बिना कंडोम चोदा देसी माल को

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Village girl chudai sex story, Big boobs sex story, Desi chudai sex story, Indian pussy sex story: मेरे मित्र भार्गव की शादी थी और हम सभी दोस्त शादी के लिए उसके गांव हालियापुर गए हुए थे। दिल्ली की हॉस्टल में रंगीन मिजाज से रहने वाले लड़के गांव की लड़कियों को देखकर तो जैसे पागल से ही गए थे। उनकी चमकती आंखें, हल्की-हल्की शरमाती मुस्कान और रंग-बिरंगे लहंगे में लिपटी काया देखकर हर किसी का दिल धड़क रहा था।

लेकिन उन सब लड़कियों में सबसे भारी पीस थी भावना। भावना की उम्र कुछ इक्कीस की थी, पर उसके शरीर की भरावट और यौवन की गहराई देखकर लगता था कि वह किसी बच्चे की मां हो सकती है। उसके स्तन इतने बड़े और उभरे हुए थे कि लहंगे का ब्लाउज उन्हें मुश्किल से समेट पा रहा था। कसी हुई चोली के नीचे से उनकी गोलाई और गहराई साफ दिखाई दे रही थी। और उसकी कमर के नीचे जो नितंब फैले हुए थे, वे इतने चौड़े और मुलायम लगते थे कि चलते वक्त उनकी लहरें साड़ी के नीचे से भी साफ महसूस हो रही थीं।

शादी के मौके पर वह लड़की वालों की तरफ से थी। हालांकि यहां लड़की वाले और लड़के वाले के घर में एक मिनट का भी अंतर नहीं था, दोनों घर सटे हुए थे और आंगन साझा था।

गांव के उटपटांग रिवाजों से मुझे भी काफी फायदा पहुंच रहा था। यहां पर लड़की वाले लड़के को मेहंदी लगाने आते हैं और लड़के के दोस्त उसे मेहंदी लगाने से रोकते हैं। इसी खींचातानी और ठेलम-ठेल में मौका बनता था करीब आने का।

मैंने जानबूझकर भीड़ का फायदा उठाया। पहली बार जब भावना मेहंदी की थाली लेकर मेरे पास से गुजरी, मैंने अपना हाथ आगे बढ़ाकर उसके स्तनों के ऊपरी हिस्से पर हल्का सा रख दिया। मुलायम, गर्म और भारी एहसास ने मेरे हाथ को कुछ पल के लिए वहीं रोक लिया। उसने उस वक्त मुझे नहीं देखा, शायद भीड़ में ध्यान नहीं गया।

दूसरी बार मैंने और साहस किया। जब वह फिर से पास आई, मैंने हाथ बढ़ाकर उसके बाएं स्तन पर पूरी हथेली टिका दी। इस बार उसका शरीर मेरे हाथ के नीचे हल्का सा कांपा। उसने तुरंत मेरी ओर देखा। उसकी आंखों में पहले तो हैरानी थी, फिर समझ आ गई कि मैं क्या कर रहा हूं। उसने कुछ नहीं कहा, बस होंठों पर हल्की सी मुस्कान लाकर आगे बढ़ गई।

तीसरी बार मेरी हिम्मत कुछ कम थी, पर कामदेव का नाम लेकर मैंने फिर कोशिश की। इस बार जब वह मेरे बिल्कुल सामने आई, मैंने धीरे से लेकिन पक्के इरादे से अपना हाथ उसके दाएं स्तन पर रख दिया। मेरी हथेली उसके ब्लाउज के ऊपर से उसके निप्पल के ठीक नीचे दब गई। भावना ने इस बार मुंह फेरकर नहीं देखा, बल्कि सीधे मेरी आंखों में देखते हुए हल्के से हंस दी। उसकी हंसी में शरम भी थी और इजाजत भी।

