आंटी ने मम्मी की चुदाई का वादा किया

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Padosan aunty chut chudai sex story, Gand chudai hotel sex story: मेरा नाम अजय है। मैं दिल्ली से हूं। यह मेरी असली कहानी है हमारे पड़ोस में रहने वाली आंटी गुलनूर के साथ। उस समय आंटी की उम्र ठीक 38 साल थी और मेरी 22 साल की। आंटी का फिगर देखकर कोई भी आदमी पागल हो सकता था – उनके दूध इतने बड़े और भरे हुए थे कि हमेशा उभरे रहते, जैसे कोई दो बड़े-बड़े नींबू हों, पतली कमर जो हाथ में आ जाती, चौड़ी कमर और सबसे ज्यादा आकर्षक उनकी मोटी-मोटी, गोल-गोल गांड जो चलते वक्त लहराती थी। मैं रोज उन्हें बालकनी में या घर के काम करते देखता था और मन ही मन उत्तेजित हो जाता था। सोचता था कि काश एक बार उन्हें पूरी तरह नंगा कर पाऊं, उनके उन बड़े दूधों को हाथों से दबाऊं, चूसूं, उनकी चिकनी चूत को जीभ से चाटूं और अपना लंड उनकी चूत और गांड दोनों में घुसाकर भर दूं। हर बार उनकी तस्वीर मन में आते ही लंड सख्त हो जाता था।

एक दिन आंटी को रिश्तेदारी की शादी में जाना पड़ा। शादी दिल्ली से करीब 24 किलोमीटर दूर एक फार्म हाउस पर थी। उनके अंकल को अचानक तेज बुखार चढ़ आया था, इसलिए वे अकेले नहीं जा सकती थीं। आंटी ने मेरी मम्मी से बात की, “भाभी जी, अजय को मेरे साथ भेज दो ना, मुझे अकेले जाने में डर लगता है, रास्ता भी लंबा है।” मम्मी ने बिना सोचे तुरंत हां कर दी। दिसंबर का महीना था, शाम होते-होते ठंड बहुत तेज हो जाती थी, हवा में कड़ाके की सर्दी काट रही थी। हम दोनों तैयार होकर बाइक पर सवार हो गए।

मैं बाइक चला रहा था और आंटी पीछे बैठी थीं। रास्ते भर उनके नरम-नरम, गरम दूध मेरी पीठ से सटे रहते थे। जैकेट और स्वेटर की वजह से ज्यादा महसूस नहीं हो रहा था, लेकिन फिर भी हर उछाल पर उनके दूध की मुलायमियत महसूस हो रही थी और मेरे लंड में हलचल मच रही थी। मैं बार-बार सोच रहा था कि अगर जैकेट न होती तो कितना मजा आता। शाम के करीब सात बजे हम शादी वाली जगह पर पहुंच गए। वहां डेढ़ घंटा रुके – खाना खाया, लोगों से मिले, थोड़ा हंसी-मजाक किया और फिर वापस निकल पड़े।

अभी ज्यादा दूर नहीं गए थे कि अचानक आसमान फट पड़ा। जोरदार बारिश शुरू हो गई। पानी की बूंदें इतनी तेज और घनी थीं कि सामने कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हम दोनों मिनटों में पूरी तरह भीग चुके थे। कपड़े चिपक गए थे, ठंड से शरीर कांप रहा था, दांत बज रहे थे। मैंने बाइक साइड में रोकी और आंटी से कहा, “आंटी जी, अब घर तक नहीं पहुंच पाएंगे। सर्दी से मर जाएंगे। कोई होटल ढूंढकर रुक जाते हैं।” आंटी ने थोड़ा सोचा, फिर कांपते हुए बोलीं, “ठीक है अजय, घर पर फोन कर देंगे कि बारिश की वजह से रुक गए हैं।”

