Maa ki chudai sex story, dost se maa chudai sex story, birthday chudai sex story: हैलो दोस्तों, मेरा नाम विक्रम है और आज मैं एक बार फिर से आप सभी लोगों के लिए अपनी एक और सच्ची कहानी लेकर आया हूँ, जिसमें एक बार फिर से मेरी चुदक्कड़ माँ मेरे एक दोस्त से चुदी और उसके साथ बहुत मज़े किए। अब मैं वो सब कुछ थोड़ा विस्तार से आप सभी लोगों को बता देता हूँ। दोस्तों यह कहानी मेरी माँ और मेरे एक दोस्त की है। मेरा दोस्त मुझसे मिला और फिर वो मेरे मुलाकात करवाने पर मेरी माँ से भी मिला और फिर उसने मेरी माँ से बहुत ही कम समय में दोस्ती कर ली, मैं अब अपने दोस्त के बारे में भी बता देता हूँ। उसका नाम आशीष है, वो दिल्ली से है और उसकी हाइट 5.11 है, गोरा रंग, दिखने में अच्छा शरीर और लंड का साइज़ 6.5 इंच है। दोस्तों मेरी माँ का नाम सपना है और हम एक मध्यम वर्ग परिवार से हैं और मैं फरीदाबाद में रहता हूँ। मेरे घर पर मैं, मेरी मम्मी, पापा हैं। मेरे पापा का अपना काम है इसलिए मैं कभी काम पर पापा के साथ तो कभी मस्ती, बस यही मेरा काम है।
मैं अपने दोस्त आशीष से मिला और हम अच्छे दोस्त बन गए। वो मुझसे एक बार मिला भी फिर एक दिन मैं उसे अपने साथ घर लेकर आ गया। आशीष को मेरी माँ को बुरी तरह से चोदना था, वो चाहता था कि उसकी चूत को फाड़ दे। फिर मैंने उसे अपनी माँ से मिलवाया और उनसे कहा कि यह मेरा दोस्त है आशीष है, उनके बीच हाय हैलो हुई और माँ ने हमारे लिए चाय बनाई और हम सभी ने चाय पी। और फिर कुछ देर बाद मैं माँ और आशीष से यह बात बोलकर वहाँ से उठकर बाहर चला गया कि मैं अभी आता हूँ, मुझे एक कॉल करना है और अब मैं बाहर आ गया। तो आशीष और मेरी माँ अब अंदर ही बैठे हुए इधर उधर की बातें कर रहे थे और थोड़ी देर बाद मैं भी अंदर चला गया उसके बाद हम दोनों मेरे घर से बाहर निकल गए, मैंने बाहर आने के बाद आशीष से पूछा कि तुम्हारी क्या क्या बात हुई? तो आशीष बोला कि कुछ नहीं, बस ऐसे ही उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम क्या करते हो कहाँ के रहने वाले हो यह सब? दोस्तों उसके बाद आशीष कभी भी मेरे साथ मेरे घर पर आ जाता था। दोस्तों 6 जून को मेरी माँ का जन्मदिन था तो मैंने इस बात को आशीष को भी बता दिया था कि माँ का जन्मदिन है और उस समय मेरे पापा भी कुछ दिनों के लिए मेरे घर से बाहर गए हुए थे और फिर मैंने आशीष को बता दिया कि यह तेरे लिए एकदम सही टाइम है, उसने मेरी बात को एक बार कहते ही तुरंत मान लिया और अब तक मेरी माँ और आशीष की बहुत अच्छी बनने लगी थी।
6 जून को आशीष मेरे घर पर आ गया। दोस्तों उस समय मेरे घर पर कोई भी नहीं था और मैं भी अपनी माँ से झूठा बहाना बनाकर बाहर चला गया था। फिर आशीष ने दरवाजे पर लगी घंटी को बजा दिया तो माँ ने दरवाजा खोलकर कहा, “अरे आशीष बेटा कैसे हो तुम?”
