बॉस ने प्रमोशन के लालच में जूनियर की चूत मारी

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Promotion sex story, Junior girl fucked sex story, Office sex story, Boss fucks junior sex story, HR chudai sex story: मेरा नाम रंजन है। मैं नोएडा की कॉलोनी में रहता हूं। मैं 6 फीट 1 इंच लंबा हूं। मेरी उम्र 36 साल है। मैं देखने में कभी 26 साल का लड़का लगता हूं। मैं गुजरात की एक कंपनी में जॉब करता हूं। उस कंपनी में मैं HR हूं। सारे लोग मेरे नीचे ही काम करते हैं। मैं ही वह कंपनी संभालता हूं।

मैंने ग्रेजुएशन के बाद ही उस कंपनी को जॉइन किया था। आज तक मैं उसी में हूं। कंपनी की सारी लड़कियां मुझे बहुत लाइन मारती हैं। लेकिन मैं किसी की तरफ आंख उठाकर नहीं देखता था। मैं देखने में बहुत स्मार्ट लगता हूं।

मैंने अब तक कई लड़कियों को चोदा है और उनका माल पिया है। कंपनी की सारी अच्छी लड़कियों को चोदकर छोड़ चुका हूं। सारी लड़कियां मुझ पर जान छिड़कती हैं लेकिन मैं किसी की तरफ ध्यान नहीं देता। लड़कियां कंपनी में हमेशा चुदवाने को तैयार रहती हैं।

दोस्तों, मैं एक शादीशुदा मर्द हूं। मेरी शादी को तीन साल हो गए हैं। शादी के बाद मैं हर रोज अपनी बीवी की चुदाई से अपनी प्यास बुझाता हूं। मेरी बीवी भी बहुत लाजवाब लगती है। पहली नजर में ही मैंने उसे पसंद कर लिया था। उसी से शादी की और अब उसी की चुदाई करता हूं। लेकिन फिर भी।

रोज-रोज एक ही चूत चोदने से सेक्स में ज्यादा मजा नहीं आता। इसलिए मैं किसी न किसी को चोदने के लिए तैयार कर लेता हूं। कंपनी में एक नई लड़की आई थी। उसका नाम रूहिका था। रूहिका देखने में बहुत लाजवाब लग रही थी। उसकी चूचियां खूब बड़ी-बड़ी थीं।

रूहिका को देखते ही मैंने उसे पसंद कर लिया। इस बार तो इसी की चुदाई करनी है। रूहिका को देखकर मैंने उस दिन मुठ भी मार ली। रूहिका बहुत जोशीली और सेक्सी लगती थी। उसके मम्मे ही पूरी बॉडी में जबरदस्त लग रहे थे। रूहिका की चूचियां पीने के लिए मैं बेकरार था।

मैं रूहिका को चोदने की प्लानिंग बना रहा था। अचानक एक दिन रूहिका से मेरी मुलाकात एक चौराहे पर बाहर हो गई। कंपनी में बात करने पर सबको लग जाता था कि इनका कोई मामला है। रूहिका ने मुझे देखकर बुलाया। पानी बरस रहा था। हम दोनों पास की होटल पर चाय पीने लगे।

रूहिका को देखकर मेरा लौड़ा बहुत तेजी से खड़ा हो रहा था। अचानक रूहिका ने भी मेरे लौड़े की तरफ देख लिया। मैं तो डर गया। कहीं ये गुस्सा होकर हाथ से न निकल जाए। मैंने रूहिका को कंपनी के बारे में बताकर टॉपिक बदलने की कोशिश की।

रूहिका मेरा लौड़ा न देखकर मेरी तरफ देख रही थी। रूहिका का मेरी तरफ देखना कयामत ढा रहा था। उसके आंखों में लगा काजल मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। उसके बोलने पर उसके नाजुक होंठ ऊपर-नीचे होकर मेरे लंड पर दबाव बढ़ा रहे थे।

मन करता था कि उसके होंठों को काट-काटकर उनके सारे रस को पी जाऊं। रूहिका बहुत झक्कास लग रही थी। मैं वहां से चला आया। कुछ देर तक बात करने के बाद मैंने रूहिका से कहा कि बाद में बात करेंगे और वहां से निकल आया।

