Dildo Fantasy Sex Story में पढ़ें कि कैसे मैंने डिल्डो से अपने बॉयफ्रेंड की गांड मारी। लेकिन उसके बाद उसने इस हरकत का बदला मुझसे कैसे लिया?
हैलो जान, मैं निशा एक बार फिर से आपकी अंतर्वासना को जगाने हाजिर हूं।
पिछली कहानी में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं नकली लंड से अपने बॉयफ्रेंड की गांड मारने की तैयारी कर रही थी।
कहानी का पिछला भाग: BDSM Sex – स्ट्रैपऑन से बॉयफ्रेंड की गांड मारी
अब आगे की डिल्डो फंतासी सेक्स स्टोरी:
मैंने लंड हिलाते हुए अपने बॉयफ्रेंड को दिखाया और बाजू में रखी हुई वैसलीन को लिया और अपने सिलिकॉन से बने हुए लंड पर लगा दिया। ल्यूब से चमकता हुआ 8 इंच का मोटा सिलिकॉन लंड मेरी कमर पर बंधा हुआ था, और उसका पिछला हिस्सा मेरी चूत में 3 इंच घुसा हुआ था, जिससे हर हलचल में मुझे भी हल्की उत्तेजना हो रही थी।
ये सब बेड पर बंधा हुआ राहुल मुझे देख रहा था। उसकी आंखें फैली हुई थीं, चेहरा लाल, सांसें तेज। वो अपनी आंखों से मानो कह रहा था कि ऐसा मत करो, लेकिन उसकी बॉडी में एक अजीब सी कंपकंपी थी, जैसे डर और उत्सुकता दोनों मिलकर उसे कांपा रही हों।
लेकिन मुझे मेरी हसरत पूरी करनी थी। मुझे पता था कि इसमें राहुल को भी मजा आएगा, पहले दर्द के बाद।
फिर मैंने राहुल का एक पैर बेड से खोल दिया। तभी राहुल छटपटाने लगा, बंधे हुए हाथ-पैर हिलाने लगा, जैसे भागना चाहता हो लेकिन नहीं भाग पा रहा हो।
मैंने उससे कहा, “प्लीज राहुल,” मेरी आवाज में थोड़ी नरमी लेकिन दृढ़ता थी।
वो थोड़ा शांत हुआ, सांसें तेज लेते हुए मुझे देख रहा था। तो मैंने उसका पैर सामने की ओर बांध दिया, घुटने मोड़कर, जिससे उसकी गांड पूरी तरह उठ गई और खुल गई। वैसे ही दूसरा पैर भी बांध दिया। अब उसकी गांड मेरे सामने पूरी तरह खुली हुई थी, थोंग के बीच से छेद साफ दिख रहा था, हल्का गुलाबी और टाइट।
अब वो पूरी तरह मेरे काबू में था, कोई बचाव नहीं।
उसकी गांड पर मैंने एक जोरदार चांटा मारा, “पटक!” की आवाज गूंजी, उसका चूतड़ा लाल हो गया। वो सिसकारी, “उम्म्म…” मैंने उसकी अंडरवियर उतारे बिना ही खेल शुरू करने का मन बनाया। चूंकि राहुल ने थोंग पहनी हुई थी, जो उसके चूतड़ों की दरार के बीच में से निकली हुई थी और गांड का छेद खुल गया था।
मैंने उसकी थोंग को साइड में कर दिया और वैसलीन लेकर उसकी गांड के छेद पर लगाने लगी। उंगली से धीरे-धीरे अंदर बाहर करते हुए ल्यूब फैलाया, ठंडी वैसलीन से वो कांप उठा।
जैसे ही मैंने उसकी गांड पर वैसलीन लगाई, तो वो ‘आह्ह..’ की आवाज निकाल रहा था, दर्द और ठंडक का मिक्स।
कुछ देर बाद उसकी गांड का छेद वैसलीन से चिकना और तैयार हो गया था।
अब मैंने सिलिकॉन वाला लंड उसकी गांड के छेद पर रख दिया और सहलाने लगी, टिप से गोल-गोल घुमाते हुए।
