बारिश में भीगी चूत सर ने क्लास में चोदी

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Office class chudai sex story: नाम शिल्पा यादव हैं। सबसे पहले मैं अपने बारे में आप लोगों को बता दूँ। मैं हरियाणा के यमुनानगर की रहने वाली हूँ। मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से बिलॉन्ग करती हूँ। मेरे फादर जॉब करते हैं। मेरी माँ एक हाउसवाइफ हैं। मेरी बड़ी सिस्टर की मैरिज को चार साल हो गए हैं। मेरे से छोटा एक भाई है जो अभी कॉलेज में पढ़ रहा है।

मेरी हाइट पाँच फीट छह इंच है। मेरा रंग साफ़ गोरा है। अब स्टोरी शुरू करते हैं। बात कुछ पाँच साल पहले की है यानी कि २००९ की। मैं कंप्यूटर सीखने के लिए सेंटर जाती थी। सेंटर पर कई सर और मैडम थे। उनमें से कुछ-कुछ एक दूसरे से गंदे इशारे और बातें करते थे।

जिस सर की मैं बात कर रही हूँ उनकी उम्र करीब २२-२३ साल की थी। उनका नाम अनिरुद्ध था। उन्हें कंप्यूटर की बहुत गहरी नॉलेज थी। कोई भी इश्यू हो, वो फौरन गलती पकड़ लेते थे। उनका रंग साँवला था। उनका पेट थोड़ा बाहर आया हुआ था। सर का फैमिली बैकग्राउंड बहुत सॉलिड था। वो सिर्फ टाइम पास के लिए ही ये जॉब करते थे।

उनसे बाकी के सर और मैडम बहुत डरते थे क्योंकि वो थोड़े गुस्सेवाले थे। वो जॉब के साथ-साथ आगे की स्टडी भी करते थे। जब वो क्लास लेते तो क्लासरूम में सन्नाटा छा जाता था। कोई शोर नहीं करता था। सब चुपचाप जो बताया जाता वो कर लेते थे।

मुझे वहाँ आठ महीने हो गए थे। एक दिन सर का फोन आया कि वो आधा घंटा लेट आएँगे। मैंने सर को चिढ़ाने के लिए जानबूझकर एक हार्ड मिस्टेक निकालकर रखी थी। मैं अक्सर उन्हें इस तरह हैरान करती थी। लेकिन वो फट से जवाब दे देते थे। जब सर आए तो मैंने उन्हें वो मिस्टेक दिखाई। उन्होंने दूसरी ही मिनट में उसे पकड़ लिया।

मैं हँस पड़ी। उन्होंने मेरी ओर देखा। मुझे लगा कि वो मेरी टी-शर्ट के उभार को गौर से देख रहे थे। मेरे बदन में एक ठंडी सी लहर दौड़ गई। वो ऊपर से नीचे तक महसूस हुई। सर भी हँस पड़े। मैं थोड़ी सी डर गई थी। इसी वजह से मैं अगले दो दिन क्लास नहीं गई।

तीसरे दिन सुबह नौ बजे मेरे फोन पर रिंग आई। मैंने फोन उठाया। “हेल्लो।” “किससे डर गई हो, मेरे से या अपनी गलती पकड़े जाने से…!” सामने अनिरुद्ध सर ही थे। मैंने कहा, “नहीं सर, ऐसी बात नहीं है। मैं बाहर गई थी। कल से जरूर आऊँगी सेंटर पर।”

“ठीक है, यह मेरा नंबर है। कुछ काम हो तो।” सर ने आखिरी वाक्य ऐसे बोला जैसे उसमें ढेर सारी वासना भरी हुई हो। मुझे लगा कि शायद यह मेरा भ्रम ही है। क्योंकि आज तक सर ने कभी कोई गंदी बात नहीं की थी।

दूसरे दिन मैं सेंटर पर गई। अनिरुद्ध सर आए तो मुझे देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने स्टाफ वाले केबिन से ही मुझे मैसेज किया। अपनी खुशी जताई। अब सर मुझे नियमित एसएमएस करने लगे थे। कभी जोक्स भेजते। कभी शायरी। कभी-कभी माइल्ड डबल मीनिंग भी।

