बॉस ने पति के सामने बीवी की चूत फाड़ी

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Boss fucked wife sex story, Pati ke malik se chudai sex story, Bur faad chudai sex story: मेरा नाम प्रियदर्शिनी है। मैं 28 साल की मस्त मौला लड़की हूँ। मेरी शादी बहुत हैंडसम मर्द से हुई थी। सभी लड़कियों की तरह मेरे भी अरमान थे कि मेरा पति मुझे छककर चोदे और जवानी का भरपूर मजा दे।

मेरे हसबैंड का नाम विष्णु है। उनका लंड 7 इंच का है। इसी लंड से रोज मेरी चूत की कुटाई करते हैं। हसबैंड मुझे पेल पेलकर चूत से पानी निकाल देते हैं। उनकी इस अदा से मैं उनको कुछ ज्यादा ही प्यार करती हूँ।

मुझे नहीं मालुम था कि मेरी खूबसूरती एक बड़ी मुसीबत बन जाएगी। मैं एक 5 फुट 5 इंच लंबी, सुंदर चेहरे वाली मस्त मौला लड़की थी। मैं बहुत गोरी तो नहीं थी पर मेरे चेहरे में बड़ी चमक थी। जवानी के रस से मेरा चेहरा सूरज की तरह दमकता था।

मेरी आँखें बड़ी-बड़ी और खूबसूरत थीं। मेरी नाक सीधी और नुकीली थी। मेरे ओंठ गुलाबी और मोटे थे। सब कुछ इतना सही गठन वाला था जैसा खूबसूरत लोगों में होता है। मेरा फिगर 34-28-36 का था। कमर इतनी पतली कि हाथ में आ जाती थी। और मेरे बड़े-बड़े दूध ऐसे थे कि देखते ही मर्दों के लौड़े में आग लग जाती थी।

सब मुझे चोदने के सपने देखते थे। हर मर्द जो मुझे देखता था, उसके दिमाग में बस यही आता था कि मुझे कैसे पेला जाए। मैं किसी को भैया भी कह देती थी तो वो तुरंत खुद को मेरा सैया समझने लगता था। पता नहीं क्यों मेरे साथ ऐसा होता था।

मेरे हसबैंड के बॉस भी मेरी इन दिलकश अदाओं से बच नहीं पाए। मैं हल्की सांवली थी पर मेरा बदन भरा-भरा और बेहद सेक्सी था। जब भी कोई मेहमान आता था, मैं रोज पिंक कलर की लिपस्टिक लगाती थी।

विष्णु के बॉस अक्सर हमारे घर आते रहते थे। मैं उनके लिए चाय-नाश्ता लेकर जाती थी। धीरे-धीरे उनका आना-जाना इतना बढ़ गया कि मैं समझ ही नहीं पाई कि वो मुझे चोदने के मूड में आ चुके हैं।

एक दिन विष्णु और उनके बॉस हमारे घर आए। मैंने दोनों को डिनर सर्व किया। खाना खाने के बाद दोनों पीने लगे। बॉस धीरे-धीरे मेरे पास आकर सोफे पर बैठ गए। वो मुझे दूसरी नजरों से देख रहे थे। मैं उनके सामने पिंक कलर की साड़ी और ब्लाउज में थी।

साड़ी का पल्लू थोड़ा सा सरक गया था। आगे से मेरा ब्लाउज काफी गहरा कटा हुआ था। मेरे मस्त 34 इंच के दूध आधे से ज्यादा नजर आ रहे थे। ब्लाउज के बीच से गहराई साफ दिख रही थी। बॉस की नजरें बार-बार मेरी चूचियों पर टिक जाती थीं।

“प्रियदर्शिनी जी!! आप भी वाइन लीजिए!! आप तो बड़ा शर्म कर रही हैं।” बॉस ने मुस्कुराते हुए कहा।

“जी नहीं!! मैं नहीं पीती हूँ।” मैंने शर्माते हुए जवाब दिया।

“आप तो हमसे हमेशा छुपती रहती हैं। कभी ठीक से बात भी नहीं करतीं।” बॉस शिकायत करने लगे। उनकी आवाज में हल्की नशे की मस्ती थी।

“जी नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है।” मैंने कहा और थोड़ा पीछे हटने की कोशिश की।

वो और पास आ गए। उनकी सांसों से शराब की तेज महक आ रही थी। उन्होंने धीरे से मेरा हाथ पकड़ने की कोशिश की। मैं थोड़ा घबरा गई। तभी मेरे हसबैंड का फोन बज उठा। नेटवर्क की समस्या की वजह से वो बाहर चले गए।

अब कमरे में सिर्फ मैं और बॉस थे। जैसे ही विष्णु बाहर गए, बॉस ने मेरे हाथ को मजबूती से पकड़ लिया। उन्होंने मेरी कलाई को अपनी हथेली में जकड़ लिया और धीरे-धीरे अपनी तरफ खींचा। मैं विरोध करने लगी पर वो नहीं माने।

