Behan chudai sex story, Didi ke boobs sex story: हाय दोस्तो, मेरा नाम मनीष है और मैं सिर्फ 20 साल का हूं, मेरी ये कहानी इतनी मस्त और कामुक है कि उम्मीद करता हूं आज आप सबके लंड खड़े हो जाएंगे और आप इसे पढ़ते हुए खुद को रोक नहीं पाएंगे. मैं एक बहुत ही खूबसूरत लड़का हूं, जिसका चेहरा चिकना और आकर्षक है, और मैं बॉडीबिल्डर भी हूं, मेरी मसल्स देखकर लड़कियां घूरती रहती हैं, लेकिन आज की ये कहानी मेरी अपनी जिंदगी से जुड़ी है. आज जो मैं आपको कहानी बताने जा रहा हूं, वो एक सच्ची कहानी है और वो मेरी बहन की है, जिसमें हर पल की कामुकता और इच्छाओं की आग को मैंने महसूस किया है.
मेरी बहन का नाम इशिका है, वो शादीशुदा है और एक बेटा है, वो बहुत ही सुंदर है, उसका कद 5.6 है और फिगर बहुत ही जबरदस्त है, उसकी कमर पतली, कूल्हे चौड़े और छाती इतनी भरी हुई कि देखने वाला बस देखता रह जाए. वो सिर्फ 22 साल की है मगर कोई उसे देखकर ये कह नहीं सकता कि वो 22 की है, वो लगती 25 की है, उसकी त्वचा इतनी गोरी और चमकदार है कि छूने का मन करता है, और उसकी आंखें बड़ी बड़ी जो कामुकता से भरी हुई लगती हैं. जब भी मेरी बहन चलती थी तो उसके चूतड़ उछलते थे और गांड तो ऐसे हिलती थी जैसे फुटबॉल, वो हिलती हुई गांड की लय इतनी मादक थी कि हवा में उसकी खुशबू फैल जाती थी और मैं उसकी हर हरकत को महसूस करता था. जब भी मैं ये सीन देखता तो मेरा लंड खड़ा हो जाता था, वो गर्मी मेरे पूरे शरीर में फैल जाती थी और दिल तेज धड़कने लगता था. मैंने अपनी बहन को कभी बुरी नजरों से नहीं देखा मगर यार वो है भी तो इतनी खूबसूरत कि दिल करता है बस चोदूं, उसकी हर अदा में एक आकर्षण था जो मुझे खींचता था, लेकिन मैं खुद को रोकता रहा था.
तो दोस्तो, मैं अब कहानी की तरफ चलता हूं, ये पूरी घटना इतनी विस्तार से बताऊंगा कि आप खुद को उसमें महसूस करेंगे. ये बात है जून के महीने की, गर्मी की वो तपती दोपहरें और रातें जो कामुकता को और बढ़ा देती हैं. चूंकि हॉलिडे होते हैं तो बहन घर में ही होती थी, वो घर के कामों में व्यस्त रहती थी और उसकी पसीने से भीगी साड़ी उसके शरीर से चिपक जाती थी, जो उसके कर्व्स को और उभार देती थी. मैं रहता था अपने हॉस्टल में तो मैंने सोचा चलो अपने घर में 10 दिन के लिए रहने चला जाऊं, वहां की शांति और बहन की मौजूदगी मुझे खींच रही थी. मैं जब घर गया तो बहन ने वेलकम किया और कहा, मनीष तुम फ्रेश हो जाओ, उसकी आवाज में वो प्यार और गर्मजोशी थी जो मुझे और करीब लाती थी. मैं फिर फ्रेश हो गया और इशिका के बेटे सुनील के साथ खेलने लगा, सुनील की हंसी और बहन की मुस्कान कमरे को रोशन कर रही थी.
