Chudasi girlfriend sex story – Girlfriend ki pehli chudai sex story – Hot college girl sex story: मैं पैदल कॉलेज जा रहा था कि पीछे मुझे किसी ने टक्कर मारी। मुझे चोट लगी पर टक्कर एक खूबसूरत लड़की ने मारी थी, मुझे तो उसे देखते से ही प्यार हो गया था। उसके बाद क्या हुआ?
दोस्तो, मेरा नाम राहुल है। मेरी उम्र 25 साल है और मैं महाराष्ट्र के अमरावती जिले से हूं। मैंने कई गर्म और उत्तेजक कहानियां पढ़ी हैं, जिनमें सेक्स के दृश्य इतने जीवंत होते हैं कि पढ़ते हुए मन उत्तेजित हो जाता है, इसलिए मैंने सोचा कि अपनी खुद की सच्ची सेक्स कहानी आप सभी के साथ शेयर करूं, जो मेरी जिंदगी का एक यादगार हिस्सा है।
मेरी इस सेक्स कहानी में पहचान गुप्त रखने के लिए नाम बदले हुए हैं। ये कहानी मेरी असल जिंदगी पर आधारित है। मेरी और मेरी जिंदगी निशा की ये सेक्स कहानी थोड़ी लंबी है। इस बात की जहां से शुरुआत हुई थी, ठीक उसी तरह की ये कहानी है, हर छोटी-बड़ी डिटेल के साथ, क्योंकि मैं चाहता हूं कि आप इसे महसूस कर सकें। ये कहानी मैं निशा के सहमति से लिख रहा हूं, और उसने खुद मुझे कुछ भूली हुई बातें याद दिलाईं।
पहले मैं अपने बारे में बता दूं। मेरा नाम तो आपको पता ही है, मैं कहां से हूं ये भी आपने जान लिया है। मेरे घर में हम चार लोग हैं। मॉम, डैड, एक छोटा भाई और मैं। छोटा भाई औरंगाबाद में पढ़ाई कर रहा है, वो वहां हॉस्टल में रहता है और इंजीनियरिंग कर रहा है। डैड का फोरव्हीलर का शोरूम है, जहां वो दिनभर व्यस्त रहते हैं, और मॉम हाउस वाइफ हैं, घर संभालती हैं और हमें प्यार से रखती हैं। मेरा पढ़ाई में ज्यादा कोई इंटरेस्ट नहीं था, मैं हमेशा से ही प्रैक्टिकल चीजों में ज्यादा रुचि रखता था, लेकिन डैड के डर से मुझे ग्रेजुएशन पूरा करना पड़ा, नहीं तो वो गुस्सा हो जाते। अब मैं डैड के साथ शोरूम संभालता हूं, जहां मैं सेल्स और कस्टमर डीलिंग करता हूं, और जीवन ठीक-ठाक चल रहा है।
ये कहानी 3 साल पहले की है, जब मैं बीएससी सेकंड ईयर में था। मेरे एग्जाम चल रहे थे, और हर दिन की तरह पढ़ाई का प्रेशर था। गर्मी का मौसम था, बहुत तेज धूप पड़ रही थी, आसमान से जैसे आग बरस रही हो, पसीना चू रहा था और रोड पर चलना मुश्किल हो रहा था। उस दिन मुझे एग्जाम देने जाने के लिए देर हो रही थी, मैं जल्दी-जल्दी तैयार हुआ और घर से निकला। बाहर आकर देखा कि मेरी बाइक ही पंचर पड़ी थी, टायर पूरी तरह फ्लैट था और समय नहीं था इसे ठीक करने का। डैड की बाइक बाजू में ही खड़ी थी, चमचमाती हुई, मैंने सोचा कि इसे ही लेकर कॉलेज चला जाऊं, लेकिन किस्मत खराब निकली। बाइक की चाबी डैड के साथ शोरूम घूमने चली गई थी, और वो पहले ही निकल चुके थे।
फिर मैंने 11 नंबर की बस पकड़ी यानि पैदल चलते हुए ही कॉलेज के लिए निकल गया, क्योंकि कोई और ऑप्शन नहीं था। कॉलेज पास में ही था, बस 10-15 मिनट की दूरी पर, लेकिन धूप में चलना जैसे सजा थी।
थोड़ी दूर चलने पर ही पीछे से एक जोर की चीख सुनाई दी, जैसे कोई डर गई हो, और अगले ही पल मुझे किसी स्कूटी ने ठोक दिया। टक्कर इतनी तेज थी कि मैं लड़खड़ा गया, लेकिन बाल बाल बच गया, बस छोटी-मोटी खरोंच ही आयी थीं, हाथ पर हल्का कट और पैर में थोड़ी सूजन। मुझे बहुत गुस्सा आया, दिल में आया कि स्कूटी चलाने वाले को डांट दूं, ऐसा महसूस हो रहा था कि उसके कान के नीचे एक जोरदार थप्पड़ मार दूं, क्योंकि मेरा बड़ा एक्सीडेंट होते होते बचा था। हाथ में भी हल्की चोट आई थी, जो जल रही थी।