मैं समझ गया कि भाई, दाल काली है। यहां माल तैयार है।

शादी की रस्में चलती रहीं। मेहंदी, जयमाला, फेरे, हर जगह हम दोनों की नजरें मिलती रहीं। कभी वह मुझे देखकर आंख मारती, कभी मैं उसे इशारा करता। बीच-बीच में जब मौका मिलता, मैं उसके करीब पहुंच जाता। एक बार जब सब लोग नाच रहे थे, मैंने भीड़ में उसके पीछे खड़े होकर धीरे से उसकी कमर पर हाथ रख दिया। उसने विरोध नहीं किया, बल्कि पीछे की ओर हल्का सा झुककर अपने नितंबों को मेरे लिंग पर दबा दिया। कुछ सेकंड के लिए दोनों ने उस गर्माहट को महसूस किया।

फिर रात को जब सब थोड़े थक गए, मैंने उसे एकांत में बुलाया। उसने पहले तो मना किया, पर आंखों में चमक थी। आखिरकार उसने मुझे अपना मोबाइल नंबर दे ही दिया। उसने बताया कि वह हर महीने अपनी बुआ के यहां दिल्ली में आती है।

मैंने उससे कहा, “अगली बार जब तुम आओगी तो मैं तुमको दिल्ली घुमाऊंगा।”

उस वक्त तो वह हंसकर वहां से भाग गई।

मैंने अंदर भावना के नाम की मुठ मारी और गीली पैंट के साथ ही सो गया। मैं इस देसी लड़की की चूत लेने के लिए बस एक मौके की राह देख रहा था।

मौका गांव में तो मिला नहीं इसलिए मैं अपना बिस्तर पोटला और लाचार लंड लेकर दिल्ली निकल गया। एक आस बची थी क्योंकि उसका मोबाइल नंबर अभी भी मेरे पास था।

दिल्ली आकर वही अपनी सिगरेट किताब और पोर्न मैगजीन वाली जिंदगी में मैं भावना को कब भूल गया पता ही नहीं चला। उसने दिल्ली आकर फोन किया।

उसकी पहली याद मुझे तब आई जब उस दिन दोपहर को मेरे मोबाइल के ऊपर उसका नाम आया। जी हां उसने मुझे कॉल करके बताया कि वो दिल्ली आई है अपनी बुआ के यहां।

मैंने सोचा कि बेटा कुलदीप चूत सामने से कह रही है कि आ लंड मुझे चोद। मैंने उससे पूछा क्या मुझसे मिलोगी।

उसने हां नहीं कहा बल्कि यही कहा अगर मुमकिन हुआ तो मैं मिलूंगी। मैंने फट से अपने दोस्त राकेश को फोन लगाया और उसके मयूर विहार वाले कमरे की चाभी मांगी।

लड़की मुमकिन हुआ कहे तो इसका मतलब होता है कि चूत मिलने की संभावना ज्यादा है। भावना को शाम को फोन किया और उसने दूसरे दिन सुबह मुझे अपनी बुआ के घर से दूर बुलाया।

जब मैं वहां गया तो देखा कि उसके साथ और एक लड़की भी थी। भावना ने मुझे बताया कि वो उसकी बुआ की बेटी है जिसका नाम रूपाली था।

रूपाली को अलविदा करके हम लोग पहले तो दिल्ली में खूब घूमे। मैंने उसे चाट खिलाई और मूवी के लिए पूछा।

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लेकिन शायद वो भी आज स्पेशल लंड के लिए ही आई थी क्योंकि उसने मुझे मूवी के लिए मना कर दिया। मैंने उससे कहा चलो मेरे दोस्त के रूम पर चलते हैं।

अगर उसने मना किया होता तो मैं समझ जाता कि उसे नहीं चुदवाना लेकिन उसने एक बार भी ना नहीं कहा। मैं उसे अपनी बाइक पर लेकर कमरे पर आया।