मैं घर पहुंचा तो मैंने तुरंत मुठ मारकर लौड़े को शांत किया। मेरा लौड़ा बार-बार खड़ा हो रहा था। मैंने उस दिन अपनी बीवी की खूब चुदाई की। मेरी बीवी आश्चर्य में थी। आज इतनी जोरदार चुदाई क्यों हो रही है। मेरी बीवी ने भी खूब मजे लेकर चुदवाया।

दूसरे दिन मैं जब ऑफिस में बैठा था तो उधर से रूहिका को जाते देखा। मैंने रूहिका को बुलाया। रूहिका मेरे ऑफिस के केबिन में आ गई। मैंने उसे बैठने को कहा। रूहिका बैठ गई। मैंने उससे उसकी पोस्ट पूछी। उसने अपना छोटा पद बताया।

रूहिका मुझे सर कह रही थी। मैंने कहा समझ लो मैं तुम्हारा फ्रेंड हूं। आज के बाद तुम सर नहीं रंजन बोलोगी। रूहिका ने कहा ठीक है। मेरी और रूहिका की अच्छी दोस्ती हो गई। एक दिन रूहिका के पास बैठे-बैठे।

मैंने कहा, “रूहिका मैं तुम्हारा बॉयफ्रेंड हूं।”

रूहिका बोली, “लेकिन कैसे? मैंने तो तुम्हें फ्रेंड ही माना है।”

मैंने कहा, “देखो मैं बॉय हूं और फ्रेंड भी तो बॉयफ्रेंड हो गया ना।” रूहिका हंसने लगी।

लेकिन उसे मेरी शादी के बारे में कुछ पता नहीं था। उसने मुझे अपना बॉयफ्रेंड बना लिया। लेकिन वो मुझे किस से ज्यादा कुछ करने नहीं देती थी। लेकिन मुझे तो उसकी चूत चाहिए थी। उसकी चूत को चोदने को मेरा लौड़ा बेकरार था।

मैंने रूहिका को बहुत मनाया लेकिन वो नहीं मानी। एक दिन रूहिका के घर पर कोई नहीं था। उसने मुझे फोन करके बुलाया। उस दिन संडे था। मैंने तुरंत ही उसके घर चला गया। रूहिका मेरा ही इंतजार कर रही थी। जैसे ही मैंने बेल बजाई।

रूहिका ने तुरंत ही दरवाजा खोला। मैंने रूहिका को पकड़कर एक बॉयफ्रेंड की तरह उससे मिलना शुरू किया। मैंने रूहिका को गोद में उठा लिया। कुछ देर तक उसे गोद में लिए घुमाया। फिर धीरे से उसे नीचे उतार दिया। मैंने रूहिका के गालों पर जोर का किस किया। रूहिका के गाल पर किस करते-करते।

मैंने रूहिका के होंठों को भी किस करना शुरू कर दिया। अब तक मैंने उसके होंठों पर कभी इतना गहरा, इतना लंबा किस नहीं किया था। उसके होंठ इतने नरम और गर्म थे कि बस छूते ही मेरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। रूहिका को प्रमोशन की सख्त जरूरत थी, इसलिए वह मेरी हर हरकत का साथ दे रही थी और मुझे खुश करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही थी। मैंने धीरे से अपने होंठ उसके नाजुक, गुलाबी होंठों पर रख दिए और पहले हल्के-हल्के दबाव बढ़ाते हुए किस करने लगा।

रूहिका ने मेरी आंखों में गहराई से देखते हुए धीमी, शरमाती आवाज में पूछा, “तुम मेरा प्रमोशन क्यों नहीं करवाते?”

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मैंने उसके होंठों से मुंह हटाए बिना, मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “मुझे क्या मिलेगा तुम्हारा प्रमोशन करवाने से?”

रूहिका ने थोड़ा और करीब आकर, होंठों पर हल्की सी मुस्कान के साथ कहा, “जैसा सबका होता है, वैसे ही मेरा भी करवा दो ना।”

मैंने उसकी कमर पर हाथ रखते हुए कहा, “ठीक है, लेकिन इसके बदले तुम्हें भी मेरा एक छोटा-सा काम करना होगा।”

रूहिका ने उत्सुकता और हल्की शरम के साथ पूछा, “कैसा काम? जल्दी बताओ, मैं कर दूंगी।”

मैंने उसकी आंखों में देखकर, धीरे से कहा, “तुम मुझे अपने निप्पलों को पिलाओगी… अच्छे से, जैसे कोई प्यासा बच्चा पीता है।”

