bhai bahan sex story, chhoti bahan ko choda sex story, pehli chudai sex story, nashe me chudai sex story: मेरा नाम टुकाई है। बचपन से ही मैं थोड़ा सा बेवकूफ टाइप का रहा हूं, लेकिन जो चीज मेरे दिमाग में बैठ जाती, उसके पीछे मैं पूरी तरह पड़ जाता। घर में सब कहते थे कि मैं ज्यादा सोचता नहीं, लेकिन जो सोचता हूं वो करता हूं। जैसे जैसे उम्र बढ़ी, मेरे शरीर में अजीब अजीब से बदलाव आने लगे। सुबह सुबह लंड खड़ा हो जाता, रात को नींद में गीले सपने आते, और दिन भर मन में कुछ न कुछ उथल पुथल रहती। मैं समझ नहीं पाता था कि ये क्या हो रहा है। एक दिन मैंने अपने करीबी दोस्त को ये सब बताया, वो हंसते हुए बोला, “अबे साले, तुझे अब चुदाई का मन करने लगा है। तू बड़ा हो गया है भाई।”
मुझे चुदाई का मतलब भी ठीक से पता नहीं था। मैंने पूछा कि ये क्या होता है, तो वो बोला कि फिल्में देख, स्टोरी पढ़। फिर एक दिन उसने मुझे अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलाया, और उन्होंने फोन में भाई बहन वाली सेक्स स्टोरी दिखाई। मैंने पढ़ी तो अंदर से जैसे电流 दौड़ गया। वो कहानी में लिखा था कि कैसे एक भाई अपनी बहन को छूता है, किस करता है, फिर धीरे धीरे चोदता है, और बहन भी मजा लेती है, चीखती है लेकिन रोकती नहीं। पढ़ते पढ़ते मेरा लंड पैंट में तन गया, और मैं घर आकर पहली बार हाथ से हिलाया। उसी दिन से मेरे मन में अपनी बहन के लिए वैसा ही कुछ जाग गया। पहले कभी ऐसा नहीं सोचा था, लेकिन अब रोज सोचता।
मेरी बहन का नाम रिया है, वो कॉलेज में पढ़ती थी, उम्र उन्नीस साल की। घर में वो सिंपल कपड़े पहनती, टी शर्ट और शॉर्ट्स या पैंट। उसकी चूचियां अभी अभी अच्छी तरह फूली थीं, गोल गोल, टी शर्ट के ऊपर से उभरी हुईं। कभी कभी वो ब्रा नहीं पहनती तो निप्पल्स साफ नजर आते, जैसे कोई मुझे चिढ़ा रहे हों। मैं रोज उसे देखता, बाथरूम में नहाते हुए सोचता, या रात को उसके कमरे के बाहर खड़े होकर सुनता कि वो क्या कर रही है। लेकिन हिम्मत नहीं होती थी कुछ करने की। मैं रोज हिलाता, लेकिन मन नहीं भरता। सोचता कि काश वो भी स्टोरी वाली बहन जैसी हो, जो भाई से चुदवाती है।
फिर एक दिन मौका मिला। हमारे छोटे भाई की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई, बुखार चढ़ गया और डॉक्टर ने मुंबई ले जाने को कहा। मां बाप उसे लेकर चले गए, और घर में सिर्फ मैं और रिया अकेले रह गए। दिन भर हम घर में रहते, खाना बनाते, टीवी देखते, और रात को चाची के घर सोने जाते। लेकिन पूरा दिन अकेले होने का मतलब था कि मैं कुछ ट्राई कर सकता हूं। मैंने प्लान बनाया कि धीरे धीरे शुरू करूंगा।
पहला दिन दोपहर का समय था। हम दोनों बिस्तर पर लेटे सो रहे थे। बाहर धूप तेज थी, कमरे में पंखा चल रहा था, और रिया की नींद बहुत गहरी आती है। वो एक तरफ करवट लेकर सोई थी, उसकी टी शर्ट थोड़ी ऊपर सरक गई थी, और कमर नंगी दिख रही थी। मैं धीरे से उसके पास सरका, और अपनी उंगलियां उसकी कमर पर फेरने लगा। उसकी त्वचा इतनी नरम थी, जैसे मखमल, और गर्माहट से मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। वो हिली नहीं, तो मैंने हिम्मत बढ़ाई। धीरे से उसकी टी शर्ट और ऊपर की, अब उसकी पीठ नंगी थी। मैंने हाथ फेरा, फिर नीचे की तरफ सरकाया। उसकी पैंट के ऊपर से गांड पर हाथ रखा, दबाया थोड़ा। वो अभी भी सोई थी।