मेरे जीजाजी का ट्रांसपोर्ट बिजनेस है तो वो सिर्फ 1 हफ्ते के लिए आते हैं, इसलिए वो भी नहीं थे घर में, घर में सिर्फ हम तीनों थे और वो खालीपन कामुक विचारों को जन्म दे रहा था. जब मैं फ्रेश हो गया तो मैंने दीदी के साथ खाना खाया और फिर सो गया, खाने की वो खुशबू और दीदी की उंगलियों से परोसा हुआ खाना मुझे और उत्साहित कर रहा था. बीच रात में मैं उठा तो मैंने देखा दीदी सुनील को दूध पिला रही है, उनके चूतड़ से निकलता हुआ क्रीमी दूध देख के मेरा भी दिल चाहने लगा और यही सोच रहा सुनील बहुत ही लकी है, वो दूध की मिठास और गर्मी मुझे महसूस हो रही थी, जैसे वो मेरे मुंह में हो. फिर मैं चुपचाप अपने रूम में गया और सो गया, लेकिन वो दृश्य मेरे दिमाग में घूमता रहा और नींद नहीं आ रही थी.
जब मैं सुबह उठा दीदी सो रही थी और सुनील भी सो रहा था, कमरे में हल्की रोशनी और शांत वातावरण था. मैं दीदी के कमरे में गया और सामने सीन देख के मैं शॉक हो गया, मेरी बहन का पल्लू गिर चुका था और वो काफी गहरी नींद में थी, उसकी सांसें नियमित थीं और शरीर इतना रिलैक्स्ड कि देखने लायक था. उनका गोरा बदन देख के मेरे जिस्म में आग लग गई, वो गोरी त्वचा सूरज की रोशनी में चमक रही थी और मुझे छूने का मन कर रहा था. उनके साड़ी का पल्लू गिर जाने से उनके बड़े बड़े सुडौल दूध जैसे चूतड़ देख मेरा तो लंड खड़ा हो गया, वो चूतड़ इतने भरे हुए थे कि ब्लाउज उन्हें संभाल नहीं पा रहा था और उनकी गर्मी मुझे महसूस हो रही थी. उनके चूतड़ ब्लाउज में बिलकुल समा ही नहीं रहे थे, वो टाइट ब्लाउज से बाहर आने को बेताब लग रहे थे. ब्लैक ब्लाउज में वो बिलकुल एक मस्त रंडी लग रही थी, उसकी सेक्सी पोजिशन और आधे खुले होंठ मुझे पागल कर रहे थे.
उनका सफेद ब्रा साफ नजर आ रहा था, वो ब्रा की लेस उसके गोरापन को और बढ़ा रही थी. मैं फिर फौरन अपने रूम में गया और मुठ मारा जब तक बहन उठ चुकी थी, वो मुठ मारते हुए मैं उसके चूतड़ों की नरमी और गर्मी को कल्पना कर रहा था और झड़ते हुए इतना मजा आया कि शरीर कांप उठा. अब मैं अपनी बहन के चूतड़ के बारे में सोचता रहा, पूरे दिन वो विचार मेरे दिमाग में घूमते रहे और शरीर में एक अजीब सी उत्तेजना बनी रही. फिर अगले दिन ऐसा हुआ के वो गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी, वो बहुत ही गजब की लग रही थी, साड़ी उसके शरीर से चिपकी हुई थी और गुलाबी रंग उसकी गोरी त्वचा पर खिल रहा था, उसकी खुशबू कमरे में फैली हुई थी. वो हर दिन की तरह घर का काम निपटा रही थी, और मैं टीवी देख रहा था, लेकिन मेरी नजरें बार बार उस पर जा रही थीं. कुछ देर बाद जब बहन झाड़ू लगाने लगी तो उनका साड़ी का पल्लू सरक चुका था, लेकिन इसका उन्हें जरा सा भी अंदाजा नहीं था, वो झुककर सफाई कर रही थी और उसकी कमर की मोड़ मुझे और कामुक बना रही थी. ये नजारा देख के मैं तो दंग रह गया, उनके विशाल चूतड़ आधे से भी ज्यादा दिख रहा था, वो गहरी क्लीवेज में पसीना चमक रहा था और मुझे लग रहा था जैसे वो मुझे बुला रही हो. गुलाबी ब्लाउज में उनकी क्लीवेज मस्त लग रही थी, वो नरम और उभरी हुई क्लीवेज देखकर मेरा लंड फिर से सख्त हो गया और मैं उसे छूने की कल्पना करने लगा. उसी पोजिशन में वो जब मेरे पास झाड़ू लगाने लगी तो मैं जानबूझ कर पैर सोफे से नीचे रख लिया, ताकि जब दीदी सोफे के नीचे सफाई करे तो उनकी चूतड़ मेरे पैर से टकराए, मैं उस स्पर्श की गर्मी महसूस करना चाहता था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ, फिर भी वो करीब आकर झुकने से उसकी खुशबू मेरे नाक में आई और मैं और उत्तेजित हो गया.