मगर जैसे ही मैंने मुड़कर उसे देखा, तो सारा गुस्सा ऐसे गायब हो गया था, मानो मैंने खुद ही कोई गलती कर दी हो, और मैं ठगा सा खड़ा रह गया।
वो एक लड़की थी, जिसने मुझे स्कूटी से ठोक दिया था। रेड कलर की स्कूटी नीचे गिरी हुई थी, धूल में लथपथ, और लड़की उठ कर बाजू में खड़ी भी हो गई थी। उसे कुछ लगी नहीं थी, बस उसके कपड़े थोड़े गंदे हो गए थे।
जब मैंने उस लड़की को देखा, तो बस देखता ही रह गया, समय जैसे थम गया हो। वो ब्लू कलर की जींस पहने थी, जो उसके कर्व्स को परफेक्टली हाइलाइट कर रही थी, ऊपर हल्के पिंक कलर का टॉप, जो उस पर बहुत अच्छा दिख रहा था, टाइट लेकिन एलिगेंट। रेड स्कार्फ से मुंह ढका हुआ था, सिर्फ उसकी बड़ी-बड़ी आंखें दिख रही थीं, जो डर से चौड़ी हो गई थीं। आंखों में काजल लगा हुआ था, जो उन्हें और आकर्षक बना रहा था। क्या खूबसूरती थी, गोरा रंग, लंबे बाल हवा में उड़ रहे थे। मैं तो बस खड़ा का खड़ा ही रह गया, दिल धड़कने लगा। उसका पूरा फिगर मेंटेन था, स्लिम लेकिन कर्वी, यही कोई 34-28-36 का फिगर था, जो किसी मॉडल जैसा लग रहा था।
उसकी मीठी आवाज निकली, “आपको बहुत चोट लग गई, मुझे माफ कर दीजिए। मुझे एग्जाम के लिए देर हो रही थी, इसलिए जल्दबाजी में ऐसा हो गया, प्लीज मुझे माफ कर दीजिए।”
इतनी मीठी आवाज, जैसे शहद घुला हो, आह मैं बस उसे ही देख रहा था, उसकी आंखों में डर और अफसोस साफ दिख रहा था। वो बिना रुके बार बार ‘माफ कर दीजिए..’ बोले जा रही थी, उसकी आवाज कांप रही थी।
मैंने अपना होश संभालते हुए, अपने बाएं पैर को पकड़ते हुए उससे कहा, “मुझे बहुत जोर से लग गई है। मैं चल भी नहीं पा रहा हूं,” जबकि चोट ज्यादा नहीं थी, लेकिन मैंने नाटक किया ताकि बात बढ़े।
उसने अपने चेहरे पर से स्कार्फ हटाया और फिर से मुझे माफी मांगने लगी, उसका चेहरा अब पूरी तरह दिख रहा था।
मैं उसका हसीन चेहरा देखे जा रहा था। उसका चेहरा गुलाबी गुलाबी लग रहा था, शर्म और डर से लाल हो गया था, नाक बहुत प्यारी थी, छोटी और नुकीली। एक तो दूध जैसी सफेद स्किन और आंखों में काजल, जो उसे और रहस्यमयी बना रहा था। मुझे तो उसे देखते से ही प्यार हो गया था, दिल में एक अजीब सी हलचल हो रही थी।
मैंने मन में बुदबुदाते हुए कहा, “मुझे कॉलेज भी जाना है, एग्जाम के लिए पहले ही देरी हो गई है,” और बाहर से मैंने पैर पकड़कर दर्द का दिखावा किया।
मैंने जो पैर में चोट लगने का नाटक किया था, तो उसने मुझसे कहा, “चलो मैं तुम्हें छोड़ देती हूं, जहां जाना है वहां ले चलती हूं,” उसकी आवाज में चिंता थी।
उसने मुझसे ये तक नहीं कहा कि चलो हॉस्पिटल चलते हैं, शायद वो भी एग्जाम की वजह से जल्दी में थी।
मैंने उससे कहा, “थोड़ा देख कर चला लेती, तो मेरे पैर में फैक्चर नहीं होता, बहुत दर्द हो रहा है मुझे,” और मैंने दर्द का और नाटक किया।
मैं वहीं रोड के किनारे बैठ गया, धूल भरी सड़क पर। वो ये सुन कर रोने लगी, उसकी आंखें भर आईं। वो शायद बहुत डर गई थी, सोच रही होगी कि बड़ा हादसा हो गया। उसकी आंखों में आंसू देख कर मेरा दिल पिघल गया, मैं तुरंत खड़ा हो गया और मैंने उसे बताया कि मामूली खरोंच है, ज्यादा कुछ नहीं।
तब जाकर उसका रोना बंद हुआ, वो राहत की सांस लेते हुए मुस्कुराई।
वो बोली, “कहां जा रहे हो, मैं तुमको उधर तक छोड़ देती हूं,” उसकी आवाज अब नॉर्मल हो रही थी।
मुझे भी कॉलेज तक तो जाना ही था, तो मैंने उसे बताया कि मैं भी एग्जाम देने के लिए कॉलेज जा रहा हूं, तुम मुझे कॉलेज तक लिफ्ट दे दो।
वो बोली, “कौन से कॉलेज?”