रूहिका ने पहले तो आंखें नीची कीं, फिर हल्के से हंसते हुए बोली, “तुम्हारी तो नियत ही खराब है,” और मुस्कुराहट उसके चेहरे पर फैल गई।

मैंने तुरंत जवाब दिया, “बॉयफ्रेंड हूं ना तेरा… तो ये तो मेरा हक बनता है।”

इतना कहते ही मैंने रूहिका को अपनी मजबूत बाहों में पूरी तरह जकड़ लिया। उसका शरीर मेरे सीने से सट गया। रूहिका मेरी आंखों में गहरे उतरती हुई देख रही थी, जैसे कुछ कहना चाह रही हो लेकिन शब्द न निकल रहे हों। मैंने अपना लौड़ा पूरी तरह सख्त कर लिया था, जो अब मेरी पैंट में साफ महसूस हो रहा था। फिर मैंने उसके नाजुक, गर्म होंठों को फिर से चूसना शुरू किया।

उसकी दोनों पंखुड़ियों जैसी पतली, मुलायम होंठों को मैं पहले धीरे-धीरे चूस रहा था, जैसे कोई मीठी चीज का स्वाद ले रहा हो। रूहिका भी मेरे होंठों को उतनी ही जोश से चूस रही थी। जैसे ही मैं उसके निचले होंठ को हल्के से काटता, उसकी सांस रुक-रुक जाती और मेरी चूसने की स्पीड अपने आप तेज हो जाती। रूहिका कभी-कभी मेरे होंठ चूसना थोड़ा धीमा कर देती, शायद सांस लेने के लिए, लेकिन मैं तो उसके होंठों को खूब मजे लेकर, बार-बार चूस-चूसकर पी रहा था।

रूहिका की सांसें अब तेज और गर्म हो चुकी थीं। उसके सीने की धड़कन मेरे शरीर पर साफ महसूस हो रही थी। मुझे अच्छे से पता था कि अगर मैं उसे और गर्म कर दूंगा तो वह खुद-ब-खुद चुदवाने को तैयार हो जाएगी। इसलिए मैंने उसके होंठों को ही बार-बार, गहराई से चूसा, जीभ से उसके होंठों की किनारियों को सहलाया, और फिर अंदर तक जीभ डालकर खेलने लगा। रूहिका अब अपने दांतों से मेरे निचले होंठ को हल्के-हल्के काट रही थी, जैसे बदला ले रही हो। मैंने उसकी उभरी हुई चूचियों की तरफ नजर डाली और फिर और जोर से उसके होंठ चूसने लगा।

रूहिका भी पूरा साथ दे रही थी। वह मेरे होंठों को चूसते हुए अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल रही थी। मैंने धीरे से अपनी जीभ उसके मुंह में डाली और उसकी जीभ को चूसना शुरू कर दिया। हम दोनों की जीभें एक-दूसरे से लिपटकर, घूमकर, खेल रही थीं। रूहिका की सांसें अब बहुत फूल चुकी थीं। मैंने उसे और कसकर जकड़ लिया, ताकि उसका पूरा शरीर मेरे शरीर से चिपका रहे।

अब मैंने धीरे से अपना दायां हाथ उसकी चूचियों पर रख दिया। रूहिका ने बिल्कुल विरोध नहीं किया। बल्कि उसने अपनी छाती थोड़ी आगे कर दी, जैसे कह रही हो कि और दबाओ। उसका विरोध न करना मेरी हिम्मत को दोगुना कर रहा था। मैंने पहले बहुत धीरे-धीरे उसकी दोनों चूचियों को दबाना शुरू किया, हथेली से गोल-गोल घुमाते हुए। फिर, उसके होंठ चूसते-चूसते, मैंने चूचियों को जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया।

रूहिका की सिसकारियां अब धीमी से तेज और लगातार होने लगीं। वह थोड़ा तेज आवाज में “…अह्ह्ह्ह्ह्ह… स्सीईईई… अअअअअ… आहा… हा हा हा…” की सिसकारियां ले रही थी। उस दिन रूहिका ने हाफ लोअर और काली टी-शर्ट पहनी हुई थी। काले रंग की टाइट टी-शर्ट में उसकी चूचियां और भी ज्यादा उभरी हुई लग रही थीं, और वह पहले से कहीं ज्यादा सेक्सी दिख रही थी।