वो नजारा मेरे दिमाग में प्रिंट हो चुका था और लंड पूरी तरह खड़ा हो चुका था, वो सख्ती इतनी थी कि पैंट में दर्द होने लगा. उस दिन तो मैं काफी कामुक हो गया था और दोपहर के वक्त तो मैं 3 बार मुठ मारा, हर बार उसके चूतड़ों और क्लीवेज की याद में झड़ते हुए मैं उसके नाम पुकारता रहा. रात के वक्त बहन मुझसे बोली, “मैं अपने दोस्त की पार्टी में जा रही हूं, तुम अगर चलना चाहते हो तो चल सकते हो.” उसकी आवाज में एक निमंत्रण सा लगा और मैंने तुरंत कहा, “ओके दीदी.” और मैं कपड़े चेंज करने लगा, लेकिन मेरे दिमाग में उसके साथ जाने की उत्सुकता थी. तभी अगले रूम में बहन आवाज लगाई, और मैं फौरन बहन के रूम में गया, दिल तेज धड़क रहा था. जा के देखा तो खड़े के खड़े रुक गया, बहन काले रंग का ब्रा और चड्डी में थी, उसकी आधी नंगी बॉडी देखकर मेरी सांसें रुक गईं.
बहन एक मस्त रंडी लग रही थी, उनके लंबे बाल पीठ पर फैले हुए थे और उसकी त्वचा की चमक कमरे की लाइट में चमक रही थी. वो अपनी ब्रा का हुक लगा नहीं पा रही थी इसलिए मुझे बुलाया था, वो संघर्ष करते हुए और सेक्सी लग रही थी. बहन को देख के मेरा लंड इतना खड़ा हो गया के तकलीफ होने लगी, वो सख्ती और गर्मी मेरे पूरे शरीर में फैल गई. उनके चूतड़ तो बिलकुल ब्रा में आ ही नहीं रहे थे और चड्डी इतनी टाइट थी उनके बू के वी शेप साफ नजर आ रहा था, वो वी शेप इतना आकर्षक था कि जीभ से चाटने का मन कर रहा था. मैं जब बहन के पास गया तो पूछा क्या हुआ दीदी तो वो बोली, “जरा मेरे ब्रा का हुक लगा दे, बहुत ज्यादा टाइट है.” उसकी आवाज में शर्म और जरूरत थी.