मैंने कहा, “पी.आर. पाटिल एग्जाम सेंटर है मेरा।”
वो बोली, “अरे, मैं भी वहीं एग्जाम के लिए जा रही हूं,” और उसकी आंखों में चमक आ गई।
फिर मैंने उसे स्कूटी उठाने में मदद की, हमने मिलकर स्कूटी को सीधा किया, और उसके पीछे कॉलेज जाने के लिए बैठ गया। अब मैं उसके इतने करीब था, उसकी पीठ से सटकर, मानो मैं हवा में उड़ रहा था, दिल की धड़कन तेज हो गई। उसके कपड़ों से परफ्यूम की महक मुझे मदहोश कर रही थी, मीठी और फ्लोरल खुशबू, जो मेरे दिमाग को घुमा रही थी। ऐसा लग रहा था कि बस उसकी कमर से होते हुए उसके पेट को कसके पकड़ लूं, लेकिन मैंने खुद को कंट्रोल किया।
उससे स्कूटी पर ज्यादा बातचीत तो न हो सकी, हवा की वजह से आवाज दब रही थी, इसी बीच कॉलेज आ गया, गेट पर पहुंचते ही हम रुक गए।
वो बोली, “आपको ज्यादा लगी तो नहीं न, लिखने में कोई तकलीफ तो नहीं होगी। मेरी वजह से आपको प्रॉब्लम हो गई, मुझे माफ कर देना,” उसकी चिंता साफ दिख रही थी।
मैंने कहा, “हां तकलीफ तो हो रही है। लेकिन ये कम हो सकती है,” और मैंने मुस्कुराकर देखा।
वो बोली, “हां बोलिए न कैसे?”
मैंने कहा, “एक कप कॉफी मेरे साथ।”
वो कुछ सोचते हुए बोली, “अच्छा ठीक है, पेपर होने के बाद,” और शरमाते हुए मुस्कुराई।
मैंने कहा, “वैसे आपने अपना नाम बताया ही नहीं।”
वो मुस्कुराते हुए बोली, “आपने पूछा ही नहीं।”
मैंने कहा, “आपकी स्माइल बहुत ही प्यारी है।”
वो बोली, “वो तो है।”
फिर जाते हुए उसने कहा, “मेरा नाम निशा है। आपके साथ कॉफी के लिए इन्तजार रहेगा, बेस्ट ऑफ लक।”
मैंने कहा, “सेम टू यू, बाय।”
मैंने अब तक ऐसे किसी लड़की के बारे में सोचा भी नहीं था, मेरी लाइफ में लड़कियां थीं लेकिन कोई इतनी स्पेशल नहीं। मुझे निशा को देखते से ही उससे प्यार हो गया था, जैसे पहली नजर का प्यार। मैं जल्द से जल्द निशा को अपना बनाना चाहता था, मन में प्लान बनाने लगा। जैसे तैसे जल्दी जल्दी मैंने पेपर लिखा, दिमाग निशा में ही अटका था, और बाहर आकर निशा का इंतजार करने लगा, हर मिनट लंबा लग रहा था। मैंने किसी भी दोस्त को इस बारे में नहीं बताया था, ये हमारा सीक्रेट था।
थोड़ी देर बाद निशा आ गई, उसकी चाल में कॉन्फिडेंस था। मुझे देखते हुए निशा ने कहा, “ओह..हो, इंतजार हो रहा था मेरा!”
मैंने कहा, “नहीं, तो बस मुझे घर जाना है, जिसने मेरा एक्सीडेंट किया है, उसे ही मुझे घर ड्राप करना होगा ना! साथ जाते हुए कॉफी भी पी ही सकते हैं,” और मैंने आंख मारी।
निशा बोली, “हम्म, स्मार्ट हो!”