उन्होंने मेरे गाल की तरफ अपना मुंह बढ़ाया। उनकी गर्म सांस मेरे गाल पर लग रही थी। मैंने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। फिर भी उन्होंने मेरे गाल पर जोर से चुम्मा मारने की कोशिश की। उनकी होंठ मेरे गाल को छू गए। मैंने फौरन खुद को पीछे खींचा और दूर चली गई।

“देखिए सर!! प्लीज आप दूर रहिए!! आप ऐसी वैसी हरकत मत करिए!! मैं उस तरह की औरत नहीं हूँ जो बॉस का बिस्तर गर्म करके अपने हसबैंड की तरक्की करती है।” मैंने सख्त आवाज में कहा। मेरी आवाज कांप रही थी।

ये बात सुनकर वो बहुत नाराज हो गए। उनका चेहरा लाल पड़ गया और आँखों में गुस्सा साफ दिखाई देने लगा। वो बिना कुछ बोले उठे, तेजी से अपने जूते पहने और दरवाजे की तरफ बढ़ गए। जाते-जाते उन्होंने एक बार मुझे घूरकर देखा, जैसे कह रहे हों कि ये बात यहीं नहीं खत्म होगी। फिर दरवाजा जोर से बंद करके चले गए।

मैं वहीं खड़ी रह गई। दिल धड़क रहा था और हाथ-पैर ठंडे पड़ गए थे। थोड़ी देर बाद विष्णु वापस आए। मैंने उन्हें सब कुछ बता दिया – बॉस ने कैसे हाथ पकड़ा, कैसे किस करने की कोशिश की, और मैंने कैसे मना किया। विष्णु चुपचाप सुनते रहे। उनका चेहरा सख्त हो गया था, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। बस सिर हिलाकर कमरे में चले गए और बिस्तर पर लेट गए। मुझे लगा शायद वो सोच रहे हैं कि क्या करें।

अगले दिन ऑफिस में बॉस ने विष्णु को बुलाया और सीधे जॉब से निकालने का आदेश दे दिया। वजह कुछ नहीं बताई, बस कहा कि परफॉर्मेंस अच्छी नहीं है। विष्णु सदमे में घर लौटे। उनका मुंह पूरी तरह लटका हुआ था। आँखें लाल थीं और चेहरा उदास। घर आते ही वो सोफे पर बैठ गए और सिर पकड़ लिया। मैंने पूछा तो बोले, “सब खत्म हो गया। अब क्या होगा?” मैं उनके पास बैठी और हाथ पकड़कर सांत्वना देने की कोशिश की, लेकिन मेरी भी आँखें भर आईं।

अगले दिन विष्णु ने हिम्मत करके बॉस से मिलने का फैसला किया। वो ऑफिस गए और बॉस के केबिन में घुसे। बॉस कुर्सी पर आराम से बैठे थे, मुस्कुराते हुए। विष्णु ने माफी मांगी, नौकरी वापस देने की गुजारिश की। तब बॉस ने सीधे-सीधे कहा,

“विष्णु!! देख, तेरी बीबी मुझे कुछ ज्यादा ही जम गई है। उसकी बुर दिलवा दे। बस एक बार मेरे साथ सो जाए वो। फिर तुम्हारी नौकरी नहीं सिर्फ बचेगी, बल्कि अच्छा प्रमोशन भी मिल जाएगा। सैलरी बढ़ेगी, सब कुछ ठीक हो जाएगा। सोच ले।”

बॉस की बात सुनकर विष्णु स्तब्ध रह गए। वो कुछ बोल नहीं पाए। बस सिर झुकाकर बाहर आ गए। घर आते ही उन्होंने मुझे सब कुछ बता दिया। उनकी आवाज कांप रही थी। वो रोने लगे और बोले, “मैं क्या करूं? सब कुछ खत्म हो रहा है।”

मैं चुप रही। मेरी हालत खराब हो गई। दिल में डर था, गुस्सा था, और शर्मिंदगी भी। लेकिन सोचा कि अगर विष्णु की नौकरी चली गई तो हमारा क्या होगा? घर का खर्च, EMI, सब कुछ। मैंने बहुत सोचा। रात भर नींद नहीं आई। सुबह उठकर मैंने फैसला कर लिया कि बॉस से चुदने को तैयार हो जाऊंगी। विष्णु को बचाने के लिए ये कुर्बानी देनी पड़ेगी।

रविवार की छुट्टी थी। शाम को बॉस हमारे घर आ गए। मैंने दरवाजा खोला तो वो मुस्कुराते हुए अंदर आए। उनकी आँखों में वही हवस थी। मैंने उन्हें सोफे पर बिठाया और पानी दिया। अब क्या करती? उस बहनचोद का बिस्तर गर्म करना ही था। क्योंकि नई नौकरी इतनी आसानी से नहीं मिलती।

बॉस ने सीधे कहा कि वो मुझे विष्णु के सामने चोदना चाहते हैं। वो चाहते थे कि विष्णु देखे कैसे उनकी बीवी उनकी रंडी बनती है। मैंने सख्ती से मना कर दिया। बोली, “नहीं सर, ये नहीं हो सकता। अगर करना ही है तो अकेले में। विष्णु को नहीं दिखाऊंगी।”

