Horny gf chudai sex story, Boyfriend galiyon wali chudai sex story, Randi banakar pelai sex story: मेरा नाम सीमा है। मैं अपने बॉयफ्रेंड के घर पर मिलने गई थी। हम दोनों को चुदाई करने का बहुत मन हो रहा था। जैसे ही मैं दरवाजे से अंदर घुसी, उसने बिना एक पल गंवाए मुझे अपनी बाहों में खींच लिया। उसकी सांसें तेज थीं, आंखों में भूख साफ दिख रही थी। उसने मेरी टी-शर्ट ऊपर की और ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया। फिर ब्रा को एक झटके में नीचे खींचा और मेरी दोनों चूचियों को मुंह में ले लिया।
वो इतने जोश में था कि दांतों से हल्के-हल्के काटने लगा, फिर जोर से चूसने लगा। जैसे सालों बाद कोई चूचियां मिली हों। जीभ से निप्पल को घुमाता, चाटता, फिर दांतों से हल्का सा काटकर खींचता। मैं सिहर उठी। “आह्ह.. ओह्ह.. धीरे..!” मेरे मुंह से सिसकारी निकली, लेकिन वो रुका नहीं। एक हाथ नीचे मेरी स्कर्ट के अंदर डालकर पैंटी के ऊपर से बुर को रगड़ने लगा। उंगलियां कपड़े के ऊपर से ही सर्कल बनाती हुईं, दबाव बढ़ाती हुईं। मैंने अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी, उसकी हथेली पर दबाव डालते हुए।
वो बड़बड़ाया, “क्या मस्त चूचियां हैं तेरी साली, आज तो इन्हें निचोड़ डालूंगा।” उसकी आवाज में गर्मी थी। वो एक चूची को मुंह से चूसते हुए दूसरी को हाथ से मसल रहा था। निप्पल को जीभ से ठीक-ठीक टारगेट करके चाटता, फिर पूरी चूची को मुंह में भरने की कोशिश करता। मैंने उसके बाल पकड़ लिए, खुद को और पास खींचा। आधे घंटे तक यही सिलसिला चला। मेरी चूचियां लाल हो गई थीं, निप्पल तने हुए, संवेदनशील। हर काटने पर “इह्ह.. आह्ह..” की आवाज निकलती।
फिर उसने मेरी टी-शर्ट पूरी उतारी, ब्रा फेंक दी, स्कर्ट और पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। मैं एकदम नंगी उसके सामने खड़ी थी। उसकी नजरें मेरे पूरे जिस्म पर घूम रही थीं। वो मेरे पीछे आया, दोनों हाथों से मेरी गांड को दबाया और अचानक जोर से एक चांटा मारा। तड़ाक की आवाज हुई। जलन हुई, लेकिन साथ ही अजीब सा सुकून भी। मैं चीखी, “आह्ह!” वो हंसा और बोला, “साली रंडी, आज तो मैं तुझे चोद-चोदकर अपनी रंडी बना लूंगा।”
दोस्तों, मुझे चुदवाते समय गालियां सुनना बहुत अच्छा लगता है। मैं सोचती हूं कि मेरा बॉयफ्रेंड मुझे गंदी से गंदी गालियां देकर मेरे बुर को चोदे। जब तक गंदी-गंदी बातें बोलकर गाली न दे, तब तक चुदाई का मजा नहीं आता।
वो मुझे बेड पर धकेला, मेरी टांगें फैलाईं और बीच में बैठ गया। उसने अपनी जीभ निकाली और पहले बुर के ऊपरी हिस्से पर हल्के से फेरा। फिर क्लिट को जीभ की नोक से छुआ। मैं तड़प उठी। “ओह्ह.. आह्ह..” वो धीरे-धीरे जीभ को नीचे ले गया, बुर के होंठों को अलग किया और अंदर डाल दी। गर्म, गीली जीभ अंदर-बाहर होने लगी। वो जीभ को घुमाता, क्लिट को चूसता, फिर पूरी बुर पर जीभ फेरता। मैं कमर उठा-उठाकर उसकी जीभ पर दबाव डाल रही थी। मेरे बुर से पानी निकलने लगा, वो सब चाट रहा था।