मैंने कहा, “और तुम खूबसूरत।”
निशा हंसते हुए बोली, “वो तो मैं हूं ही। चलो फिर घर ड्राप कर देती हूं और आगे कॉफी शॉप भी है,” उसकी हंसी संक्रामक थी।
हम दोनों घर के लिए निकल गए, स्कूटी पर फिर वही करीबियां। बीच में कॉफी शॉप पर कॉफी के लिए रुक गए, एक छोटी सी कोजी जगह थी। उधर बैठ कर एक दूसरे के बारे में बात की, जैसे कहां से हो, नाम क्या है, किस कॉलेज से हो, पेपर कैसा गया इत्यादि, और मैंने उसके बारे में ज्यादा जानने की कोशिश की, उसकी हॉबीज, फैमिली।
कॉफी शॉप से निशा ने मुझे घर ड्राप किया, तब ही मम्मी और आंटी कहीं बाहर से आ रही थीं, शॉपिंग बैग्स हाथ में। उन्होंने हम दोनों को आते हुए देख लिया। जब एक्सीडेंट हुआ था, तो मेरे कपड़े खराब हो चुके थे, धूल लगी थी और चोट दिख रही थी।
मम्मी बोलीं, “अरे बेटा क्या हुआ? और ये हाथ पर चोट कैसे लगी, ये कौन है?” उनकी आवाज में चिंता थी।
मैंने कहा, “मम्मी आप घर में चलिए, सब बताता हूं।”
फिर अंदर आकर जो कुछ भी हुआ था मैंने मम्मी को सब बताया, एक्सीडेंट से लेकर निशा से मिलने तक।
मम्मी ने निशा को देखते हुए कहा, “बेटा निशा, गाड़ी थोड़ी संभाल कर चलाया करो,” लेकिन मुस्कुरा रही थीं।
निशा बोली, “जी आंटी। मुझसे गलती हो गई, प्लीज माफ कर दीजिएगा,” वो शर्मा रही थी।
ऐसे ही हम सभी बहुत सारी बातें की, चाय पीते हुए, निशा ने मम्मी से अच्छी बॉन्डिंग बना ली। कुछ देर बाद निशा मुझसे ‘सी यू टुमारो, बाय..’ करके चली गई, और जाते हुए आंख मारी।
मेरी तो किस्मत जैसे मुझ पर मेहरबान थी, जो मैं उससे बोलना चाहता था, वो उसने ही कह दिया, जैसे टेलीपैथी हो।
जैसे तैसे दिन गुजर गया, शाम को मैं निशा के बारे में सोचता रहा। रात को उससे फोन पर बात हुई, हमने घंटों चैट की, तो उसने सुबह आने का कहा, और मैं एक्साइटेड हो गया।
अगले दिन मैं जल्दी से रेडी हो गया था, अच्छे कपड़े पहने, परफ्यूम लगाया। सुबह 10.30 को निशा मुझे लेने आ गयी। क्या हॉट माल लग रही थी, उसकी ब्लैक पटियाला ड्रेस टाइट थी, जो उसके फिगर को हाइलाइट कर रही थी, बाल खुले, मेकअप लाइट लेकिन परफेक्ट, वो ब्लैक में कहर ढा रही थी।
निशा बोली, “तारीफ नहीं करोगे?”
मैंने कहा, “अरे वो ही सोच रहा था, और तुम लग ही रही हो इतनी खूबसूरत। तुम सेक्सी माल लग रही हो, ऐसा मैं उससे अब भी नहीं बोल सकता था,” लेकिन मन में यही सोच रहा था।
निशा बोली, “अच्छा जी।”
मैंने कहा, “हां जी।”
हम दोनों की पसंद बहुत हद तक एक जैसी ही थी, म्यूजिक से लेकर फिल्में तक। निशा और मैं बहुत ही नजदीक आ गए थे, रोज मिलते, बातें करते, लेकिन मैंने उसे प्रपोज करने में 6 महीने लगा दिए, क्योंकि डर था रिजेक्शन का।
अक्टूबर का महीना चल रहा था, ठंडी हवाएं चलने लगी थीं। उस दिन 26 तारीख थी, जब मैंने उसे प्रपोज करने की ठान ली थी, दिल में घबराहट थी लेकिन डिसीजन फाइनल था।
मैंने उसे कॉल किया और कहा, “आज कुछ खास है, मुझे मिलना है तुमसे,” मेरी आवाज थोड़ी कांप रही थी।
तो उसने भी हां में जवाब देते हुए कहा, “कब मिलना है, और कितने बजे?” वो एक्साइटेड लग रही थी।
तो मैंने उसे अपने घर पर ही मिलने के लिए कहा और 4 बजे का टाइम बता दिया।
मेरे मॉम डैड मेरे भाई से मिलने औरंगाबाद गए थे, घर खाली था, तो निशा को प्रपोज करने का आज अच्छा मौका था, प्राइवेसी थी।