बॉस ने कुछ देर सोचा, फिर हंसकर मान गए। बोले, “ठीक है, जैसी तू बोले। आज रात बस तू और मैं।”

मैंने उसकी हवस की भूख शांत करने के लिए फैसला किया कि खुद को पूरी तरह तैयार कर लूँ। बाथरूम में गई और दरवाजा बंद कर लिया। सबसे पहले गर्म पानी चलाया और अच्छे से नहाने लगी। साबुन हाथ में लिया और पहले अपने दूधों पर लगाया। दोनों चूचियों को गोल-गोल मलते हुए साफ किया, निपल्स पर उंगली से हल्का दबाव दिया ताकि वो साफ-सुथरे और चमकदार हो जाएँ। फिर कमर पर साबुन फैलाया, पेट को रगड़-रगड़कर साफ किया।

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अब नीचे की तरफ आई। अपनी चूत पर साबुन लगाया और उंगलियों से होठों को खोलकर अंदर तक अच्छे से साफ किया। चूत के बाल पहले से ही थोड़े बढ़े थे, इसलिए मैंने रेजर लिया और सावधानी से सारे बाल साफ कर दिए। अब चूत बिलकुल चिकनी और गोरी-गोरी दिख रही थी। फिर गांड पर साबुन लगाया, चूतड़ों को दोनों हाथों से मसल-मसलकर साफ किया। अंदर तक उंगली डालकर अच्छे से धोया। पूरा बदन साफ होने के बाद शावर से पानी बहाया और तौलिये से पोंछ लिया।

हाथ-पैरों पर वैक्सिंग पहले से कर रखी थी, लेकिन आज फिर से चेक किया कि कहीं बाल तो नहीं उगे। सब स्मूद था। बालों में अच्छा शैंपू किया, कंडीशनर लगाया और धोकर सुखाया। बाल खुले छोड़ दिए, जो मेरी कमर तक लहरा रहे थे।

अब तैयार होने का समय था। मैंने उसी तरह मेकअप किया जैसी नई दुल्हन सुहागरात पर करती है। पहले फाउंडेशन लगाया, चेहरा चमकदार और ग्लोइंग बना। फिर काजल से आँखें गहरी कीं, मस्कारा लगाया। गालों पर हल्का ब्लश और होंठों पर गहरा गुलाबी लिपस्टिक। आईब्रो पहले से थ्रेडिंग की हुई थी, वो परफेक्ट आर्क में थीं।

इतना ही नहीं, मैंने अपना शादी का जोड़ा निकाला – लाल जोड़ा जिसमें भारी एम्ब्रॉयडरी थी। ब्लाउज टाइट था, जो मेरी 34 इंच की चूचियों को और उभार रहा था। साड़ी को अच्छे से प्लेट्स बनाकर पहना। कमर पर पेटीकोट कसकर बाँधा। आभूषण भी पहने – चूड़ियाँ, बिंदी, मंगलसूत्र, सब कुछ। अच्छे से फेशियल कर रखा था, चेहरा इतना चमक रहा था कि खुद को आईने में देखकर लगा मैं सच में नई दुल्हन हूँ। मैं पूरी तरह चोदने लायक कड़क माल लग रही थी – सज-धजकर, तैयार होकर।

इधर मेरे हसबैंड का शराबी बॉस पहले से ही कमरे में था। वो व्हिस्की की एक बड़ी बोतल गटक चुका था। उसकी आँखें लाल थीं, चेहरा चमक रहा था नशे से। मुझे शराबी लोग बिलकुल पसंद नहीं थे, लेकिन आज मजबूरी थी। उस बेटीचोद से चुदना ही था मुझे।

मैं कमरे में दाखिल हुई। जैसे ही बॉस ने मुझे देखा, वो जोर से हंसने लगा। उसकी हँसी में नशा और हवस दोनों थे।

“आओ आओ प्रियदर्शिनी रानी!! मेरे पास आओ। कितनी देर से तेरा वेट कर रहा हूँ।” वो शराब के नशे में गर्दन हिलाकर बोला और हाथ बढ़ाकर इशारा किया।

मैं धीरे-धीरे उसके करीब गई और बिस्तर के किनारे पर बैठ गई। जैसे ही मैं पास आई, उसने हरकत चालू कर दी। एक झटके से मुझे अपनी बाहों में खींच लिया। उसने मेरी कमर पर हाथ रखा और मुझे अपनी तरफ खींचकर किस करने लगा। पहले गाल पर, फिर होंठों पर। बैठे-बैठे ही मुझे कसकर पकड़ लिया और अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए। वो जोर-जोर से चूसने लगा। उसकी जीभ मेरे मुंह में डालकर चाटने लगा। मैं शांति से चुसवाने लगी, विरोध नहीं किया।

शराब की तेज महक मेरे नाक में घुस रही थी। मुझे बहुत परेशान कर रही थी, लेकिन मैं क्या करती। बस आँखें बंद करके सहन करती रही।

“प्रियदर्शिनी बेबी!! आज तो आयटम लग रही हो!!” बॉस ने मेरे कान में फुसफुसाते हुए कहा और फिर से होंठ चूसने लगा।