“आह्ह.. ओह्ह.. इह्ह.. और अंदर..!” मैं बड़बड़ाई। वो और जोर से चूसने लगा। जीभ को तेजी से अंदर-बाहर करता, क्लिट को होंठों से पकड़कर चूसता। मेरे शरीर में currents दौड़ रहे थे। पैर कांप रहे थे। वो आधे घंटे तक ऐसे ही मेरी बुर चाटता रहा। कभी तेज, कभी धीमा। कभी सिर्फ क्लिट पर फोकस, कभी पूरी बुर पर जीभ फेरता। मैं कई बार झटके खा चुकी थी, लेकिन वो रुकने का नाम नहीं ले रहा था।
फिर वो खड़ा हो गया। उसने पैंट उतारी, अपना सख्त लंड बाहर निकाला और मेरे मुंह के पास ले आया। “ले चूस मेरा लौड़ा, अच्छे से चूस साली रंडी, कुत्तिया।” मैंने मुंह खोला। उसने लंड मेरे होंठों पर रखा, फिर धीरे से अंदर डाला। मैंने जीभ से चाटना शुरू किया, सुपारे को चूसा। वो मेरा सिर पकड़कर धीरे-धीरे आगे पीछे करने लगा। फिर स्पीड बढ़ाई। लंड गले तक पहुंचने लगा। ग्ग्ग्ग.. ग्ग्ग्ग.. गी.. गी.. गों.. गों.. गोग.. मेरी आंखों में आंसू आ गए। सांस लेना मुश्किल हो रहा था।
वो जोर-जोर से मेरे मुंह में चोद रहा था। “चूस साली, और गहरा ले!” मैं कोशिश कर रही थी। गला भरा हुआ था, लेकिन मजा भी आ रहा था। वो आधे घंटे तक ऐसे ही मुंह चोदता रहा। कभी धीमा, कभी तेज। आखिर में उसने जोर से धक्का मारा, लंड गले में अटका और गर्म पानी मेरे मुंह में छोड़ दिया। “पी मेरे पानी को साली रंडी, कुतिया, छिनाल।” मैंने सब निगल लिया, आंखें बंद करके।
उसके बाद वो मेरे बगल में लेट गया। उसका लंड एकदम ढीला हो गया, अभी-अभी जो इतना सख्त था वो अब थका हुआ लग रहा था। हम दोनों पसीने से तर-बतर थे, सांसें तेज चल रही थीं। मैं उसके सीने पर सिर रखकर लेट गई, उसकी धड़कनें महसूस कर रही थी। हमने मोबाइल उठाया और एक हॉट बीएफ लगा लिया। स्क्रीन पर जो कुछ हो रहा था, वो देखकर धीरे-धीरे फिर से गर्मी बढ़ने लगी। उसका हाथ मेरी चूचियों पर फिर से घूमने लगा, हल्के-हल्के मसलते हुए। मैंने भी उसकी जांघ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।
आधे घंटे तक हम ऐसे ही बीएफ देखते रहे, बीच-बीच में एक-दूसरे को छूते, चूमते। उसका लंड फिर से सख्त होने लगा, मेरी उंगलियां उसे सहलाती रहीं। वो अचानक उठा और बोला, “बस अब काफी हुआ, तुम्हारी बुर को चोदना है। जल्दी से तैयार हो जाओ, कुत्तिया बन जाओ।” उसकी आवाज में फिर वही भूख थी।
मैं तुरंत चारों हाथ-पैरों के बल हो गई, घुटनों और हाथों पर। गांड ऊपर करके, कमर नीचे करके कुत्तिया पोजीशन में आ गई। वो मेरे पीछे आया, एक हाथ से मेरी कमर पकड़ी, दूसरे से अपना सख्त लंड मेरे बुर के मुंह पर रगड़ा। बुर पहले से ही गीली थी, पानी टपक रहा था। उसने लंड का सुपारा बुर के होंठों पर रखा और एक ही जोरदार धक्के में पूरा लौड़ा अंदर डाल दिया।