मैं तैयारी करने में लग गया। अपने रूम में मैंने गुलाब की पंखुड़ियों से फर्श पर ‘आई लव यू निशा..’ लिख दिया, लाल और सफेद पंखुड़ियां बिखेरीं। पूरे रूम में रोमांटिक माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, सुगंधित कैंडल्स जलाए, सॉफ्ट म्यूजिक सेट किया। मोमबत्तियों से रूम को रोशन कर दिया, हल्की रोशनी में सब जादुई लग रहा था। मुझे भी तैयार होना था, सो मैं नहाने के लिए जल्दी से बाथरूम में घुस गया और बॉडी के हेयर रिमूव कर दिए, शेविंग क्रीम से क्लीन किया। मैं जिम जाता हूं ना तो मुझे बॉडी पर बाल अच्छे नहीं लगते, मैं अपनी पूरी बॉडी एकदम क्लीन रखता हूं, स्मूद और अट्रैक्टिव।
आज निशा के बारे में सोच कर नहाते नहाते मैंने अच्छे से मुठ मारी, उसकी याद में लंड सख्त हो गया था, और रिलीज होने पर राहत मिली। मेरा लंड 6.5 इंच का है, जो औसतन भारतीय मर्दों का होता है, मोटा और मजबूत।
अब 4 बजने वाले थे। मेरा नहाना भी हो गया था। निशा आने वाली थी। मैंने कपड़े पहने, ब्लू शर्ट और जींस, और अच्छे से तैयार हो गया, मिरर में खुद को देखा। तभी डोरबेल बज गई, दिल की धड़कन तेज हो गई। मैं दौड़ते हुए गया और दरवाजा खोला। मेरे सामने निशा खड़ी हुई थी, मैं उसे देखता ही रह गया, वो और भी सुंदर लग रही थी। वो रेड कलर की ड्रेस में थी, जो उसके घुटनों तक आ रही थी, टाइट फिटिंग, जो उसके कर्व्स को दिखा रही थी। वो बहुत ही हॉट लग रही थी, लिपस्टिक रेड, बाल सेट, मुझे लगा कि जैसे उसे पता चल गया था कि मैं उसे प्रपोज करने वाला हूं, क्योंकि वो स्पेशल तैयार हुई थी।
निशा ने आंख दबाई, “यहीं घूरोगे या घर में अंदर भी आने दोगे?” उसकी मुस्कान शरारती थी।
मैंने कहा, “आपका ही तो इंतजार था मैडम।”
निशा बोली, “अरे वाह मैडम, ऐसी क्या खास बात है, जो इतनी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे?” वो उत्सुक लग रही थी।
मैं उसे पट्टी देते हुए बोला, “इसे आंखों पर बांध लो, सरप्राइज है।”
निशा ने खुश होते हुए पूछा, “क्या सरप्राइज है?”
मैंने कहा, “पहले ये बांधो, अभी बताता हूं।”
निशा ने आंखों पर पट्टी बांध ली, मैंने उसका हाथ पकड़ा, जो नरम था। मैं उसे अपने रूम में ले गया, धीरे-धीरे चलाते हुए। उसकी आंखों पर से पट्टी हटा दी और उसके सर को, फर्श पर बने हुए ‘आई लव यू..’ की ओर कर दिया, कैंडल्स की रोशनी में सब चमक रहा था।
जब मैंने घुटनों के बल बैठ कर उसे प्रपोज किया, “निशा, आई लव यू,” तब वो बहुत खुश हो गई थी, उसकी आंखें चमक उठीं।
प्रपोज करते वक्त सब गुलाब का फूल देते हैं, लेकिन मैंने उससे चॉकलेट दी, जो उसे बहुत पसंद थी, डार्क चॉकलेट उसकी फेवरेट।
जैसे ही मैंने उसे प्रपोज किया, तो उसने मुझे कसके गले से लगा लिया था और किस किया, उसके होंठ नरम थे।
ये किस मेरी लाइफ का पहला किस था। किस छोटा सा ही था, उसने बस होंठों से होंठों को लगाया और हटा लिए, लेकिन वो पल अनमोल था।
निशा बोली, “डंबो, कोई प्रपोज के लिए इतना वक्त लेता है। मुझे तो लगा था, जब लास्ट एग्जाम हुए थे, तब ही तुम प्रपोज कर दोगे।”
मैंने कहा, “निशु, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूं। तुम्हें कभी खोना नहीं चाहता। आई लव यू सो मच!”
