नंगी चूत दिखाकर नए PG बॉय को गर्म किया

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Mature aunty paying guest sex story, PG boy chudai kahani sex story: हाय दोस्तों, मेरा नाम खुशी है। जैसा कि नाम है वैसे ही सबको खुशियां बांटना मेरा काम है। मेरी उम्र 33 साल है और आज भी मैं अकेली हूं। मेरा फिगर 34-30-38 का है। हां, थोड़ी मोटी हूं लेकिन दिखने में बहुत सेक्सी लगती हूं। मेरे दूध एकदम तने हुए हैं और मैं ज्यादातर ब्रा नहीं पहनती। गहरे गले वाले पतले ब्लाउज में मेरी चूचियों की गहरी घाटी अच्छे-अच्छों को मदहोश कर देती है। निप्पल साफ दिख जाते हैं तो मर्द या लड़के बस उन्हें देखते रह जाते हैं। ये सब देखकर मुझे बहुत सुकून मिलता है कि मेरा यौवन अभी भी मर्दों को अपनी ओर खींच सकता है।

मुझे चुदाई बहुत पसंद है लेकिन हर किसी से नहीं करवाती। जो लड़का मुझे पसंद आ जाए उसके लिए मैं खुद बिछ जाती हूं। ज्यादातर अपनी चूत की खुजली अपने किरायेदारों से मिटाती हूं। किरायेदार मजबूत लौड़े वाला होना चाहिए, इसलिए मैं ऐसे लड़कों को कमरा देती हूं जो दिखने में कड़ियल हों, बाहों में दबोचकर पीस सकें। सुरक्षा के लिए ऐसे लड़के चुनती हूं जो पढ़ाई के लिए आए हों, एक-दो साल में चले जाएं। लौड़े बदल-बदलकर मिलते रहते हैं। मैं आगे-पीछे दोनों तरफ से चुदवाती हूं। मन है कि कभी दो लौड़ों के बीच में गेहूं की तरह पीस जाऊं, चूत और गांड दोनों में एक साथ ड्रिलिंग हो और मुंह में भी एक लंड हो। लेकिन अभी ये इच्छा पूरी नहीं हुई।

पिछले साल मेरे घर में एक नया किरायेदार आया, नाम राहुल। एमबीए करने आया था। लंबाई 5 फुट 9 इंच, सीना भरा-भरा, देखते ही मेरा मन उसके नीचे आने को हुआ। लेकिन मैंने खुद को संभाला और सख्त मिजाज वाली आंटी बनकर बात की। वह भी सभ्य था। कमरा देखकर सामान लेकर दो घंटे में शिफ्ट हो गया। मैं किरायेदारों के लिए खाना भी बनाती हूं ताकि उन्हें कोई परेशानी न हो।

पहले दिन से ही उसकी प्यासी नजरें समझ गईं कि ये मेरा अगला शिकार है। प्लान ये था कि उसे लगे कि उसने आंटी को पटाकर चोदा, लेकिन असल में गेम मैं चलाऊंगी। कुछ दिनों में मैंने उसे अपनी चूत के दर्शन करा दिए।

एक सुबह राहुल चाय पीने नीचे आया। मैं साड़ी घुटनों तक ऊपर करके आलू छील रही थी। वो आया तो बोली, बेटा चाय गर्म करके मुझे भी दे देना। चाय लेकर आया तो मैंने टांगें थोड़ी-थोड़ी खोलकर अपनी चूत दिखा दी। उस दिन मैंने बुर के सारे बाल साफ कर लिए थे, चूत की लहसुन पर हल्की लाल लिपस्टिक लगाई थी जो चमक रही थी। साड़ी का पल्लू ऐसे सरका था जैसे अनजाने में हो गया हो। मेरी चिकनी, गुलाबी-लाल चूत पूरी तरह नजर आ रही थी, होंठ थोड़े फूले हुए, बीच का छेद हल्का गीला। राहुल की सांसें तेज हो गईं, उसकी आंखें चूत पर टिक गईं। उसके लोअर में लंड फड़ककर खड़ा हो गया, साफ उभार दिख रहा था। वो चाय का कप थामे खड़ा रह गया, जाने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।