मैं उनका ब्रा का हुक लगाते वक्त उनसे इतना करीब था कि मेरा लंड उनके पैंटी के दरार में फंस रहा था, वो स्पर्श इतना गर्म था कि मैं कांप उठा और उसकी पीठ की नरमी मेरे हाथों में महसूस हो रही थी, मैंने धीरे से हुक लगाया लेकिन जानबूझकर ज्यादा समय लिया ताकि उसकी खुशबू और गर्मी को महसूस कर सकूं. फिर बहन ने मुझे शुक्रिया कहा और मैं बाहर आ गया, लेकिन वो शुक्रिया में उसकी मुस्कान ने मुझे और पागल कर दिया. मैं काफी खुश था, वो पल मेरे लिए एक सपना सा था. फिर हम पार्टी के लिए तैयार हो गए, बहन उन कपड़ों में ऑस्ट्रेलियन माल लग रही थी, उसके टॉप से उसके चूतड़ों का शेप और भी बड़े और उभरे हुए लग रहे थे, वो टाइट टॉप उसकी निप्पल्स को हल्का उभार दे रहा था. मैं बहन को देख कर बोला, “बहुत मस्त लग रही हो” तो उन्होंने प्यारी सी स्माइल दी, वो स्माइल में शर्म और खुशी थी जो मुझे और करीब ला रही थी. फिर हम पार्टी के लिए बाइक से जाने लगे, रास्ते में रोड खराब होने के कारण बहन मुझसे चिपक के बैठी हुई थी, उसके चूतड़ जोर जोर से मेरी पीठ पर गुदगुदाते, वो नरम और गर्म स्पर्श मेरी पीठ से होता हुआ मेरे लंड तक पहुंच रहा था और हर उछाल में उसकी सांसें मेरे कान में आ रही थीं, वो चिपकाव इतना कामुक था कि मैं बाइक चलाते हुए कंट्रोल खोने लगा था.
हम पार्टी में पहुंच चुके थे और वहां खूब तफरी की, पार्टी की म्यूजिक और लाइट्स में बहन और सेक्सी लग रही थी, हमने डांस किया जहां उसके शरीर का हर मूवमेंट मुझे छू रहा था. फिर हम घर वापस आ गए, लेकिन वो पार्टी की यादें मेरे दिमाग में घूम रही थीं. अगले दिन सुबह से ही मैं बहन को नंगा देखने का प्लानिंग करने लगा, वो इच्छा इतनी mạnh थी कि मैं कुछ और सोच नहीं पा रहा था. मुझे एक आईडिया आया, मैं बाथरूम के दरवाजे में एक सुराख कर दिया, वो सुराख इतना सही था कि अंदर सब दिख सके. सारा काम निपटा के जब बहन नहाने गई, तो मैं उस सुराख से झांकने लगा, दिल की धड़कनें तेज थीं और उत्तेजना चरम पर थी. मुझे सब कुछ साफ नजर आ रहा था, बहन अपना साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट उतार चुकी थी, उसकी नंगी कमर और जांघें देखकर मैं सिहर उठा.
मैं उनकी पैंटी और ब्रा खुलने का इंतजार कर रहा था तभी बहन ने मेरी मनोकामना पूरी कर दी, उन्होंने अपनी दोनों चीजें उतार दी, धीरे धीरे उतारते हुए जैसे वो जानती हो कि कोई देख रहा है. उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ्फ! क्या लग रही थी, उसकी पूरी नंगी बॉडी इतनी परफेक्ट थी कि मैं बस देखता रह गया. उनकी बड़ी गांड को चाटने का जी कर रहा था और वो जब भी हिलती उनके फुटबॉल जैसे चूतड़ जोर जोर से हिल रहे थे, वो हिलाव इतना कामुक था कि मेरे मुंह में पानी आ गया और लंड से प्री कम निकलने लगा. ये सब देख के मैं पागल सा हो रहा था, मेरे हाथ खुद ब खुद लंड पर चले गए.