निशा बोली, “आई लव यू टू मेरी जान।”
मैंने निशा को गले लगाया और उसी तरह उससे बातें करने लगा, “मैं तुमसे मोहब्बत करता हूं, तुमसे कभी अलग नहीं होना चाहता,” मेरी बांहें उसे कस रही थीं।
निशा बोली, “मेरी जान, मैं भी तुमसे बहुत मोहब्बत करती हूं, कब से इस दिन का इंतजार था मुझे,” उसकी सांसें तेज थीं।
निशा ने मुझे बेड पर गिरा दिया, जो बाजू में ही था, सॉफ्ट गद्दे पर। वो मेरे ऊपर खुद भी गिर गई, उसका वजन मेरे ऊपर। अपना सर मेरे सीने पर रख कर मुझे बातें करने लगी, उसकी सांसें मेरी शर्ट पर महसूस हो रही थीं।
निशा बोली, “इतना कोई लेट करता है क्या? कितनी बार मैंने तुम से बातों बातों में कहा भी कि मैं तुम्हें पसंद करती हूं लेकिन तुम डंबो समझे ही नहीं। पहले दिन ही जब तुम्हें देखा था, तब ही मुझे पसंद आ गए थे तुम।”
ये सुनकर मैंने उसे ऊपर की ओर खींच लिया और अपने होंठों को उसके होंठों पर रख दिये, गहरा किस, जीभ मिलाकर। वो भी बिना किसी विरोध के मेरा साथ देने लगी, उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी।
मैं बोला, “निशु, मुझे भी इस वक्त का इंतजार था कि कब तुम मेरी बांहों में होगी। तुम्हारे सपने मैं कब से देख रहा था,” मेरी आवाज भारी हो गई थी।
निशा ने आंख दबाते हुए चुटकी ली, “सपने में सिर्फ देख रहे थे या कुछ कर भी रहे थे।”
मैं बोला, “अच्छा बच्चु।”
ये कहते हुए उसे किस करने लगा, गहराई से, गर्दन पर किस करते हुए। वो भी मेरा साथ दे रही थी, उसकी सांसें तेज हो गईं। किस करते मेरा हाथ कब उसके मम्मों पर चला गया, कुछ पता ही नहीं चला, मैंने धीरे से दबाया।
निशा के चूचे मस्त टाइट थे, सख्त लेकिन नरम। इस समय वो भी पूरे मूड में थी, उसकी बॉडी गर्म हो रही थी, जैसे कह रही हो कि बस अभी ही मुझे चोद दो। निशा सिर्फ वन पीस ड्रेस में थी, जो उसके घुटनों तक था, आसानी से ऊपर सरक रही थी। उसका ये ड्रेस उतारने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगी, मैंने जिपर खींचा।
मैंने उसके ड्रेस के पीछे की चैन खोल दी और उसका ड्रेस उसके जिस्म से अलग कर दिया, धीरे से नीचे सरकाया।
आह क्या माल लग रही थी। पिंक पैंटी और ब्रा में कसे हुए उसके जिस्म को मैं ललचाई निगाहों से देखने के लिए थोड़ा अलग हुआ, उसकी स्किन चमक रही थी कैंडल लाइट में।
मैं उसे देखने लगा। मेरी जान कयामत लग रही थी। एकदम टाइट चूचे, पतली सी मुलायम कमर, उसका जिस्म हल्का गुलाबी था, पर्फेक्ट शेप। इतनी खूबसूरत थी कि सोच कर मैं मन ही मन खुश हो रहा था, जैसे सपना सच हो गया हो। उसने अपना चेहरा शर्म के मारे हाथों से ढक लिया था, उसके गाल लाल हो गए थे।
मैंने उसके हाथ हटाए और धीरे से उसके गाल पर किस किया, “निशु, तुम इतनी हॉट हो, मैं तुम्हें छूना चाहता हूं हर जगह,” मेरी आवाज कामुक थी। वो शर्मा गई लेकिन मुस्कुराई, जैसे थोड़ी हिचकिचाहट हो लेकिन मन कर रहा हो, उसने कहा, “राहुल, धीरे से।” मैंने उसके ब्रा के हुक खोले, और उसके 34 साइज के टाइट चूचे बाहर आ गए, गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे, गुलाब की कलियों जैसे। मैंने एक चूचे को मुंह में लिया और चूसने लगा, जीभ से निप्पल को घुमाते हुए, चूसते हुए हल्का काटा, वो सिसकारी भरने लगी, “आह राहुल, धीरे, उफ्फ आह्ह, ये कितना अच्छा लग रहा है।” उसका हाथ मेरे सर पर आ गया, जैसे और दबा रही हो, उसके नाखून मेरी स्किन में गड़ रहे थे। मैंने दूसरे चूचे को हाथ से दबाया, मुलायम लेकिन टाइट, उसे मसलते हुए, वो कमर हिलाने लगी, उसकी बॉडी आर्क हो रही थी, “ओह्ह राहुल, ये क्या कर रहे हो, मुझे गुदगुदी हो रही है, आह्ह इह्ह, और चूसो।”