उनकी शायरी दिल वाली होती थी। मैं भी कभी-कभी उन्हें शायरी रिप्लाई कर देती थी। सर के मैसेज रोज पचास से ऊपर होने लगे थे। मैंने उनका नाम बदलकर लड़की का कर दिया था मोबाइल में। ताकि कोई शक ना कर सके।

और एक दिन तो सर ने हद ही कर दी। उन्होंने एक गंदी शायरी भेजी। मैंने उस पूरे दिन कोई रिप्लाई नहीं किया। शाम को साढ़े आठ बजे उनकी कॉल आई। मैंने ऊपर के कमरे में छिपकर कॉल उठाई। “क्या बात है शिल्पा, तुम रूठ गई क्या?”

“नहीं सर, लेकिन ऐसे मैसेज से मुझे प्रॉब्लम हो सकती है।” “ठीक है, मैं नहीं भेजूँगा। लेकिन प्लीज कॉन्टैक्ट मत छोड़ो। मुझे चैन नहीं आता।” सर अब खुलकर फ्लर्ट करने लगे थे। मैं भी उन्हें धीरे-धीरे पसंद करने लगी थी।

वो अब मुझे अपनी लाइफ की बहुत सी चीजें शेयर करने लगे थे। उन्होंने बताया कि उनका पहला अफेयर उनकी मामा की बेटी के साथ ही था। वो मुझे मेरे बॉयफ्रेंड के बारे में भी पूछते थे। मैंने कहा कि मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है।

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अक्सर वो मस्ती में कहते, “मुझे बना लो ना फिर।” मैं हँसकर उनकी बात टाल देती थी। लेकिन होनी तो होनी होती है और होके रहती है।

ऐसा ही कुछ उस दिन हुआ। मैं घर से निकल चुकी थी और रास्ते में ही बिन मौसम की बरसात हो गई। ऊपर से मैं हलके रंग की टी-शर्ट और अंदर काली ब्रा पहनी थी। मैं आधे से ज्यादा भीग गई थी। मेरी टी-शर्ट शरीर से चिपक गई थी। मेरे स्तन साफ़ दिख रहे थे।

कैसे करके मैं सेंटर पहुँची। वहाँ देखा तो लाइट नहीं थी और एक-दो सर बाहर घूम रहे थे। वो लोग मेरी ओर बड़े ही अलग भाव से देख रहे थे। मेरे बूब्स जो बाहर छलक रहे थे, उनके ये भाव आने ही थे। तभी अनिरुद्ध सर दौड़ते हुए आए और उन्होंने वो दोनों सरों के सामने देखा। वो दोनों वहाँ से खिसक लिए।

सर ने मुझे देखा और हँस पड़े। “आज छुट्टी कर लेती, वैसे भी तुम्हारी बैच का कोई नहीं आया है अभी तक। मैं क्लास में मक्खियाँ ही मार रहा था। और अगर कोई आया भी तो लाइट नहीं है।” मैंने कहा, “फिर मैं जाती हूँ घर वापस।” सर ने कहा, “बारिश में और भीगने का इरादा है क्या। बारिश कम हो लेने दो, मैं तुम्हें अपनी बाइक से लिफ्ट दे दूँगा।”

इतनी बात करके हम लोग क्लास में जा बैठे। सर ने सही कहा था, वहाँ कोई भी नहीं था। ऊपर से क्लास का एक कोना अंधेरे की वजह से पूरा डार्क था। सर मेरे साथ ही बेंच पर बैठे और मुझे देखने लगे। “शिल्पा, तुम सच में मस्त दिखती हो।” मैंने शर्म से अपना मुँह नीचे किया।

और आज तो तुम्हारा बदन भीगने के बाद कयामत बना हुआ है…! सच में किसी की भी गलती नहीं है अगर वो तुम्हें देखता रहे। सर की तारीफ से मेरी चूत गीली होने लगी थी अब। सर बिना रुके बोलते रहे। “काश मेरी एक गर्लफ्रेंड होती तुम्हारे जैसी!” अब मैंने उनकी ओर देखा और हँस पड़ी।

