह्ह्ह… और तेज… ऊउइ… उईईई… मेरी चूत तेरे लिए गीली है।”

उसके बाद तो हम दोनों चुदाई करने लिए एकदम रेडी हो गए, लेकिन इससे पहले उसने मेरी गर्दन, पेट, नाभि सबको चूमा, हर जगह उसकी जीभ ट्रेल छोड़ रही थी। मैंने सुरेश से कहा कि अब देर न करो, पहले मेरी प्यास बुझा दो, बाद में खेल लेना, मेरी आवाज में वो बेचैनी थी।

सुरेश राजी हो गया और उसने मुझे चित्त लिटा दिया, मेरी पीठ बिस्तर पर लगी और मैं अपनी टाँगें फैला लीं। वो मेरी चूत के सामने अपना लंड लेकर चुदाई के लिए तैयार हो गया, उसका लंड इतना सख्त और गर्म लग रहा था।

मैंने चूत खोल दी थी तो उसने मेरी चूत की फाँकों पर अपना लंड टिका दिया, उसके लंड की गर्म टिप मेरी चूत पर लगते ही मैं सिहर गयी। उसके लंड के स्पर्श से मेरी चूत एकदम से चुदने के लिए मचल उठी, वो मचलन मेरे पूरे शरीर में फैल गयी।

कुछ देर मेरी चूत पर अपना लंड रखकर वो अपना लंड रगड़ने लगा, वो रगड़ से मेरी क्लिट उत्तेजित हो रही थी, हर रगड़ में मजा दोगुना हो रहा था। उसके बाद मैंने उसे एक आँख मारते हुए चुदाई करने का इशारा किया, तो उसने अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया, धीरे-धीरे अंदर जाते हुए, मेरी चूत की दीवारें उसे निचोड़ रही थीं। उसके मोटे लंड के जाते ही मेरी एक सिसकारी निकल गई, “उम्म्ह… अहह… हय… ओह… सुरेश, कितना मोटा है तेरा… धीरे से… आह्ह… ह्ह्ह,” लेकिन मेरी चूत ने जल्द ही उसके लंड को सहन कर लिया, और वो सहन अब मजा बन गया।

उसके बाद वो मेरी चूत में अपना पूरा लंड डालकर मेरी चूत को चोदने लगा, हर धक्के में उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा था, मेरी चूत की गर्मी और गीलापन उसे चूस रहा था। हम दोनों लोग सेक्स करने लगे, हमारे शरीर एक लय में हिल रहे थे। वो धक्के मारते हुए बोला, “भाभी, कितनी टाइट है तुम्हारी चूत… मजा आ रहा है… आह… तुम्हारी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही है, कितनी गर्म है,” उसकी आवाज ग्रंट के साथ आ रही थी। मैं भी जवाब में सिसकारते हुए बोली, “हाँ सुरेश, चोदो मुझे जोर से… आह्ह… ह्ह्ह… ऐसे ही… ऊऊ… कितना अच्छा लग रहा है… मत रुको, और जोर से धक्का मारो… आह… इह्ह… ओह्ह।”

कुछ देर बाद उसने मेरी दोनों टाँगों को अपने कंधे पर रख लिया और मेरी चूत में अपना लंड अंदर तक डालकर मेरी चूत को चोदने लगा, अब कोण ऐसा था कि लंड और गहरा जा रहा था, हर धक्के में मेरी चूत की गहराई छू रही थी। अब धक्के और गहरे हो गए थे, हर धक्के के साथ मेरी चूत से ‘फच… फच…’ की आवाजें आ रही थीं, वो आवाजें हमें और उत्तेजित कर रही थीं। मैं सिसकार रही थी, “आह… इह्ह… ओह्ह… सुरेश, और गहरा… ह्ह्ह… ऊउइ… उईईई… तेरे लंड से मेरी चूत भर गयी है… चोद मुझे… आऊ… ऊऊ… इतना मजा कभी नहीं आया, तुम्हारा लंड कितना परफेक्ट है मेरे लिए।”