हमने नजदीक ही एक ढाबा स्टाइल का छोटा-सा होटल देखा। मैंने बाइक पार्क की और काउंटर पर जाकर एक डबल बेड वाला कमरा बुक कर लिया। कमरे में घुसते ही ठंड और ज्यादा लग रही थी, क्योंकि बाहर से भीगकर आए थे। मैंने आंटी से कहा, “आंटी, आप पूरी भीग गई हैं, जल्दी कपड़े बदल लो वरना बीमार पड़ जाओगी।” आंटी हंस पड़ीं और कांपते हुए बोलीं, “अरे यहां नए कपड़े कहां से लाऊं बेटा, सब गीला पड़ा है।”

मैं बाथरूम में गया तो वहां दो सफेद बाथरोब टंगे हुए थे। मैंने अपने सारे गीले कपड़े उतार दिए – शर्ट, स्वेटर, पैंट, अंडरवियर सब, लंड तक पूरी तरह नंगा हो गया। ठंड से लंड सिकुड़ गया था लेकिन फिर भी आंटी की याद से हल्का सख्त था। मैंने बाथरोब पहन लिया और बाहर आया। आंटी को आवाज दी, “आंटी आप भी अंदर जाकर बाथरोब पहन लो, ये गीले कपड़े उतार दो।” आंटी अंदर गईं। कुछ देर बाद वे बाथरोब पहनकर बाहर आईं। बाथरोब का गला काफी गहरा था, ब्रा नहीं पहनी थीं तो उनके बड़े-बड़े दूध हिल रहे थे, निप्पल साफ उभरे हुए दिख रहे थे और बीच की गहरी घाटी इतनी आकर्षक थी कि मेरी नजरें वहीं टिक गईं। मैं उन्हें घूर रहा था और लंड बाथरोब के नीचे फिर से सख्त होने लगा था।

मुझे ठंड बहुत लग रही थी तो मैंने रिसेप्शन पर फोन करके एक बोतल व्हिस्की और एक पैकेट सिगरेट मंगवा लिया। आंटी कमरे में आईं तो बोलीं, “यार अजय मुझे भी बहुत सर्दी लग रही है, कुछ गर्म करने को मंगवा ना।” मैंने कहा, “हां आंटी, कुछ गर्म चीज मंगवाई है, अगर आपको चले तो ले लेना।” वे उत्सुक होकर पूछीं, “क्या मंगवाया है?” मैंने कहा, “व्हिस्की।” आंटी ने मुस्कुराकर कहा, “अरे व्हिस्की नहीं, रम मंगवाते, सर्दी में रम बहुत अच्छी लगती है और मजा भी देती है।”

मैंने तुरंत फोन करके व्हिस्की की जगह रम मंगवा दी। साथ में भुने हुए काजू, नमकीन पिस्ता और कुछ बर्फ के क्यूब्स भी मंगवा लिए। कुछ ही मिनट में वेटर सामान ले आया। मैंने दो गिलास निकाले, बर्फ डाली और रम के भारी-भरकम पैग बनाए। आंटी ने पूछा, “पानी डालूं या सोडा?” मैंने कहा, “मैं तो ऑन द रॉक्स लेता हूं, बिना मिलाए।” आंटी हंसकर बोलीं, “अच्छा, वही मेरे लिए भी बना दे, सर्दी को बर्फ ही खत्म करेगी।”

हमने गिलास टकराए, “चीयर्स” बोला और पीना शुरू किया। आंटी ने एक ही सांस में पूरा पैग गटक लिया। मुंह बनाया, जीभ निकालकर बोलीं, “उफ्फ कितनी तेज है।” फिर काजू उठाकर मुंह में डाल लिया। मैंने उनका गिलास फिर से भर दिया। मैंने सिगरेट सुलगाई तो आंटी ने भी हाथ बढ़ाकर एक ले ली और सुलगा ली। दारू ने जल्दी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया। आंटी की आंखें चमकने लगीं, गाल लाल हो गए।