उसकी चूचियां इतनी उभरी हुई थीं कि टी-शर्ट के कपड़े को अंदर से धकेल रही थीं। निप्पल बाहर से ही उभरे हुए साफ नजर आ रहे थे। मैंने ऊपर से ही उसके निप्पलों को अंगूठे और तर्जनी से दबाया। निप्पल दबाते ही रूहिका का पूरा शरीर सिमट गया और उसकी चूचियां ऊपर की तरफ और उठ गईं।

मैं जानबूझकर उसे तड़पा रहा था। चूचियों को बार-बार दबाता, छोड़ता, फिर जोर से मसलता। इस तरह मैंने उसे खूब गर्म कर दिया। अब मैंने अपना बायां हाथ धीरे-धीरे नीचे उसकी चूत की तरफ बढ़ाया। पहले लोअर के बाहर से ही चूत पर हल्का सा दबाव दिया, फिर हाथ अंदर डालकर पैंटी के ऊपर से चूत को सहलाना शुरू किया। अंत में मैंने पैंटी के किनारे से हाथ डालकर सीधे उसकी गीली चूत में उंगली करना शुरू कर दिया।

रूहिका सिमटकर मुझसे और ज्यादा चिपक गई। उसकी कमर मेरे हाथ में आ गई। जैसे ही वह चिपकी, मैंने उसकी चूत में दो उंगलियां डालकर अच्छे से अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया। उसकी चूत अब पूरी तरह गीली और गरम हो चुकी थी। मैंने एक हाथ से उसकी टी-शर्ट को ऊपर की तरफ सरकाना शुरू किया। रूहिका ने खुद टी-शर्ट उतार फेंकी। अब उसका मन भी पूरी तरह चुदाई के लिए तैयार हो चुका था।

अब रूहिका सिर्फ सफेद रंग की ब्रा में मेरे सामने खड़ी थी। उसकी फूली हुई चूचियां ब्रा के अंदर से इतनी उभरी हुई लग रही थीं कि ब्रा का कपड़ा तनकर चिपका हुआ था। सफेद ब्रा में उसकी गोरी चमकदार त्वचा और गहरी दरार बहुत ही जबरदस्त और लुभावनी दिख रही थी। मैंने अपनी उंगलियां उसके पीछे ले जाकर ब्रा के हुक को खोला। हुक खुलते ही ब्रा थोड़ी ढीली हो गई। रूहिका ने खुद ही ब्रा के दोनों स्ट्रैप्स कंधों से उतारे और ब्रा को हाथों में पकड़कर मेरी तरफ देखते हुए खड़ी हो गई।

मैंने उसे उसी के पास पड़े सोफे पर धीरे से लिटा दिया। रूहिका पीठ के बल लेट गई, उसकी चूचियां अब दोनों तरफ थोड़ी फैलकर और भी आकर्षक लग रही थीं। मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को नीचे से ऊपर की तरफ उठाया, हल्के से दबाया और फिर एक निप्पल को अपने मुंह में भर लिया। मैंने पहले धीरे से निप्पल को जीभ से घुमाया, फिर होंठों से चूसना शुरू किया। रूहिका की ब्रा अब उसके हाथों में थी, लेकिन उसने उसे एक किनारे रख दिया और दोनों हाथों से मेरे सिर को अपनी चूचियों से चिपकाने लगी, जैसे कह रही हो कि और जोर से चूसो।

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मैं रूहिका की चूचियों को पीने में पूरी तरह मस्त हो चुका था। एक निप्पल को मुंह में लेकर चूसता, तो दूसरी चूची को हाथ से मसलता और निप्पल को अंगूठे से रगड़ता। चूसने में इतना मजा आ रहा था कि मैं बार-बार निप्पल को जीभ से घुमाता, दांतों से हल्का सा काटता और फिर होंठों से खींचता। रूहिका की चूचियां अब मेरे मुंह की वजह से लाल और चमकदार हो गई थीं। मैंने चूसने की स्पीड बढ़ा दी – अब तेज-तेज चूस रहा था, एक के बाद एक दोनों निप्पलों को बारी-बारी।