वो छटपटा रहा था, बॉडी कस रही थी। मैं उसकी ओर कामुकता से देखने लगी, उसकी आंखों में डर और उत्सुकता देखकर मुझे और जोश आ रहा था।
मुझे उसके चेहरे पर दर्द देखना था।
मैंने लंड को थोड़ा सा अंदर किया, सिर्फ टिप, तो वो जोर से ‘हम्म्म… हम्म्म… हम्म्म..’ की आवाज करने लगा।
उसके मुंह में पैंटी होने के वजह से वो आवाज दबी-दबी निकल रही थी, लेकिन दर्द साफ महसूस हो रहा था।
मेरे लंड का सामने का भाग ही अभी अंदर गया था कि उसके चेहरे पर उभरता हुआ दर्द मैं साफ देख पा रही थी, आंखें बंद, दांत भींचे हुए।
लेकिन मुझे अभी ये दर्द और बढ़ाना था।
मैंने एक झटका दिया और आधा लंड गांड के अंदर चला गया।
राहुल बुरी तरह से तड़प रहा था, बॉडी कांप रही थी, “उम्म्म… उम्म्म…” मैं लंड पेल कर उसकी छाती पर चूमने लगी और उसके निप्पलों को बारी-बारी से चूसने लगी, काटते हुए, जिससे दर्द और मजा दोनों बढ़े।
कुछ पल बाद वो थोड़ा शांत हुआ, सांसें तेज लेकिन रुक गईं।
जैसे ही वो थोड़ा शांत हुआ, तो मैंने दूसरा झटका दे दिया और मेरी कमर पर बंधा पूरा आठ इंच का लंड उसकी गांड में चला गया।
पूरा लंड गांड में घुसा, तो वो और ज्यादा तड़पने लगा, बॉडी आर्क हो गई, आंसू बहने लगे। मैं ये देख कर खुश हो रही थी और बिना रुके लंड को अंदर-बाहर कर रही थी, धीरे-धीरे स्पीड बढ़ाते हुए।
उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे और वो जोर-जोर से ‘हम्म्म… हम्म..’ किए जा रहा था।
वो लगभग बेहोश सा हो गया था।
अगर मैं रुक जाती, तो इसके बाद मुझे वो कभी उसकी चुदाई नहीं करने देता।
मैं उसे चोद रही थी, “पच-पच” की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
कुछ ही देर में उसकी गांड में लंड आसानी से अंदर-बाहर होने लगा था, टाइट छेद अब ढीला पड़ गया था।
मुझे भी अपने बॉयफ्रेंड की गांड मारने में बहुत मजा आ रहा था।
मेरी गांड में बटप्लग लगा था और चूत में स्ट्रैपऑन का तीन इंच हिस्सा घुसा हुआ था, हर धक्के में मुझे भी उत्तेजना हो रही थी।
मेरे साथ-साथ अब राहुल भी मजे ले रहा था। उसे गांड मरवाने में मजा आ रहा था।
मैं उसका लंड भी मुठिया रही थी, तेज-तेज हाथ चलाते हुए, जिससे वो बस तीन या चार मिनट में ही झड़ गया।
उसकी थोंग से उसका वीर्य बाहर आ रहा था, गर्म और चिपचिपा।
मैं रुकी और मैंने उसकी अंडरवियर के ऊपर से ही उसका वीर्य पूरा चाट लिया, जीभ से साफ करते हुए।
फिर मैंने उसके मुंह पर लगा हुआ टेप निकाल दिया और उसके मुंह में से अपनी पैंटी भी निकाल दी।
इसके बाद मैंने फिर से उसकी गांड के छेद पर अपना लंड रख कर एक जोरदार झटके के साथ पूरा लंड राहुल की गांड में उतार दिया।
राहुल जोर से मजे लेने लगा, “अह्ह… याह्ह… बेबी चोदो मुझे… आह और जोर से!”