फिर मैंने पैंट के इलास्टिक में हाथ डाला, और धीरे से नीचे सरकाया। उसकी पैंटी दिख गई, सफेद रंग की, और गांड के बीच में फंसी हुई। मैंने पैंटी भी थोड़ी साइड की, और पहली बार अपनी बहन की चूत को छुआ। वो गर्म थी, हल्की नमी थी, जैसे पसीने से। मैंने उंगली से सहलाया, धीरे धीरे रगड़ा। मेरा लंड पैंट में फड़फड़ा रहा था। फिर मैंने अपना लंड निकाला, करीब छह इंच का, मोटा, और उसे उसकी चूत पर रखकर घिसने लगा। उसकी गर्माहट, नमी, सब महसूस हो रहा था, जैसे स्वर्ग। कुछ ही सेकंड में मेरा पानी निकल गया, और मैंने उसे वही छोड़ दिया। फिर सब ठीक किया और सो गया। शाम को उठे तो वो कुछ नहीं बोली, शायद पता नहीं चला। लेकिन मेरे मन में आग और लग गई।
अगले दिन सुबह का समय था। हम दोनों किचन में चाय पी रहे थे। मैंने बात छेड़ी, “रिया, कभी नशा किया है क्या तूने?” वो चौंक गई, लेकिन मुस्कुराई, “नहीं भैया, मैं तो ऐसी नहीं हूं, लेकिन सिगरेट पीने का मन तो करता है कभी कभी, देखती हूं फिल्मों में।” मेरा दिल जोर से धड़का। मैंने कहा, “तो आज ट्राई कर ले, मैं भी पीता हूं कभी कभी, मजा आएगा।” वो बोली, “नहीं नहीं, मैं तो ऐसे ही कह रही थी।” मैंने बहुत मनाया, “अरे यहां कोई नहीं है, मां पापा दूर हैं, मैं किसी को बताऊंगा नहीं, तू भी मत बताना।” वो डर रही थी, लेकिन आखिर मान गई।
हम घर के अंदर गए, दरवाजा बंद कर लिया। कमरा छोटा था, पर्दे डाले हुए, हल्की रोशनी। मैंने अपनी जेब से Gold Flake सिगरेट निकाली, और उसे दी। वो कांपते हाथों से ली, मैंने लाइटर जलाया। पहला कश लिया तो वो खांसने लगी, लेकिन हंस रही थी। फिर मैंने कहा, “चल भांग मिलाकर पीते हैं, और मजा आएगा।” वो बोली, “वो क्या है? नशा तो नहीं चढ़ेगा ज्यादा?” मैंने कहा, “थोड़ा सा चढ़ेगा, लेकिन अच्छा लगेगा, डर मत।” घर के पीछे भांग का पेड़ था, मैंने पत्ता तोड़कर लाया, सिगरेट में मिलाया, जॉइंट बनाया। हम दोनों पीने लगे। धुंआ कमरे में फैल गया, गंध अजीब लेकिन उत्तेजक।
थोड़ी देर में रिया को नशा चढ़ गया। उसकी आंखें लाल हो गईं, वो हंस रही थी बिना वजह, शरीर ढीला पड़ गया। वो सोफे पर बैठी थी, लेकिन लड़खड़ा रही थी। मैंने उसे पकड़ा, और बिस्तर पर लिटा दिया। उसकी टी शर्ट गीली हो गई थी पसीने से, चिपक रही थी शरीर से। “क्या कर रहे हो भैया?” वो हंसते हुए बोली, आवाज नशीली। मैंने कहा, “तुझे देख रहा हूं, कितनी सुंदर लग रही है, जैसे कोई अप्सरा।” वो बोली, “अच्छा तो देख लो ना, मैं क्या करूं?” मैंने धीरे से उसकी टी शर्ट ऊपर की, उसकी नाभि दिखी, फिर चूचियां। ब्रा नहीं थी, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने हाथ रखा, धीरे धीरे मसला। वो सिहर गई, “आह्ह… भैया ये क्या… गुदगुदी हो रही है… ओह्ह…”