रूहिका की चूचियों को काटते-खींचते ही उसकी आवाज बदल गई। वह अब जोर-जोर से सिसकारियां लेने लगी – “हूँउउउ… हूँउउउ… हूँउउउ… ऊँ… ऊँ… ऊँ… सी… सी… सी… हा हा हा… ओ हो हो…”। उसकी सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। मैंने चूचियों को खूब चूसा, पीया और गर्म किया। उसकी सांसें तेज हो गईं, शरीर में कंपकंपी आने लगी।

अब मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला। मेरा सुपारा पहले से ही पूरी तरह सख्त और लाल हो चुका था। रूहिका ने उसे देखते ही आंखें बड़ी कर लीं और लपककर हाथ बढ़ा दिया। मैंने झट से अपना 10 इंच लंबा, मोटा लौड़ा उसके हाथों में रख दिया। रूहिका मेरे लौड़े के साथ खेलने लगी। वह उसे पकड़कर ऊपर-नीचे खींच रही थी, कभी टोपे को स्किन से ढक देती, कभी स्किन पीछे खींचकर टोपे को पूरी तरह बाहर निकालकर देखती। उसकी उंगलियां मेरे लौड़े पर घूम रही थीं, कभी जड़ पर दबाव देती, कभी टोपे को हल्के से मसलती। मुझे उसका ये खेल बहुत अच्छा लग रहा था, मेरा लौड़ा और सख्त हो रहा था।

मैंने अपना लौड़ा उसके मुंह के पास ले जाकर रख दिया। रूहिका ने बिना हिचकिचाहट के मुंह खोला और मेरे लौड़े को अंदर ले लिया। वह धीरे-धीरे चूसने लगी – पहले टोपे को जीभ से चाटा, फिर होंठों से चूसा। जैसे ही वह चूसने लगी, मेरा लौड़ा और बड़ा, और सख्त होने लगा। मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को झुकाकर जोर-जोर से दबाना शुरू कर दिया। रूहिका अब एक हाथ से मेरे लौड़े को पकड़कर मुठ मार रही थी, दूसरे हाथ से मेरी जांघों को सहला रही थी। वह मुठ मार-मारकर लौड़े को चूस रही थी – मुंह में गहराई तक ले जाती, फिर बाहर निकालकर जीभ से टोपे को चाटती।

रूहिका को लौड़ा चूसने में बहुत मजा आ रहा था। उसकी आंखें बंद थीं, चेहरा लाल हो चुका था। मैंने अब उसके मुंह में ही हल्के धक्के मारने शुरू कर दिए – धीरे-धीरे आगे-पीछे। रूहिका मेरा लौड़ा खा जाना चाहती थी, गले तक ले रही थी। मैंने उसे मुंह में चोदते हुए कहा कि अब लोअर निकाल दो। रूहिका ने पहले सिर्फ चूचियां पिलाने की बात की थी, लेकिन अब मैंने उसे इतना गर्म कर दिया था कि वह खुद चुदवाने को तड़प रही थी।

मैंने उसके लोअर का नाड़ा खोला और धीरे से नीचे सरका दिया। रूहिका अब सिर्फ पैंटी में मेरे सामने लेटी थी। उसकी पैंटी में गीलेपन की वजह से एक बड़ा सा गीला धब्बा साफ दिख रहा था। मेरा लौड़ा अब बेकाबू हो रहा था। मैंने पैंटी के दोनों तरफ उंगलियां डालकर उसे धीरे से नीचे खींचा और उतार दिया।

पैंटी निकलते ही रूहिका की चिकनी, गोरी, पूरी तरह साफ चूत मेरे सामने आ गई। मैंने उसकी दोनों टांगों को फैलाया। टांगें फैलते ही उसकी चूत की दोनों मोटी-मोटी फुदकियां पूरी तरह खुल गईं। चूत गीली चमक रही थी, क्लिटोरिस उभरा हुआ था, और अंदर का गुलाबी रंग साफ दिख रहा था।

चूत को देखते ही मेरे मुंह में पानी भर आया। मैंने झुककर अपनी जीभ सीधे उसकी चूत पर लगा दी। पहले जीभ से पूरी चूत को ऊपर से नीचे तक चाटा, फिर दोनों फुदकियों को बारी-बारी चाटना शुरू किया। रूहिका की चूत मुंह में रखते ही उसकी सिसकारियां तेज हो गईं। वह अपनी कमर ऊपर उठा रही थी।