और मेरे हँसने से जैसे सर के अंदर हिम्मत का दरिया फूट निकला। उन्होंने मुझे अपनी ओर खींचकर अपने होंठ मेरे होंठों से लगा दिए। एक पल के लिए तो मुझे जैसे कुछ पता ही नहीं चला। मेरे होंठों को जैसे सर ने जादू किया था, वो उनके साथ हो गए थे। मैंने मुश्किल से सर का माथा अपने से दूर किया। “सर कोई देख लेंगे, प्लीज।”

“शिल्पा, आई लव यू यार, मैं सच्चे दिल से तुम्हें चाहता हूँ…!” मेरे पास सर की बात का कोई जवाब नहीं था। मैंने मुड़कर दरवाजे की ओर देखा और फिर सर की ओर देखा। “कोई नहीं आएगा इधर, और आया तो हमें कदमों की आहट से खबर हो जाएगी।” इतना कहते ही उनके होंठ वापस मेरे होंठों पर आ गए। वो मेरे होंठ चूस रहे थे खींच-खींचकर।

मैं पहले तो कुछ नहीं कर रही थी लेकिन फिर मेरा बदन भी सर के साथ हो लिया। मैंने भी उनके बाल अपने हाथ में पकड़े और उन्हें खींचकर मैं उनके किस को साथ देने लगी। सर का हाथ मेरे बूब्स पर आ गया और वो उसे जोर से दबाने लगे। यह मेरा पहला स्पर्श था मर्द का अपने बूब्स के ऊपर। मुझे बहुत ही हॉट फील हो रहा था पूरे बदन के अंदर।

सर ने मेरे दोनों चुंचों को मस्ती से मसला और फिर उनका हाथ मेरी जांघों को सहलाने लगा। तभी किसी के कदमों की आहट हुई। सर फट से उठकर बेंच के सामने खड़े हो गए। आनेवाला व्यक्ति प्यून था। “सर, बड़े साहब ने कहा है कि सेंटर पर आज छुट्टी रख देंगे।” अनिरुद्ध सर बोले, “ठीक है बाबू, सर को बोलो बारिश रुक लेने दो जरा फिर हम निकलेंगे।”

“सर, बड़े साहब तो कहके निकल गए हैं। और साथ में दूसरे टीचर लोग भी निकल गए हैं। मुझे ही सेंटर को लॉक करना है।” यह सुनते ही सर की आँखें चमक उठीं। वो बोले, “एक काम करो बाबू, चाबी मुझे दे दो। मैं लॉक कर दूँगा।”

“वैसे भी मैं सुबह में सबसे पहले आता हूँ।” बाबू हमारी ओर देखने लगा। सर उसके कंधे पर हाथ रखके उसे बाहर ले गए। शायद उसे खर्चा-पानी देकर सर ने भगा दिया वहाँ से। एक मिनट में सर अंदर आए और बोले, “अब किसी के आने का कोई डर नहीं है। अब सेंटर में हम दोनों ही हैं।”

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मेरा दिल अपनी एक धड़कन भूल गया। मैं समझ नहीं पा रही थी कि यह मेरे लिए सही था या गलत। सर वापस मेरी ओर आए और उन्होंने फिर से मेरे होंठों को अपने कब्जे में ले लिया। मेरी निपल्स अकड़ने लगी थीं अब तो। सर का हाथ वापस मेरी जांघ पर आया, मुझे पूरे बदन में गर्मी चढ़ने लगी थी।

सर ने जैसे ही जांघ के बीच में हाथ डाला मैं तो जैसे उछल ही पड़ी। सर मेरी योनी यानी की चूत को सहला रहे थे मेरी जींस के ऊपर से ही। मैं उत्तेजित हो गई थी और मेरे होंठ पर भी गर्मी होने लगी थी। मेरे होंठ काँपने लगे थे अब।