उसके बाद उसने मेरे सीने से साड़ी का पल्लू हटा दिया। पल्लू सरककर नीचे गिर गया। अब गुलाबी कसा हुआ ब्लाउज में मेरी 34 इंच की चूचियाँ साफ दिख रही थीं। वो इतनी उभरी हुई थीं कि ब्लाउज फटने वाला लग रहा था। बॉस की आँखें उन पर टिक गईं।

उसने मुझे और कसकर पकड़ा और ब्लाउज के ऊपर से ही दोनों चूचियों को दबाने लगा। पहले हल्के से, फिर जोर-जोर से मसलने लगा। मैं दर्द और सुख के मिश्रण में “ओह्ह माँ….ओह्ह माँ…उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ….” करने लगी। मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँजने लगीं।

फिर बॉस ने मुझे धीरे से बिस्तर पर लिटा दिया। मैं पीठ के बल लेट गई। वो मेरे ऊपर झुक गया और प्यार करने लगा। पहले गालों पर चुम्मे लिए, फिर गले पर। गले की नसों पर जीभ फेरने लगा। कान में जीभ डालकर चाटा। मेरे पूरे बदन में झुनझुनी दौड़ गई। रोम-रोम सिहर उठा।

इससे पहले कभी किसी गैर मर्द का लंड नहीं चखा था। बॉस से चुदना मेरे लिए बहुत बड़ी बात थी। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। वो मुझे मुर्गी की तरह नोचने लगा। ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे बड़े-बड़े रस से लबरेज दूधों को दबाने लगा। मैं सिसियाने लगी। “आह्ह…आह्ह…” मेरी आवाज निकलने लगी।

“बेबी!! मुझे अपने दूध चुसवा दो।” बॉस ने लालची आवाज में कहा।

मैंने धीरे-धीरे ब्लाउज की हुक खोलीं। ब्लाउज खुल गया। मेरे तिकोने कबूतर बाहर आ गए। गुलाबी ब्रा में वो और भी आकर्षक लग रहे थे। बॉस को वो बहुत पसंद आए। उसने ब्रा पर हाथ फेरा, किस किया।

“तुम तो छमिया जैसी चिकनी सामान हो। आज तेरे कबूतर का सब रस चूस जाऊंगा।” विष्णु का बॉस बोला और ब्रा के ऊपर से ही मेरे स्तनों पर हाथ रखकर दबाना चालू कर दिया। वो जोर-जोर से मसल रहा था, जैसे उन्हें निचोड़कर रस निकाल लेगा।

मेरी वासना और चुदास अब तेजी से बढ़ने लगी थी। बॉस के हाथ ब्रा के ऊपर से मेरी चूचियों को मसल रहे थे, और हर मसलने से मेरे बदन में एक मीठी कंपकंपी दौड़ जाती थी। कोई भी औरत हो, अगर उसकी चूची कोई मर्द इस तरह मसले तो वो चुदासी हो ही जाएगी। मैं भी अब पूरी तरह चुदासी हो चुकी थी। मेरी सांसें तेज हो गई थीं, और चूत में गर्माहट फैल रही थी।

बॉस अब मेरे दोनों आमों को और जोर से मसलने लगा। ब्रा के पतले कपड़े के ऊपर से रगड़-रगड़कर दबा रहा था। कभी हल्के से दबाता, कभी जोर से निचोड़ता। फिर वो झुक गया और ब्रा के ऊपर से ही एक चूची को मुंह में ले लिया। मुंह खोलकर चूसने लगा, जैसे कोई बच्चा दूध पी रहा हो। उसकी जीभ ब्रा के कपड़े पर घूम रही थी, और निपल्स पर दबाव डाल रही थी। मैं “ओह्ह्ह्ह….अह्हह्हह…अई..अई..अई… उ उ उ उ उ…” करने लगी। मेरी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं, और बदन तड़प रहा था।

“बॉस जी!! मैं आपके हाथ जोड़ती हूँ, आराम आराम से मेरे अनार आप दबाओ।” मैंने सिसकते हुए कहा, क्योंकि दबाव से थोड़ा दर्द भी हो रहा था।

ये सुनकर बॉस हंस पड़ा। उसकी आँखों में शरारत और गुस्सा दोनों थे।

“उस दिन तो कह रही थी कि तू शरीफ औरत है। आज खुद ही गैर मर्द से चुदने आई है रंडी!!” बॉस ने तंज कसते हुए कहा।

और वो अब कुछ ज्यादा ही हिंसक हो गया। उसने मेरे 34 इंच के दूधों को दोनों हाथों से कसकर पकड़ा। ब्रा को एक तरफ सरका दिया और सीधे एक चूची को मुंह में डाल लिया। मस्ती से चूसने लगा, जैसे सालों से भूखा हो। जीभ से निपल्स को घुमाता, चाटता, और जोर-जोर से चूसता। कामवासना में आकर उसने मेरे दूध पर हल्के से दांत गड़ा दिए। दर्द और मजा दोनों एक साथ हो गया। मैं पागल होने लगी। “सी सी सी सी..” मैं सिसकारियां भरने लगी, और कमर ऊपर उठाने लगी।