आशीष: “हाँ मैं एकदम ठीक हूँ आंटी और आप कैसे हो? आपको अपना जन्मदिन मुबारक हो आंटी।”
माँ: “धन्यवाद बेटा, लेकिन आपको कैसे पता चला कि मेरा आज जन्मदिन है और इस समय तो विक्रम भी घर पर नहीं ही है।”
आशीष: “आंटी आप यह सब मुझे अंदर बुलाकर भी पूछ सकती हो।”
माँ: “अरे मुझे माफ करना बेटा, आ जाओ अंदर।”
अब आशीष अंदर आ गया और फिर उसने बताया कि विक्रम ने कुछ दिन पहले ही बातों ही बातों में उसे बता दिया था कि 6 जून को आपका जन्मदिन है। तो माँ ने बोला कि उसे तो याद भी है, लेकिन उसके पापा ने तो आपको बधाई भी नहीं दी और ना मुझे एक बार भी फोन किया। दोस्तों आशीष के हाथ में एक केक और गिफ्ट भी था और उसने वह माँ को दे दिया और बोला कि आंटी केक कट करो। उसके बाद आप अपना यह गिफ्ट खोलकर देखना। दोस्तों आशीष के मुँह से यह सभी शब्द सुनकर मेरी माँ थोड़ी सी उदास हो गई और उनकी आँख में हल्के से आंसू आ गए और वो कहने लगी कि बेटा आज तक मेरा जन्मदिन कभी किसी ने नहीं मनाया। दोस्तों यह सब बातें मैंने ही आशीष को बताई थी तो उसने बोला कि कोई बात नहीं आंटी आप आज मना लो, मैं हूँ ना आपके साथ, आपको खुश करने के लिए। अब माँ ने तुरंत आशीष को हग कर लिया और फिर आशीष और माँ ने वो केक काट लिया और आशीष को खिला दिया और आशीष ने माँ को खिला दिया। अब आशीष ने बचा हुआ पूरा केक मेरी माँ के चेहरे पर लगा दिया और माँ भी आशीष को लगाने लगी और ऐसे करते करते उन दोनों ने एक दूसरे को बहुत सारा केक लगा दिया, जिसकी वजह से उन दोनों के कपड़े, चेहरा, बाल सब जगह केक लग गया। फिर आशीष ने मेरी मम्मी को अपना वो गिफ्ट दिया और उसमें एक सुंदर सी ड्रेस थी। माँ ने उसे खोलकर देखा और वो बोली कि वाह यह तो बहुत अच्छी है। तो आशीष ने कहा कि तो आंटी अब आप इसे एक बार पहनकर भी देखो ना, माँ बोली कि क्या अभी? आशीष ने बोला कि हाँ आंटी यह कपड़े तो आपके सारे केक में खराब हो गए है तो नहाना तो अब आपको पड़ेगा, नहाकर चेंज कर लो। अब मेरी माँ ने ठीक है कह दिया और दोस्तों आप सभी लोग मेरी माँ को तो बहुत अच्छी तरह से जानते ही हो कि वो कैसी है? उसे तो बस कोई अच्छा मौका चाहिए, माँ तुरंत बोली कि ठीक है मैं अभी आती हूँ, तुम तब तक बैठो।
अब आशीष लिविंग रूम में बैठा हुआ था और उसे जब लगा कि माँ अंदर बाथरूम में चली गई है तो उसने सोचा कि अब माँ के रूम में जाकर बैठ जाता हूँ और वो रूम में चला गया और माँ के बाथरूम के पास चला गया और मेरी माँ ने ऐसे ही दरवाजा बंद तो कर दिया, लेकिन पूरा बंद नहीं किया आशीष ने ऐसे ही हल्का सा चेक करने के लिए अपना एक हाथ लगाया तो वो खुल गया, उसने देखा कि मेरी माँ ब्रा और पेंटी में नहा रही थी, आशीष ने तुरंत दरवाजा पूरा खोल दिया और उसके अपने सारे कपड़े बाहर ही उतारकर वो खुद भी बाथरूम के अंदर चला आ गया। तो माँ उसे अचानक से देखकर बिल्कुल चकित हो गई या फिर होने का नाटक करने लगी और वो बोली कि अरे बेटा आप यहाँ पर कैसे? मैं नहा रही हूँ।
