किचन में माँ को घोड़ी बनाकर चोदा

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Maa beta chudai sex story, Kitchen sex story, Hot milf mom fucked by son sex: मेरा नाम गीता है और मैं चालीस साल की एक खूबसूरत औरत हूँ। मैं अभी भी पच्चीस साल की लड़की को पीछे छोड़ देती हूँ। मेरा बदन गठीला है, चूचियाँ टाइट और गोल-गोल हैं, गांड भी गोल और उभरी हुई है। कमर पतली है लेकिन चौड़ी दिखती है। मेरे नैन-नक्श कातिलाना हैं और बूब्स का साइज 34 है। दोस्तों, मैं सच में मस्त माल हूँ। पर ये मस्त माल अगर किसी और के लिए होती तो अच्छा लगता, लेकिन अपने बेटे से चुद गई, ये थोड़ा अजीब लगा। फिर भी वो क्या करता, मैं खुद ही ऐसी कपड़े पहनती थी, इतनी हॉट और सेक्सी रहती थी कि शायद उसके बस में नहीं रहा होगा खुद को रोक पाना। अब मैं सीधी कहानी पर आती हूँ। मेरे घर में मैं, मेरा बेटा राहुल और मेरा पति अजय रहते हैं। पति की ट्रांसफर दूसरे शहर हो गई है, इसलिए अब सिर्फ मैं और राहुल घर पर हैं।

मैं थोड़ी चुड़क्कड़ किस्म की औरत हूँ। सेक्स कहानियाँ पढ़ना मुझे बहुत पसंद है। जब पति नहीं होता तो वासना की आग बुझाने के लिए हॉट कहानियाँ पढ़ती हूँ, फिर अपनी चूत में उँगली डालकर मजे लेती हूँ और तकिए को जांघों के बीच दबाकर सो जाती हूँ। राहुल दूसरे कमरे में सोता है। एक दिन की बात है, सुबह का वक्त था। राहुल अभी सोया हुआ था। मैं उठ गई और रसोई में नाश्ता बनाने लगी। उस दिन मुझे रिश्तेदार के यहाँ जाना था, इसलिए साड़ी पहननी थी। नहा-धोकर मैं किचन में थी। सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। मेरी बड़ी-बड़ी चूचियाँ ब्लाउज से उभरकर दिख रही थीं। पेटीकोट कमर के नीचे बंधा था, जिससे पेट गोल और गांड पीछे की तरफ उभरी हुई लग रही थी। बाल गीले थे और पीठ पर लटक रहे थे। मैं सच में बहुत हॉट लग रही थी। तभी राहुल सोकर आया।

वो चुपके से मेरे पीछे आया। उसने दोनों हाथ मेरी कमर पर रख दिए और मुझे पीछे से कसकर पकड़ लिया। उसका सिर मेरे कंधे पर टिक गया और उसकी साँसें मेरी गर्दन पर गर्म-गर्म लग रही थीं। उसका पूरा बदन मेरे पीछे सट गया था।

मैंने हल्के से मुस्कुराकर कहा, “गुड मॉर्निंग बेटा।” उसने मेरी गर्दन में मुँह छिपाते हुए धीमी आवाज में कहा, “गुड मॉर्निंग मम्मी।” फिर वो और ज्यादा पास आ गया। उसकी हथेलियाँ धीरे-धीरे मेरी कमर पर सरकने लगीं।

उसका लंड मेरे पेटीकोट के ऊपर से मेरी गांड पर दबाव डाल रहा था। मैंने महसूस किया कि वो पहले से ही सख्त हो चुका था। उसने मेरे कंधे पर सिर रखकर प्यार भरी तोतली-सी आवाज में कहा, “मैं बहुत प्यार करता हूँ आपको।”

मैंने कहा, “मैं भी करती हूँ बेटा।”

फिर वो बोला, “आप तो सिर्फ बेटे वाला प्यार करती हो, मैं तो आपको अपना सब कुछ मानता हूँ – माँ, बहन, टीचर, गुरु और गर्लफ्रेंड भी।”

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मैं हँसकर बोली, “तो देती हूँ ना सब प्यार, जो-जो तुम मांगते हो।”

वो तुरंत बोला, “आप सब देते हो, पर गर्लफ्रेंड वाला प्यार नहीं देती।”

और वो मुझसे और चिपक गया। पीछे से इतना सटा कि मुझे उसके लंड का पूरा एहसास होने लगा। उसका मोटा, गरम लंड मेरी गांड की दरार में दब गया था। पहले तो वो नरम-सा था, लेकिन धीरे-धीरे सख्त होने लगा। उसकी मोटाई बढ़ती गई और वो मेरी गांड के बीच में और गहराई तक दबने लगा। मैं थोड़ा सहम गई। मेरे शरीर में एक अजीब-सी कंपकंपी दौड़ गई।

