प्यासी दीदी ने भाई को गोद में बिठाकर चूत चोदवाई

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Bhai ne didi ki chut chodi sex story, Didi bhai incest chudai sex story, Married didi sex story: मेरा नाम शालिनी है, मैं 28 साल की एक खूबसूरत महिला हूं जिसकी त्वचा गोरी और चिकनी है, शरीर की बनावट ऐसी कि हर कोई देखकर आह भर ले, अभी तक मेरा कोई बच्चा नहीं हुआ है और मैं दिल्ली में अपने सास और ससुर के साथ ससुराल में रहती हूं जहां हर दिन की रूटीन मुझे और ज्यादा अकेला महसूस कराती है। मेरे पति अमेरिका में रहते हैं, वहां की व्यस्त जिंदगी में फंसे हुए, और मैं यहां उनके बिना हर रात बिस्तर पर करवटें बदलती रहती हूं। पति के बिना जिंदगी सूनी सी लगती है, जैसे कोई अधूरा सपना जो कभी पूरा न हो, हर पल की तन्हाई मुझे काटती है और मेरी इच्छाएं दबकर रह जाती हैं।

एक जवान खूबसूरत औरत को अगर चोदने वाला न हो तो जिंदगी बेकार हो जाती है, वह हर पल की गर्माहट, स्पर्श की तलब, और उस गहरी संतुष्टि से महरूम रहती है जो सिर्फ एक पुरुष का साथ दे सकता है। यही हाल मेरे साथ था, दिन रात की तन्हाई में मैं खुद को सहलाती, लेकिन वह संतुष्टि कभी नहीं मिलती जो एक असली स्पर्श देता है। ऐसे में महिलाएं बहक जाती हैं, उनकी इच्छाएं उन्हें रास्ता बदलने पर मजबूर कर देती हैं, और मैं भी बहक गई और अपने भाई के साथ वह कर लिया जो भाई बहन नहीं करते, लेकिन उस पल की गर्मी और निकटता ने सब कुछ भुला दिया।

मेरा भाई 25 साल का है, जवान और मजबूत कद काठी वाला, उसकी आंखों में हमेशा एक चमक रहती है जो मुझे दोस्त जैसा लगता था। जब मैं मायके में थी तब उसके साथ अच्छे दोस्त जैसे संबंध थे, हम घंटों बातें करते, हंसते खेलते, लेकिन कभी कोई गलत सोच नहीं आई। रिश्ता पवित्र था, भाई बहन का वह बंधन जो समाज की नजरों में साफ और बेदाग होता है, मैंने भी नहीं कहूंगी कि मेरे मन में या उसके मन में कभी कोई बात थी, हम बस एक दूसरे के साथ सहज थे। भाई-बहन ही थे पर एक अच्छे दोस्त थे, जो एक दूसरे की हर छोटी बड़ी बात साझा करते थे।

समय बीता, समय का पहिया घूमा मेरी शादी हो गई मैं ससुराल आ गई पति का साथ नहीं मिल रहा है, हर रात उनके बिना बिस्तर ठंडा लगता है और मेरी त्वचा पर स्पर्श की कमी खलती है। ऐसा नहीं कि मुझे प्यार नहीं करते हैं वह मुझे प्यार करते हैं, उनके फोन पर बातें होती हैं, लेकिन वह दूरबीन से देखने जैसा लगता है। मेरा वीजा नहीं होने की वजह से अमेरिका नहीं जा पाई तो जैसे ही वीजा बन जाएगा मैं वही चली जाऊंगी, लेकिन तब तक की यह तन्हाई मुझे खा रही है।

जिंदगी बहुत छोटी होती है दोस्तों, छोटी जिंदगी में समय पर हो जाना चाहिए, हर पल को जीना चाहिए क्योंकि कल क्या हो किसे पता। कई बार जिंदगी जीने के लिए कुछ भी करना होता है इंसान को कर लेना चाहिए, क्या पता कब ऐसा कुछ हो जाए की जिंदगी ही नहीं रहे, इसलिए मैंने फैसला किया कि अपनी इच्छाओं को दबाऊंगी नहीं। मैं सीधे अपनी कहानी पर आती हूं, मेरे सास-ससुर दोनों एक रिश्तेदार के यहां गए हुए थे क्योंकि वहां पर शादी था, घर की सारी जिम्मेदारी मुझ पर थी लेकिन उस अकेलेपन में मुझे अपनी वासना की आग महसूस हो रही थी। मैं अकेले ही थी, घर की दीवारें मुझे घूरती लगतीं और हर कोना खालीपन से भरा था।