आशीष बोला कि अरे आंटी वो मुझे भी केक लगा है तो इसलिए मैंने सोचा कि आपके साथ में भी नहा लेता हूँ, प्लीज आप थोड़ा मुझे भी साफ कर दो ना। दोस्तों मेरी माँ को तो ऐसा ही मौका चाहिए होता है माँ ने झट से कहा कि अच्छा लाओ मैं कर देती हूँ और अब माँ उसके साथ नहाने लगी और उसके शरीर पर हाथ लगाने लगी, जैसे ही माँ के नरम हाथ आशीष की छाती पर फिसले, उसका शरीर सिहर उठा और नीचे उसका लंड धीरे धीरे सख्त होने लगा, माँ ने उसके कंधों पर साबुन लगाया, फिर पीठ पर हाथ फेरा, आशीष की साँसें तेज हो गईं और वो माँ के करीब आ गया, माँ ने महसूस किया कि आशीष का लंड अब उसके पेट से टकरा रहा है, वो हल्के से मुस्कुराई और अपना हाथ नीचे ले गई, आशीष की आँखें बंद हो गईं जब माँ ने उसके लंड को छुआ, “उम्म्म… आंटी, आपका हाथ कितना नरम है,” आशीष ने सिसकारी ली और माँ ने हल्के से उसका लंड पकड़ लिया, अब हाथ लगते लगते आशीष का लंड पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया। उस पर माँ की नज़र चली गई और माँ ने अपना एक हाथ उसके लंड के पास लाकर उससे पूछा कि तुमने अंदर यह क्या छुपा रखा है, यह क्या मेरे लिए कोई और गिफ्ट है? तो आशीष बोला कि हाँ आंटी यह आपके लिए सबसे अच्छा गिफ्ट है, अब माँ ने मुस्कुराते हुए कहा कि अच्छा तो मुझे यह गिफ्ट भी दो ना। फिर आशीष ने झट से अपना अंडरवियर उतार दिया और माँ उसके लंड को देखकर बहुत खुश हो गई और उसका लंड करीब 6.5 इंच का था, माँ ने उसे हाथ में ले लिया और हिलाने लगी, आशीष की सिसकारियाँ निकलने लगीं, “आह्ह… आंटी, कितना अच्छा लग रहा है,” वो बोला और माँ ने तेजी से हिलाना शुरू किया, पानी की फुहारों के बीच दोनों के शरीर गीले हो रहे थे, आशीष ने भी माँ की ब्रा पेंटी को उतार दिया और अब वो भी मेरी माँ की चूत पर हाथ लगने लगा जिसकी वजह से माँ उम्म्म उफ्फ्फ्फ़ कर रही थी, माँ की चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी, आशीष ने अपनी उँगलियाँ माँ की चूत में डाली और अंदर बाहर करने लगा, माँ की आँखें बंद हो गईं, “ओह्ह… आशीष, हाँ वैसे ही, उफ्फ… कितना अच्छा लग रहा है,” माँ ने कराहते हुए कहा और आशीष ने तेज किया, अब आशीष ने माँ को किस करना शुरू कर दिया और फिर माँ के बूब्स को दबाने लगा और चूसने लगा, माँ के निप्पल्स को मुँह में लेकर चूसा, माँ सिसकार उठी, “आह्ह… ह्ह्ह… चूसो बेटा, जोर से चूसो,” वो बोली और आशीष ने एक हाथ से माँ की चूत को सहलाया, दूसरे से बूब्स दबाए, दोनों के बीच गर्मी बढ़ती गई, फिर थोड़ी देर में वो दोनों नहाकर बाथरूम से बाहर आ गए, लेकिन वो दोनों पूरे नंगे ही बाहर आ गए तो आशीष ने बोला कि आंटी यह आपका शरीर बिना कुछ पहने बहुत अच्छा लगता है और उसने माँ को बेड पर लेटा दिया और वो उनके ऊपर आ गया। वह माँ को किस करने लगा और माँ के बूब्स को चूसने लगा, वो दोनों बिल्कुल मदहोश हो गए, आशीष ने माँ के होंठों को चूमा, फिर गले पर किस किया, नीचे उतरते हुए बूब्स पर आया, एक निप्पल को जीभ से चाटा, दूसरे को उँगलियों से मसला, माँ की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं, “उम्म्म… आशीष, तुम कितने अच्छे हो, हाँ वैसे ही करो,” माँ बोली और आशीष ने माँ के पेट पर किस किया, नाभि में जीभ डाली, माँ का शरीर काँप उठा।
