मेरी चुदाई का चक्रव्यूह भाग 2 – मै जलील हुई

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हैलो दोस्तों, मैं आपकी रंडी वैष्णवी एक बार फिर अपनी आगे की कहानी लेकर आई हूँ।

पिछली कहानी: मेरी चुदाई का चक्रव्यूह – मेरी सील टूटी

मैं आपको बता देना चाहती हूँ कि यह मेरी काल्पनिक कहानी है। ऐसा मेरे साथ कुछ भी नहीं हुआ। लेकिन आपके रिप्लाई मुझे बहुत अच्छे लगे। मैंने कुछ लोगों का जवाब दिया है, लेकिन सभी का जवाब देना मुमकिन नहीं था। इसके लिए माफ़ी चाहती हूँ!!

तो पिछली बार मैंने आपको बताया था कि जब मैं अतुल के फार्महाउस से घर वापस आई, तो मेरी पूरी बॉडी में दर्द हो रहा था। मैं घर आते ही सो गई।

जब अगली सुबह उठी, तो दिन निकल चुका था। उस दिन मैं स्कूल भी नहीं जा सकी। उठने के बाद मैं ऐसे ही फोन चला रही थी कि व्हाट्सएप पर एक वीडियो आया। वह वीडियो एक अनजान नंबर से था। मैंने जैसे ही उसे ओपन किया, मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं।

उस वीडियो में मैं चुद रही थी। मेरी चूत में भी लंड था, मेरी गांड में भी और मेरे मुंह में भी। मैं उछल-उछल कर चुद रही थी और मज़े ले रही थी।

मैंने तुरंत रिप्लाई किया, “ये क्या है?”

तभी अतुल का जवाब आया, “ये इस बात का सबूत है कि तू मेरी रंडी है और जो मैं कहूँगा, वो तुझे करना होगा।”

मैंने गिड़गिड़ाते हुए लिखा, “प्लीज अतुल, इसे डिलीट कर दो। मैं बर्बाद हो जाऊँगी।”

अतुल ने बेरहमी से जवाब दिया, “देख, ज्यादा ड्रामा मत कर। मुझे पता है कि तुझे भी अपनी चूत मरवाने में मजा आता है।”

मैंने फिर से लिखा, “प्लीज, प्लीज!!”

अतुल ने गुस्से में कहा, “चुप, साली रंडी! अब मेरी बात ध्यान से सुन। तुझे जो स्कर्ट मैंने दी है, अब स्कूल वही पहनकर जाएगी। और वह भी बिना ब्रा और पैंटी के।”

मैंने हैरान होकर जवाब दिया, “पागल हो गए हो क्या? वो स्कर्ट बहुत छोटी है। और बिना ब्रा-पैंटी के?! नहीं, प्लीज!”

अतुल ने सख्ती से कहा, “ठीक है, फिर मैं तेरी ये वीडियो इंटरनेट पर डाल रहा हूँ।”

मैं डर गई और काफी देर तक कोई जवाब नहीं दिया। थोड़ी देर बाद अतुल ने मुझे एक और वीडियो भेज दिया। इस वीडियो में मैं बीच में बैठी थी, और चारों तरफ से लंड लिए लोग खड़े थे।

मैंने रोते हुए लिखा, “ठीक है, तुम जैसा कहोगे, मैं वैसा ही करूँगी। पर प्लीज ये वीडियो कहीं मत डालना।”

अतुल ने जवाब दिया, “ठीक है, लेकिन याद रखना, कल स्कूल इसी ड्रेस में आना। वरना तू जानती है मैं क्या कर सकता हूँ।”

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मैंने डरते हुए लिखा, “ओके।”

मुझे बहुत डर लग रहा था, लेकिन साथ ही थोड़ी एक्साइटमेंट भी हो रही थी कि स्कूल में क्या होगा।