बॉस ने ब्रा की हुक पीछे से खोल दी और ब्रा को पूरी तरह उतार फेंका। अब मैं ऊपर से पूरी नंगी हो गई थी। मेरे बड़े-बड़े दूध हवा में लहरा रहे थे। बॉस ने मुझे अपनी बाहों में भर लिया और अपनी औरत की तरह चूसने-चाटने लगा। एक चूची मुंह में लेकर चूसता, दूसरी को हाथ से मसलता। कभी दोनों को एक साथ दबाता, कभी जीभ से निपल्स को चाटता। इस दौरान कब मैं शरीफ औरत से चुदक्कड़ औरत बन गई, मुझे पता ही नहीं चला। अब मेरे अंदर सिर्फ चुदाई की आग थी।

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अब बॉस ने मेरे दोनों हाथ पकड़े और ऊपर उठा दिए। मेरी बगलें पूरी तरह खुल गईं। मैंने अंडरआर्म्स को अच्छे से साफ कर लिया था – बिलकुल चिकना और सुगंधित। बॉस मेरे सेक्सी सांवले जिस्म के एक-एक भाग को तबीयत भरके देख रहा था। उसकी नजरें मेरी बगलों पर टिक गईं।

फिर वो झुक गया और अपनी जीभ लगा लगाकर रगड़-रगड़कर मेरी अंडरआर्म्स चाटने लगा। पहले एक बगल को, फिर दूसरी को। जीभ से पूरी तरह चाट रहा था, जैसे कोई कुत्ता चाटता है। मैं उसकी रंडी बनने लगी। क्योंकि ऐसा गदर तो विष्णु ने कभी नहीं मचाया था। आज तक किसी मर्द ने मेरे अंडरआर्म्स नहीं चाटे थे, लेकिन बॉस को मैं कुछ ज्यादा ही पसंद आ गई थी।

वो कुत्ता मेरे दोनों हाथ ऊपर उठाकर अंडरआर्म्स किसी चोदू कुत्ते की तरह चाट रहा था। मैं अपनी गांड उछाल रही थी, और चूत में और ज्यादा गर्मी महसूस हो रही थी।

“चाट बहन के लौड़े!!! और चाट इसे!!” मैं भी जोश में आकर कहने लगी।

बॉस वासना से भर गया। उसने अचानक मेरे दोनों गालों पर 2-4 जोरदार चांटे ताड़-ताड़ मार दिए। गाल जलने लगे, लेकिन उस दर्द में भी एक अजीब सा मजा था। फिर वो फिर से अंडरआर्म्स चाटने लगा। मैं जोश से भर गई।

मैंने खुद उसकी गर्दन पकड़ी और अपने मुंह पर लगा लिया। उसके होंठ चूसने लगी। मैंने भी उसे जोर-जोर से चूसकर जन्नत दिखा दी। जीभ अंदर डालकर चाटी, होंठ काटे, और चूस-चूसकर उसे पागल कर दिया।

“रंडी!! तेरे अंदर बड़ी आग है। साली आज तेरी चूत और गांड दोनों मारूंगा।” बॉस ने गर्म सांसों में कहा।

“तो बेटीचोद चोद ना!! बातों में क्यों टाइम खराब कर रहा है।” मैं भी किसी छिनाल की तरह बोली।

बॉस के ऊपर अब चूत का भूत पूरी तरह चढ़ गया। उसने मेरी एक चूची फिर से पकड़ी और मुंह में लेकर चूसने लगा। अच्छे से पीने लगा, जैसे दूध निकाल रहा हो। जीभ से निपल्स को घुमाता, चूसता, और कभी हल्के से काटता। ऐसा करने से मुझे बड़ी संतुष्टि मिली। मैं अब आराम से उसे पिलाने लगी, अपनी कमर उठाकर चूची उसके मुंह में और गहराई से डाल रही थी।

बॉस की हवस अब पूरी तरह जाग चुकी थी। उसकी आँखें लाल हो गई थीं और सांसें तेज चल रही थीं। वो मेरे दोनों 34 इंच के कसे-कसे दूधों को दोनों हाथों से पकड़कर मसल-मसलकर दबाने लगा। पहले हल्के से दबाता, फिर जोर-जोर से निचोड़ता। मेरी चूचियाँ उसके हाथों में दबकर आकार बदल रही थीं। वो मुंह में एक चूची लेकर चूसने-पीने लगा। जीभ से निपल्स को घुमाता, चाटता और जोर से चूसता, जैसे दूध निकाल रहा हो। दूसरी चूची को हाथ से मसलता रहा।

मेरे निपल्स बहुत सेक्सी थे। सांवले बदन पर काली-काली निपल्स कितनी आकर्षक लग रही थीं। चूचक काले रंग के चमकदार थे और उनके चारों ओर बड़े-बड़े काले गोले थे, जो मेरे दूधों को और भी मस्त माल बनाते थे। बॉस बार-बार उन्हें देखकर और ज्यादा उत्तेजित हो रहा था।