ये सुन कर मुझे और ज्यादा जोश आ गया।
ऐसे ही मैंने काफी तक उसकी चुदाई की। जिसमें वो एक बार और झड़ गया और मैंने उसका वीर्य चाट लिया।
मैं भी ये आधे घंटे में तीन या चार बार झड़ चुकी थी और अब हम दोनों बहुत थक गए थे।
मैंने उसे खोल दिया। और राहुल के ऊपर ही लेट गई।
मैं बोली, “सॉरी शोना, मुझे माफ कर दो। मैंने ये सब तुम्हें पहले ही बता देना था… लेकिन नहीं बताया। अगर मैं अपनी फैंटसी तुम्हें बता देती, तो तुम मना कर देते… और मेरी ये कल्पना कभी पूरी नहीं हो पाती।”
राहुल बोला, “अरे डंबो, सॉरी की कोई बात ही नहीं है। मुझे भी बहुत मजा आया… और आगे से जो भी तुम्हारी सेक्स फैंटसी है, मुझे बता देना। हम दोनों साथ में मिल कर पूरी करेंगे। लव यू मेरी जान।”
मैं बोली, “थैंक्यू… अभी बहुत कुछ बाकी है। हम दोनों मिल कर हमारी सेक्स लाइफ के मजे लेंगे।”
यही सब प्यार मुहब्बत की बातें करते-करते कब हमारी नींद लग गई, कुछ पता ही नहीं चला।
जब मैं उठी तो राहुल सो रहा था। उसके लंड पर अभी भी पेनिस केज लगा हुआ था।
मैंने उसकी अंडरवियर उतार दी और उसके लंड को आजाद कर दिया।
वो अभी भी सो रहा था। मैंने उसकी टांगों के पास जाकर हल्के से उसके लंड को मुंह में ले लिया और चूसने लगी।
लंड चूसने में पता ही नहीं चला कि राहुल कब उठ गया।
उसका लंड खड़ा हो गया था, लोहे की रॉड जैसा सख्त।
मुझे मेरी गांड में बटप्लग महसूस हो रहा था। वो अभी भी मेरे गांड में ही फंसा था।
मैं बोली, “राहुल पेनिस स्लीव लगा कर मुझे चोदो… मुझे कितना भी दर्द हो, तुम रुकना मत। मैं तुम्हें कितना भी मना करूं, बस तुम मुझे बिना रुके मेरी चुदाई करना।”
मैंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि पेनिस स्लीव 9 इंच का था और उसकी मोटाई ढाई इंच थी।
राहुल बोला, “पक्का… जो तुमने मुझे दर्द दिया है, उसी तरह मैं भी तुम्हें दर्द जरूर दूंगा जान। निशा मैं तुम्हें बांधकर तुम्हारी चुदाई करना चाहता हूं।”
मैं बोली, “नहीं राहुल, इसकी कोई जरूरत नहीं है।”
मगर उसकी जिद को देखते हुए मैं मान गई।
लेकिन मुझे क्या पता था आगे ऐसा कुछ होगा। उसने पहले मेरे हाथ पलंग के दोनों सिरों से बांध दिए और मुझे देखने लगा।
मुझे लगा कि इसके बाद वो पलंग के निचले सिरों से मेरे पैर बांधेगा… लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
जब राहुल ने मेरा एक पैर, सामने बांधने के लिए उठाया तो मैंने उसे मना किया।
तो उसने मुझसे कहा कि मुझे ऐसे बैठ कर चुदाई करनी है।
मैंने कुछ नहीं कहा।
उसने मेरे दोनों पैर बांध दिए, जिससे मेरी चूत और गांड दोनों उसके सामने खुल गई थीं।
राहुल ने मेरी गांड में से बटप्लग निकाल लिया और अपने लंड पर पेनिस स्लीव लगा लिया।
अब उसका लंड 9 इंच का होकर मेरी चुदाई के लिए रेडी हो गया था। ये लंड बहुत बड़ा दिख रहा था।
तब उसने पास रखा हुआ डिल्डो भी उठाया और मेरी चूत पर रगड़ने लगा।
डिल्डो का साइज 8 इंच का था। राहुल ने उस पर वैसलीन लगाई और मेरी चूत पर रगड़ने लगा। फिर एक झटके में ही मेरी चूत में आधे से ज्यादा अंदर पेल दिया।
मैं तड़प उठी… मगर चूत में रस था इसलिए मैं अगले ही पल शांत हो गई।
अब राहुल आराम-आराम से डिल्डो अंदर-बाहर करते हुए मेरे मम्मों को चूसने लगा।
ऐसे ही उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और मुझे चूमने लगा। सिलिकॉन से बना लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रहा था, इससे मुझे मजा आ रहा था।