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कुछ देर में आंटी के तीन पैग हो चुके थे और मेरे दो। उनकी सर्दी अब पूरी तरह खत्म हो चुकी थी। उन्होंने बाथरोब की डोरी थोड़ी ढीली कर दी। अब दूध और ज्यादा खुलकर हिल रहे थे। निप्पल साफ दिख रहे थे, गुलाबी और सख्त। मेरी आंखों में नशे के साथ वासना भी चमक रही थी। आंटी ने पैर फैलाकर टेबल पर रख दिए, घुटने मोड़ लिए। उनकी उंगलियों में सिगरेट थी और बाथरोब के नीचे से उनकी चूत साफ नंगी दिख रही थी। बिल्कुल चिकनी, बिना एक बाल के, हल्की गुलाबी और गीली चमक रही थी।

मैंने देखकर जोर से सीटी बजा दी। आंटी ने सिगरेट का धुआं छल्ले बनाकर हवा में उड़ाया और हल्की मुस्कान के साथ अपनी चूत को उंगलियों से थोड़ा और फैलाकर दिखाया। मैंने जीभ होंठों पर फेरी और हाथ लंड पर रखकर सहलाने लगा। लंड पूरी तरह खड़ा होकर बाथरोब से बाहर झांक रहा था, टोपा लाल और चमकदार। आंटी ने देखा तो बोलीं, “अरे तेरी लौकी तो दिख रही है।” मैंने पूछा, “थोड़ी दिख रही है या पूरी?” वे हंसकर बोलीं, “जब पूरी दिखेगी तब लौका कहूंगी।” मैंने कहा, “आंटी लौका नहीं बोलते, लौड़ा कहते हैं।”

आंटी जोर से हंस पड़ीं और अपनी चूत को उंगली से सहलाते हुए बोलीं, लौड़ा तो तब बनेगा जब मेरी चूत उसे बुलाएगी। रम अब उनके सिर पर पूरी तरह चढ़ चुकी थी। उनकी आंखें नशे से लाल हो चुकी थीं, होंठ थोड़े सूजे हुए और गालों पर हल्की लाली छा गई थी। वे और एक पैग बनाकर आधी पी गईं, गिलास को होंठों से लगाकर एक लंबा घूंट लिया, फिर जीभ से होंठ चाटते हुए अचानक उठ खड़ी हुईं। मेरे ठीक सामने खड़ी होकर उन्होंने बाथरोब की डोरी को धीरे-धीरे खींचा। डोरी खुलते ही बाथरोब दोनों तरफ सरक गया, उनके बड़े-भारी दूध पूरी तरह खुले, निप्पल सख्त और उठे हुए, और नीचे उनकी चिकनी चूत की पूरी झलक मेरी आंखों के सामने आ गई। चूत के होंठ थोड़े फूले हुए, बीच में हल्की चमक वाली नमी साफ दिख रही थी। उन्होंने कुछ सेकंड तक मुझे ऐसे ही देखने दिया, फिर बिना डोरी बांधे बाथरोब को दोनों हाथों से थोड़ा समेट लिया, लेकिन अब भी दूध आधे खुले और चूत की झलक बनी हुई थी।

मैंने सिगरेट का गहरा कश लगाया, धुआं छोड़ते हुए कहा, आंटी शर्मा क्यों रही हो, यहां तो सिर्फ हम दोनों हैं। बाथरोब उतार ही दो। वे मुस्कुराईं और बोलीं, फिर तो ठंड लग जाएगी। मैंने कहा, नहीं लगेगी, मैं हूं ना। वे हंसकर बोलीं, कोई और तरीका बता ना। मैंने कहा, हां एक तरीका है। वे मेरी उंगली से सिगरेट छीनकर अपने होंठों पर रखी और बोलीं, क्या? मैंने कहा, बाथरोब उतारकर बिस्तर पर कंबल में लेट जाओ।

वे बोलीं, फिर क्या होगा? उनकी आवाज में शरारत और नशे का मिश्रण था। मैंने कहा, आंटी आप इतना तो कर दो, बड़ा तरसा रही हो। आंटी ने मेरी आंखों में देखा, फिर धीरे-धीरे बाथरोब की डोरी पूरी तरह खोल दी। कपड़ा कंधों से सरकता हुआ नीचे गिरा। उनका पूरा नंगा जिस्म मेरे सामने था – बड़े गोल दूध हल्के से हिल रहे थे, कमर पतली, नाभि गहरी, और नीचे चिकनी चूत जो अब पूरी तरह गीली चमक रही थी। वे बिस्तर की तरफ गईं, कंबल उठाकर अंदर घुस गईं, लेकिन कंबल को सिर्फ कमर तक ओढ़ा, ऊपर से दूध खुले ही थे।