बॉस का लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चुका था। उसकी पैंट में साफ उभार दिख रहा था। वो मुझे और जल्दी-जल्दी चूसने लगा। पूरे 15 मिनट तक मेरे बूब्स से खेलता रहा। कभी हाथ से दबाता, कभी मुंह में लेकर चूसता। कभी दोनों चूचियों को एक साथ दबाकर निचोड़ता, कभी निपल्स को हल्के से काटता। मेरी सिसकारियाँ बढ़ती जा रही थीं।

“अपनी फुद्दी दिखा छिनाल!! मैं भी देखूं तेरा भोसड़ा कितना सुंदर है???” बॉस वासना में आकर गरजते हुए बोला। उसकी आवाज में लालच साफ झलक रहा था।

मैंने धीरे-धीरे साड़ी को कमर से खोला। साड़ी सरककर नीचे गिर गई। फिर पेटीकोट की डोरी खींचकर खोल दी। अंत में पेंटी को उतारा और साइड में रख दिया। अब मैं नीचे से पूरी नंगी थी।

“ले देख ले बेटीचोद!!” मैं बोली और दोनों पैर फैलाकर खोल दिए। मेरी चूत पूरी तरह उसके सामने थी।

मैं कोई सूखी-साखी लड़की नहीं थी। मेरा जिस्म हट्टा-कट्टा और तंदुरुस्त था। बदन मांस से भरा-पूरा था। इस वजह से मेरा भोसड़ा भी बेहद मांसल और गोश्त से भरा हुआ था – गद्देदार, मुलायम और आमंत्रित करने वाला।

सांवली होने की वजह से मेरी चूत ब्राउन कलर की दिख रही थी। चूत के होठ मोटे और भरे हुए थे, और क्लिटोरिस थोड़ा उभरा हुआ था। बॉस ने उसे देखा तो कुछ देर तक घूरता रहा, मजा लेता रहा। उसकी आँखें चमक रही थीं। फिर वो झुक गया और जीभ लगाकर मेरी चूत चाटने लगा।

मैं उसे पिलाने लगी। जैसे ही उसकी जीभ मेरे चूत के होठों पर लगी, मैं “आआआअह्ह्ह्हह…..ईईईईईईई….ओह्ह्ह्….अई..अई..अई…..अई..मम्मी….” करने लगी। क्योंकि मेरे हसबैंड का बॉस साला कुछ ज्यादा ही ठरकी निकल गया था।

वो मेरी बुर को काट-काटकर जीभ निकाल-निकालकर चाटने लगा। जिस तरह लोग अंदर का खोया खाते हैं, उसी तरह वो मेरी चूत का रस चूस रहा था। जीभ अंदर डालकर घुमाता, क्लिटोरिस को चाटता, होठों को चूसता।

“बॉस!! आप जरा धीरे-धीरे मेरी चूत पीजिये, लगती है…….ओह्ह्ह्….अई..अई—” मैं बोली, क्योंकि तेज चाटने से दर्द और मजा दोनों हो रहा था।

पर वो गांडू माना ही नहीं। और तेज हो गया। जल्दी-जल्दी मेरी चूत को मुंह लगाकर खाने-पीने-चूसने लगा। मैं बिस्तर पर उछलने लगी। अपनी कमर और पेट ऊपर-ऊपर उठाने लगी। पैर कांप रहे थे।

वो आज मेरी बुर का सारा रस पी लेना चाहता था। ऐसे पागलों की तरह जीभ निकाल-निकालकर चूस रहा था कि मैं क्या बताऊँ। मेरी सांवली सलोनी बुर के होठों को खोल-खोलकर उसने अंदर तक जीभ डाली और रस चूसा। मैं इसी दौरान एक बार जोर से झड़ गई। मेरी चूत से गरम रस निकला, जो बॉस ने देसी घी की तरह चाट लिया। उसने सब पी लिया और मुंह चाटा।

“बॉस!! अब आप मुझे चोदकर रंडी बना दो। जल्दी पेलो मुझे।” मैंने जोश में आकर कहा।

वो बड़ी जल्दबाजी में उठा। अपनी पैंट और शर्ट खोली। बनियान उतारी, अंडरवियर नीचे किया। उसका लौड़ा पहले से ही बह रहा था – प्रीकम से गीला और खड़ा।

“पहले लौड़ा चूस छिनाल!!” वो बोला और बिस्तर पर लेट गया।

मैं उसके पैरों के बीच बैठ गई। उसके 10 इंच के लौड़े को हाथ में पकड़ लिया और जल्दी-जल्दी फेंकने लगी। बॉस को आनन्द मिलने लगा। वो “आह्ह…” करने लगा।

उसका लौड़ा बड़ा डरावना लग रहा था, जैसे कोई नागराज। लंड की नसें बहुत तन गई थीं। एक-एक नस साफ दिख रही थी। सुपारा लाल और चमकदार था।

मैंने जीभ निकालकर पहले सुपारे को चाटा। फिर पूरा लंड जीभ से चाटने लगी। फिर मुंह में लेकर चूसना चालू कर दिया। बॉस को मजा आने लगा। मैं और ज्यादा जोश में आ गई और तेज-तेज चूसने लगी। मुंह में लेकर गहराई तक ले जाती, फिर बाहर निकालती।