राकेश को पहले ही रिक्वेस्ट करके मैंने उसके कमरे से शराब की बोतलें और सिगरेट के बट्स हटा दिए थे। कमरा अब साफ-सुथरा लग रहा था, सिर्फ बिस्तर पर चादर बिछी हुई थी और हल्की धूप खिड़की से आ रही थी।

भावना ने कमरे में बैठते हुए मुझे पूछा तुम्हारी तो दिल्ली में काफी लड़कियों से सेटिंग होगी।

मैंने हंसकर कहा नहीं अब तक तो सिर्फ तुम पर ही दिल आया है।

वो हंसकर मुझे कंधे पर मारने लगी। उसकी हंसी में शरारत थी और आंखों में चमक।

मैंने भी मौका देखकर उसके साथ मस्ती चालू कर दी।

मैंने उसे कंधे से पकड़ा और पूरा झंझोड़ दिया। उसके भारी चूचे जैसे हवा में लहरा गए। उसकी टाइट कुर्ती के नीचे से उनकी गोलाई साफ नजर आ रही थी और वो हल्के से कांप रहे थे।

उसने मस्ती में तकिया उठाकर मेरे मुंह में दे मारा। मैंने तकिए को हटाया और उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए उसे और करीब खींच लिया।

मैंने उठकर उसे कमर से पकड़कर बिस्तर पर धीरे से डाल दिया। वो पीठ के बल लेट गई और बाल बिस्तर पर फैल गए।

और देखते ही देखते मैंने उसके सेक्सी चूचे अपने दोनों हाथों में पकड़ लिए।

मैंने पहले हल्के से दबाया, उनकी नरमी और गर्माहट महसूस की। कुर्ती के ऊपर से ही चूचों की सख्त निप्पल्स उभरकर साफ दिख रही थीं। मैंने अंगूठों से उन निप्पल्स को रगड़ा, धीरे-धीरे गोल-गोल घुमाते हुए।

भावना की सांसें तेज हो गईं। उसने आंखें बंद कर लीं और होंठों से एक लंबी आह निकली।

एक आह के साथ वो हंस पड़ी, शायद शर्म और मजे के मिश्रण से।

उसने हथियार डाल दिए जैसे कि उसका मकसद मुझसे चूचे पकड़वाने का ही था। उसने बिना हिले हुए चूचों को पकड़वाना जारी रखा।

मेरा लंड इधर मेरी हालत खराब किए हुए था। वो पूरी तरह खड़ा हो चुका था, पैंट के अंदर तड़प रहा था, जैसे बाहर निकलकर सीधा उसकी चूत में घुस जाना चाहता हो।

मैंने उसके गले पर किस किया। पहले हल्के से होंठ लगाए, फिर जीभ से उसकी गर्दन की नरम त्वचा चाटी। उसकी त्वचा गरम थी और हल्की सी महक आ रही थी, जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

फिर मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से स्पर्श किया। पहले सिर्फ छुआ, फिर धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। उसके होंठ नरम और गीले थे।

मैं कुछ आगे करता, उसके पहले ही भावना का हाथ मेरे माथे के पीछे आ गया। इस देसी लड़की ने अपने होंठ मेरे होंठों से पूरी तरह लगा दिए। वो खुद आगे बढ़ी और मुझे गहराई से चूमने लगी।

मैंने अपने दोनों हाथ उसकी कमर में डाल दिए। उसकी पतली कमर को जकड़ लिया, उसे अपनी छाती से सटा लिया। फिर मैंने उसे और जोर से चूमना शुरू कर दिया। हमारी जीभें एक-दूसरे से खेल रही थीं, लार मिल रही थी, सांसें तेज हो रही थीं।

भावना की सांसें लंबी हो गईं। वो मुझे चूमते-चूमते मेरी गर्दन वाले हिस्से में नाखून मारने लगी। उसके नाखून हल्के से दब रहे थे, दर्द और मजा दोनों दे रहे थे। मैंने भी उसके बालों में उंगलियां फेरते हुए उसे और करीब खींच लिया।