हम दोनों मस्ती से सेक्स कर रहे थे और साथ में एक-दूसरे को किस कर रहे थे, उसके होंठ मेरे होंठों पर दबे हुए, हमारी जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं। चुदाई के दौरान कभी वो मेरी चूची को मसल रहा था, कभी निप्पल को अपने होंठों में दबाकर चूसने लगता था, “भाभी, तुम्हारी चूचियाँ कितनी रसीली हैं… चूसने का मजा आ रहा है… आह,” उसका चूसना इतना जोरदार था कि मेरी चूचियाँ लाल हो रही थीं। मैं भी उसकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी, “हाँ सुरेश, चूसो उन्हें… आह्ह… ह्ह्ह… मुझे और गर्म करो… ऊईई… तेरे दाँतों का स्पर्श कितना अच्छा लग रहा है।”

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धकापेल चुदाई होने लगी थी, हमारे शरीर एक-दूसरे से टकरा रहे थे, थप… थप… की आवाजें कमरे में भर गयी थीं। दोपहर का समय था, इसलिए हम दोनों सेक्स करते-करते पसीने से भीग गए थे, वो पसीना हमारी त्वचा पर चमक रहा था और एक-दूसरे के शरीर पर लग रहा था, उसकी खुशबू मर्दानी थी। मुझे बेहद पसीना आ रहा था, मेरी पीठ पर पसीने की धार बह रही थी। मुझसे ज्यादा तो सुरेश को पसीना हो रहा था, उसके माथे से टपकता पसीना मेरे चेहरे पर गिर रहा था। चुदाई के पहले ही मेरी चूत काफी गर्म हो गयी थी और उसका लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था, जिससे मेरी चूत को अजीब सा अच्छा फील हो रहा था, हर धक्के के साथ ‘फचक… फचक…’ की आवाजें गूँज रही थीं, वो गीलापन और गर्मी का मिश्रण अद्भुत था।

मुझे बहुत दिन के बाद एक दमदार लंड से चुदने के लिए मौका मिला था, वो दमदार लंड मेरी चूत की हर इच्छा पूरी कर रहा था। सुरेश ने भी बहुत दिन से सेक्स नहीं किया था और वो बहुत जोर लगाकर मुझे चोद रहा था, उसके हर धक्के में वो ताकत थी जो मुझे हिलाकर रख देती थी। जिससे हम दोनों को ही बहुत अच्छा लग रहा था, हमारी साँसें मिलकर एक हो गयी थीं। वो बोला, “भाभी, तुम्हारी चूत कितनी गीली है… मेरे लंड को और चूस रही है… आह… मैं रोज तुम्हें चोदना चाहता हूँ, तुम्हारी ये गर्मी मुझे पागल कर देती है।” मैं जवाब में, “हाँ सुरेश, रोज चोदना मुझे… आह्ह… ह्ह्ह… तेरे बिना अब नहीं रह सकती… ऊउइ… चोदो जोर से, मुझे अपनी बना लो।”

सुरेश के लंड से मेरी चूत की प्यास बुझ रही थी, उसका मोटा लंड मेरी चूत को दे दनादन चोद रहा था, हर धक्का मेरी गहराई को छू रहा था।

मैंने तो सुरेश से चुदते वक्त ही सोच लिया था कि अगर मेरे पति रोज मुझे नहीं चोदेंगे, तो मैं सुरेश के रूम में आकर सुरेश से चुदूँगी, ये सोच मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर रही थी।

सुरेश अपना पूरा लंड अंदर डालकर मेरी चूत को चोद रहा था, जिससे मुझे और भी मजा आ रहा था और साथ में मुझे शांति भी मिल रही थी, वो शांति जो मेरी प्यास बुझा रही थी। मैं गाँड उठा-उठाकर सुरेश से चुदवा रही थी, मेरी गाँड की हर उठान उसके धक्के से मिल रही थी, “आह… इह्ह… ओह्ह… ऐसे ही… ह्ह्ह… ऊईई… सुरेश, तेरे धक्के कितने जोरदार हैं… आऊ… ऊऊ… मुझे और चोदो।”

करीब बीस मिनट बाद हम दोनों लोग सेक्स करते-करते झड़ने लगे थे, वो समय जैसे रुक सा गया था, लेकिन हमारी गति और तेज हो गयी थी। हालांकि वो इस वक्त चरम पर आने को था, लेकिन तब भी वो मुझे पूरा जोर लगाकर चोद रहा था, उसके धक्के और तेज हो गए थे। मेरी सिसकारियाँ भी तेज होने लगी थीं, “आह्ह… ह्ह्ह… सुरेश, मैं झड़ रही हूँ… ऊउइ… उईईई… और जोर से… आह… इह्ह… ओह्ह… हाँ, ऐसे ही।”