बॉस को दोगुना मजा मिलने लगा। मैं अच्छे से मुंह में लेकर चूस रही थी। कभी सुपारे को जीभ से घुमाती, कभी गोलियों को चाटती।

“प्रियदर्शिनी बेबी!! मस्ती करती है तू!! ….ऊँ..ऊँ…ऊँ…उनहूँ और चूसो रानी!!” बॉस बोला। उसकी आवाज कांप रही थी।

मैं लंड को मुंह में लेकर ऊपर-नीचे सर हिलाकर चूसने लगी। लंड के छोटे से मुख को जीभ से चाटने लगी। उसकी दोनों गोलियों को हाथ से दबा-दबाकर चूसने लगी। वो पूरी तरह मस्त हो गया। उसका बदन तड़प रहा था और वो मेरे सिर पर हाथ रखकर दबा रहा था।

अब विष्णु के बॉस का लंड बिलकुल स्टील जैसा सख्त और तना हुआ दिख रहा था। वो इतना कड़ा था कि किसी भी बुर को आसानी से फाड़ सकता था। सुपारा लाल और चमकदार था, नसें फूली हुईं, और पूरा लंड मेरे रस से गीला हो चुका था।

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फिर बॉस ने मेरे दोनों पैर फैलाकर खोल दिए। वो मेरी कमर के नीचे तकिया रख दिया ताकि मेरी चूत ऊपर उठ जाए और आसानी से घुस सके। उसने अपना लंड हाथ में पकड़ा और मेरी चूत की गद्दी पर जोर-जोर से पीटने लगा। लंड का सुपारा मेरे चूत के दाने पर घिस रहा था, क्लिटोरिस पर रगड़ लग रही थी। हर पीटने से मेरी चूत में करंट सा दौड़ जाता था।

मैं “हूँउउउ हूँउउउ हूँउउउ ….ऊँ—ऊँ…ऊँ सी सी सी… हा हा.. ओ हो हो….” कहने लगी। मेरी आवाजें अनियंत्रित हो गई थीं। बॉस पीटता रहा, कभी तेज, कभी धीरे, मेरी चूत को और गर्म करता रहा। मेरी चूत से रस बहने लगा, जो उसके लंड पर चिपक रहा था।

फिर उसने लंड की नोक मेरी चूत के मुंह पर रखी और एक झटके में अंदर घुसा दिया। लंड का मोटा सुपारा मेरी चूत के होठों को फैलाते हुए अंदर चला गया। मैं “आह्ह्ह्ह!!” चिल्लाई। वो जल्दी-जल्दी चोदने लगा। धक्के छोटे-छोटे लेकिन तेज थे। मैं पेट उठा-उठाकर चुदवाने लगी, अपनी चूत को उसके लंड पर और गहराई से चढ़ाने की कोशिश कर रही थी। वो घपाघप चोदने लगा। हर धक्के में लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। मैं सी-सी करने लगी, “सी..सी..सी..” मेरी सिसकारियाँ कमरे में भर गईं।

“साली रंडी!! आज तेरी गर्मी दूर कर दूंगा!” बॉस गरजते हुए बोला। उसकी आवाज में विजय का भाव था।

वो अब चूत में तेज-तेज धक्के देने लगा। हर धक्का इतना जोरदार था कि मेरी चूत का चुंकदर हो रहा था। लंड अंदर तक जा रहा था, मेरी गर्भाशय तक छू रहा था। मैं बिस्तर पर उछल-उछलकर चुदवाने लगी। मेरी चूत उसके लंड को कसकर पकड़ रही थी।

“पेल बहनचोद और जोर से पेल!! फाड़ दे मेरी चुद्दी को!!” मैं किसी रंडी की तरह चिल्लाने लगी। अब मेरे अंदर कोई शर्म नहीं बची थी, सिर्फ चुदाई की भूख थी।

बॉस ने फिर अपना जलवा दिखा दिया। अब वो मेहनत करके अपनी गांड हिला-हिलाकर चोदने लगा। हर धक्के में उसकी गांड आगे-पीछे हो रही थी, लंड मेरी चूत में पूरी ताकत से घुस रहा था। मेरी चूत में करंट का दौड़ने लगा था। पूरे बदन में बिजली सी दौड़ रही थी। मेरी उंगलियाँ चादर को कसकर पकड़ रही थीं, पैर कांप रहे थे।

मैंने खुद बॉस के दोनों हाथ पकड़े और उन्हें अपनी 34 इंच की रसीली चूचियों पर रख दिया। वो दबाने लगा, चूसने लगा। वो मेरे ऊपर पूरी तरह लेट गया। उसका वजन मेरे ऊपर था। फिर से मेरे मुंह पर अपना मुंह टिका दिया। मेरे लब चूसने लगा। जीभ अंदर डालकर चाटने लगा। चूस-चूसकर मेरी चूत में लंड दौड़ाने लगा। मैं स्वर्ग जैसा मजा लूटने लगी।