सर ने मेरी ओर देखा और बोले, “शिल्पा, क्या तुम अभी तक वर्जिन हो?” मैंने हाँ में सर हिलाया। सर को तो जैसे बड़ी लॉटरी लगी हो। वो मुझे गले से लगाकर मेरे गाल और होंठों को जोर-जोर से चूमने लगे। “शिल्पा आज का दिन तुम अपनी जिंदगी में हमेशा याद रखोगी।”

सर के स्पर्श से अब मैं भी हॉट हो चुकी थी। सर ने अब धीरे से मेरी टी-शर्ट को ऊपर किया और मेरी मदद से उसे उतार फेंका। उन्होंने मुझे बेंच पर खड़ा किया और मेरी जींस की बटन भी खोल दी। मेरी जींस उतारते ही मुझे बहुत शर्म महसूस होने लगी। मैंने अपने दोनों हाथों से अपना मुँह ढँक दिया।

सर ने हँसकर कहा, “शिल्पा शरमाओ मत, कभी ना कभी तो इसे उतरना ही था…!” और फिर उनके हाथ पैंटी के ऊपर घूमने लगे। जहाँ पर योनी का छेद होता है वहाँ पर वो सहलाने लगे।

पता नहीं कैसे लेकिन मेरी चूत से पेशाब आने लगा था, मैं वो आठ-दस बूंदों को अपनी पैंटी के ऊपर देख रही थी। सर ने अब धीरे से पैंटी की पट्टी को पकड़ा और उसे नीचे खींचा। मेरी चूत के बालों के बीच में मेरी चूत को देखकर वो हँस पड़े। “शिल्पा तुम बहुत हॉट और सेक्सी हो। आई लव यू…..”

इतना कहकर उनके होंठ मेरी चूत पर आ गए। वो मेरी चूत को कुत्ते की तरह जीभ निकालकर चाटने लगे। मुझे तो जैसे हाई फीवर हो गया था। मेरे बदन के एक-एक भाग में जैसे आग लगा दी गई थी। सर ने अपनी जीभ जब चूत के छेद में डाली तब तो मैं उड़ने लगी थी जैसे।

सर के हाथ मेरी गांड को सहला रहे थे और वो जबान से मेरी चूत के एक-एक हिस्से को चाट रहे थे। वो चूत के छेद में कभी अपनी जबान डालते थे और कभी ऊपर के बालों को अपने मुँह में लेकर उन्हें खींचते थे। मुझे यह सब क्रियाओं से इतना मजा आ रहा था कि जिसकी कोई हद ही नहीं है। मैं उड़ने लगी थी बिना पंखों के ही।

सर मेरी चूत को दो-तीन मिनट और ऐसे ही चूसते रहे और फिर उन्होंने खड़े होकर मुझे नीचे बेंच पर बिठा दिया। सर ने अब अपनी पैंट को खोला और शर्ट भी निकाल दिया। वो मेरे सामने बनियान और चड्डी में थे। फिर उन्होंने धीरे से अपनी चड्डी निकाली। बाप रे सर का लंड कितना काला था!

क्योंकि वो साँवले थे इसलिए उनका लंड कोयले की माफिक काला था। वो खड़ा था और उसका सुपाड़ा खुल चुका था। मैंने देखा कि लंड के ऊपर की चमड़ी नीचे आ चुकी थी। सर ने मुझे बेंच पर ही टाँगें खोलने के लिए कहा। “शिल्पा अपनी एक टाँग को इधर की बेंच पर दूसरी को उधर की बेंच पर रख दो।”

मेरे ऐसा करने की वेट किए बिना ही वो खुद मेरी टाँगों को सेट करने लगे। अब मेरी चूत खुली थी उनके सामने। सर ने अपने लंड को अपने हाथ से पकड़ा और उसे मेरी चूत के ऊपर घिसने लगे।

उनका लंड बहुत ही गर्म था। मुझे बहुत ही मजा आ रहा था उनके लंड को मेरी चूत के ऊपर घिसने से। सर ने फिर मेरे होंठों को अपने होंठों से जोर से लगाया और नीचे एक हल्का झटका दिया।