मैंने अपना बाथरोब भी खोल दिया। लंड पहले से ही सख्त और फड़क रहा था। मैंने उसे हाथ में पकड़ा, आंटी के गिलास में बची रम में टोपे को डुबोया, ठंडी रम से लंड पर सिहरन दौड़ गई। फिर बाहर निकाला, लंड अब रम से चमक रहा था। आंटी देख रही थीं, उनकी आंखें फैली हुईं। बोलीं, ये क्या कर रहा है तू? मैंने कहा, मेरे लौड़े को भी सर्दी लग रही थी, रम चखा दी। अब गर्म हो जाएगा।

आंटी हंसते-हंसते लोट-पोट हो गईं, कंबल में लेटे-लेटे ही उनका पूरा शरीर हिल रहा था। बोलीं, अबे चूतिया, लौड़े को गर्म करने के लिए चूत में डालना पड़ता है। दारू से क्या असर होगा। मैंने कहा, अब चूत में कैसे डाल दूं? वे बोलीं, दिक्कत क्या है, तू भी गाउन उतार और आ जा मेरे साथ कंबल में। मैंने झट से बाथरोब पूरी तरह उतारा, नंगा होकर उनके पास गया। लंड को हाथ में पकड़कर हिलाने लगा, टोपा लाल और चमकदार हो गया था। लंड देखकर आंटी की आंखें चमक उठीं, उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर मुझे जोर से कंबल में खींच लिया।

अब हम दोनों पूरी तरह नंगे एक-दूसरे से लिपटे हुए थे। उनकी गरम, नरम त्वचा मेरे शरीर से पूरी तरह सटी हुई थी। उनके दूध मेरी छाती पर दब रहे थे, निप्पल मेरी त्वचा को छूकर सिहरन पैदा कर रहे थे। आंटी ने कहा, चल एक पैग और लेते हैं। मैंने लेटे-लेटे गिलास भरा। आंटी ने एक सिप लिया, फिर मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और मुंह से मुंह लगाकर मुझे पिला दिया। शराब की गंध, उनकी गरम सांस और जीभ का टच सब मिलकर मुझे और मदहोश कर रहा था। हमने एक-दूसरे को चूमना शुरू कर दिया। पहले हल्के चुम्बन, फिर जीभ मिलाकर गहरा किस। मैंने उनके दूधों को दोनों हाथों से मसलना शुरू किया। नरम लेकिन भारी दूध हथेलियों में भर गए। निप्पल सख्त होकर उभर आए। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया, जीभ से घुमाया, फिर जोर से चूसा। आह्ह.. इह्ह.. ओह्ह.. आंटी की कराहें निकलने लगीं, उनकी कमर हल्के से उठ रही थी।

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कुछ देर बाद कंबल हट गया। हम दोनों नंगे एक-दूसरे को देख रहे थे। आंटी की चिकनी चूत अब पूरी तरह गीली और फूली हुई चमक रही थी, रस की एक पतली लकीर बाहर तक आ रही थी। मैंने उन्हें पीठ के बल लिटाया और ऊपर चढ़ गया। मैंने अपना लंड उनके चूचों के बीच फंसाया और मम्मों की चुदाई शुरू कर दी। लंड आगे-पीछे हो रहा था, टोपा उनके मुंह तक पहुंच रहा था। आंटी जीभ निकालकर टोपे को चाट रही थीं, फिर मुंह में लेकर हल्का चूसतीं। ग्ग्ग्ग.. गी.. गों.. गोग.. उनकी मुंह से गले की गहरी आवाजें आने लगीं।

