अनचुदी बहन की चूत की झिल्ली

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Bhai behan seal breaking sex story: मेरी बहन जेनी मुझसे बड़ी है। पूरा नाम तो ज़ीनत है पर हम उसे प्यार से जेनी कहते हैं।

मैं उस वक्त अठारह साल का था। पिछले कई दिनों से उसे देखकर मेरे शरीर में अजीब सा उबाल आने लगा था। वह मुझे पहले से कहीं ज्यादा आकर्षक लगने लगी थी। उसके गुलाबी होंठों पर हमेशा एक नम चमक रहती थी। नशीली आँखों में गहरी मोहकता थी। लंबे काले बाल कंधों पर लहराते थे और उसके बदन से हल्की सी मीठी महक आती थी जो मेरे दिमाग को घेर लेती थी।

तब तक तो सब कुछ ठीक था लेकिन एक दिन वह पेट के बल लेटकर शायद मैगजीन पढ़ रही थी। मैं सामने से आ गया। क्या नजारा था यार। उसकी टी शर्ट का गला थोड़ा ढीला हो गया था और उसमें से उसके दोनों स्तन आधे से ज्यादा दिख रहे थे। गोल और भरे हुए स्तन हल्के से दबे हुए थे। उनकी नरम गोरी त्वचा पर हल्की सी लाली थी। पहली बार मुझे जेनी की जवानी का पूरा अहसास हुआ।

तब मैंने उसे ध्यान से देखा तो जेनी कुछ ऐसी दिखी। गुलाबी होंठ, नशीली आँखें, लंबे बाल और गोरी बाँहें। स्लीवलेस टी शर्ट पहने होने के कारण उसकी नरम बाँहें पूरी तरह नंगी थीं। गोल गोल चूचे टी शर्ट के अंदर से साफ उभर रहे थे। पतली कमर और मोटी सी उभरी हुई गाण्ड उसके शरीर को बेहद आकर्षक बना रही थी।

अब वह मुझे अपनी बहन से ज्यादा एक सेक्सी लड़की लग रही थी। जो अभी शायद चुदी नहीं थी। मैं उसे चोदना चाहता था। फिर उसने मुझे देखा और हमेशा की तरह मुस्कुराई। मैं भी मुस्कुरा कर बाहर आ गया और सीधा जाकर बाथरूम में हस्तमैथुन करने लगा।

मैं और जेनी एक ही कमरे में सोते थे। रोज की तरह खाने के बाद हम पढ़ने के लिए कमरे में आ गए और पापा मम्मी अपने कमरे में चले गए। जेनी तो रजाई में बैठकर पढ़ रही थी मगर मेरी नजर तो उसके वक्ष पर ही अटकी हुई थी। मन कर रहा था कि अभी जाकर उसके मम्मों को जोर से दबा दूं। उसके गुलाबी होंठों को चूस लूं।

मगर मन मार कर रह गया। तभी जेनी बोली, “विमल, आज सुबह से बड़े चुपचाप से हो? क्या बात है?” मैं सकपका सा गया। कहीं इसे शक तो नहीं हो गया। “नहीं, आज सर्दी कुछ ज्यादा है, इसलिए कहीं मन नहीं लग रहा है।” मैंने जवाब दिया।

“ठीक है। मैं तो सोने जा रही हूँ। तुम भी जल्दी सो जाना।” यह कहकर वह रजाई ओढ़ कर लेट गई और मैं उसे देखता रहा। थोड़ी देर बाद जेनी सो गई और मेरी अन्तर्वासना जाग गई। अजीब सा नशा या पागलपन सवार था। सही या गलत का अहसास खत्म हो गया था।

मुझे तो बस दिख रहा था जेनी का गदराया हुआ बदन और उसकी चूत की छवि जो बचपन में एक बार देखी थी। मैं उसके पास जाकर बैठ गया और धीरे से उसके उभारों से रजाई हटा दी। उसके उभार सांसों के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे। यह देखकर मेरा लंड खड़ा होने लगा।

मुझसे रहा नहीं जा रहा था और फट भी रही थी।

मैंने रजाई को और नीचे सरका दिया। अब जेनी का पूरा निचला हिस्सा मेरे सामने था। उसकी नाईटी के ऊपरी हिस्से के तीन बटन एक-एक करके खोल दिए। हर बटन खुलते ही उसकी नरम त्वचा थोड़ी-थोड़ी दिखने लगी।

मुझे लड़कियों की नाभि बहुत पसंद है। जेनी का सपाट, चिकना और गोरा पेट मेरे सामने पूरी तरह खुल गया था। उसकी गोल, हल्की लंबी और गहरी नाभि सांस लेने के साथ-साथ धीरे-धीरे ऊपर-नीचे हिल रही थी। नाभि के अंदर हल्की सी नमी चमक रही थी।