मैंने मुस्कुराकर कहा, बेटा यहीं बैठकर चाय पी लो, क्या हुआ? वो हकलाकर बैठ गया। चाय पीते-पीते मैंने जानबूझकर टांगें और फैलाईं, 2-3 बार चूत पूरी तरह दिखाई। हर बार वो नजर हटाने की कोशिश करता लेकिन फिर चुपके से देख लेता। उसका लंड अब इतना सख्त हो चुका था कि लोअर पर गीला धब्बा भी बनने लगा था। फिर मैंने कहा, अच्छा बेटा, मैं जरा बाथरूम होकर आती हूं, तुम यहीं बैठना।

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बाथरूम में जाकर मैंने दरवाजा हल्का-सा खुला छोड़ दिया। झांककर देखा तो राहुल दबे पांव मेरी तरफ बढ़ रहा था। मैं मुंह दरवाजे की तरफ करके शौचालय पर बैठ गई। साड़ी ऊपर करके टांगें फैलाईं और पेशाब छोड़ने लगी। सर्ररर्र… सर्ररर… गरम मूत की तेज धार चूत से निकली, छेद से फुहार की तरह छिटक रही थी। पूरा मूत निकलने के बाद मैंने उंगली डालकर बची हुई बूंदें बाहर निकालीं। फिर बाल्टी से पानी लेकर चूत पर डाला और उंगली अंदर-बाहर करने लगी, धीरे-धीरे, ऐसे कि छेद और क्लिटोरिस दोनों साफ दिखें। मेरी चूत अब गीली हो चुकी थी, पानी और रस मिलकर चमक रहा था। मैं जानबूझकर उंगली को गहराई तक डाल रही थी, हल्की-हल्की सिसकारी ले रही थी, आह्ह… ह्म्म… ताकि राहुल सुन ले। फिर आराम से साड़ी नीचे की और बाहर निकली। राहुल वापस अपनी जगह पर शरीफ बनकर बैठा था, लेकिन उसकी सांसें तेज चल रही थीं।

मैंने कहा, ठीक है राहुल, अब तुम जाओ। कुछ सामान मंगवाना है, बाद में बताऊंगी। वो जी आंटी कहकर तेजी से ऊपर चला गया। अब मेरी बारी थी देखने की कि उस नजारे का असर क्या हुआ। मैं भी दबे पांव उसके कमरे के पास पहुंची। दरवाजे की झिरी से देखा तो राहुल लोअर नीचे करके बिस्तर पर बैठा था। उसका साढ़े छह इंच का लंड पूरा खड़ा था, सुपारा लाल और चमकदार, नसें फूली हुईं। वो तेल लेकर लंड पर मल रहा था, धीरे-धीरे ऊपर-नीचे कर रहा था। आंखें बंद करके कल्पना में मुझे चोद रहा था, होंठ काट रहा था, हल्की-हल्की सिसकारी ले रहा था… आह्ह… आंटी… आपकी चूत… कितनी गर्म… वो मुट्ठी तेज करने लगा।

सही मौका था। मैंने धीरे से दरवाजा खोला और अंदर कदम रखा। बोली, राहुल जाओ तो चाभी… इतना कहकर मैं चुप हो गई। राहुल की आंखें अचानक खुलीं, वो चौंककर लंड छिपाने की कोशिश करने लगा लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। मैं बोली, ये क्या कर रहे हो तुम? वो घबराकर बोला, व…वह… आंटी कुछ नहीं… बस थोड़ा दर्द हो रहा था तो… मैंने नजदीक जाकर कहा, बेटा वो दर्द ऐसे हाथ से ठीक नहीं होता। तो फिर क्या करूं आंटी, उसने कांपती आवाज में पूछा। मैंने मुस्कुराकर कहा, या तो गर्लफ्रेंड बना लो या शादी कर लो। वो बोला, आंटी अभी समय नहीं है। फिर हिचकिचाते हुए बोला, बुरा न मानो तो आप मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओ न। मैंने थोड़ा रुककर कहा, बेटा मैं तुमसे दस साल बड़ी हूं, लेकिन अगर यही इच्छा है तो ठीक है।