उस दिन मेरे भाई का नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से फोन आया दीदी मैं नई दिल्ली पहुंच गया हूं और मैं आ रहा हूं, उसकी आवाज सुनकर मेरे दिल में एक अजीब सी हलचल हुई, जैसे कोई पुरानी आग सुलग रही हो। मैं उसको पूछे कि तुम कानपुर से दिल्ली तक पहुंच गए पहले मुझे फोन नहीं किया और तुम यहां कर फोन कर रहे हो, मेरी आवाज में उत्साह था लेकिन अंदर से कुछ और चल रहा था। उसने कहा मैं आपको सरप्राइज देना चाह रहा था इस वजह से मैं दिल्ली आकर फोन किया आपको बस मैं आधे घंटे में घर आ रहा हूं, और उस सरप्राइज की बात ने मुझे और उत्तेजित कर दिया।

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दोस्तों उसी समय जब मेरे भाई का फोन आया था तब मैं इसी वेबसाइट पर एक भाई बहन के सेक्स कहानी पढ़ रही थी, उन शब्दों ने मेरी कल्पना को हवा दी और मेरी चूत में एक मीठी सी सिरहन हो रही थी। मैं अपने आप को अकेला महसूस करती हूँ तो इस कहानी को पढ़कर अपने जिस्म को सहला कर हस्तमैथुन करती हूं चूत में उंगली डालती हूं और चुपचाप सो जाती हूं, लेकिन आज वह उंगली पर्याप्त नहीं लग रही थी, मेरी त्वचा गर्म हो रही थी और सांसें तेज।

मैं वही कर रही थी पर मैं बहक गयी, मेरी उंगलियां मेरी चूत के होंठों को सहला रही थीं, गीलापन फैल रहा था और मैं कल्पना कर रही थी कि कोई मुझे छू रहा है। पर जब भाई का फ़ोन आया तो ख़ुशी से झूम उठी, उसकी आवाज ने मेरी वासना को और भड़का दिया। मुझे लगा की ढेर सारी बाते करुँगी और भाई से, और मैं हद से आगे भी जाने को पहले से ही सोच ली थी, मेरे मन में अब रिश्ते की दीवारें गिर रही थीं। मुझे अपने भाई बहन रिश्ते की परवाह नहीं थी, बस उस स्पर्श की तलब थी जो मुझे जिंदा महसूस कराए।

वो आधे घंटे में ही घर आ गया, दरवाजे पर घंटी बजी मैं दौड़कर गयी दरवाजा खोली मेरा भाई सामने खड़ा था, उसकी मुस्कान और थकी लेकिन उत्साहित आंखें देखकर मेरी सांसें रुक गईं। मैं तुरंत ही उसको अपनी बाहों में भर ली और फिर अंदर बुलाकर दरवाजा बंद की, उसका शरीर मेरे खिलाफ दबा और मैंने महसूस किया उसकी गर्म सांसें मेरे गले पर। अंदर आते ही सबसे पहले उसने यही पूछा की मम्मी पापा नहीं दिख रहे है, उसकी आवाज में चिंता लेकिन मेरे लिए वह पल और उत्तेजक था।

मैंने बता दिया वो दोनों यहाँ नहीं है कुछ दिनों के लिए रिस्तेदार के यहाँ गए है, और मैंने सोचा कि अब हम अकेले हैं, कोई बाधा नहीं। मैंने फिर से उसको अपने गले लगा ली, मैं अपने सीने से चिपका ली, मेरी चूचियां उसके सीने से दब रही थीं और मैंने महसूस किया उसका दिल तेज धड़क रहा है। वो बोलै अरे बस भी करो मैं यही हूँ अब दो तीन दिन तक, जितना मर्जी तुम मुझे गले लगा लेने और उससे भी मन नहीं भरे तो साथ सुला लेना ऐसे भी जीजा जी तुम्हारे साथ नहीं रहते है, उसकी यह बात मेरे कानों में मधुर लगी और मैंने महसूस किया कि वह भी कुछ महसूस कर रहा है।