मेरी हालत खराब हो रही थी। दिल की धड़कनें इतनी तेज हो गई थीं कि सीने में दर्द होने लगा था। साँस रुकने सी लग रही थी। मन में बार-बार खयाल आ रहा था कि अभी उसकी नाभि को चूम लूँ या उसमें अपनी उँगली डालकर घुमाऊँ।

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फिर मैं आखिरकार उसकी नाभि को सहलाने लगा। कितनी नर्म, मुलायम और गर्म त्वचा थी ज़ीनत की। एकदम फूलों की तरह कोमल। मेरी उँगलियाँ उसके पेट पर फिसल रही थीं। नाभि के गहरे छेद को छूते ही मेरे पूरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गई।

जेनी अभी भी जगी नहीं थी इसलिए मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने उसकी नाईटी के बाकी के दो बटन भी खोल दिए। अब जेनी के ऊपरी बदन पर सिर्फ गुलाबी ब्रा बची हुई थी। उस ब्रा से आधे से ज्यादा स्तन बाहर झाँक रहे थे। पूरी वक्षरेखा साफ दिख रही थी। क्या गोल और कसे हुए मम्मे थे।

मैंने हौले से उसके एक स्तन पर हाथ रख दिया मगर पहले दबाया नहीं। पहली बार किसी लड़की के मम्मे छू रहा था। उसकी नरम और गर्म त्वचा की गर्माहट मेरी हथेली में समा गई। लंड पूरे उफान पर था और पैंट के अंदर फटने को तैयार था।

तभी मेरी नज़र उसके होंठों पर गई। सुर्ख लाल अधरों पर हल्का सा रस टपक रहा था। अचानक मैंने एक हाथ से जेनी की कमर को जोर से पकड़ लिया। दूसरे हाथ से उसके चूचे को अच्छे से दबाया और उसके रसीले होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

हाय। क्या पल थे वो। जैसे इससे मीठी और मज़ेदार दुनिया में और कोई चीज नहीं थी। उसके होंठ नरम, गर्म और मीठे थे। नींद में जेनी ने भी अनायास ही मेरा साथ दिया। हम दोनों गहरे चुम्बन करते रहे। उसके होंठों की नमी मेरे मुंह में घुल रही थी।

तभी जेनी जाग गई। “क्या कर रहे हो?” वो चिल्लाई।

मगर मैंने उसे छोड़ा नहीं। मैंने सोच लिया जो करना अभी कर लो बाद मौका न मिला तो।

वह मुझे दूर हटाने लगी मगर मैं उसे जकड़े हुआ था, वो हार गई और बोली, “क्या करना चाहते हो? मैं तुम्हारी बहन हूँ।”

“तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो। बस एक बार तुम्हारी चूत देखना चाहता हूँ।”

“क्या बकवास कर रहे हो? मैं ऐसा नहीं कर सकती।”

“मैं कुछ नहीं करूँगा। सिर्फ देखूँगा, प्लीज।”

“नहीं।”

“प्लीज।”

मैंने तभी उसकी ब्रा का हुक खोल दिया। ब्रा के दोनों कप दोनों तरफ सरक गए और उसके भरे हुए मम्मे उछलकर पूरी तरह बाहर आ गए। वे गोल, भारी और दूधिया सफेद थे। उनके ऊपर हल्की सी गुलाबी नसें दिख रही थीं। मैंने दोनों हाथों से उन चूचों को मसलने लगा। उनकी नरम और गर्म त्वचा मेरी उँगलियों में फंस रही थी। जेनी को शायद मज़ा आने लगा था इसलिए उसने कोई विरोध नहीं किया।

“सिर्फ देखना, और कुछ मत करना। ओके?” जेनी बोली।

उसके भूरे चुचूक अब पूरी तरह कड़े और खड़े हो गए थे। वे सख्त होकर मेरी हथेलियों में चुभ रहे थे। ज़ीनत की बात सुनकर मेरी जान में जान आ गई।

“ओके।” अब मैंने उसके बदन से नाइटी को पूरी तरह हटा दिया। वो अधनंगी हो गई थी। उसका गोरा और चिकना बदन मेरे सामने पूरी तरह नंगा लेटा था।

मैं उसको एक बार फिर चूमने लगा। अबकी बार वो मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने उसे बिस्तर पर सीधा किया, उसके दोनों हाथों को अपने हाथ में पकड़ लिया और उसके मम्मों को चूसने लगा। मैंने एक चुचूक को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। जीभ से उसे घुमाता और हल्का-हल्का काटता भी। “आहाऽऽ… आऽऽ.. आआह… आह…।” जेनी की आहें सुनाई दे रही थी।