राहुल को मानो मंजूर मुराद मिल गई। उसकी आंखों में भूख साफ दिख रही थी। वो एकदम मेरे ऊपर टूट पड़ा। उसने मेरे ब्लाउज के हुक जल्दी-जल्दी खोले और उसे फेंक दिया। ब्रा नहीं थी, इसलिए मेरे भरे हुए 34 के दूध एक झटके में बाहर आ गए, निप्पल पहले से ही सख्त हो चुके थे। राहुल ने दोनों हाथों से मेरे दूध पकड़े, उन्हें दबाया और एक दूध को मुंह में भर लिया। वो जोर-जोर से चूसने लगा, जैसे सालों से प्यासा हो।

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आह्ह… राहुल… बेटा… ऐसे चूसो… पियो अच्छे से… मैंने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।

उसने दांत हल्के से लगाए तो मैंने रोका, “बेटा, पियो… काटो मत… बस चूसो…”

“सॉरी आंटी…” कहकर उसने दांत हटा लिए और अब दोनों चूचियों को बारी-बारी चूसने लगा। एक को मुंह में लेकर जीभ से निप्पल घुमाता, चूसता, दूसरा हाथ से मसलता। मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं – आह्ह… हां… ऐसे ही… राहुल… अच्छा लग रहा है… मैं नीचे हाथ बढ़ाकर उसके लोअर के ऊपर से लंड को सहलाने लगी। वो पहले से ही पत्थर की तरह सख्त था। मैंने लोअर के ऊपर से ही उसे दबाया, सहलाया, ऊपर-नीचे किया। उसका सांस तेज हो गई।

हम दोनों ने बाकी कपड़े भी उतार दिए। मैंने उसका लोअर और अंडरवियर खींचकर नीचे किया, उसका साढ़े छह इंच का मोटा लंड बाहर आया, सुपारा लाल और चमकदार। मैं पूरी नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई। राहुल भी नंगा होकर मेरे ऊपर आया। मैंने उसके सिर को पकड़ा और धीरे से अपनी चूत पर ले गई।

“चाटो बेटा… मेरी चूत को अच्छे से चाटो…”

राहुल ने जीभ निकाली और मेरी चिकनी, गीली चूत की फांक पर रख दी। पहले हल्के-हल्के चाटा, फिर जीभ अंदर डालकर चूत के अंदर घुमाने लगा। मेरी चूत से रस टपकने लगा। आह्ह… ओह्ह… राहुल… कितना अच्छा चाट रहे हो… जीभ और अंदर डालो… हां… ऐसे ही… मैं कमर उठाकर अपनी चूत उसके मुंह पर दबाने लगी। वो मेरी चूत का रस पीता रहा, क्लिट पर जीभ घुमाता, चूसता। मेरी सांसें तेज हो गईं, शरीर कांपने लगा।

फिर मैंने उसे नीचे लिटाया। मैं उसके चेहरे के ऊपर बैठ गई, चूत सीधे उसके मुंह पर टिका दी। अब मैं खुद कमर हिलाकर चूत रगड़ने लगी। उसकी जीभ मेरे छेद में घुसती रही। आह्ह… हां राहुल… अंदर… और अंदर… चाटो जोर से… ओह्ह… मैं तेज-तेज रगड़ रही थी। मेरी चूत से पानी बहने लगा, उसके मुंह में गिर रहा था। वो सब चाट-पाट रहा था।