अब आशीष ने मौका देखकर माँ की चूत में अपनी जीभ को डालकर वो चूत के दाने को चूसने लगा, पहले उसने जीभ की नोक से क्लिटोरिस को हल्के से छुआ, फिर चारों तरफ घुमाया, माँ का शरीर तुरंत सिहर उठा, उसकी कमर ऊपर उठ गई, “आह्ह… ओह्ह… आशीष, चूसो मेरी चूत को, उफ्फ… कितना मजा आ रहा है,” माँ ने कराहते हुए कहा और अपनी टाँगें और फैला दीं, आशीष ने अब जीभ को पूरी तरह अंदर डाला, चूत की दीवारों को चाटा, फिर बाहर निकालकर क्लिट को जोर से चूसा, जैसे कोई मीठा फल हो, माँ की चूत से रस बहने लगा, आशीष ने वो सारा रस जीभ से चाट लिया, “मम्म… आंटी, आपकी चूत का स्वाद कितना अच्छा है,” वो बोला और फिर जीभ अंदर बाहर करने लगा, तेज तेज, माँ की टाँगें काँप रही थीं, वो आशीष के बाल पकड़कर उसका मुँह अपनी चूत पर और दबाने लगी, “हाँ… ऐसे ही… गहराई तक… ओह्ह… उफ्फ,” माँ की सिसकारियाँ बढ़ गईं, उसकी साँसें तेज हो गईं, आशीष ने एक उंगली भी चूत में डाल दी, अंदर बाहर करते हुए क्लिट को चूसता रहा, माँ अब पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी, उसका शरीर लहरा रहा था।
कुछ देर चूसने के बाद आशीष ने अपना लंड माँ के मुँह की तरफ कर दिया, लंड पहले से ही सख्त और चमक रहा था, माँ ने बिना हिचकिचाहट के उसे हाथ में पकड़ा, फिर जीभ से टिप को चाटा, धीरे से चूमा, फिर मुँह में लिया, “ग्ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गी… गों… गों,” माँ के मुँह से वो गहरी आवाजें आने लगीं जैसे वो लंड को गले तक ले जा रही हो, आशीष की आँखें बंद हो गईं, “आह्ह… आंटी, कितना अच्छा चूस रही हो, पूरा मुँह में लो,” वो बोला और माँ ने जोर से चूसा, लंड पर थूक लगाया, हाथ से हिलाया, फिर दोबारा मुँह में लिया, अब वो लंड को गहराई तक ले जा रही थी, गला तक, फिर बाहर निकालकर चाटती, आशीष की कमर हिलने लगी, वो माँ के मुँह में हल्के धक्के देने लगा, दोनों की साँसें तेज थीं, माँ की आँखों में आंसू आ गए थे लेकिन वो रुक नहीं रही थी, कुछ देर चूसने चाटने के बाद वो दोनों अपनी चरम सीमा तक पहुँच गए थे, आशीष ने कराहते हुए कहा, “आंटी… मैं… आ रहा हूँ,” और माँ के मुँह में झड़ गया, गर्म गर्म रस माँ के गले में गया, माँ ने सब निगल लिया, फिर आशीष ने माँ को 69 पोजीशन में किया और उसकी चूत चाटते हुए माँ ने भी आशीष के लंड से बचा हुआ रस चूसा, दोनों ने एक दूसरे का रस चाटकर चूसकर कुछ देर बाद बिल्कुल सीधा होकर लेट गए, माँ ने आशीष को गले लगाया, “वाह बेटा, कितना मजा आया,” वो बोली और आशीष मुस्कुराया, दोनों के शरीर पसीने और रस से चिपचिपे थे।