बॉस मुझे पूरी मेहनत से चोद रहा था। कुछ देर बाद मेरी बुर से पट-पट, चट-चट की ताबड़तोड़ आवाज निकलने लगी। हर धक्के में चूत का रस बाहर छलक रहा था, और आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।

मैं किसी रंडी की तरह बिस्तर पर कमर उछाल-उछालकर चुदवा रही थी। बॉस धकाधक अपना इंजन चला रहा था। मेरी चूत को फाड़-फाड़कर उसने चबूतरा बना दिया। चूत के होठ लाल हो गए थे, सूज गए थे, लेकिन मजा इतना था कि रुकना नामुमकिन था।

उसके बाद बॉस पसीने से पूरी तरह तर-बतर हो चुका था। उसके माथे, छाती और पीठ पर पसीने की बूँदें चमक रही थीं। उसकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं, जैसे दौड़कर आया हो। वो मेरे ऊपर लेटा हुआ था, उसका वजन मुझे दबा रहा था। आखिरकार वो जोर से कराहा – “आह्ह्ह्ह्ह… साली… ले ले…” – और मेरी चूत के अंदर गहराई में झड़ गया। गरम-गरम वीर्य की धार मेरी चूत में भरने लगी। मैंने महसूस किया कि वो कितना ज्यादा निकाल रहा है – गाढ़ा, गरम और भरपूर। मेरी चूत पूरी तरह उसके वीर्य से भरी हो गई।

वो कुछ सेकंड उसी हालत में रुका रहा, लंड अभी भी मेरी चूत के अंदर था। उसकी सांसें मेरे कान के पास गर्म लग रही थीं। फिर धीरे-धीरे उसने अपना लंड बाहर निकाला। लंड बाहर आते ही मेरी चूत से वीर्य की कुछ बूँदें बहकर बिस्तर की चादर पर गिर गईं। मेरी चूत अब लाल और सूजी हुई थी, और अंदर से गरमाहट महसूस हो रही थी।

बॉस अभी भी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुआ था। उसका लंड अभी भी काफी सख्त था, वीर्य से चिपचिपा लेकिन खड़ा। उसने मुझे पलट दिया। मैं अब पेट के बल लेट गई। उसने मेरी कमर पकड़ी और मुझे घुटनों और हाथों पर खड़ा कर दिया – कुतिया की पोजिशन में। मेरी गांड ऊपर उठ गई, पूरी तरह उसके सामने। मेरी चूत से अभी भी वीर्य टपक रहा था, जो मेरी जांघों पर बह रहा था।

बॉस ने अपना अभी भी सख्त और गीला लंड मेरी गांड के छेद पर रखा। पहले सुपारे से ही रगड़ने लगा। वो मेरी गांड के छेद को हल्के-हल्के घिस रहा था, ताकि वो और ढीला हो जाए। मैं थोड़ी घबराई, क्योंकि गांड में पहले कभी नहीं लिया था। उसने अपना लंड थूक से गीला किया और फिर धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। सुपारा अंदर घुसते ही दर्द हुआ। मैं “आह्ह्ह!!” जोर से बोली, दर्द से मेरी आँखें भर आईं।

लेकिन वो रुका नहीं। धीरे-धीरे, लेकिन लगातार दबाव डालता रहा। लंड का मोटा हिस्सा मेरी गांड के टाइट छेद को फैलाते हुए अंदर जा रहा था। मैंने दांत भींच लिए, लेकिन दर्द के साथ-साथ एक अजीब सा मजा भी होने लगा। आखिरकार पूरा 10 इंच का लंड मेरी गांड में समा गया। मैं पूरी तरह भर गई थी। बॉस ने कुछ सेकंड रुककर मुझे एडजस्ट होने दिया, फिर धक्के मारने शुरू कर दिए।

पहले धक्के धीमे थे – अंदर-बाहर, अंदर-बाहर। मेरी गांड उसके लंड को कसकर पकड़ रही थी। दर्द कम होने लगा और जगह-जगह मजा बढ़ने लगा। फिर वो तेज हो गया। धक्के जोरदार होने लगे। वो मेरी कमर पकड़कर अपनी तरफ खींचता और लंड पूरी ताकत से अंदर धकेलता। मेरी गांड फाड़ते हुए चोद रहा था। हर धक्के में “पट-पट” की आवाज आ रही थी, और मेरी गांड के छेद से दर्द और सुख का मिश्रण हो रहा था।

मैं दर्द और मजा में सिसकारियां भर रही थी। “आह्ह… ओह्ह… बॉस… धीरे… आह्ह… और जोर से…” मेरी आवाज कांप रही थी। मैं अपनी कमर हिला-हिलाकर चुदवाने लगी। बॉस की एक हाथ मेरी चूत पर गया, उंगलियों से क्लिटोरिस रगड़ने लगा। अब दोगुना मजा हो रहा था – गांड में लंड और चूत में उंगलियां। मैं पागल हो रही थी। बॉस की सांसें फिर तेज हो गईं, वो और तेज धक्के मारने लगा। मेरी गांड अब पूरी तरह उसके लंड की आदी हो चुकी थी।

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