मैंने हल्की आवाज में कहा, “अलग हो जा बेटा।”

लेकिन वो बोला, “हो गया ना प्यार करना? आप मुझे गर्लफ्रेंड की तरह प्यार नहीं करतीं। इसलिए आज से मैं अपनी गर्लफ्रेंड बनाऊंगा। मेरे दोस्त की बहन सौम्या तो मुझे लाइन भी दे रही है।”

सौम्या का नाम सुनते ही मैं गुस्से में बोली, “उस लड़की से दूर रहो राहुल, वो अच्छी नहीं है। वो कई लड़कों के साथ घूमती है, रात भर घर नहीं आती, कहती है दोस्त के यहाँ जा रही हूँ लेकिन होटल में लड़कों के साथ होती है।”

वो तुरंत बोला, “फिर आप मुझे मत रोका करो। मैं किसी को भी दोस्त नहीं बनाऊंगा।”

मैं चुप हो गई। वो समझ गया कि मैं चुप हूँ यानी इशारा है। वो और ज्यादा चिपक गया। अब उसने दोनों हाथ आगे लाकर मेरे पेट को मजबूती से पकड़ लिया। उसकी हथेलियाँ मेरे नाभि के ठीक नीचे टिकी थीं। फिर धीरे-धीरे उसकी एक उंगली मेरी नाभि में घुस गई। वो उंगली को अंदर-बाहर करने लगा, नाभि के चारों ओर घुमाने लगा। मेरे शरीर में बिजली-सी दौड़ गई।

मेरी साँसें तेज हो गईं। छाती तेजी से ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी उंगली नाभि में गहराई तक जा रही थी और बाहर निकलते वक्त मेरी त्वचा पर हल्का दबाव डाल रही थी। मैंने आँखें बंद कर लीं। शरीर में सिहरन होने लगी। मेरी कमर अनजाने में थोड़ी पीछे की ओर झुक गई, जिससे उसका लंड मेरी गांड में और गहराई तक दब गया। अब वो पूरी तरह खड़ा हो चुका था – मोटा, सख्त और गरम। उसकी नसें उभर आई थीं और वो मेरी गांड की दरार को दबाते हुए फड़क रहा था।

उसकी साँसें मेरे कान के पास गरम-गरम पड़ रही थीं। मेरे कानों में उसकी तेज साँसों की आवाज गूंज रही थी। मेरे निप्पल सख्त हो गए थे और ब्लाउज के कपड़े के नीचे से महसूस हो रहे थे। नीचे पैंटी में गीलापन बढ़ने लगा। मेरी चूत में हल्की-हल्की जलन होने लगी। मैं भी अब पागल होने लगी थी।

तब तक उसका लंड पूरा खड़ा और मोटा हो चुका था, जो मेरी गांड के बीचों-बीच दब रहा था। वो अब धीरे-धीरे अपना लंड मेरी गांड की दरार पर रगड़ने लगा। उसकी गरम साँसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं। मैं होश खोने लगी थी। मेरी साँसें तेज़ हो गई थीं और धीरे-धीरे मैंने अपना गांड उसके लंड की तरफ पीछे को धकेलना शुरू कर दिया।

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तभी उसने अपने बरमुंडे को नीचे सरका दिया। उसने अपना मोटा, खड़ा लंड हाथ में पकड़ा। मेरी पेटीकोट को ऊपर उठाया। मैंने अंदर पेंटी नहीं पहनी थी, इसलिए मेरी चूत बिल्कुल नंगी और गीली उसकी नज़रों के सामने आ गई। उसने मुझे थोड़ा आगे की तरफ झुकाया। मेरी कमर पर हाथ रखकर मुझे स्थिर किया। फिर उसने अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर सेट किया। लंड का गरम सुपारा मेरी चूत की फुदकती हुई लिप्स को छू रहा था।

एक जोरदार धक्का मारा। उसका पूरा मोटा लंड एक ही झटके में मेरी चूत के अंदर समा गया। “आह्ह्ह… ओह्ह्ह…” मेरे मुंह से तेज़ सिसकारी निकल गई। चूत की दीवारें अचानक फैल गईं और लंड की मोटाई से पूरी तरह भरी हुई महसूस हो रही थी। वो रुक गया एक पल के लिए, फिर जोर-जोर से धक्के देने लगा। हर धक्के के साथ मेरी गांड हिल रही थी। उसकी थपथपाहट कमरे में गूंज रही थी।