मैंने राहुल से कहा, “राहुल अब बड़ा लंड मेरी चूत में डाल दो… और मेरी चूत को फाड़ दो। मुझे दर्द दो राहुल।”
मेरे इतना बोलते ही राहुल उठा और वैसलीन अपने पेनिस स्लीव पर लगाने लगा।
फिर उसने वो लंड मेरी गांड के छेद पर लगा दिया। मैं अपनी गांड पर उस स्लीव चढ़े लंड को पाते ही अचकचा गई। मुझे लगा ही नहीं था कि राहुल ऐसा कुछ करेगा।
ये देख कर मैं राहुल को मना करने लगी, “प्लीज राहुल… ऐसा मत करो, ये बहुत बड़ा है। मैं मर जाऊंगी। मेरी गांड फट जाएगी।”
मैं विनती करने लगी।
मुझे ऐसा करते देख, उसने डिल्डो को मेरी चूत में अंदर-बाहर करना चालू कर दिया।
मुझे मजा आने लगा था। वो सिर्फ आधा ही डिल्डो अंदर-बाहर कर रहा था। लेकिन एकदम से ही उसने पूरा 8 इंच का डिल्डो अंदर तक डाल दिया। मेरी एकदम से चीख निकल गई।
इतना बड़ा लंड मैंने कभी चूत में नहीं लिया था। दर्द के मारे मेरी जान निकल रही थी। मेरी आंखों से आंसू आ रहे थे। मुझसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मगर वो लंड को चूत में अंदर-बाहर किए जा रहा था।
मैं उसे रुकने के लिए बोल रही थी, लेकिन वो रुक ही नहीं रहा था।
थोड़ी देर तक राहुल ऐसे ही करता रहा। थोड़ी देर बाद मुझे मजा आने लगा था। मेरी चूत में मुझे बड़ा लंड महसूस हो रहा था।
मैं अब उससे बोले जा रही थी, “आह फक मी बेबी… चोदो मुझे… आह और जोर से चोदो। मैं तुम्हारी दासी हूं… अह्ह… फक मी।”
ऐसे न जाने मैं क्या-क्या बोल रही थी।
थोड़ी देर बाद एक ‘अह्ह..’ के साथ मैं झड़ गई। राहुल मेरे ऊपर आ गया और मुझे किस करने लगा। डिल्डो अभी भी मेरी चूत में फंसा था।
राहुल ने मेरे कान में कहा, “दर्द के लिए तैयार रहो।”
मुझे लगा कि अब पेनिस स्लीव को चूत के अंदर डालने वाला है। ये नकली नौ इंच का लंड उसके लंड पर चढ़ा था।
लेकिन राहुल ने वैसलीन मेरी गांड के छेद पर लगाई और पेनिस स्लीव पर मलने लगा। मैं ये देख कर बहुत डर गई थी। मुझे लगा कि आज तो मैं मर ही जाऊंगी… मेरी गांड फट जाएगी।
राहुल को जैसे ही मैंने मना किया, वैसे ही राहुल ने टेप से मेरा मुंह बंद कर दिया।
वो मुझसे बोला, “साली तू बहुत बड़ी चुदक्कड़ है ना… बहुत हवस है ना तेरे अंदर… आज इस लंड से तेरी सारी हवस मिटा दूंगा।”
उसने मेरी गांड के छेद पर लंड रखा और एक जोर का झटका लगा दिया। वो मूसल सीधा मेरी गांड को चीरते हुए अंदर घुसता चला गया।
मेरे मुंह से आवाज नहीं निकल पा रही थी। मगर दर्द इतना ज्यादा हो रहा था, जैसे किसी ने मेरे गांड में आग लगा दी हो।
मैं खुद को उससे अलग भी नहीं कर सकती थी। मैं बस रो रही थी। मेरा मुंह बंद था… चीख भी नहीं सकती थी। बहुत दर्द हो रहा था।
उधर राहुल रुक नहीं रहा था। मेरी गांड फट चुकी थी। मैंने इससे पहले गांड नहीं चुदवाई थी… और पहली बार ही 9 इंच का लंड मेरी गांड में था।
राहुल बिना रुके मेरी गांड मारता रहा। मैं बस बंधी हुई बेबस पड़ी थी।
वो मेरी गांड में 9 इंच का लौड़ा अंदर-बाहर किए जा रहा था।
तभी उसने एकदम से डिल्डो हाथ में लिया और मेरी चूत में डाल दिया।
अब मेरी गांड में 9 इंच का लंड और चूत में 8 इंच का डिल्डो था। मेरे दोनों छेद भरे हुए थे।
मुझे बहुत दर्द हो रहा था। मैं बुरी तरह छटपटा रही थी।
मैं उससे बोलना चाहती थी कि अब बस करो… बहुत दर्द हो रहा है। लेकिन नहीं बोल सकती थी।
ऐसे ही वो मेरी चुदाई करता रहा।
दस मिनट में मैं तीन बार झड़ चुकी थी।