मैंने एक हाथ पीछे करके उनकी चूत पर रखा। चूत पूरी गीली और गरम थी। मैंने दो उंगलियां अंदर डालीं, अंदर-बाहर करने लगा। आंटी की कमर उठ गई, चूत ने उंगलियों को कसकर पकड़ा। आह्ह.. ऊऊ.. ओह्ह.. वे जोर से कराहीं। आंटी बोलीं, अब देर मत कर अजय, जल्दी से अंदर पेल दे अपना लौड़ा। मैं नीचे सरका। लंड को चूत के मुंह पर टिकाया। टोपा चूत के होंठों को अलग करता हुआ धीरे-धीरे अंदर गया। चूत टाइट थी लेकिन रस से इतनी गीली कि लंड आसानी से फिसल रहा था। मैंने धीरे-धीरे धक्का दिया, आधा लंड अंदर चला गया। आह्ह्ह.. ऊई.. आंटी की कराह निकली, उनकी उंगलियां मेरी पीठ पर नाखून गड़ा रही थीं।

आंटी ने अचानक मुझे धक्का देकर नीचे गिरा दिया। वे मेरे ऊपर चढ़ गईं। मेरे लंड को हाथ में पकड़ा, बहुत सारा थूक लगाया, लंड पूरी तरह चिकना हो गया। फिर खुद ऊपर चढ़कर चूत को लंड पर सेट किया। धीरे से नीचे बैठीं, टोपा अंदर गया। उई मम्मी.. आह्ह.. वे जोर से कराहीं और थोड़ा ऊपर उठ गईं। फिर फिर से नीचे बैठीं, इस बार और गहराई तक। लंड पूरी तरह अंदर चला गया, चूत के होंठ लंड की जड़ तक फैल गए। आंटी कुछ सेकंड रुकीं, सांस लेती रहीं, फिर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी चूत लंड को कसकर दबा रही थी।

कुछ देर बाद मैंने उन्हें कुतिया बनाया। वे चारों हाथ-पैरों पर आ गईं। मैंने पीछे से लंड टिकाया और आधा अंदर डाला। आंटी दूर हो गईं। बोलीं, दर्द हो रहा है अजय, तेरे अंकल की लुल्ली तेरे लौड़े के सामने कुछ भी नहीं। पिछले दो साल से शुगर है, उनका तो खड़ा भी नहीं होता। मैंने कहा, चिंता मत करो आंटी, मैं बहुत आराम से करूंगा।

मैंने उन्हें बेड के किनारे ले जाकर आधी गांड नीचे लटका दी। उनके पैर अपने कंधों पर रखे। लंड चूत के मुंह पर सेट किया। पहले धीरे से टोपा अंदर किया, फिर पूरी ताकत से एक जोरदार धक्का मारा। लंड रॉकेट की तरह पूरी तरह अंदर चला गया, बच्चेदानी तक टच हो गया। आह्ह मार दिया मुझे.. बचाओ.. आंटी जोर से चीखीं। उनकी आंखों में आंसू आ गए।

मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। पहले सिर्फ छोटे-छोटे धक्के दे रहा था, लंड का सिर्फ आधा हिस्सा ही अंदर-बाहर हो रहा था ताकि आंटी को ज्यादा दर्द न हो। उनकी चूत अभी भी बहुत टाइट और गरम थी, हर धक्के पर चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़ रही थीं। आंटी की सांसें तेज हो रही थीं, वे धीरे-धीरे कमर उठा-उठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थीं। मैंने स्पीड थोड़ी बढ़ाई, अब लंड ज्यादा गहराई तक जा रहा था। हर बार अंदर जाते वक्त चूत से चुपचुप की आवाज आने लगी, रस की वजह से सब गीला हो चुका था।

दो मिनट बाद आंटी का दर्द पूरी तरह मजा में बदल गया। उनकी आंखें बंद हो गईं, मुंह से गालियां निकलने लगीं – “भोसड़ी के मादरचोद… धीरे चोद साले… कमीने रंडी की चूत समझ रखी है क्या… साले बहन के लंड… आह्ह… और जोर से…” उनकी गालियां सुनकर मेरा जोश सातवें आसमान पर पहुंच गया। मैंने अब फुल स्पीड पकड़ ली। दोनों हाथों से उनकी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। लंड पूरी तरह अंदर तक जा रहा था, बच्चेदानी को छू रहा था। हर धक्के पर उनके दूध ऊपर-नीचे उछल रहे थे।