तभी मेरी नजर उनकी बुर पर पड़ी, एक भी बाल नहीं थे और फूले हुए थे, वो गुलाबी और चमकदार बुर देखकर मैं और उत्तेजित हो गया. बहन नहाने लगी, पानी उसके शरीर पर गिरता हुआ उसकी हर कर्व को और चमका रहा था और वो साबुन लगाते हुए अपने चूतड़ों को मसल रही थी, जो मुझे और पागल कर रहा था. मैं वहां से फौरन चला गया और मुठ मारता रहा, वो मुठ इतनी तेज थी कि मैं जल्दी झड़ गया लेकिन संतुष्टि नहीं हुई. मैं पूरा झड़ चुका था अब मुझसे और रहा नहीं जा रहा था, अब मैं उन्हें चोदना चाहता था, वो इच्छा मेरे पूरे अस्तित्व को घेर चुकी थी. मैं आज रात तो उन्हें चोदने का प्लान बना लिया, हर डिटेल सोच ली कि कैसे शुरू करूं. मैं रात का इंतजार करने लगा, दिन भर की उत्तेजना रात को और बढ़ा रही थी. रात को हम खाना खा के सोने गए, खाने के दौरान बहन की नजरें मुझ पर थीं और वो मुस्कुरा रही थी. बहन आज लाल साड़ी में एक दम मस्त लग रही थी, वो लाल रंग उसकी कामुकता को दोगुना कर रहा था, बस मैं उनके साथ सुहागरात मनाना चाहता था, वो कल्पना मुझे और गर्म कर रही थी. करीब एक घंटे के बाद देखा के बहन गहरी नींद में सो चुकी है, उसकी सांसें शांत थीं लेकिन शरीर की गर्मी हवा में महसूस हो रही थी.
मैं उनके करीब गया उनके शरीर से मस्त खुशबू आ रही थी, वो परफ्यूम और उसकी प्राकृतिक खुशबू का मिश्रण मुझे मदहोश कर रहा था. तभी मैंने अपनी जेब से कंडोम निकाला और लगा लिया, वो लगाते हुए मेरी उंगलियां कांप रही थीं. मैं उनके बिस्तर पर बैठ कर बहन का पल्लू गिरा दिया और उनका ब्लाउज का 2 हुक खोल दिया, और फिर लास्ट हुक भी खोल दिया, धीरे धीरे खोलते हुए मैं उसके चूतड़ों की गर्मी महसूस कर रहा था. उन्हें ये सब पता नहीं था, वो गहरी नींद में थीं. मैं अपने एक हाथ से बहन की गांड सहला रहा था, वो नरम और गर्म गांड मेरे हाथ में इतनी अच्छी लग रही थी कि मैं धीरे धीरे दबाने लगा, और दूसरे से उनके चूतड़ को उनके ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा, वो दबाव से उसके चूतड़ उभर आए और मैं उसकी नरमी को महसूस कर रहा था. तभी अचानक बहन जाग गई और मुझे डांटने लगी और विरोध करने लगी, वो बोली, “मनीष ये क्या कर रहे हो, रुक जाओ, ये गलत है.” लेकिन उसकी आंखों में शर्म के साथ एक उत्सुकता थी.
लेकिन मैं उनके ऊपर बैठ गया और चूमने लगा, पहले उसके गालों पर, फिर गर्दन पर, वो विरोध कर रही थी लेकिन धीरे धीरे कमजोर पड़ रही थी, मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “दीदी, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं, बस एक बार.” उसके शरीर की गर्मी मेरी छाती से लग रही थी.