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“उईईइ माँ मर गई रेईईईईईईस्सस्सस….सररररररर….बहुत दर्द हो रह्हाआआआअ हैं…!” मेरी चीख निकल पड़ी। होंठों को होंठों से हटाने के चक्कर में मुझे हल्की खरोंच भी आ गई। सर ने मुझे कंधों से पकड़ लिया और बोले, “शिल्पा एक मिनट में ही दर्द मजे में बदल जाएगा। आराम से करूँगा, कोई दर्द नहीं होगा डार्लिंग।”

सर अब धीरे-धीरे अपने लंड को मेरी चूत में आगे-पीछे करने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे चूत में लोहे की जलती सलाख को पेल दिया गया हो। मेरी दीवारें तन गई थीं और हर हल्की सी हरकत से तेज दर्द की लहर उठ रही थी। सर अभी भी बहुत धीरे-धीरे लंड को अंदर से बाहर और फिर बाहर से धीरे से अंदर कर रहे थे।

जैसा उन्होंने कहा था, मुझे कुछ देर बाद मजा भी आने लगा। सर ने मेरी ओर देखा। मैंने अपने दाँतों के तले होंठों को दबाया हुआ था। “शिल्पा, अब कैसा है दर्द?” मैंने सर को थोड़ा हिलाया और दर्द कम होने का जवाब दिया।

और दूसरे ही पल सर लंड को अब पूरा चूत में डालकर निकालने लगे। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे लंड मेरे पेट के साथ टकराया जा रहा हो। सर अपने पेट को आगे-पीछे कर रहे थे और मेरी चूत के अंदर लंड को जोर से धकेल रहे थे। मुझे अब पूरा मजा आने लगा था।

मैं अपने हाथों को पीछे करके बेंच पर टिका दिया। सर अब मेरी चूत को ठोक रहे थे जोर-जोर से। मुझे बड़ा मजा आने लगा था। मैं “आह आह” करते हुए अपनी चूत की चुदाई कर रहे मेरे साँवले सर को देख रही थी। अनिरुद्ध सर के मुँह से भी “आह आह” निकल रही थी क्योंकि शायद मेरी चूत बहुत टाइट थी।

सर पाँच मिनट तक मुझे चोदते रहे और फिर उन्होंने अपना लंड मेरी चूत से निकाला और बोले, “शिल्पा बेंच के ऊपर उल्टी बैठ जा ना।” मैं डर गई कि सर कहीं गांड ना मारें मेरी। लेकिन मैं उल्टी हो गई और अपनी गांड को ऊपर उठाया।

सर ने अपने हाथ में थोड़ा थूक लिया और मेरी चूत पर मला। फिर अपने लंड को सेट करने लगे। लंड सेट होते ही मैंने मुंडी हिलाई। और सर ने एक करारे प्रहार से चूत को भर दिया।

उस वक्त मुझे जो संतोष मिला वो दुनिया में किसी और चीज से नहीं मिल सकता था। सर की गति फिर से बढ़ी और वो मुझे जोर-जोर से चोदते रहे। उनके हाथ मेरी कोमल गांड को सहला रहे थे और उनका लंड मेरी चूत को खरोच रहा था।

इस अवस्था में तो उनका लंड चूत की गहराई तक घुस रहा था और मेरा मजा जैसे दुगुना हो गया था। सर मेरी चूत को ऐसे ही रगड़ते रहे और फिर उनके मुँह से एक जोर की आह निकली। उनके लंड की नाली से ढेर सारा गर्म पानी निकला और मेरी चूत में भर गया।

सर ने आखिरी दो झटके लगाए और पानी पूरा अंदर निकाल दिया। मुझे उस चरमसीमा का मजा अभी तक याद है। सर ने जब लंड चूत से निकाला तो वो बहुत खुश थे, जैसे उन्होंने वर्जिन चूत नहीं चोदी हो बल्कि हिमालय को लंड से उठा लिया हो….!

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