मैंने उसे कमर के ऊपर से पकड़ा और धीरे से खड़ा कर दिया। वो मेरे सामने खड़ी हो गई, आंखें बंद, होंठ सूजे हुए, सांसें फूल रही थीं।

भावना हल्के रंग की टी-शर्ट और लाल जींस पहनकर आई थी। टी-शर्ट टाइट थी, उसके चूचों की आकृति साफ दिख रही थी।

मैंने उसकी टी-शर्ट के गले वाले हिस्से से उसके चूचे दबाए। कपड़े के ऊपर से ही उनकी गर्माहट और भारीपन महसूस हो रहा था। फिर मैंने धीरे-धीरे टी-शर्ट को ऊपर की ओर खींचा और पूरा खोल दिया।

टी-शर्ट उतरते ही उसके बड़े, गोल चूचे काली ब्रा में कैद नजर आए। ब्रा थोड़ी टाइट थी, जिससे चूचे ऊपर की ओर उठे हुए लग रहे थे।

बॉलीवुड की फिल्म की तरह उसने अपने चूचे जो काली ब्रा में छिपे थे, उन्हें अपने हाथ से ढकने की कोशिश की। शरमाते हुए उसने दोनों हाथ आगे कर दिए।

मैंने उसके दोनों हाथ हटाकर उसकी ब्रा के ऊपर से चूचे दबाने लगा। ब्रा के कपड़े पतले थे, निप्पल्स सख्त होकर बाहर निकल आए थे। मैंने अंगूठों से निप्पल्स को रगड़ा, हल्के से पिंच किया। भावना की आह निकल गई, उसने पीठ पीछे की ओर झुकाई।

भावना भी अब चुदाई के रंग में रंग चुकी थी। उसकी आंखें लाल हो गई थीं, सांसें तेज, शरीर में कंपकंपी।

मेरे लंड ने भी अब चूत की खुशबू जैसे कि सूंघ ली थी। वो पैंट में फड़फड़ा रहा था, बस बाहर आने और उसकी चूत फाड़ने के लिए बेताब था।

भावना के बड़े चूचे मेरे हाथ में जैसे कि समा ही नहीं रहे थे। मैंने ब्रा के हुक खोले, ब्रा गिर गई। अब उसके नंगे चूचे मेरे सामने थे – गोल, भरे हुए, गुलाबी निप्पल्स सख्त। मैंने एक चूचा मुंह में लिया, जीभ से चाटा, चूसा। दूसरे को हाथ से दबाता रहा।

भावना अपने चूचे दबवाकर बिस्तर पर लेट गई थी। वो पीठ के बल लेटी हुई थी, आंखें बंद, मुंह से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं।

और मैंने अपने दिमाग में उसकी चूत से अपना बच्चा भी निकाल लिया था – सोच लिया था कि आज इसी देसी लड़की की चूत में अपना रस डालकर उसे पूरी तरह अपनी बना लूंगा।

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इस देसी लड़की के कड़े हुए भारी चूचे दबाते हुए मुझे जन्नत की अनुभूति होने लगी थी। उनकी नरम, गरम त्वचा मेरे हथेलियों में फिसल रही थी, निप्पल्स सख्त होकर मेरी उंगलियों से टकरा रहे थे। हर दबाव के साथ भावना की सिसकारियां निकल रही थीं, और मुझे लग रहा था जैसे मैं स्वर्ग में पहुंच गया हूं।

अब मुझसे जरा भी रहा नहीं जा रहा था। मैंने जल्दी से अपनी पैंट की जिप खोली, अंडरवियर नीचे किया और अपना खड़ा लंड बाहर निकालकर उसके सामने रख दिया। लंड पूरी तरह तना हुआ था, नसें उभरी हुईं, सुपारा चमक रहा था। भावना का मुंह खुला का खुला रह गया। उसकी आंखें फैल गईं, जैसे वो कभी इतना बड़ा और मोटा लंड देखा ही न हो।