अगले दिन जब मैं स्कूल जाने के लिए तैयार होने लगी, तो मैंने देखा कि वह स्कर्ट इतनी छोटी थी कि मेरी गांड दिख रही थी। अगर मैं थोड़ा भी झुक रही थी, तो सबकुछ साफ नजर आ रहा था। मैंने अपनी स्कर्ट को थोड़ा नीचे खींच लिया ताकि मेरी टाँगें कुछ हद तक छुप जाएँ।

मैं स्कूल अपनी स्कूटी से जाती थी। जैसे ही मैं स्कूल के लिए निकली, मैंने महसूस किया कि हवा की वजह से मेरी स्कर्ट ऊपर उड़ने लगी। मैं एक हाथ से स्कूटी चला रही थी और दूसरे हाथ से अपनी स्कर्ट संभाल रही थी।

रास्ते में गड्ढे और स्पीड ब्रेकर आते ही मेरी चूचियाँ उछलने लगती थीं। इसलिए मैंने बहुत धीरे-धीरे स्कूटी चलाई और आखिरकार स्कूल पहुँच गई।

जब मैं अपनी क्लास में पहुँची, तो देखा कि अतुल और उसके दोस्त वहीं खड़े थे। वे मेरा ही इंतजार कर रहे थे। अतुल मेरे पास आया और बिना कुछ कहे मुझे जोर से किस करने लगा।

“आव्वम्म्म्म…”

मैं उससे हटने की कोशिश कर रही थी, लेकिन उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी। उसने मुझे पीछे हटाकर कहा, “तूने स्कर्ट इतनी नीचे क्यों कर रखी है? इसे ऊपर चढ़ा।” फिर वह मेरे पास आया और मेरी स्कर्ट को खींचकर मेरे पेट तक चढ़ा दिया।

अब मेरी हालत ऐसी थी जैसे मैं कोई बाजारू रंडी लग रही थी। मेरी स्कर्ट इतनी ऊपर थी कि मेरी टाँगें पूरी तरह से दिख रही थीं। फिर उसने मेरी शर्ट के ऊपर के दो बटन भी खोल दिए। मैं कुछ भी नहीं कह पा रही थी, क्योंकि मुझे डर था कि वह मेरी वीडियो इंटरनेट पर डाल देगा।

मैं चुपचाप उसकी सारी बातें मानने लगी। तभी शिविका भी वहाँ आ गई। उसने आते ही अतुल को किस किया, फिर उसके दोस्तों को भी। मैं उसे देख रही थी कि वह कितनी बड़ी रंडी है।

शिविका मेरे पास आई और मेरी स्कर्ट के अंदर हाथ डालकर मेरी चूत सहलाने लगी। उसने मुस्कुराते हुए पूछा, “कैसी है तेरी चूत?”

मैं उसे बस देखती ही रह गई। थोड़ी ही देर में और लोग भी आ गए और क्लास शुरू हो गई। हम सब क्लास की आखिरी पंक्ति में बैठे थे, जहाँ सभी कॉलम आपस में जुड़े हुए थे।

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अब मैं दो लड़कों के बीच में थी और शिविका भी वहीं थी। क्लास के बीच में ही वे मेरी चूत सहला रहे थे। क्योंकि हम लास्ट सीट पर थे, कोई हमें देख नहीं सकता था। थोड़ी देर बाद वे बारी-बारी से नीचे झुककर मेरी चूत चाटने लगे।

मेरी चूत से नदी बह रही थी। मैं उन्हें मना करने लगी, लेकिन तभी टीचर ने मुझे देख लिया और खड़ा होने को कहा। उन्होंने पूछा, “क्या पढ़ा रहा हूँ, बता?”