“आआअह्ह्ह्ह!” मैं जोर से चिल्ला दी, दर्द और मजा दोनों एक साथ। बुर एकदम भर गया था, लंड की मोटाई महसूस हो रही थी। मैं बोली, “आराम से चोदो प्लीज!” लेकिन उसने एक नहीं सुनी। उसने मेरी कमर दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के में लंड पूरा अंदर-बाहर हो रहा था। तड़-तड़-तड़ की आवाज कमरे में गूंज रही थी।
“ले साली रंडी, अंदर ले मेरा लौड़ा! कैसा लग रहा है साली बहनचोद? साली कुत्तिया, मजा आ रहा है मेरे लंड से?” उसकी गालियां सुनकर मेरे शरीर में और जोश भर गया। दर्द अब मजा में बदल रहा था। मैं पीछे कमर हिलाती हुई बोली, “हां.. बहुत मजा आ रहा है.. और जोर से चोदो.. और गंदी-गंदी गालियां दो.. गंदा से गंदा बोलो!”
वो और तेज हो गया। “ले रंडी, तेरी बुर फाड़ दूंगा आज! साली छिनाल, मेरी कुतिया!” हर धक्के के साथ वो गालियां दे रहा था। मैं चीख रही थी, “आह्ह.. ओह्ह.. हां.. और जोर से!” मेरी चूचियां लटककर हिल रही थीं, हर धक्के में आगे-पीछे हो रही थीं। वो कभी धीमा करता, लंड को अंदर घुमाता, फिर अचानक तेज धक्का मारता। मेरी बुर की दीवारें लंड को कसकर पकड़ रही थीं।
फिर वो अचानक रुका, खुद को पीछे खींचा और बेड पर लेट गया। उसका लंड सीधा खड़ा था, चमक रहा था मेरे पानी से। “चल अब धक्के मार साली रंडी। ऊपर आ जा!” मैंने उसकी कमर के दोनों तरफ घुटने टिकाए, लंड को हाथ से पकड़ा और धीरे से अपनी बुर पर सेट किया। फिर धीरे-धीरे नीचे बैठ गई। लंड फिर से पूरा अंदर चला गया। “ऊऊ.. आह्ह..” मैं सिसकारी।
अब मैं ऊपर-नीचे होने लगी, उसके लंड पर कूदने लगी। मेरी चूचियां उछल रही थीं। नीचे से वो भी कमर उठाकर धक्के मार रहा था। दोनों की स्पीड मैच हो गई। मैं तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी, लंड हर बार गहराई तक जा रहा था। “जल्दी चोदो.. जोर से धक्का मारो.. गंदी-गंदी गालियां दो!” मैं चिल्ला रही थी।
उसने स्पीड बढ़ा दी। नीचे से जोर-जोर से धक्के मारने लगा। “ले साली.. ले और ले.. आज तेरे बुर को फाड़ दूंगा साली कुतिया.. मादरचोद.. रंडी.. साली छिनाल!” उसकी गालियां अब और गंदी हो गई थीं। मैं पूरी तरह जोश में थी। मेरी बुर सिकुड़ रही थी, पानी निकलने वाला था। “आह्ह.. ओह्ह.. ऊऊ.. ऊई.. हां.. बस..!” सिसकारियां निकल रही थीं।
अचानक मेरे शरीर में एक तेज झटका आया। मैं चीखी, “आआअह्ह्ह्ह.. निकल रहा है!” और अपना सारा पानी उसके लंड पर ही छोड़ दिया। गर्म-गर्म तरल लंड के चारों ओर बह गया। मैं थककर उसके ऊपर लेट गई, सांसें तेज, शरीर कांप रहा था। वो भी मेरी पीठ पर हाथ फेर रहा था, अभी भी अंदर ही था।