आह्ह… ओह्ह… आऊ… ऊई… ऊउइ… उनकी कराहें अब कमरे में गूंज रही थीं। चूत से रस इतना बह रहा था कि बिस्तर की चादर गीली हो गई। मैं हर धक्के के साथ उनकी चूत की दीवारों को रगड़ रहा था, क्लिटोरिस पर उंगली से दबाव डाल रहा था। आंटी की कमर बार-बार उठ रही थी, वे मेरे धक्कों के साथ ताल मिला रही थीं। “आह्ह… राजा… और जोर से… फाड़ दे मेरी चूत… मादरचोद… हां ऐसे ही…” उनकी आवाजें अब कराह से ज्यादा चीख जैसी हो गई थीं। मैंने एक हाथ से उनके दूध को मसलना शुरू किया, निप्पल को पिंच किया। वे और जोर से कराहीं – “आह्ह… ह्ह्ह… इह्ह… ओह्ह… ऊईई…”

करीब 20 मिनट तक मैंने इस रफ चुदाई जारी रखी। मेरा लंड अब फुल सख्त था, निकलने वाला था। मैंने रुककर कहा, “आंटी… रस कहां निकालूं?” वे हांफते हुए बोलीं, “आज मुझे सिर्फ रंडी बोल साले… और मेरे मुंह में निकाल दे सारा माल… जल्दी…” मैंने लंड बाहर निकाला। आंटी फौरन उठकर बैठ गईं, मुंह खोल लिया, जीभ बाहर निकाल दी। मैंने लंड उनके होंठों पर टिकाया और जोर से झड़ गया। गर्म-गर्म माल की धार उनके मुंह में भर गई, कुछ उनके गालों पर भी गिर गया। आंटी ने आंखें बंद करके सब निगल लिया, फिर जीभ से होंठ चाटे।

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उन्होंने मुस्कुराकर कहा, “तू भी टेस्ट करेगा अपना माल?” मैंने हां में सिर हिलाया। आंटी ने मुझे खींचकर पास किया, उनके होंठ मेरे होंठों से लगे। उन्होंने जीभ से आधा माल मेरे मुंह में डाल दिया। थोड़ा नमकीन, थोड़ा कड़वा और अजीब स्वाद था लेकिन नशे और उत्तेजना में बहुत मजा आ गया। हम दोनों ने एक-दूसरे को चूमते हुए साफ किया।

हम दोनों थककर बिस्तर पर लेट गए। सांसें अभी भी तेज चल रही थीं। मैंने कहा, “रंडी… एक पैग और बनाऊं?” वे हंसकर बोलीं, “हां मादरचोद… बना ले।” मैंने उठकर गिलास में रम डाली, बर्फ डाली और दोनों के लिए पैग बनाए। पीते हुए मैंने पूछा, “मां किधर चोदी है जो मादरचोद बोल रही हो?” वे जोर से हंस पड़ीं और बोलीं, “मैं भी तेरी मां की तरह हूं… अगर तुझे अपनी मां चोदनी है तो बता, साली रंडी की टांगें भी तेरे लौड़े के सामने खुलवा दूंगी।”

यह सुनकर मेरा दिमाग हिल गया। मम्मी भी बहुत हॉट हैं, बड़े दूध, मोटी गांड… लेकिन कभी ऐसा सोचा ही नहीं था। आंटी ने मेरी हैरानी देखकर कहा, “टेंशन मत ले अजय… तेरे लौड़े का काम मैं चुटकियों में करा दूंगी। साली रंडी की तरह गैर मर्दों से चुदती रहती है।” हमने और एक-एक पैग पी लिया। नशा फिर से बढ़ने लगा। अब मेरा मन उनकी गांड मारने का हो रहा था।