मेरा लंड बड़ा और मोटा है। मैं यह नहीं कहता कि वो सबसे मोटा है, लेकिन वो औसत लंड से तो काफी तगड़ा और मोटा है। उसकी लंबाई अच्छी थी और मोटाई ऐसी कि हाथ में भरपूर भराव महसूस होता था।

देसी लड़की ने अपना हाथ आगे करके मेरे लंड को छू लिया। उसकी उंगलियां ठंडी थीं, लेकिन स्पर्श इतना गरम कि मुझे आह निकल गई। मजा सीधा दिमाग में चला गया।

भावना ने फिर से लंड को छुआ और इस बार उसने लंड की गोलियों को भी अपने हाथ में पकड़कर हल्के से खींचा। उसकी हथेली गोलियों को सहला रही थी, उंगलियां धीरे-धीरे मसल रही थीं। वाह, क्या मजा दे रही थी मुझे यह देसी लड़की। मेरे शरीर में करंट सा दौड़ गया।

मैंने अब उसके कपड़े पूरे निकाल दिए। पहले लाल जींस की बटन खोली, जिप नीचे की और जींस उतार दी। पैंटी भी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी भी खींचकर उतार दी। अब वो पूरी नंगी बिस्तर पर थी। मैंने उसे पलंग के ऊपर लिटा दिया। उसने खुद अपनी टांगें फैला दीं, घुटने मोड़कर, जैसे मुझे चूत में हस्तक्षेप करने की पूरी इजाजत दे दी हो। उसकी चूत की दरार साफ दिख रही थी, हल्के बालों से घिरी हुई, गीली और चमकती हुई।

मैंने अपना हाथ उसकी कमर के ऊपर से लेकर चूचों तक फेर लिया। उंगलियां चूचों को दबाती हुईं आगे बढ़ीं, फिर नाभि से होते हुए चूत की दरार तक पहुंचीं। जैसे एक लकीर सी बना दी। वाह, भावना की चूत तो पानी निकाल बैठी थी। उसकी चिकनाहट मेरे हाथों पर फैल गई, गर्म और चिपचिपी।

मुझे भावना की चूत चूसने का बेहद मन हो गया। साथ ही मुझे यह भी इच्छा हो चली कि वो मेरे लंड को मुंह में भर ले। इसलिए मैंने उसे पलटा और सिक्सटी-नाइन पोजीशन बना ली। मैं उसके ऊपर लेट गया, मेरा मुंह उसकी चूत के पास, उसका मुंह मेरे लंड के पास।

यह देसी लड़की जैसे कि मेरे लंड को चूसने में थोड़ा कतराती रही। पहले हिचकिचाई, फिर उसने लंड के सुपारे पर हल्का सा किस कर दिया। उसके होंठ नरम थे। फिर उसने सुपारा मुंह में ले लिया। मेरे तन-बदन में आग सी दौड़ गई। मैंने भी अपना मुंह उसकी चूत की दरार पर लगा दिया। अपनी दो उंगलियों से चूत के होंठों को खोल दिया।

भावना की चूत मस्त लाल-लाल थी। अंदर से पानी निकल रहा था, ऐसे लग रहा था जैसे सेब पर शबनम की बूंदें गिरी हों। मैंने अपनी जीभ चूत के होंठों पर लगाई। जैसे ही जीभ लगी, देसी लड़की की चूत में एक हजार बोल्ट का झटका लगा। उसने जोर से आह कर दी, शरीर कांप गया।

मैंने अब जीभ को चूत के अंदर डाला। जीभ से होंठों को साइड में धकेलने लगा, अंदर की गर्माहट और चिकनाहट चखने लगा।

भावना ने मेरे लंड को मुंह में आधा ले लिया। उसकी उंगलियां मेरी गोलियों पर थीं, उन्हें हल्के से मसल रही थीं। वो लंड को चूस रही थी, जीभ से सुपारे को घुमा रही थी। यह देसी लड़की मुझे बड़ा सुख दे रही थी। मैं भी अपनी तरफ से उसे भरपूर मजा देना चाहता था।