मुझे इतनी ख़ुशी हुई उसकी ये बात सुनकर, वो मेरी मुँह की बात छीन लिया था, मैं यही चाहती थी कि वह मेरे साथ रहे, स्पर्श करे। उसके भी मिज्जाज बदले बदले से लग रहे थे, उसकी आंखें मेरे शरीर पर घूम रही थीं। मुझे लगा कि शायद आज काम बन जाएगा, एक अकेले जवान औरत और एक अकेला लड़का दरवाजा बंद कोई देखने वाला नहीं भले ही वह रिश्ते में भाई लगता हूं क्या फर्क पड़ता है जो भाई भी तैयार बहन भी तैयार तो शायद किसी तरीके की कोई दिक्कत किसी भी इंसान को नहीं होगी, जब एक दूसरा तैयार हो एक दूसरे के जिस्म को चूमने के लिए, और हमारी आंखें मिलीं तो लगा जैसे हम दोनों की वासना एक हो गई है।

जैसे मेरे भाई का फोन आया था वैसे ही मैंने अपने कपड़े बदल लिए थे, मैं साड़ी पहन ली थी ब्लाउज सेक्सी वाला था, आगे से ब्लाउज का गला काफी ज्यादा कटा हुआ था मेरे दोनों बड़ी-बड़ी चूचियां आधे बाहर आ रहे थे, मेरी चूचियां गोल और भरी हुई थीं, निप्पल सख्त हो चुके थे। बाल खोल रखे थे काजल कर रखे थे, देखने में बहुत हॉट और सेक्सी लग रही थी मैं, मेरी कमर की मटक और होंठों की लाली सब कुछ आकर्षक था।

मैंने आईने में देखा था मैं कामुकता की देवी लग रही थी, मेरी त्वचा चमक रही थी और आंखें वासना से भरी। इस रूप भाई ने मुझे देखा था तभी से उसकी नियत बदल गई थी वह बहकी बहकी बात कर रहा था, उसकी नजरें मेरी चूचियों पर टिकीं और मैंने देखा उसका चेहरा लाल हो रहा है। मैंने उसको पूछा चाय पियोगे गरम-गरम तुरंत बना कर आती हूं, मेरी आवाज नरम और आमंत्रित थी। उसने बोला गर्म लाओगे मैं यहां चाय तो गर्म ही होता है, मैं कुछ और लोगे और तुम्हारे पास जो भी गरम गरम है ले आना, उसकी डबल मीनिंग वाली बात ने मेरी चूत में सिरहन पैदा कर दी।

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मैं डबल मीनिंग में बोली गरम गरम तो है वो रात को लेना, और मैंने अपनी आंखें झुकाकर मुस्कुराई। इतना सुनते ही भाई अभी थोड़ा सा तो दिखा दो क्या है गरम गरम, उसकी आवाज में उतावलापन था और वह मेरे करीब आया। मैं बोली पहले तुम चाय पी लो उसके बाद दिखा दूंगी या तुम चख लेना, और उसको सेक्सी निगाह से देखती हुई मैं किचन में चली गई और मैं उसके लिए चाय बना कर ले आई, चाय बनाते समय मेरी कल्पना चल रही थी कि वह मुझे छुएगा कैसे।

हम दोनों ने चाय पिया, चाय की गर्मी ने हमारी बातों को और गर्म कर दिया, हम हल्की फुल्की बातें कर रहे थे लेकिन आंखें कुछ और कह रही थीं। चाय का प्याला जैसे ही हम दोनों ने टेबल पर रखा, वैसे ही उसने बोला गरम-गरम जो भी है थोड़ा दिखा दो, उसकी आंखें मेरी चूचियों पर थीं। मैं वहां से उठी और दोनों टांगों को फैला कर उसके गोद में बैठ गयी, मेरी साड़ी ऊपर सरक गई और मेरी जांघें उसके खिलाफ दब रही थीं, मेरे चूचियां उसके सामने जवाई तो वह हक्का-बक्का रह गया, लेकिन जल्दी ही उसने मुस्कुराकर मुझे देखा।