तभी थोड़ी देर बाद आशीष ने माँ का एक हाथ अपने लंड पर रख दिया, माँ ने धीरे से मसलना शुरू किया, लंड फिर से सख्त होने लगा, आशीष ने कहा, “आंटी, अभी तो और मजा बाकी है,” और जब उसका लंड पूरी तरह खड़ा हो गया तो उसने अपना लंड माँ के मुँह में डाल दिया, माँ ने फिर से चूसना शुरू किया, अब तक लंड और मोटा और लंबा लग रहा था, माँ ने उसे चाटा, जीभ से चारों तरफ घुमाया, फिर जोर से चूसा, “ग्ग्ग्ग… गों… गों,” आवाजें फिर से आईं, आशीष ने माँ के बाल पकड़े और मुँह में धक्के देने लगा, “हाँ आंटी… ऐसे ही… गहरा लो,” वो बोला, माँ की गला तक लंड जा रहा था, वो खाँस रही थी लेकिन मजा ले रही थी, फिर आशीष ने अपनी पेंट से एक कंडोम बाहर निकाला और माँ को उसे अपने लंड पर लगाने को कह दिया, माँ ने लंड को हाथ में पकड़ा, कंडोम निकाला, पहले टिप पर रखा, फिर धीरे से नीचे खींचा, पूरा लंड कवर हो गया, माँ की आँखों में वासना थी, “आशीष, अब चोदो मुझे, मेरी चूत प्यासी है,” वो बोली और अपनी टाँगें फैला दी।
अब आशीष अपने लंड को माँ की चूत पर लगाकर धीरे धीरे रगड़ने लगा, लंड की टिप चूत के होंठों पर फिसल रही थी, क्लिट को छू रही थी, माँ की सिसकारियाँ निकलने लगीं, “उम्म्म… आह्ह… डालो ना… रगड़ मत,” वो बड़बड़ाई, आशीष ने और रगड़ा, चूत का रस लंड पर लग रहा था, फिर कुछ देर बाद माँ गर्म होकर बोलने लगी कि प्लीज अब इसे मेरी प्यासी चूत के अंदर डाल दो प्लीज आशीष, उसकी आवाज में बेचैनी थी, आशीष ने मुस्कुराकर कहा, “अब ले लो आंटी,” और एक जोर का झटका दे दिया, पूरा 6.5 इंच का लंड एकदम से चूत में चला गया, माँ जोर से चिल्ला गई, “आईईईई… आह्ह… क्या कर दिया… पूरा अंदर… ओह्ह,” क्योंकि पूरा लंड एकदम से गया था, चूत टाइट थी और अचानक भर गई, माँ बोली कि थोड़ा आराम से आईईईई क्या आज तू मुझे मारेगा क्या? “आह्ह… ह्ह्ह… ओह्ह… धीरे बेटा,” माँ कराह उठी, उसकी आँखों में आंसू आ गए लेकिन चूत में लंड महसूस करके वो भी कमर हिलाने लगी, आशीष ने धक्के जारी रखे, पहले धीरे धीरे, फिर तेज, हर धक्के के साथ माँ की सिसकारियाँ बढ़ती गईं।
अब आशीष बोला कि आंटी आज जोर जोर से ही करने में मज़ा आएगा और आज आपको गिफ्ट देना है और वो स्पीड में करने लगा, उसने अपनी कमर को तेजी से हिलाना शुरू किया, लंड को माँ की चूत में गहराई तक धकेलते हुए बाहर निकालना, हर धक्के के साथ माँ का शरीर हिल रहा था। फिर माँ बोली उफ्फ्फफ्फ्फ़ आह्ह्हह्ह प्लीज आशीष थोड़ा आराम आराम से कर बेटा, आराम से ऊईईईइ माँ मर गई, उसकी आवाज में दर्द और मजा दोनों घुला हुआ था, लेकिन आशीष ने उसकी बात अनसुनी कर दी। अब आशीष कहने लगा कि चुपकर साली बस मज़े ले और फिर उसके अपनी स्पीड को और भी बढ़ा दिया, अब वो माँ के ऊपर झुका और उसके बूब्स को जोर से दबाते हुए धक्के मारने लगा, हर