भावना ने अब लंड को थोड़ा और अंदर लिया। अब उसके मुंह में करीब तीन चौथाई लंड घुस चुका था। वो सिर आगे-पीछे करके लंड को अंदर-बाहर कर रही थी, जैसे कैडबरी की कैंडी मुंह में घुमा रही हो। उसका मुंह गर्म और गीला था, लार लंड पर बह रही थी।

मैंने अब अपनी जीभ उसकी चूत के पूरे अंदर तक दे दी। साथ ही उंगली से चूत के दाने – क्लिटोरिस – को मसलने लगा। जब मैंने दाने को सहलाया, तो इस देसी लड़की से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हुआ। वो छटपटाने लगी, कमर उठा-उठाकर हिलने लगी।

उसने मेरे लौड़े को मुंह से बाहर निकाल लिया। मैंने अपनी उंगली चूत में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा। उंगली गीली चूत में आसानी से घुस रही थी, अंदर की दीवारें सिकुड़ रही थीं।

भावना आह-आह-ओह करने लगी। वो बोली, “आज चोद दो मुझे प्लीज… मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है… आह आह आह… जल्दी अपना लौड़ा मेरी चूत के अंदर डालो प्लीज।”

मैं भी तो इसी पॉइंट की तलाश में था, जब वो अपनी चूत मरवाने के लिए बेताब हो जाए।

मैं उठा और उसकी दो टांगों के बीच में जाकर बैठ गया। भावना ने लौड़े के स्वागत के लिए अपनी चूत और भी फैला दी। उसकी टांगें पूरी तरह खुली हुई थीं, घुटने मोड़े हुए, और चूत की दरार गीली चमक रही थी, जैसे वो खुद मुझे अंदर बुला रही हो।

मैंने अपने लौड़े को हाथ में पकड़ा। सुपारा पहले से ही चिपचिपा था, नसें फूली हुईं। मैंने उसे भावना की चूत के सुपाड़े के ऊपर सटा दिया। गर्माहट और चिकनाहट सीधे लंड तक पहुंच गई।

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वो फिर बोली, “अब इतना भी ना तड़पाओ प्लीज… जल्दी इसे अंदर डालो… कब से मेरी चूत इसे मांग रही है।” उसकी आवाज कांप रही थी, आंखें बंद, होंठ काटते हुए।

मैंने लौड़े को छेद के ठीक ऊपर सेट किया। सुपारा चूत के होंठों को छू रहा था। फिर मैंने एक हल्का झटका दे दिया। देसी लड़की के छेद के अंदर लंड जाने में इतनी दिक्कत नहीं हुई जितना मैंने सोचा था। उसकी योनि पहले से इतनी गीली और तैयार थी कि मेरा लंड फट से करीब आधा उसकी चूत में घुस गया। अंदर की गर्म, नरम दीवारें लंड को जकड़ रही थीं।

भावना की आंखें बंद हो गईं। उसने जोर से सांस ली और बोली, “चोद मुझे… जोर-जोर से फाड़ दो मेरी चूत को… आज अपने लौड़े से… आह्ह।” उसकी आवाज में दर्द और मजा दोनों थे।

मैंने उसकी कमर को दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ा। फिर लौड़े की ट्रेन को चूत की पटरी पर दौड़ाना शुरू कर दिया। पहले धीरे-धीरे, फिर रफ्तार बढ़ाई। हर धक्के के साथ लंड पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। चूत की चिकनाहट से फड़फड़ाहट की आवाज आ रही थी।

भावना भी अपनी गांड को उठा-उठाकर चुदाई का बड़ा मजा ले रही थी। वो मेरे हर धक्के के साथ कमर ऊपर उठाती, लंड को और गहराई तक लेने की कोशिश करती।