मैं नीचे सरका और उसके पेट पर किस करते हुए, नरम स्किन पर जीभ फिराते हुए उसकी नाभि में जीभ डाली, गोल घुमाई, वो कांप गई, उसका पेट सिकुड़ गया, “उई राहुल, वहां नहीं, आह्ह ऊउउ, ये टिकल हो रहा है लेकिन अच्छा भी।” मैंने उसकी पैंटी पर हाथ रखा, वो पहले से गीली हो चुकी थी, गर्म और नम, मैंने धीरे से पैंटी नीचे सरकाई, उसकी जांघें नरम थीं, उसकी चूत साफ शेव्ड थी, गुलाबी और चमक रही थी, रस से भीगी हुई। वो शर्मा कर बोली, “राहुल, मत देखो ऐसे, मुझे शर्म आ रही है,” लेकिन उसकी आंखों में इच्छा थी। लेकिन मैंने उसकी जांघों को फैलाया और जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू किया, पहले क्लिट पर जीभ घुमाई, हल्के से चूसा, वो जोर से सिसकारी, “आह्ह राहुल, ओह्ह क्या कर रहे हो, उफ्फ इह्ह ऊईई, ये बहुत अच्छा लग रहा है, मत रुको।” मैंने जीभ अंदर डाली, उसका रस चाटते हुए, मीठा और गर्म, जीभ से अंदर बाहर करते हुए, वो कमर ऊपर उठाने लगी, उसकी जांघें कांप रही थीं, “आह्ह ह्ह्ह राहुल, और चाटो, ओह्ह ऊउउ इह्ह, मैं पागल हो रही हूं।” उसका हाथ मेरे सर को दबा रहा था, मैंने उंगली डाली और अंदर बाहर करने लगा, पहले एक फिर दो उंगलियां, कर्व करते हुए, वो चिल्लाई, “आह्ह राहुल, धीरे, उफ्फ आह्ह, ये दर्द और मजा दोनों दे रहा है, और तेज।”
कुछ देर बाद वो कांपने लगी, जैसे ऑर्गेज्म आने वाला हो, उसकी सांसें तेज, बॉडी टेंस, “राहुल, कुछ हो रहा है, आह्ह ऊईई ह्ह्ह, रुक मत,” उसकी आवाज कांप रही थी। मैंने स्पीड बढ़ाई, जीभ और उंगली दोनों से, और वो जोर से झड़ गई, उसका रस मेरे मुंह पर आ गया, गर्म फव्वारा जैसा, वो हांफते हुए बोली, “राहुल, ये क्या था, मैं उड़ गई लगता है,” उसकी बॉडी रिलैक्स हो गई। मैं ऊपर आया और उसे किस किया, वो अपना रस टेस्ट कर रही थी, शर्मा रही थी लेकिन किस कर रही थी, जीभ मिलाकर। अब मैंने अपने कपड़े उतारे, शर्ट फिर पैंट, मेरा 6.5 इंच का लंड खड़ा था, वेन दिख रही थीं, वो देख कर बोली, “राहुल, ये इतना बड़ा है, मुझे डर लग रहा है, क्या फिट होगा?” उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। मैंने कहा, “धीरे धीरे करूंगा, तुम्हें मजा आएगा,” मैंने उसे रिलैक्स किया। वो हिचकिचाते हुए बोली, “ठीक है, लेकिन धीरे,” थोड़ी नर्वस लेकिन एक्साइटेड। मैंने उसे लंड पकड़ाया, वो हाथ से सहलाने लगी, ऊपर नीचे करते हुए, “ये कितना गर्म है, राहुल, और सख्त।” फिर मैंने कहा, “मुंह में लो निशु।” वो थोड़ा हिचकी, “मैंने कभी नहीं किया, लेकिन ट्राई करती हूं,” उसने हिचकिचाते हुए कहा।