मैंने चूत के दोनों टुकड़ों को बारी-बारी चूसा, जीभ अंदर डालकर अंदर तक चाटा। रूहिका ने मेरे सिर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी चूत में और गहराई से दबाया। मैं उसे पी-पीकर तड़पा रहा था। रूहिका अब अपनी चूत को खुद मसल रही थी, क्लिटोरिस को उंगलियों से रगड़ रही थी। चूत में खुजली इतनी बढ़ गई थी कि वह बार-बार कमर हिला रही थी।

मैंने उसके चूत के दाने (क्लिटोरिस) को होंठों से पकड़ा और हल्के से खींचा। जैसे ही मैंने दाने को होंठों से खींचा, रूहिका ने जोर से अपनी चूत ऊपर उठाई और चिल्लाने लगी – “…मम्मी… मम्मी… सी… सी… सी… हा हा हा… ऊऊऊ… ऊँ… ऊँ… ऊँ… उनहूँ… उनहूँ…”। उसकी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं, शरीर कांप रहा था।

मैंने रूहिका को खूब तड़पाया। उसकी चूत को जीभ से चाट-चाटकर, दाने को खींच-खींचकर, उंगलियों से अंदर-बाहर करके मैंने उसे इतना गर्म कर दिया था कि वह बार-बार कमर हिला रही थी और सिसकारियां रोक नहीं पा रही थी। अब मैंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और उसे रूहिका की गीली, लाल हो चुकी चूत पर रख दिया। मैंने सुपारे को चूत की दोनों फुदकियों के बीच में रखकर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू किया। लौड़ा ऊपर-नीचे, आगे-पीछे सरक रहा था, टोपा क्लिटोरिस पर रगड़ खा रहा था। रगड़ते-रगड़ते मेरे लौड़े का सुपारा और रूहिका की चूत दोनों ही लाल-लाल, चमकदार और गरम हो गए। उसकी चूत से रस बहकर मेरे लौड़े पर चिपक रहा था, जिससे रगड़ और चिकनी हो गई।

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रूहिका अब तड़पकर कह रही थी, “रंजन… डाल दो… बस करो ये तड़पाना… मैं सह नहीं पा रही…” लेकिन मैं अभी भी उसे और तड़पा रहा था। फिर मैंने लौड़े का सुपारा ठीक चूत के छेद पर सेट किया। एक हाथ से उसकी कमर पकड़ी, दूसरे से लौड़ा थामा और जोर का धक्का मारा। सुपारा एक झटके में अंदर घुस गया। रूहिका का शरीर सिहर उठा, उसकी आंखें बंद हो गईं। मैंने रुककर नहीं, तुरंत दूसरा और जोर का धक्का मारा। इस बार पूरा 10 इंच का मोटा लौड़ा जड़ तक उसकी चूत में समा गया।

रूहिका की चूत में लौड़ा घुसते ही वह जोर से चिल्ला उठी। “आआआअह्ह्ह्हह… ईईईईईईई… ओह्ह्ह्ह्ह्ह…. अई… अई.. अई… अई… मम्मी…!” उसकी चीख से पूरा कमरा गूंज उठा। उसकी चूत इतनी टाइट थी कि लौड़े को पहले से ज्यादा दबाव महसूस हो रहा था। रूहिका की आंखों में आंसू आ गए थे, चेहरा लाल हो गया था, और वह दर्द से कराह रही थी। उसकी चूत फट गई लग रही थी।

मैंने धीरे-धीरे लौड़ा अंदर-बाहर करना शुरू किया। पहले हल्के धक्के, ताकि उसकी चूत लौड़े की आदत डाल ले। लेकिन जल्दी ही मैंने स्पीड बढ़ा दी। अब जड़ तक पेल रहा था – पूरा लौड़ा बाहर निकालकर फिर जोर से अंदर धकेलता। रूहिका की चूत खूब दर्द कर रही थी, लेकिन धीरे-धीरे दर्द में मजा मिलने लगा। उसकी चूत अब रस से भर गई थी, और हर धक्के पर चटक-चटक की आवाज आ रही थी। मैं उसकी चूत को फाड़कर उसका भरता बना रहा था।