उसने मेरी बूब्स को निहारना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से मेरे दोनों चुचियों को पकड़ लिया, उसके हाथों की गर्मी मेरी त्वचा में उतर गई और मैंने सिहरन महसूस की। मैं भी वासना में अभिभूत थी मैंने तुरंत ही उसको चूमने लगी, उसके होंठ नरम और गर्म थे, हमारी जीभें मिलीं और चुंबन गहरा होता गया, उसकी सांसें मेरे मुंह में घुल रही थीं। मेरा भाई मुझे कसके अपनी ओर खींच लिया और मेरे होंठ को चूमने लगा, उसके हाथ मेरी कमर पर घूम रहे थे, साड़ी को सहला रहे थे। मेरी वासना भड़क गई थी मेरे चूत गीली हो चुकी थी, गीलापन मेरी पैंटी में फैल रहा था और मैं महसूस कर रही थी कि मेरी चूत की दीवारें सिकुड़ रही हैं।

जैसा मैं चाहती थी वैसा ही हो रहा था, हमारा चुंबन और गहरा होता गया, उसके हाथ अब मेरी चूचियों को दबा रहे थे, निप्पल को उंगलियों से मसल रहे थे, मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डाली और उसका स्वाद लिया। मैं अपने भाई के बाहों में भी उसका लंड धीरे-धीरे खड़ा हो रहा था, उसकी जींस में उभार महसूस हो रहा था जो मेरी जांघों से दब रहा था। मेरे कांड के नीचे पता चल रहा था उसका लंड मोटा हो गया था, मैंने महसूस किया उसकी गर्मी और सख्ती। मैंने हाथ को नीचे लगाकर उसके लंड को पकड़े बहुत मोटा था, उसकी नसें फड़क रही थीं और मैंने उसे सहलाया जिससे वह और सख्त हो गया। मैं बोली आज मैं से खा जाऊंगी, मेरी आवाज कांप रही थी वासना से।

उसने पूछा तुम्हारे साथ ससुर कितने दिन में आएंगे मैं बोले 3 दिन में, और मैंने सोचा कि ये तीन दिन天堂 होंगे। वह बोला फिर आराम आराम से 3 दिन तक खाना, उसकी आंखें चमक रही थीं और वह मुझे और कसकर पकड़ लिया। उसके बाद उसने मेरी उतारते खड़ा कर दिया, फिर से मुझे वैसे ही बैठने को बोला अपना जींस का बटन खोला नीचे सरकाया अपना लंड निकाल कर खड़ा किया और मुझे उस पर बैठने के लिए बोला, लेकिन इससे पहले उसने मेरी साड़ी को और ऊपर किया, मेरी जांघों को सहलाया, उंगलियां मेरी पैंटी पर घुमाईं जहां गीलापन साफ महसूस हो रहा था, वह बोला दीदी कितनी गीली हो गई हो, और उसने मेरी पैंटी को साइड किया, उंगली से मेरी चूत के होंठों को छुआ जिससे मैं सिहर उठी, आह… भाई… ऐसे छुओ… और वह उंगली अंदर डालकर हिलाने लगा, मेरी चूत का रस उसकी उंगली पर लगा और मैं कमर हिलाने लगी।

मैं उसके लंड को पकड़ कर चूत के छेद पर सेट करते हुए मैं बैठ गई, लेकिन बैठने से पहले मैंने उसके लंड को सहलाया, उसकी टोपी को जीभ से चाटा, गों… गों… गोग… जैसे आवाजें निकलीं जब मैंने उसे मुंह में लिया, उसका स्वाद नमकीन और गर्म था, वह कराह उठा, आह दीदी… चूसो… और मैंने गहराई तक लिया, ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गी.. मेरी जीभ उसके लंड पर घूम रही थी, फिर मैंने उसे चूत पर लगाया। उसका पूरा लंड में चूत के अंदर चला गया था अब मैंने ब्लाउज के हुक खोल दिया पीछे से ब्रा के हुक खोल दिया मेरे दोनों बड़ी चूचियां उसके सामने थी मेरी चूत चोदते हुए पीने लगा, उसके मुंह में मेरी निप्पल थी, वह चूस रहा था, दांत से काट रहा था, आह… ओह भाई… चूसो जोर से… मेरी चूचियां लाल हो रही थीं।