मैं फिर नीचे पेट तक पहुँच गया और नाभि चूमने लगा। क्या मजा आ रहा था। मेरी जीभ नाभि के अंदर घुस रही थी। मैंने उसका पजामा उतार दिया और जाँघें सहलाने लगा। मेरी उँगलियाँ उसकी नरम जाँघों की अंदरूनी त्वचा पर फिसल रही थीं।

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जेनी को मजा आने लगा था। वो अपने मम्मे खुद दबा रही थी और हल्के-हल्के कराह रही थी।

और फिर मैंने उसकी पैंटी को देखा। बस वो ही बची थी उसके दूधिया बदन पर। धीरे से मैंने उसकी पैंटी उतार दी और दुनिया की सबसे नायाब चीज मेरे सामने थी।

हल्की गुलाबी कसी हुई अनचुदी चूत। जेनी ने शर्म से आँखें बंद कर लीं। मैंने उसकी टाँगों को फैला दिया और चूत को सहलाने लगा। क्या चमक रही थी जेनी और उसकी चूत। रुई की तरह मुलायम और गर्म। तभी मैंने उसकी चूत की फाँकों को अपनी उँगलियों से अलग करके छेद को देखा और उसे छूने लगा।

“ओ नो, ऐसे मत करो।” जेनी बोली।

मगर मैं उसके छेद को सहलाता रहा। “तुमने कहा था सिर्फ देखोगे आऽऽ… आ… आह्ह्ह…।”

मैंने चूत में उँगली डाल दी। “मत करो, प्लीज।”

मैं उँगली आगे-पीछे करने लगा और जेनी आहें भरती रही। आहाऽऽ… आऽऽ.. आआह… आह… स्स्स आह। उसकी चूत अब गीली होने लगी थी और मेरी उँगली पर रस चिपक रहा था।

मैं अब उसकी चूत चाटने लगा। मेरी जीभ उसके फूलों पर घूम रही थी। जेनी पागल हो रही थी। ओ आहाऽऽ… आऽऽ… यस स्स्स आआह…।

उसकी ऐसी सिसकारियाँ सुन कर मुझे बहुत मजा आ रहा था। अब मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और जेनी के बदन को एक बार फिर चाटने लगा। होंठ, स्तन, नाभि और चूत।

कभी सोचा भी नहीं था कि जेनी को यों निपट नंगी देखूँगा मैं।

अब जेनी गरम हो चुकी थी।

मैंने जेनी की कमर के नीचे एक मोटा तकिया लगा दिया जिससे उसकी कमर ऊपर उठ गई और उसकी चूत पूरी तरह उभरकर सामने आ गई। फिर मैंने उसकी दोनों टाँगें फैलाकर कंधों की तरफ ऊपर कर दीं। अब उसकी चूत पूरी तरह खुली और फैली हुई मेरे सामने थी। उसकी चूत रस छोड़ने लगी थी। पारदर्शी और चिपचिपा रस उसके छेद से बाहर निकलकर जाँघों पर बह रहा था। चूत की फाँकें फूल गई थीं और गुलाबी रंग गहरा हो गया था जैसे लंड के लिए बेताब हो रही हो।

मैंने अपना लंड उसकी चूत से छुआ दिया।

गर्म और नरम स्पर्श से मेरे लंड की नसें फड़कने लगीं। लंड का गर्म सिरा उसकी गीली और फूली हुई चूत की फाँकों को हल्का-हल्का दबाते हुए छू रहा था। उसकी चूत से निकलता गर्म और चिपचिपा रस मेरे लंड के सिरे पर लग रहा था। जेनी ने शर्म और उत्तेजना से आँखें बंद कर लीं। उसका पूरा चेहरा लाल हो गया था और होंठ हल्के से काँप रहे थे।

मैंने जोर लगाया। लेकिन उसकी चूत बहुत ज्यादा कसी हुई थी। लंड का मोटा सिरा बस बाहर ही दब रहा था, अंदर घुसने का नाम नहीं ले रहा था। मैंने और जोर लगाया। उसकी चूत की फाँकें बहुत धीरे-धीरे फैलीं। लंड का सिरा आधा इंच भी अंदर नहीं जा पा रहा था। जेनी के माथे पर पसीना छूटने लगा।