उसके लंड पर पेनिस स्लीव होने के वजह से वो तो झड़ने से रहा था।
मेरी चूत और गांड दोनों को एक साथ वो काफी देर तक चोदता रहा।
कुछ समय बाद मेरे दोनों छेदों ने लंड स्वीकार कर लिए थे और अब मुझे भी बहुत मजा आने लगा था।
मेरी दर्द भरी स्थिति खत्म होते देख कर उसने मेरे मुंह से टेप निकाल दिया।
मैं उससे गालियां देने लगी, “आह साले गांडू… मादरचोद… ऐसा कोई दर्द देता है क्या! खोल साले मुझे।”
ऐसा सुन कर उसे और जोश आ रहा था।
वो मुझे और जोर से चोदने लगा।
मगर अब मैं उसे बोल रही थी, “आह मेरे राजा… और जोर से चोद मुझे… आह दो लंड का मजा लेने में बहुत मजा आ रहा है। आह तेरे जैसा सेक्स गुलाम मुझे नहीं मिल सकता था। तू मेरा कुत्ता है।”
ऐसी बातें हम सिर्फ सेक्स के वक्त करते हैं। मुझे सेक्स के वक्त गालियां देना अच्छा लगता है।
पूरे आधे घंटे के चुदाई के बाद मैं थक गई थी, उसने लंड पर से पेनिस स्लीव निकाला और मेरे मुंह के पास आकर बैठ गया।
मेरा सर उसकी दोनों टांगों के बीच में था। फिर लंड मेरे मुंह में दे लंड अंदर-बाहर करने लगा।
पांच मिनट बाद राहुल मेरे मुंह में ही झड़ गया और मैं उसका सारा वीर्य पी गई।
फिर उसने मुझे खोल दिया और हम दोनों वैसे ही लेटे रहे।
कुछ देर बाद हम दोनों सो गए।
जब मैं उठी, तो शाम के 7 बज रहे थे। मैंने देखा कि पलंग पर राहुल नहीं था। मैं बाथरूम जाने के लिए उठी, तो मुझे चलते नहीं बन रहा था।
आज मेरी गांड और चूत की बहुत ज्यादा चुदाई हो गई थी। जैसे-तैसे मैं बाथरूम पहुंची और खुद को साफ किया, फ्रेश हो गई।
बाथरूम में तौलिया टंगा था, मैं उसे लपेट कर बाहर आई, तो देखा बेडशीट पर बहुत सारा खून था। बेडशीट मैंने बदल दी।
तब तक राहुल भी आ गया था। उसने हमारे खाने का इंतजाम किया हुआ था। फिर हम दोनों ने मिलकर खाना खाया।
मैं ऐसे चलकर घर नहीं जा सकती थी, तो मैंने अपनी फ्रेंड जागृति को कॉल किया और उससे कहा कि मेरी मॉम को बोला कि मैं आज उसके घर पर रुकने वाली हूं।
इससे पहले भी बहुत बार मैं जागृति के यहां रुकी थी। मॉम को शक भी नहीं हो सकता था।
उसने ऐसा ही किया। इस सेफ इंतजाम के बाद मैं राहुल के साथ उसी के घर पर रुक गई।
मैं और राहुल पलंग पर एक दूसरे की बांहों में ऐसे ही बिना कपड़ों के लेट गए। हम दोनों दो लंड से चुदाई की बातें करने लगे।
मैंने उससे बातों ही बातों में कहा, “ये तो नकली लंड थे, मगर मेरी जान आज काश दो लड़के मुझे एक साथ चोदते पूरी रात… तो मजा आ जाता। एक तुम तो मेरे कुत्ते हो ही और एक और कुत्ता होता। तो मैं दोनों से एक साथ चुदवा लेती।”
मैं ऐसा बोल कर राहुल से मजाक करने लगी।
राहुल ने भी मेरी बात सुनकर मेरे दूध मसले और कहा, “जान समय आने दो, तुम्हारी ये इच्छा भी पूरी करवा दूंगा।”
मैं उसकी बात सुनकर खुश हो गई और हम दोनों फिर से चुदाई में लग गए।
उस रात और उसके अगले दिन… पूरे दो दिन हम बिना कपड़ों के अलग-अलग तरह से सेक्स करते रहे। ऐसे पूरी हुई मेरी सेक्स फैंटसी।
अभी एक नई इच्छा दो लंड से चुदवाने की बात ने मेरे मन में जन्म ले लिया था… और मेरी ये इच्छा कैसे पूरी हुई, ये मैं आगे सेक्स कहानी में आपको राहुल बताएगा।
दोस्तो, आपको ये डिल्डो फैंटसी और बीडीएसएम चुदाई वाली कहानी कैसी लगी? क्या आपने कभी डबल पेनेट्रेशन या स्ट्रैपऑन ट्राई किया है? कमेंट में अपनी फैंटसी या एक्सपीरियंस शेयर करें, बहुत मजा आएगा।
कहानी का अगला भाग: ककॉल्ड राहुल ने अपनी मालकिन को 5 बुल्स से चुदवाया