धक्के के साथ “चप्प… चप्प… फच… फच,” चूत में लंड अंदर बाहर होने की आवाजें आने लगीं, माँ की चूत गीली होकर लंड को आसानी से ले रही थी, उसका रस लंड पर चिपक रहा था जो हर बार बाहर निकलने पर चमक रहा था, आशीष ने माँ की टाँगें उठाईं और उन्हें अपने कंधों पर रख लिया, इससे लंड और गहराई तक जा रहा था, गहरे धक्के दिए, माँ सिसकार रही थी, “आह्ह… ह्ह्ह… जोर से चोदो आशीष, फाड़ दो मेरी चूत को, उफ्फ… हाँ वैसे ही,” वो बोली और अपना सिर पीछे की तरफ झटक दिया, उसकी आँखें बंद थीं और मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थीं, आशीष ने अब माँ के निप्पल्स को चुटकी में लेकर खींचा, जिससे माँ का शरीर और उत्तेजित हो गया, वो अपनी कमर को नीचे से उठाकर आशीष के धक्कों का जवाब दे रही थी, दोनों के पसीने से शरीर चिपचिपा हो गया था, आशीष ने पोजीशन बदली, उसने माँ को पलटा और घोड़ी बनाया, माँ घुटनों और हाथों के बल हो गई, आशीष ने पीछे से उसकी कमर पकड़ी और लंड को चूत पर रगड़ा, फिर एक झटके में अंदर डाल दिया, “ओह्ह… आह्ह… हाँ बेटा, गांड भी मारो,” माँ ने कहा, उसकी आवाज में अब पूरी वासना थी, आशीष ने पहले चूत में कुछ धक्के दिए, “फच… फच… चप्प… चप्प,” आवाजें तेज हो गईं, माँ की गांड हिल रही थी, फिर आशीष ने लंड बाहर निकाला और माँ की गांड पर रगड़ा, माँ ने थोड़ा हिचकिचाते हुए कहा, “धीरे से बेटा, वो टाइट है,” लेकिन आशीष ने नहीं सुना, उसने लंड पर थूक लगाया और धीरे से गांड के छेद में दबाया, माँ की सिसकारी निकली, “उफ्फ… आह्ह… धीरे,” फिर आशीष ने धीरे धीरे अंदर धकेला, आधा लंड अंदर जाते ही माँ चिल्लाई, “आह्ह… ह्ह्ह… ओह्ह… फाड़ दी,” लेकिन आशीष ने कमर पकड़कर पूरा लंड अंदर कर दिया, अब वो धीरे धीरे धक्के देने लगा, माँ का दर्द धीरे धीरे मजा में बदलने लगा, वो खुद अपनी गांड पीछे धकेलने लगी, आशीष ने स्पीड बढ़ाई, “फच… फच,” आवाजें आईं, माँ ने खुद गांड हिलाई, “हाँ आशीष, जोर से मारो, उफ्फ… कितना मजा आ रहा है,” वो बोली, आशीष ने एक हाथ से माँ की चूत में उंगली डाली और रगड़ने लगा, इससे माँ और पागल हो गई, दोनों की साँसें तेज थीं, फिर कुछ देर में करीब 12-20 मिनट के बाद आशीष झड़ गया और वो माँ के ऊपर ही थककर लेट गया, उसका लंड अभी भी माँ की गांड में था, धीरे धीरे सिकुड़ रहा था। दोस्तों उसने मेरी माँ को कपड़े पहनाकर फिर से उतारकर दोबारा चोदा और उसकी गांड भी मारी, पहले माँ को बेड पर लेटाया, गांड में उंगली डाली, “उफ्फ… आह्ह… धीरे,” माँ बोली लेकिन आशीष ने लंड पर थूक लगाया और धीरे से गांड में डाला, “आह्ह… ह्ह्ह… ओह्ह… फाड़ दी,” माँ चिल्लाई लेकिन फिर मजा आने लगा, आशीष ने धक्के दिए, “फच… फच,” आवाजें आईं, माँ ने खुद गांड हिलाई, फिर झड़ने के बाद दोनों थक गए। उस दिन पूरे दिन उसने मेरी माँ को बहुत मज़े लेकर चोदा।
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