वो बोला, “कैसा लगा मेरी रंडी?” उसकी आवाज में अभी भी वो गर्मी बाकी थी, सांसें थोड़ी तेज चल रही थीं। मैं उसके सीने पर लेटी हुई थी, शरीर अभी भी कांप रहा था, बुर में हल्की-हल्की सुन्नपन महसूस हो रहा था। मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “बहुत मजा आया… सच में बहुत। मैं चाहती हूं कि तुम मुझे रोज रंडी बनाकर चोदो और ऐसी गंदी-गंदी गालियां दो।” मेरी आवाज में थकान थी, लेकिन साथ ही उत्साह भी।
वो हंस पड़ा, मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोला, “अरे मेरी रंडी, अभी तो तेरी गांड भी मारनी है।” उसने मेरी गांड पर हल्का सा थप्पड़ मारा, जैसे अभी से प्लानिंग कर रहा हो। मैंने थोड़ा सा झटका खाया, लेकिन हंसकर बोली, “नहीं-नहीं, अभी मैं जा रही हूं। लेट हो रहा है मुझे, घर पहुंचना भी है। बाद में आऊंगी तुमसे मिलने, तब जो चाहे वो कर लेना।” मैंने उसकी आंखों में देखकर कहा, थोड़ी शरारत भरी मुस्कान के साथ।
वो थोड़ा मायूस सा हो गया, लेकिन फिर मुस्कुराया और बोला, “ठीक है मेरी जान, लेकिन जाते-जाते एक बार मेरा लंड का पानी निकाल दो। इतना मत जा कि खाली हाथ जाओ।” उसका लंड अभी भी आधा सख्त था, मेरे पानी और उसके स्पर्म से चिपचिपा हुआ पड़ा था। मैंने हंसते हुए कहा, “अच्छा जी, आखिरी सर्विस दे देती हूं।”
मैं नीचे सरक गई, उसके पैरों के बीच बैठ गई। लंड को हाथ में पकड़ा, पहले जीभ से साफ करना शुरू किया। मेरे पानी का स्वाद अभी भी उस पर था, नमकीन-मीठा मिक्स। मैंने सुपारे को होंठों से चूसा, धीरे-धीरे जीभ घुमाई। वो सिहर उठा, “आह्ह.. साली रंडी, ऐसे ही चूस…” मैंने मुंह में लिया, धीरे-धीरे गहराई तक। अब वो फिर से सख्त हो रहा था। मैंने एक हाथ से उसके अंडकोष को सहलाया, दूसरे से लंड की जड़ पकड़ी।
मुंह ऊपर-नीचे करने लगी, जीभ से नीचे की साइड को चाटते हुए। ग्ग्ग्ग.. गी.. गों.. गोग.. वो मेरे बाल पकड़कर हल्के से गाइड कर रहा था। “चूस अच्छे से… ले मेरा पानी…” मैं स्पीड बढ़ाई, मुंह में पूरा लेने की कोशिश की। वो कमर उठाने लगा, मुंह में ही हल्के धक्के देने लगा। मैंने गला रिलैक्स किया, लंड गले तक जाने दिया। उसकी सांसें तेज हो गईं।
कुछ ही मिनटों में वो कांपने लगा। “आ रहा है… ले साली…” उसने जोर से धक्का मारा और गर्म-गर्म पानी मुंह में छोड़ दिया। मैंने सब निगल लिया, आखिरी बूंद तक चूसकर साफ किया। लंड धीरे-धीरे ढीला होने लगा। मैंने जीभ से आखिरी बार फेरा और उठ गई।
वो संतुष्ट मुस्कान के साथ बोला, “तू सच में मेरी परफेक्ट रंडी है।” मैंने कपड़े पहने, बाल ठीक किए, उसको एक आखिरी किस दी और बोली, “अब चलती हूं। अगली बार जल्दी मिलते हैं।” फिर मैं वहां से चली गई, मन में अभी भी वो गर्माहट बाकी थी।