कुछ देर बाद मैं उतरी। उसका लंड सीधा खड़ा था, नसें फूली हुईं। मैंने उसे पकड़ा, थोड़ा सहलाया, सुपारे पर जीभ फेरी और फिर अपनी चूत की फांक पर सेट किया। धीरे से बैठ गई, लंड मेरी चूत में सरकता हुआ अंदर गया। आह्ह… कितना गरम… अच्छा लग रहा है… मैं ऊपर-नीचे होने लगी। राहुल नीचे से कमर उठाकर धक्के मारने लगा। मैंने अपनी चूचियां उसके मुंह में ठूंसीं। वो चूसता रहा, मैं सवारी करती रही। उसका लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रहा था। हर धक्के पर मजा बढ़ता जा रहा था।

कुछ देर बाद मेरी चूत में तेज झटका आया। पूरा शरीर कांप गया। आह्ह्ह… राहुल… बस… ओह्ह… पहला झटका… मैं तेजी से कांपी, चूत सिकुड़ने लगी। मैंने कहा, “एक मिनट रुको बेटा…” मैं उसके लंड से उतरी और पीठ के बल लेट गई।

राहुल ने मेरी बाईं टांग अपने कंधे पर रख ली। लंड फिर से चूत की फांकों में सेट किया। एक झटके में पूरा अंदर डाल दिया। आह्ह… ओह्ह… कितना मोटा है तेरा लंड… धीरे… पहले धीरे… वो धीरे-धीरे धक्के देने लगा। हर धक्के पर लंड पूरा अंदर-बाहर। मेरी चूत फिर से गीली हो गई, रस बहने लगा। मैंने कमर उठाकर मिलना शुरू किया।

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फिर मैं थोड़ा उठकर बैठ गई, लंड अभी भी अंदर था। बोली, “अब पूरा अंदर डालकर धीरे-धीरे आधा बाहर निकालो… ऐसे ही…” वो ऐसा करने लगा। पूरा घुसाता, फिर आधा बाहर, फिर पूरा। 15-20 बार ऐसा हुआ तो मेरी चूत में दबाव बढ़ा। पानी पेशाब की तरह निकलने लगा। लंड बाहर जाता तो छिटकी, अंदर जाता तो रुक जाती। आह्ह… राहुल… देख… निकल रहा है… ओह्ह… वो भी मजा ले रहा था। पूरी पेशाब निकल गई, चादर गीली हो गई।

राहुल बोला, “आंटी अब घोड़ी बन जाओ।”

मैं बिस्तर पर घुटनों और हाथों के बल झुक गई। गांड ऊपर, चूत पीछे से खुली। राहुल पीछे आया, लंड मेरी चूत पर रगड़ा और एक झटके में पूरा घुसा दिया। अब वो जोर-जोर से पेलने लगा। हर धक्के पर थप्पड़ की आवाज, चूत से रस छलक रहा था। आह्ह… हां… जोर से… चोदो मुझे राहुल… पूरी ताकत से… मैं चीख रही थी। उसका लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था।

कुछ देर बाद वो बोला, “आंटी… अंदर ही छोड़ दूं या बाहर?”

मैंने सांस फूलते हुए कहा, “बेटा… अंदर ही छोड़ दो… मेरी चूत में भर दो…”

राहुल ने और जोर से धक्का मारा, कमर पकड़कर तेज-तेज पेला। फिर एक लंबा धक्का और वो कांपने लगा। गरम-गरम वीर्य मेरी चूत में फूटने लगा। आह्ह… हां… भर दो… ओह्ह… मैं भी फिर से झड़ गई। उसने पूरा वीर्य मेरी चूत में उड़ेल दिया।

थोड़ी देर तक हम ऐसे ही जुड़े रहे। फिर धीरे से अलग हुए। उसका लंड चूत से निकला तो वीर्य और रस मिलकर मेरी जांघों पर बहने लगा। इस तरह मैंने अपने किरायेदार से चुदवा लिया।

दोस्तों, आपको ये कहानी कैसी लगी? कमेंट करके जरूर बताना। फिर मैं आपको बताऊंगी कि राहुल के चार और दोस्तों के साथ कैसे संबंध बनाए।

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