कुछ देर बाद रूहिका का दर्द कम हुआ और वह अब सिसकारियां मजा लेकर लेने लगी। मैंने उसकी एक टांग को कंधे पर उठा लिया और उसे थोड़ा खड़ा-सा कर दिया। इस पोजिशन में चूत और गहरी हो गई। मैंने अब जोर-जोर से चोदना शुरू किया – तेज, गहरे धक्के। हर धक्के पर मेरी जांघें उसकी जांघों से टकरा रही थीं। रूहिका की चूत की चटनी बन रही थी, रस चारों तरफ छिड़क रहा था।

रूहिका अब “…उंह उंह उंह.. हूँ.. हूँ… हूँ… हमममम अह्ह्ह्ह्हह… अई…. अई… अई…” की आवाजों के साथ चुदवा रही थी। उसकी सिसकारियां तेज होती जा रही थीं। मैंने उसकी कमर दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ी और चुदाई की रफ्तार और बढ़ा दी। लौड़ा पूरी ताकत से अंदर-बाहर हो रहा था। रूहिका की चूत अब पूरी तरह फैल चुकी थी और हर धक्के पर उसका शरीर हिल रहा था।

कुछ देर बाद मैं थक गया। मैं सोफे पर लेट गया, लौड़ा सीधा खड़ा हुआ हुआ। रूहिका की चूत की खुजली अभी भी शांत नहीं हुई थी। वह तुरंत मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने मेरे लौड़े को हाथ से पकड़ा, अपनी चूत पर सेट किया और धीरे से बैठ गई। पूरा लौड़ा फिर से अंदर चला गया। अब रूहिका जोर-जोर से उछल-उछलकर चुदवा रही थी। उसकी चूचियां ऊपर-नीचे लहरा रही थीं, मैंने उन्हें पकड़कर दबाया और निप्पलों को मसला। वह तेज-तेज उछल रही थी, हर बार लौड़ा जड़ तक अंदर जाता और बाहर निकलता। उसकी सिसकारियां अब और तेज हो गईं – “आह्ह्ह… रंजन… और जोर से… हाँ… ऐसे ही…”

मैंने उसे खूब तेज चुदाई करवाई। रूहिका की हर उछाल के साथ उसकी सिसकारियां बढ़ रही थीं। करीब 25 मिनट तक वह इसी तरह उछलती रही, मेरे लौड़े से माल निकलवाने पर मजबूर कर दिया। आखिरकार मेरी मर्जी पूरी हुई। मैंने उसे नीचे बैठाया। रूहिका ने मेरे लौड़े को हाथ में पकड़ा और मुंह में ले लिया। वह तेज-तेज चूसने लगी, जीभ से टोपे को चाटती, मुठ मारती। मैंने अपना पूरा माल उसके मुंह में गिरा दिया – गर्म-गर्म, मोटा-मोटा। रूहिका ने आंखें बंद करके सारा माल निगल लिया, आखिरी बूंद तक पी लिया।

हम दोनों नंगे ही सोफे पर लेटे रहे, सांसें तेज, शरीर पसीने से भीगा हुआ। कुछ देर बाद जब हम दोनों की सांसें सामान्य हुईं, मैंने रूहिका को अपनी बाहों में लिया और उसके माथे पर हल्का किस किया।

मैंने कहा, “रूहिका, तुमने आज जो किया, वो मैं कभी नहीं भूलूंगा। तुम्हारी मेहनत और मेरी खुशी दोनों देख ली।”

रूहिका ने शरमाते हुए मेरी छाती पर सिर रखा और बोली, “तो अब… मेरा प्रमोशन?”

मैंने मुस्कुराकर कहा, “कल सुबह ऑफिस में सबसे पहले तुम्हारा नाम सीनियर पोजिशन के लिए फॉरवर्ड कर दूंगा। टीम लीड की पोस्ट तुम्हारी। सैलरी में अच्छा इजाफा होगा।”

रूहिका की आंखें चमक उठीं। उसने मुझे जोर से गले लगाया और बोली, “थैंक यू रंजन… तुम सच में बहुत अच्छे हो। मैं तुम्हारी हमेशा खुश रखूंगी।”

मैंने उसके होंठों पर एक गहरा किस किया और कहा, “अब से तुम मेरी स्पेशल जूनियर हो… और जब भी मन करे, मुझे बुलाना।”

अब जब भी मौका मिलता है, मैं उसे चोदने जरूर जाता हूं। और ऑफिस में उसका प्रमोशन देखकर सब हैरान हैं कि इतनी जल्दी कैसे हो गया।

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