उनके होंठ मेरे होंठ में चिपक चुके थे और थोड़ी देर बाद वो मेरा साथ देने लगी, वो चुंबन इतना गहरा था कि हमारी जीभें एक दूसरे से खेल रही थीं और लार का आदान प्रदान हो रहा था, वो स्वाद इतना मीठा था कि मैं रुक नहीं पा रहा था. फिर उनका ब्रा भी खोल दिया और फटाकkkkk से उनके चूतड़ मेरे ओर कूद पड़े, वो बड़े और नरम चूतड़ मेरे हाथों में आ गए और मैं उन्हें देखकर पागल हो गया. मैं उनके चूतड़ को मसलने और चाटने लगा, पहले एक निप्पल को मुंह में लेकर चूसा, फिर दूसरे को, वो निप्पल सख्त हो चुके थे और मैं दांतों से हल्का काट रहा था, और उनका दूध पीने लगा, वो दूध गर्म और मीठा था जो मेरे मुंह में भर रहा था. उनके दूध में बहुत मिठास थी, मैं चूसते हुए उसके चूतड़ों को दबा रहा था और वो सिहर रही थी. मैं उनके चूतड़ को जोर जोर से दबाने लगा और इतना दबाया के वो लाल हो चुके थे, और बहन को तकलीफ भी हो रही थी, वो बोली, “आह्ह.. मनीष धीरे से, दर्द हो रहा है, लेकिन रुकना मत, और दबाओ.” लेकिन मैं नहीं रुका, मैंने उनके निप्पल को मुंह में लेकर चूसा, “स्स्स्स.. आह्ह.. ह्ह्ह.. इतना जोर से मत चूसो ना, दीदी की जान निकल रही है.” वो कराह रही थी, लेकिन अब वो भी गर्म हो चुकी थी, उनके हाथ मेरे बालों में थे और वो मुझे और करीब खींच रही थी, मैंने उसके चूतड़ों को चूसा, चाटा, दबाया, और उसके बीच की घाटी में जीभ फेरी, वो सिहर उठी, “ओह्ह.. मनीष, वहां मत, लेकिन अच्छा लग रहा है.”
फिर मैंने उसके पेट पर किस किया, नाभि में जीभ डाली, वो कमर उचका रही थी, “आह्ह.. इह्ह.. ऊउउ.. मनीष, तुम मुझे पागल कर दोगे.” मैंने धीरे धीरे नीचे आया और उनकी पैंटी भी खोल के उनकी चूत को चाटने लगा, जीभ से मैंने उनकी क्लिट को छुआ तो वो सिहर उठी, “ओह्ह.. मनीष, ये क्या कर रहे हो, आह्ह.. इह्ह.. इतना अच्छा लग रहा है, कभी किसी ने ऐसा नहीं किया.” मैंने जीभ अंदर डाली और चाटता रहा, उनकी चूत गीली हो चुकी थी, उसका रस इतना मीठा था कि मैं पीता रहा, वो कमर उचका रही थी, “आह.. ह्ह्ह.. ऊउउ.. मत रुको, और चाटो, दीदी की चूत तेरे लिए है.” मैंने अपनी उंगली उनकी चूत में डाली और अंदर बाहर करने लगा, वो चिल्लाई, “आह्ह्ह.. ह्ह्ह्ह.. मनीष, उंगली मत डालो, दर्द हो रहा है लेकिन मजा आ रहा है, और डालो.” मैंने दो उंगलियां डाली और तेजी से हिलाने लगा, वो कराहती रही, “ओह्ह.. इह्ह.. ऊईई.. मैं झड़ने वाली हूं, तेज करो.” मैंने तीन उंगलियां डाली और घुमाया, उसकी चूत का रस मेरे हाथ पर बह रहा था और वो जोर जोर से सांस ले रही थी.
तभी बहन ने मेरी हाफ पैंट तान के उतार दी और चड्डी उतार दी, मेरा मोटा और लंबा लंड देख के वो शर्मा गई, लेकिन उसकी आंखों में लालसा थी, वो बोली, “वाह मनीष, कितना बड़ा है, मुझे डर लग रहा है.” फिर वो बिलकुल भी नहीं रुकी और लंड चूसने लगी, “ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों..” वो डीप थ्रोट कर रही थी, मुंह से अजीब सी आवाजें आ रही थीं, मैंने उसके सिर को पकड़ कर और अंदर धकेला, वो गैग कर रही थी लेकिन रुकी नहीं, “स्स्स.. आह्ह.. दीदी, कितना अच्छा चूस रही हो, और चूसो, पूरा मुंह में लो.” वो चूसते हुए मेरी आंखों में देख रही थी और मैं उसके मुंह की गर्मी और जीभ की चाल को महसूस कर रहा था, फिर मैंने उसे पीछे से पकड़ा और उसके मुंह में धक्के लगाए, वो कराह रही थी लेकिन मजा ले रही थी.