उसने लंड मुंह में लिया, पहले टिप चूसी, होंठों से दबाकर, “ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी..” आवाज आने लगी, गर्म सांसें लग रही थीं, वो जीभ घुमाती हुई डीप लेने लगी, गले तक ट्राई करते हुए, “गों.. गों.. गोग”, मैं उसके सर को दबाया, हल्के से, “आह्ह निशु, अच्छा कर रही हो, और गहरा,” मेरी सिसकारी निकली। वो गगिंग कर रही थी लेकिन ट्राई कर रही थी, लार से चमक रहा था, कुछ देर बाद मैंने निकाला, नहीं तो जल्दी झड़ जाता। अब मैंने उसे लेटाया, पीठ पर, उसकी चूत पर लंड रगड़ा, गीली स्लिपरी, वो बोली, “राहुल, डालो ना, अब सहन नहीं होता,” उसकी आवाज में बेसब्री थी। मैंने धीरे से टिप डाला, टाइट थी, वो चिल्लाई, “आह्ह राहुल, दर्द हो रहा है, उफ्फ इह्ह,” उसने आंखें बंद कर लीं। मैं रुका, किस किया, गर्दन चूसी, फिर थोड़ा और डाला, धीरे धीरे, वो कसके पकड़ ली, मेरी पीठ पर नाखून, “ओह्ह ह्ह्ह, धीरे, आह्ह ऊउउ,” दर्द से उसकी आंखों में आंसू। आधा अंदर गया, मैंने धक्का मारा, पूरा अंदर, वो चीखी, “आह्ह राहुल, फट गई लगता है, उईई ह्ह्ह इह्ह,” उसकी बॉडी कांप गई। मैं रुका, उसके चूचे चूसने लगा, निप्पल काटते हुए, दर्द कम हुआ तो बोली, “अब मूव करो,” शर्मा कर।
मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू किए, अंदर बाहर, “पच पच” की आवाज आने लगी, गीली चूत से, वो मोन करने लगी, “आह्ह राहुल, मजा आ रहा है, ओह्ह इह्ह ऊईई, और जोर से,” उसकी कमर मिला रही थी। मैंने स्पीड बढ़ाई, उसकी कमर पकड़ कर जोर जोर से चोदने लगा, गहराई से, वो चिल्ला रही थी, “आह्ह ह ह ह ह्हीईई आअह्ह्ह्ह, राहुल, चोदो मुझे, ओह्ह ऊउउ इह्ह, और तेज,” उसकी आवाज कमरे में गूंज रही थी। मैंने पोजिशन चेंज की, उसे डॉगी स्टाइल में घुमाया, घुटनों पर, पीछे से डाला, गांड पकड़कर, “पचक पचक” की आवाज तेज हो गई, स्किन स्लैपिंग, वो बोली, “राहुल, ये गहरा जा रहा है, आह्ह ऊईई ह्ह्ह, मैं फिर झड़ने वाली हूं,” उसकी कमर हिल रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और जोर से ठोका, तेज धक्के, वो कांपते हुए झड़ गई, “आह्ह्ह्ह ऊउउउउ इह्ह्ह्ह, राहुल,” उसका रस बह रहा था। मैं भी क्लाइमैक्स पर था, बॉडी टेंस, बोला, “निशु, मैं आने वाला हूं।” वो बोली, “अंदर मत, बाहर निकालो,” हांफते हुए। मैंने निकाला और उसके पेट पर गिरा दिया, गर्म स्पर्म, हम दोनों हांफते हुए लेट गए, पसीने से तर, एक दूसरे को गले लगाकर। वो बोली, “राहुल, ये अमेजिंग था, लेकिन अगली बार और ट्राई करेंगे,” शर्मा कर। मैंने उसे गले लगाया, “हां मेरी जान, ये सिर्फ शुरुआत है,” और हम किस करते रहे।
मैंने अब तक जितनी भी कहानियां पढ़ी हैं, उसमें ये सब नहीं था। शुरुआत ही नहीं थी, बस स्टार्ट से ही सेक्स था, बिना बैकग्राउंड के। लेकिन जब मैं ये कहानी लिख रहा हूं, तब मैं कुछ बातें भूल गया था। ये वो बातें थीं जो हमने की थीं, छोटी-छोटी डिटेल्स। वो मुझे निशा ने याद दिलाईं। अभी तो सिर्फ शुरुआत है दोस्तो, आप सोच भी नहीं सकते कि आगे की सेक्स स्टोरी में क्या क्या हुआ। हम दोनों ने सेक्स में नए नए प्रयोग किए, कई तरह के आसनों से चुदाई की, जगह-जगह पर, कभी कार में, कभी बाहर।
मैं चाहता, तो ये सब बीच से भी स्टार्ट कर सकता था। लेकिन मुझे पूरी कहानी लिखनी थी। आप सबको निशा और मैं कैसे मिले, वो बताना था, हर भावना और पल के साथ।
आपको सेक्स कहानी की शुरुआत कैसी लगी, ये मुझे जरूर बताएं।
कहानी का अगला भाग: स्कूटी वाली हॉट गर्लफ्रेंड की चुदाई -2