मैंने हाथ उनकी मोटी, नरम गांड पर फेरना शुरू किया। उंगलियां गांड के बीच में सरकाने लगा। आंटी बोलीं, “गांड नहीं मारने दूंगी… तेरा लंड बहुत मोटा और लंबा है… फट जाएगी मेरी।” मैंने बहुत मिन्नत की, “प्लीज आंटी… बस एक बार… बहुत मन कर रहा है।” आखिरकार वे मान गईं। बोलीं, “ठीक है… लेकिन आधा ही घुसेड़ना… और बहुत धीरे।”

आंटी ने बिस्तर से अपना बैग खींचा और एक ट्यूब क्रीम निकाली। उन्होंने मेरे लंड के टोपे पर बहुत सारी क्रीम लगाई, हाथ से अच्छे से मल-मलकर फैलाया। फिर खुद कुतिया बन गईं, गांड ऊपर करके बोलीं, “पहले मेरी गांड पर ज्यादा क्रीम लगा दे।” मैंने उंगली में क्रीम लेकर उनके गांड के छेद पर लगाई, धीरे से अंदर भी थोड़ी डाली। छेद टाइट था, उंगली मुश्किल से अंदर जा रही थी। फिर मैंने लंड का टोपा गांड पर टिकाया और जरा सा दबाया। एक इंच अंदर चला गया।

आह मर गई… रुक भोसड़ी के… आंटी जोर से चीखीं। उनका पूरा शरीर कांप गया। मैं फौरन रुक गया। उनके दूध पकड़कर मसलने लगा, निप्पल को चूमने लगा ताकि दर्द कम हो। थोड़ी देर बाद मैंने फिर हल्का धक्का दिया। लंड दो इंच और अंदर चला गया। आंटी की चीख निकली, “आह निकाल ले कमीने… मेरी फट गई…” मैंने कहा, “बस आंटी… हो गया… आराम से।” फिर धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा, सिर्फ उतना ही हिस्सा जो अंदर गया था।

दो-तीन मिनट बाद उनका दर्द कम होने लगा। गांड अब थोड़ी ढीली पड़ रही थी। मैंने धीरे से पूरा लंड अंदर पेल दिया। उनकी कुंवारी गांड फट गई, अंदर से गर्म खून मेरे लंड पर लगा। लंड लाल हो गया। आंटी की आंखों से आंसू बह रहे थे, वे तकिए में मुंह दबाकर रो रही थीं। मैंने रुककर उनके पीठ पर हाथ फेरा, “आंटी… ठीक है?” वे हांफते हुए बोलीं, “हां… अब धीरे… लेकिन मत निकालना।”

धीरे-धीरे आंटी को मजा आने लगा। गांड अब लंड को अंदर ले रही थी। वे बोलीं, “अब जोर से पेल… फाड़ दे मेरी गांड… आह्ह… ओह्ह…” मैंने स्पीड बढ़ाई। अब जोर-जोर से धक्के मार रहा था। गांड की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं। आह्ह… ओह्ह… ऊई… उनकी कराहें फिर शुरू हो गईं। पूरी रात मैंने चूत और गांड दोनों बारी-बारी मारी। बीच-बीच में पैग लिए, सिगरेट फूंकी। नशा बढ़ता गया। सुबह चार बजे हम थककर सो पाए। दस बजे जागे।

होटल से निकलते वक्त आंटी ने मुझे गले लगाया। होंठों पर गहरा चुम्बन दिया और बोलीं, “जानू आई लव यू। आगे भी मुझे ऐसे ही प्यार से चाहिए।” मैंने वादा किया। सुबह आंटी ठीक से चल नहीं पा रही थीं। गांड में दर्द था। मैंने रास्ते में एक मेडिकल स्टोर से पेनकिलर दिलाया। दवा खाने के बाद दर्द कम हो गया।

दोस्तों, कैसी लगी मेरी यह पूरी कहानी जिसमें मैंने पड़ोसन आंटी गुलनूर की चूत और गांड दोनों पूरी रात चोदी? क्या आप भी ऐसी कोई रियल घटना शेयर करना चाहेंगे? कमेंट में जरूर बताना।

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