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया, उसके पैर फैलाए और चूत पर फिर से जीभ फेरी, वो तैयार थी. और फिर जैसे ही लंड उनकी बुर में डाला तो बहन की जोर से आवाज आई, “आआआआआआआआआhhhhhhhhhhhhh.. मनीष, धीरे, बहुत मोटा है.”
वो चिल्लाने लगी, वो इतनी चिल्लाई के सुनील उठ गया मगर हम चुदाई में इतने खो चुके थे के उस की रोने की आवाज ना तो मेरे ना दीदी के कान में आ रही थी, हमारी सांसें मिली हुई थीं और शरीर पसीने से भीगे हुए. उन्हें काफी तकलीफ हो रही थी, वो बोली, “मनीष, धीरे डालो, बहुत मोटा है तेरा, आह्ह.. ह्ह्ह.. इह्ह.. दर्द हो रहा है, लेकिन रुकना मत.” मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए, उनकी चूत टाइट थी लेकिन गीली, हर धक्के पर फचक की आवाज आ रही थी, “फच.. फच.. फच..” मैंने स्पीड बढ़ाई, वो कराह रही थी, “ओह्ह.. आह्ह.. ह्ह्ह.. ऊउउ.. और जोर से चोदो मनीष, अब मजा आ रहा है, दीदी को पेलो.” मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से डाला, उसकी गांड को थप्पड़ मारा, “आह्ह.. ह्ह्ह.. मत मारो, लेकिन अच्छा लग रहा है, और मारो.” मैंने बाल पकड़े और तेज तेज धक्के लगाए, वो चिल्ला रही थी, “आह्ह्ह.. इह्ह.. ओह्ह.. मैं झड़ रही हूं, और जोर से, गांड हिलाकर चोदो.” मैंने पोजिशन चेंज की, उसे साइड से लिटाया और फिर से डाला, उसके चूतड़ मेरी छाती से लग रहे थे, फिर मिशनरी में आया और उसके होंठ चूमते हुए धक्के लगाए, हमारी बॉडी एक हो गई थी.
करीब आधे घंटे चोदने के बाद उनकी बुर से पानी आने लगा फिर मैं और झटके देने लगा के तभी खून निकला शुरू हो गया, वो थोड़ा सा खून था लेकिन उत्तेजना में हम रुके नहीं. बहन की तकलीफ से हालत खराब हो रही थी, वो रोने लगी, “आह्ह.. मनीष, रुक जाओ, बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन मुझे अच्छा लग रहा है.” लेकिन मैं नहीं रुका, मैंने कंडोम में झड़ दिया, वो गर्म स्पर्म की कल्पना से वो भी झड़ गई, फिर रात भर मैं उनका दूध पीता गया और दबाता गया और चूत को सहलाता गया ताकि उनको तकलीफ ना हो, मैंने उसके चूतड़ चाटे, दबाए, और उंगली से सहलाया, वो बोली, “मनीष, अब दर्द कम हो रहा है, तुम्हारे स्पर्श से.” दीदी फिर बोली, “मेरा पति यहां पर नहीं होता मनीष, तुम्हीं आया करो मेरी प्यास बुझाने के लिए.”
मैंने कहा, “क्यों ना बहन, तुम्हारा ये भाई किस काम का.” अब जब भी मैं फ्री होता हूं बहन को चोदता हूं, वो मिलन इतने कामुक होते हैं कि हर बार नया लगता है.
इंडिया में ये सब बहुत आम सी बात है, घरों में ऐसी इच्छाएं छिपी रहती हैं. खैर दोस्तो मेरी कहानी कैसी लगी. अगर अच्छी लगी तो उसके शेयर जरूर करें. शुक्रिया.