मैंने एक चूची मुंह में ली, जीभ से चाटा, चूसा। दांतों से हल्का काटा। वो कराह रही थी, “श्श्श… भैया… ये अजीब लग रहा है… लेकिन अच्छा भी… आह्ह…” मैंने दूसरी चूची भी चूसी, हाथ से दबाया। उसका शरीर गर्म हो रहा था। फिर मैंने उसकी पैंट में हाथ डाला, पैंटी गीली थी। उंगली से चूत सहलाई, “रिया, तेरी चूत कितनी गर्म है, जैसे आग लगी हो।” वो बोली, “भैया… आह्ह… क्या कर रहे हो… हम भाई बहन हैं ना…” मैंने कहा, “अरे स्टोरी पढ़ी नहीं क्या? भाई बहन में भी मजा आता है, चोदने दे ना मुझे।” वो नशे में थी, बोली, “हां… करो… बहुत अच्छा लग रहा है… इह्ह…”
मैंने उसकी पैंट और पैंटी उतार दी। अब वो नीचे से नंगी थी। मैंने उसकी चूत को देखा, गुलाबी, गीली, हल्के बाल। जीभ रखी और चाटने लगा। वो तड़प उठी, “आआह्ह्ह… ओह्ह भैया… ये क्या… ऊंह्ह… और चाटो… श्श्श…” मैंने जीभ अंदर डाली, चाटा, चूसा। उसका रस मीठा था, बह रहा था। वो अपनी कमर ऊपर उठा रही थी, मेरे सिर को दबा रही थी। फिर मैंने दो उंगलियां अंदर डाली, अंदर बाहर करने लगा। “आह्ह… भैया… तेरी उंगलियां… कितनी मोटी… फाड़ रही हैं… ओह्ह…” वो चीख रही थी। मैंने स्पीड बढ़ाई, उसकी चूत से चिपचिप की आवाज आ रही थी।
फिर मैंने अपना लंड निकाला, वो देखकर बोली, “भैया ये कितना बड़ा है… मुंह में आएगा?” मैंने कहा, “पहले चोदूंगा, फिर चूसना।” मैंने लंड उसकी चूत पर रगड़ा, गीला किया। धीरे से धक्का दिया, आधा अंदर गया। वो सिकुड़ गई, “श्श्शीई… दर्द हो रहा है भैया… निकालो…” मैंने कहा, “बस थोड़ा सह ले, मजा आएगा।” एक जोरदार धक्का मारा, पूरा लंड अंदर। वो चीख पड़ी, “आआआह्ह्ह्ह… ईईई… फट गई मेरी चूत… भैया दर्द… आह्ह…” मैं रुक गया, उसके होंठ चूमे, गले पर किस किया, चूचियां दबाई। धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ, वो बोली, “अब हिलाओ ना… देखो क्या होता है।”
मैंने धीमे धीमे धक्के मारने शुरू किए। उसकी चूत टाइट थी, मेरे लंड को कस रही थी। “आह्ह… भैया… अब अच्छा लग रहा है… ओह्ह… और अंदर… ऊईई…” मैंने स्पीड बढ़ाई, जोर जोर से पेलने लगा। बिस्तर चरमरा रहा था, उसकी चूचियां उछल रही थीं। “रिया, तेरी चूत कितनी टाइट है, जैसे कुंवारी… चोदकर फाड़ दूंगा आज।” वो बोली, “हां भैया… फाड़ दो… मैं तेरी हूं… आह्ह… ऊंह्ह… और जोर से…” मैंने उसे घोड़ी बनाया, पीछे से डाला। उसकी गांड दबाई, थप्पड़ मारे। “आह्ह ह्ह ह्ह… भैया… जन्नत है ये… ओह्ह्ह… चोदो मुझे… तेरी बहन की चूत तेरी है…” कुछ देर बाद वो झड़ गई, कमर कांपने लगी, “उम्म्म… आह्ह्ह्ह… मर गई… पानी निकल गया… आई लव यू भैया… आह्ह…”
मैंने कहा, “अब मेरा पानी निकाल। मुंह में ले।” वो बोली, “कुछ होगा तो नहीं ना?” मैंने कहा, “नहीं पगली, नमकीन लगेगा, चूस ले।” उसने लंड मुंह में लिया, जीभ से चाटा। मैंने सिर पकड़ा, मुंह में धक्के मारे। “ग्ग्ग… ग्ग्ग्ग… गी… गों… गोग…” थोड़ी देर में मेरा पानी उसके मुंह में निकल गया। वो थूक दी, लेकिन हंस रही थी।
फिर हमने सब साफ किया। मैंने कहा, “चल नंगी होकर शादी करते हैं, जैसे बचपन में।” वो बोली, “हां भैया, करते हैं।” हमने मजाक में शादी की, फिर से चुदाई की, इस बार वो ऊपर बैठी, उछल रही थी। अब जब मन करता है हम चुदाई करते हैं। कभी मैं सोया रहता हूं तो वो मेरे लंड से खेलने लगती है।
ऐसे खत्म हुई हमारी पहली चुदाई की कहानी।
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