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वह जोर जोर से मेरी चूत लगा, और जोर जोर से धक्के देकर अपना नौ इंच का लंड मेरी चूत के अंदर घुसाने लगा, हर धक्के पर पच्च पच्च की आवाज आ रही थी, मेरी चूत का रस उसके लंड पर चिपक रहा था। मैं उछल उछल कर उसके लंड को अपने अंदर लेने लगी, मेरी कमर हिल रही थी, सांसें तेज, मैं सिसकारियां लेने लगी, मेरे मुँह से आअह्ह्ह्हह्हह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआआ ऊऊऊओ ओह्ह्ह्हह्हह उफफफ्फ्फ्फ़ उफ्फफ्फ्फ़ मर गाइएएए ओह्ह्ह्हह्हह और जोर से और जो से अअअअअअअ की आवाज निकालने लगी, हर धक्का मेरी गहराई को छू रहा था, दर्द और सुख मिलकर मुझे पागल कर रहे थे।

मेरी आंखें बंद हो रही थी मेरे होठ लाल हो गए थे मेरी चूचियां बड़ी वाली और टाइट हो चुकी थी, वह मुझे जोर जोर से चोदने लगा मैं भी जोर जोर से अपनी गांड को पटक-पटक कर उसके लंड को नहीं रही थी, उसकी त्वचा मेरी त्वचा से रगड़ रही थी, पसीना बह रहा था, हमारी सांसें मिल रही थीं। 30 से 40 मिनट तक मुझे वह चोदते रहा सोफे पर, फिर उसने मुझे जमीन पर लिटा दिया मेरी टांगों को ऊपर करके फिर जोर जोर से मेरी चूचियों को मसलते हुए धक्के मार मार कर अपना मोटा लंड मेरी चूत के अंदर घुसा रहा था, लेकिन इससे पहले उसने मेरी चूत को जीभ से चाटा, आह… इह्ह… ओह्ह… भाई… चाटो… मेरी क्लिट को चूसो… गी… गी… उसकी जीभ अंदर घूम रही थी, रस चाट रहा था, फिर धक्के शुरू किए।

करीब डेढ़ घंटे तक उसने मुझे चोदा, फिर हम दोनों एक साथ झड़ गए, उसका गर्म वीर्य मेरी चूत में बह रहा था, मैं कांप उठी, आह… भाई… भर दो मुझे… हम दोनों एक साथ बाथरूम में जाकर नहाए, पानी की बौछार के नीचे हमने एक दूसरे को साबुन लगाया, छुआ, फिर से चुंबन लिए, उसके हाथ मेरी चूत पर, मेरे हाथ उसके लंड पर। फिर खाना खाकर हम दोनों एक ही बेड पर सो गए, लेकिन सोने से पहले हमने फिर से एक दूसरे को सहलाया, चूमा। शाम को 4:00 बजे फिर हम दोनों ने एक बार फिर से सेक्स किया, इस बार और ज्यादा foreplay के साथ, वह मेरी गर्दन चूम रहा था, कान में फुसफुसा रहा था कि दीदी तुम कितनी गर्म हो, मैंने उसके सीने को चाटा, निप्पल चूसे। उस रात को तीन से चार बार उसने मुझे चोदा, हर बार नई पोजीशन में, कुत्ते स्टाइल में, मिशनरी में, हर धक्के पर सुख की लहरें। 3 दिन तक उसने मुझे खूब चोदा मैं भी खूब मजे ली, हर पल की गर्मी, स्पर्श, और संतुष्टि ने मुझे नया जीवन दिया। मुझे चिंता नहीं है मेरा पति कहीं नहीं मेरा भाई मेरे पास है जब मर्जी बुला लूंगी उसको, या मैं समय निकालकर खुद ही कानपुर चली जाऊंगी।

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