अब उसने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर मेरी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से सहलाना शुरू किया। मैंने खुद ब्लाउज के हुक खोल दिए। ब्रा के अंदर से चूचियां बाहर निकालीं, लेकिन ब्रा में दिक्कत हो रही थी। मैंने जल्दी-जल्दी ब्लाउज और ब्रा दोनों उतार फेंके। अब मेरी नंगी, भारी चूचियां लटक रही थीं और हर धक्के के साथ उछल रही थीं। उसने दोनों चूचियों को जोर से पकड़ा और मसलने लगा। उसकी उंगलियां मेरे निप्पल्स को चुटकी कसकर खींच रही थीं।

मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी। उसका लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। चूत से रस टपक रहा था और उसकी जांघों तक बह रहा था। “आह्ह… राहुल… ओह्ह… कितना जोर से… आह्ह…” मैं सिसकार रही थी। वो गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मार-मारकर चोद रहा था। हर थप्पड़ से मेरी गांड लाल हो रही थी। “मम्मी… कितनी टाइट है आपकी चूत… आह्ह… मजे आ रहे हैं…” वो भी उत्तेजना में बोल रहा था।

करीब दस मिनट तक ऐसे ही जोरदार धक्के चलते रहे। उसकी सांसें तेज़ हो गईं। अचानक वो रुक गया। उसने मेरी कमर को कसकर पकड़ा और सारा माल मेरी चूत के अंदर उड़ेल दिया। गरम-गरम रस की धारें मेरी चूत की दीवारों पर पड़ रही थीं। “आह्ह्ह… ले लो मम्मी… मेरा रस…” वो कराहते हुए बोला। फिर उसने मेरी गांड पर कई हल्के-हल्के किस करने शुरू कर दिए।

मैं धीरे से घूमी, सीधी हुई और उसके होंठों को चूसने लगी। वो भी मेरे होंठ चूस रहा था। हमारी जीभें एक-दूसरे से लिपट रही थीं। फिर उसने मेरी चूचियों को सहलाते हुए निप्पल्स को मुंह में लिया और जोर से चूसने लगा। मैं उसकी पीठ पर हाथ फेर रही थी। तभी रिश्तेदार का फोन आ गया। मैंने जल्दी से ब्लाउज और साड़ी ठीक की, कपड़े पहने और बात करने लगी। आधे घंटे तक बात हुई।

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फोन रखते ही राहुल फिर से चक्कर लगाने लगा। इस बार उसने मुझे बेडरूम में ले जाकर बेड पर लिटाया। मेरी साड़ी ऊपर की, पेटीकोट का नाड़ा खोला और फिर से अपनी चूत में लंड डाल दिया। अब वो अलग-अलग पोजिशन में चोद रहा था। पहले मैं घुटनों के बल थी। वो पीछे से घोड़ी बनाकर जोर-जोर से धक्के मार रहा था। उसका लंड हर बार गहराई तक जा रहा था। “आह्ह… राहुल… और जोर से… ओह्ह… मम्मी की चूत फाड़ दो…” मैं चिल्ला रही थी।

फिर उसने मुझे पीठ के बल लिटाया। मिशनरी पोजिशन में मेरी टांगें अपने कंधों पर रखीं और गहराई तक धक्के मारने लगा। मेरी चूचियां हर धक्के के साथ उछल रही थीं। “मम्मी… आपकी चूचियाँ कितनी मुलायम हैं… चूसूँ?” वो बोला और मेरे निप्पल्स को मुंह में लेकर जोर से चूसने लगा। मैं उसकी पीठ पर नाखूनों से खरोंच रही थी। “आह्ह… हाँ बेटा… चूस… जोर से… ओह्ह…”

कई राउंड चले। हर बार वो अलग-अलग तरीके से चोदता। कभी मैं ऊपर थी। उसकी गोद में बैठकर उछल रही थी। उसका मोटा लंड मेरी चूत को पूरी तरह भर रहा था। “राहुल… तेरा लंड कितना मोटा है… पूरी चूत भर देता है… आह्ह…” मैं बोल रही थी। वो नीचे से तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। आखिर में वो फिर से मेरी चूत में झड़ गया।

उस दिन के बाद से मैं रोज चुदती हूँ और मजे ले रही हूँ। कई बार सोचती हूँ कि सही है, मेरा बेटा किसी गलत लड़की के चक्कर में न फंसे, इसलिए चुद जाती हूँ। फिर कभी लगता है ये गलत है। वासना की आग कम नहीं होती और चुदाई के बिना रह नहीं पाती। अब आप ही बताओ दोस्तों, मैं क्या करूँ?

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