आ…आऽऽऽ… आह… स्स्स्सा..आह।

फिर मैंने एक जोरदार झटका दिया। मेरा मोटा और कड़ा लंड उसकी चूत की झिल्ली को जोर से दबाते हुए अंदर घुसने की कोशिश कर रहा था। लेकिन झिल्ली बहुत मजबूत थी। लंड सिर्फ थोड़ा सा ही अंदर गया और फिर अटक गया। जेनी जोर से चिल्लाई। आऽऽऽऽ आआआऽऽऽऽ अह्ह्ह्हाआ…आऽऽऽ… आह।

उसके पूरे शरीर में तेज झटका लगा। उसकी आँखें फट गईं, मुँह खुला रह गया और कमर एकदम ऊपर उठ गई। टाँगें जोर से काँप रही थीं। “आह… दर्द हो रहा है… धीरे…!” वो कराह उठी।

मगर मैंने उसका मुँह बंद कर दिया। अब उसका कौमार्य भंग होने वाला था। मैंने थोड़ी देर रुककर लंड को हल्का-हल्का दबाया। लंड पूरी तरह उसके अंदर नहीं घुस पा रहा था। मैं उसके चेहरे को देखता रहा। उसके माथे पर पसीने की बूँदें थीं, साँसें बहुत तेज और भारी हो रही थीं। उसकी चूत मेरे लंड को बहुत जोर से जकड़े हुए थी।

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जब वो थोड़ी सामान्य हुई तब उसने काँपती हुई आवाज में कहा, “अब… करो… लेकिन धीरे।”

मैंने पूरा जोर लगाया। फिर भी बहुत कसी चूत थी। लंड डालने में भारी दिक्कत हो रही थी। मैंने पीछे हटकर फिर से जोर का झटका मारा। इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत की झिल्ली को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया। आआहाअ आह।

जेनी की चीख निकल गई। उसकी चूत के अंदर से हल्का खून भी निकला जो मेरे लंड पर लगा। कितनी गर्म और तंग चूत थी। बिल्कुल चिकनी लेकिन अंदर से मेरे लंड को इतनी जोर से जकड़ रही थी कि लग रहा था जैसे निचोड़ लेगी। हर बार झटका देने पर उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़ लेती थीं।

जेनी को भी मेरा लंड डलवा कर मजा आ रहा था।

उसने मुझे अपनी ओर खींच कर बदन से चिपका लिया। उसके नंगे, गर्म और भरे हुए स्तन मेरी छाती से पूरी तरह दब रहे थे। उसके कड़े चुचूक मेरी त्वचा में चुभ रहे थे। उसकी साँसें मेरे कान के पास गरम-गरम पड़ रही थीं।

मैं उसे गहरे किस करने लगा। हमारे होंठ एक-दूसरे में घुसे हुए थे, जीभें आपस में लड़ रही थीं। साथ ही मैं धीरे-धीरे झटके देने लगा। हर झटके के साथ जेनी की आह निकल रही थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी। आऽऽ… आ… आह्ह्ह…स। जेनी मजे ले रही थी मेरे लंड का।

उसने अपनी टाँगें फैलाकर मेरी कमर के ऊपर लपेट ली। अब मैं और गहरे झटके मारने लगा। हर झटके पर मेरा पूरा लंड उसकी चूत के अंदर तक धंस जाता था। जेनी तड़पने लगी। उसकी चूत से गाढ़ा, गर्म रस निकलकर मेरे लंड और चादर दोनों को गीला कर रहा था। तेज-तेज थपाके कमरे में गूंज रहे थे।

पाँच मिनट तक मैं उसे लगातार चोदता रहा। कभी धीमे तो कभी तेज झटके। जेनी की आहें अब चीखों में बदल रही थीं। उसकी चूत मेरे लंड को बार-बार जकड़ रही थी। उसका पूरा बदन पसीने से तर हो चुका था।

और फिर जेनी ढीली पड़ने लगी। उसका पूरा शरीर जोर-जोर से काँपने लगा। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को बहुत तेजी से सिकोड़ने लगीं। मैंने भी अपने लंड को आखिरी बार पूरी गहराई तक धकेला और अपना पूरा गर्म पानी उसके अंदर ही छोड़ दिया।

फिर दोनों एक ही रजाई में सो गए।

सुबह जेनी बहुत खुश लग रही थी और मैं भी।

मैंने जेनी से पूछा, “अब कब दे रही हो?”

“जब भी चाहो, मुझे चोद सकते हो।” जेनी मुस्कुरा कर बोली और मैंने उसे चूम लिया।

अब मुझे कोई गर्लफ्रेंड नहीं चाहिए। जेनी ने मुझसे अपनी कई सहेलियों को भी चुदवाया और मेरे दोस्तों को भी अपनी कई सहेलियों से मिलवाया।

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