तभी हम दोनों चुदाई करते हुए झड़ने लगे, मेरी चूत ने कसकर उसके लंड को पकड़ लिया और मेरा रस बहने लगा। हम दोनों ने बहुत देर तक सेक्स किया था, वो देर हमें थका रही थी लेकिन संतुष्ट भी। इसके बाद दोनों ने ही एक साथ अपना पानी छोड़ दिया था, जिससे दोनों को ही बड़ा मजा आया था, वो गर्म रस मेरी चूत में भर रहा था, जो मुझे पूर्ण महसूस करा रहा था। मैं चिल्लाई, “आह्ह… ह्ह्ह… सुरेश, भर दो मुझे… ऊईई… हाँ, ऐसे ही… आऊ… ऊऊ… कितना गर्म है तेरा रस।” और वो भी ग्रंट करते हुए झड़ गया, “आह… भाभी, ले लो मेरा माल… कितना अच्छा लग रहा है, तुम्हारी चूत ने मुझे निचोड़ लिया।”

उसके बाद थककर मैं कुछ देर के लिए उसके साथ ही लेट गयी, हमारे शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए, पसीने से लथपथ। हम दोनों लोग की साँसें तेज चल रही थीं, वो साँसें धीरे-धीरे शांत हो रही थीं। हम दोनों इस वक्त चुदाई के बाद एकदम नंगे पड़े थे, कमरे में हमारी खुशबू फैली हुई थी। कुछ देर बाद मैं उठी और मैंने अपनी ब्रा पेंटी पहनी, ब्रा लगाते हुए मेरी चूचियाँ अभी भी संवेदनशील थीं, उसके बाद अपनी मैक्सी पहनकर अपने रूम में जाने लगी, मैक्सी पहनते हुए मेरी त्वचा पर उसकी यादें चिपकी हुई थीं।

सुरेश ने मुझे रोककर कुछ देर किस किया और उसके बाद मैं अपने रूम में आ गयी, वो आखिरी किस में वादा था अगली मुलाकात का।

अब हम दोनों लोग रोज दोपहर को सेक्स करने लगे, वो दोपहर हमारे लिए स्वर्ग बन गयी थीं। मेरे पति और मेरे घर वाले सब लोग ऑफिस चले जाते थे, तो मैं सुरेश के रूम में जाकर चुदवा लेती थी, हर बार नया रोमांच, नयी पोजीशन्स। वो मुझे बहुत अच्छे से चोदता था, उसकी हर हरकत में वो जुनून था। जब भी कभी मेरे पति की नाइट ड्यूटी होती थी, तो मैं पहले से ही सुरेश को बता देती थी, और वो रात हमारी होती थी।

इसके बाद उस रात को मैं उसके साथ खुलकर चुदाई का मजा ले लेती थी, रात की वो अंधेरी में हमारा मिलन और ज्यादा कामुक हो जाता था। उसके साथ अब मैं ओरल सेक्स भी करने लगी थी, उसके लंड की वो नसें, वो स्वाद मुझे अच्छा लगने लगा था, मैं उसे चूसते हुए “ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गी… गों… गों… गोग” की आवाजें निकालती। मुझे उसका लंड चूसना अच्छा लगने लगा था, वो मजा जो मुझे मिलता था उसे खुश करते हुए। उसने मेरी गाँड भी खोल दी थी, वो पहली बार का दर्द और फिर मजा आज भी याद है। मेरी गाँड का उद्घाटन कैसे हुआ, उसकी कहानी मैं आपको अपनी अगली कहानी में लिखूँगी, वो कहानी और ज्यादा उत्तेजक होगी।

हम दोनों आज भी कभी दोपहर में सेक्स करते हैं, वो मिलन अभी भी वैसा ही ताजा है। सुरेश अभी भी मेरे घर में किराए पर रहता है, उसकी मौजूदगी मेरे जीवन में रोमांच बनाए रखती है। मुझे उसको छोड़ पाना अब दुश्वार सा लगता है, वो मेरी आदत बन गया है।

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