वो अपने मुंह से “आह… ओह… यस्स्स्स…” की आवाजें निकाल रही थी। उसकी उंगलियां मेरी पीठ पर नाखून गाड़ रही थीं, मुझे और जोर से चोदने के लिए उकसा रही थी। मैंने भी उसकी चूत का फालूदा बनाने के लिए लंड को और जोर-जोर से पटका। हर धक्का इतना तेज कि बिस्तर हिल रहा था।

यह देसी लड़की लंड को सही तरह से चूत के अंदर लेती गई। अब मेरी इच्छा हो गई कि उसे कुतिया बनाकर पेल दूं।

मैंने उसकी चूत से लंड निकाला। अभी कमर पर हाथ रखा ही था कि वो खुद ही पलट गई। घुटनों और हाथों के बल हो गई, गांड ऊपर उठाई, चूत पीछे की तरफ। यह होता है अनुभवी लड़की को चोदने का फायदा – आपको बोलना कम और करना ज्यादा होता है।

मैंने भावना की गांड के पास से अपने लंड को अंदर की तरफ किया। सुपारा चूत के छेद पर लगा और मैंने धक्का दिया। इस पोजीशन में लंड सही तरह अंदर जा रहा था, ज्यादा गहराई तक। भावना आह कर गई, “आह्ह… कितना गहरा… और जोर से…”

अब वो अपनी गांड वापस हिलाने लगी। मैं भी अपनी कमर हिला-हिलाकर उसकी चूत लेने लगा। हर धक्के के साथ मेरी गोलियां उसकी गांड से टकरा रही थीं। चूत की चिकनाहट अब और ज्यादा हो गई थी।

दो मिनट की चुदाई के बाद अब भावना के मुंह से झाग जैसा थूक निकलने लगा। वैसा ही झाग उसकी चूत के ऊपर भी जमा हुआ था। चूत के होंठ लाल हो गए थे, सूज गए थे।

मैं जब अपना लंड उसकी चूत से निकालता था तो वो सफेद गाढ़ा झाग मुझे साफ नजर आ रहा था। लंड पर चिपका हुआ, चमकता हुआ। मैं समझ गया कि यह देसी लड़की झड़ चुकी थी। उसकी चूत सिकुड़ रही थी, कंपकंपा रही थी।

इसलिए मैंने भी उसकी चूत के अंदर अपना वीर्य निकालने की योजना बना ली। सेक्स के नशे में हम दोनों कंडोम की अहमियत जैसे भूल ही गए थे।

फिर अचानक मुझे ख्याल आया – कहीं पेट फुला लिया इसने तो गांव की बस्ती मेरी गांड मार देगी।

यह सोचकर मैंने उसकी चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया। लंड अब भी तना हुआ, चमकता हुआ। मैंने अपना लौड़ा अब उसके मुंह के आगे रख दिया और हाथ से उसका मुंह खोल दिया।

भावना ने मुंह खोलकर लंड को मुंह में ले लिया। आह, वाऊ, क्या मजा था ऐसा करने में। उसका मुंह गर्म, गीला। वो जीभ से सुपारे को घुमा रही थी, लंड को गले तक ले रही थी।

भावना अपना मुंह चलाने लगी। तेज-तेज अंदर-बाहर। मेरे वीर्य दो मिनट में ही बाहर आ गया। गरम-गरम फुहारें उसके मुंह में।

बेसिन के पास जाकर भावना ने वीर्य में तैर रहे मेरे बच्चों को गटर में बहा दिया। वो कुल्ला करके साफ होकर वापस आई।

वो नंगी ही मेरे पास आई और मुझे किस करने लगी। उसके होंठ अभी भी नम थे। हमने कपड़े पहने और मैं उसे लेकर पिज्जा खिलाने चला गया।

पिज्जा के बाद मैं इस देसी लड़की को वापस कमरे पर लेकर आ गया। अभी तो चुदाई का एक और राउंड बाकी था।

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