मुझे पता ही नहीं था कि क्लास में क्या हो रहा है। मैंने सिर झुकाकर मना कर दिया। इस पर सर को गुस्सा आ गया। उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया।

मैं डरते हुए उनके पास पहुँची। उन्होंने मेरी टाँगों को घूरना शुरू कर दिया। फिर उन्होंने कहा, “यहाँ खड़ी हो जाओ और हाथ ऊपर करो।”

मैंने अपने हाथों से अपने निप्पल्स को छुपा रखा था। लेकिन जैसे ही मैंने अपने हाथ ऊपर किए, मेरे निप्पल्स साफ-साफ दिखने लगे। मेरी स्कर्ट भी ऊपर खिसक गई, जिससे मेरी इनर थाइज सबके सामने आ गईं। आगे बैठे लड़कों के लंड खड़े हो गए थे।

मुझे बहुत शर्म आ रही थी, लेकिन यह सजा थी, जो झेलनी पड़ रही थी। पीछे बैठे अतुल, उसके दोस्त और शिविका सब मुझ पर हंस रहे थे।

तभी बेल बजी और अगला पीरियड गेम्स का था। अतुल और उसके दोस्तों ने मुझे स्कूल के पीछे वाले कंपाउंड में ले जाने का प्लान बनाया। उन्होंने मुझे पकड़कर वहाँ ले जाया और बिना समय गवाए मेरे सारे कपड़े उतार दिए।

अब मैं पूरी तरह नंगी थी। कोई मेरे बूब्स दबा रहा था, तो कोई मुझे किस कर रहा था। मेरी हालत पूरी तरह मदहोश जैसी हो चुकी थी। तभी किसी ने मेरी चूत पर मुँह लगाया और जोर-जोर से चाटने लगा।

मैं पूरी तरह से मस्त हो गई थी। मैंने अपने हाथों से उसके बाल पकड़कर उसका सिर अपनी चूत में दबा दिया। थोड़ी ही देर में मैं झड़ गई। जब मैंने देखा, तो शिविका मेरी वीडियो बना रही थी।

अब मुझे भी इस सबमें मजा आ रहा था, लेकिन मैं अपनी भावनाएँ जाहिर नहीं कर रही थी। मैं नहीं चाहती थी कि वे समझें कि मैं खुद भी इस सब में रुचि ले रही हूँ।

इसके बाद उन्होंने मुझे नीचे बिठाया और एक-एक करके अपने लंड चुसवाने लगे। उन्होंने अपने लंड मेरे गले तक उतार दिए। मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी, लेकिन वे लोग मुझ पर कोई रहम नहीं कर रहे थे।

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वे मेरे बाल पकड़कर मुझे डीप थ्रोट करा रहे थे। मेरे मुँह से आवाजें निकल रही थीं:

“आह्ह्ह्ह… उह्ह्ह्ह…!”

फिर उन्होंने मुझे उठाया और अतुल ने मुझे अपने ऊपर बिठा लिया। उसने मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और मुझे चोदने लगा। मुझे दर्द हो रहा था, लेकिन वह रुका नहीं।

तभी एक और लंड मेरी गांड के पास आया और उसने एक झटके में मेरी गांड में डाल दिया। मैं चीख पड़ी:

“आआआआह्ह्ह्ह्ह… उउउउउह्ह्ह्ह… आह्ह्ह्ह…”

इसी बीच एक और लंड ने मेरा मुँह बंद कर दिया। अब मेरी आवाजें भी बंद हो चुकी थीं। उन्होंने मुझे बारी-बारी से दो घंटे तक चोदा। मैं पूरी तरह थक चुकी थी और आराम करना चाहती थी।

दो घंटे तक लगातार चुदने के बाद मैं पूरी तरह से थक चुकी थी। मेरे शरीर में एक भी ताकत नहीं बची थी। लेकिन वे लोग अभी भी रुके नहीं थे। मैं वहीं स्कूल के पीछे लेटी हुई थी और उन्होंने मेरे कपड़े भी नहीं लौटाए।

मैं वहीं सो गई। जब मेरी आँख खुली, तो मैंने देखा कि वे सब हँसते हुए चले गए थे, और मेरे कपड़े भी साथ ले गए थे।

अब मैं नंगी थी, और मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं घर कैसे जाऊँगी। मेरा शरीर दर्द से भर चुका था, और मैं हिलने की हालत में भी नहीं थी।

अगली कहानी में आप जानेंगे कि मैं नंगी हालत में घर कैसे पहुँची।

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