किराएदार का लंड भाभी की खुजली का इलाज

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Bhabhi ki gand chudai sex story: मेरे पति का लंड मेरे चूत में फचाफाच आ और जा रहा था. उसका मोटा और गर्म लंड मेरी भीगी हुई चूत की दीवारों को बार बार जोरदार धक्कों से चीरता हुआ अंदर तक घुस रहा था. हर धक्के के साथ मेरी चूत से चिकना पानी बाहर निकल कर उसके लंड को और भी चिकना बना रहा था. मुझे काफी मज़ा आ रहा था. शादी के १२ साल बीत जाने के बावजूद चुदाई का यह आनंद बिल्कुल कम नहीं हुआ था बल्कि साल दर साल बढ़ता ही जा रहा था.

मेरी चूत ने अचानक कस कर सिकुड़ना शुरू कर दिया और गर्म पानी की धार छोड़ दी. मेरे चूत से निकला यह चिपचिपा रस मेरी गांड की दरार में बहता हुआ बिस्तर पर तक फैल गया. लेकिन मेरे पति अभी भी पूरी तरह कायम थे. उनका लंड मेरी चूत के अंदर पूरी ताकत से फड़क रहा था. दो मिनट बाद उनके औजार ने भी जोर से फड़कना शुरू किया और गरम वीर्य की मोटी धार मेरी चूत के अंदर छोड़ दी.

वो पूरी तरह पस्त होकर मेरे नरम और भारी चूचियों पर अपना सिर रख कर लंबी लंबी सांसें लेते हुए सुस्ताने लगे. मैंने प्यार से उनके गांड को सहलाते हुए नरम स्वर में कहा, “राजाजी, ज़रा मेरी गांड की भी चुदाई कीजिये ना. कितने दिनों से मेरी गांड में खुजली हो रही है, आपने गांड की चुदाई नहीं की है.”

मेरे पति हांफते हुए बोले, “नहीं जान, अब हिम्मत नहीं है. कल तेरी गांड की चुदाई जरूर करूंगा.”

मैंने थोड़ी नाराजगी के साथ कहा, “कल रात को भी आपने यही कहा था. तीन दिन से मेरे गांड में खुजली हो रही है. प्लीज कुछ कीजिये न.”

मेरे पति मेरे चूत से अपना लंड निकालते हुए बोले, “नहीं बेबी, कल जरूरी मीटिंग है. सो जाओ. सुबह जल्दी उठना है.”

कह कर वो हमेशा की तरह मुंह फेर कर सो गए. और मेरी गांड की खुजली को मिटाने के लिए मुझे मोमबत्ती के सहारे छोड़ गए. मैंने बगल में रखी मोमबत्ती उठाई और अपने दोनों टांगों को ऊपर की ओर मोड़ लिया जिससे मेरी गांड का छेद पूरी तरह खुल गया. मैंने धीरे से मोमबत्ती को अपनी गांड में डाला और जहां तक संभव था अंदर तक ले जाने की कोशिश की. लेकिन साथ ही साथ उस दिन की दोपहर वाली घटना याद करते हुए दस से बारह मिनट तक मोमबत्ती को गांड के अंदर बाहर करके गांड की चुदाई की. तब जाकर गांड की खुजली थोड़ी कम हुई. तब जाकर थोड़ा मन को शांति मिली. लेकिन दोपहर वाली घटना अभी भी मेरे दिमाग में घूम रही थी.

दरअसल मेरा नाम माधुरी है. मेरी उम्र ३८ साल की है. मेरे पति का नाम दयासिंह है. वो ४२ साल के हैं. वो सरकारी विभाग में कर्मचारी हैं. यूं तो उनका पोस्ट छोटा ही है लेकिन ऊपरी कमाई काफी है. ऊपरी कमाई से ही दिल्ली के छोटे से घर को बड़े घर में बदल दिया. मेरे घर में और कोई नहीं है. मेरा मतलब अभी तक मुझे संतान नहीं हुई है. मेरे सास ससुर अपने गांव में रहते हैं. यहां के मकान में सिर्फ मैं और मेरे पति रहते थे. मकान में कई कमरे थे लेकिन रहने वाले सिर्फ हम दो. किसी सज्जन ने मेरे पति को सलाह दी कि क्यों नहीं अपने इस बड़े मकान में लड़कों को रहने के लिए किराया पर रूम दे देते हो. किराया भी अच्छा खासा मिल जाएगा. मेरे पति दयासिंह को ये बात कुछ जंच गई. उन्होंने ज्यों ही इसके लिए हां कहा अगले ही दिन मेरे घर के नीचे वाले फ्लोर पर दो लड़कों ने मिलकर दो रूम ले लिया. दोनों ही दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करने आए थे. दोनों काफी शांत और पढ़ाई में मगन रहने वाले स्टूडेंट थे. एक का नाम राहुल तथा दूसरे का नाम शान था.

मेरे पति मुझे हर दो दिन पर चोदते हैं. यूं तो मुझे उनकी चुदाई से कोई समस्या नहीं है. मुझे भी काफी मज़ा आता है. लेकिन उनमें एक ही कमजोरी थी कि वो सिर्फ एक बार में एक ही बार चोद सकते हैं. एक बार चोदने के बाद उनकी शक्ति खत्म हो जाती है. यूं तो मुझे भी एक बार चुदवा लेने पर संतुष्टि मिल जाती है लेकिन मेरा हमेशा मन करता है कि चुदाई अगर चूत और गांड की एक बार में ना हो तो मज़ा ही नहीं आता. इसकी आदत भी मेरे पति ने ही मुझे लगाई थी. शादी के बाद वो मेरी चूत को चोदने के ठीक बाद गांड की चुदाई करते थे. शुरुआत में तो गांड चुदाई में काफी दर्द होता था. लेकिन एक महीने में ही गांड चुदाई में इतना मज़ा आने लगा कि पूछो मत. सचमुच जन्नत का अहसास है गांड चुदाई.

लेकिन इधर दो तीन वर्षों से मेरे पतिदेव का लंड मेरी चूत मारने में ही पस्त हो जाता है. अगर कभी गांड मारते हैं तो चूत की चुदाई नहीं कर पाते. अब मैं या तो गांड मरवा सकती थी या सिर्फ अपनी चूत चुदवा सकती थी. इसलिए गांड की चुदाई के लिए मोमबत्ती का सहारा लेना पड़ता था.

उस दिन मेरे पति जब अपने ऑफिस गए हुए थे तो मैं किसी काम से नीचे वाले फ्लोर पर गई. दोपहर के दो बज रहे थे. बाहर कड़ी धूप और गरमी थी. जब मैं वापस ऊपर की ओर जाने लगी तो देखा कि नीचे वाले कमरे का दरवाजा खुला हुआ था. मुझे लगा कि कहीं इन दोनों लड़कों ने अपने कमरे का दरवाजा खुला छोड़ कर कहीं चले तो नहीं गए. मैं उनके कमरे की तरफ गई. वहां जा कर देखा राहुल सिर्फ अंडरवियर पहने बैठा हुआ है. ज्यों ही मैं वहां पहुंची मैं उसे इस हालत में देख हड़बड़ा गई. क्योंकि उसने भी मुझे देख लिया था.

उसने मुझे देखते ही कहा, “क्या हुआ आंटी जी?”

मैंने उसके अंडरवियर पर से नजर हटाते हुए पूछा, “ये कमरे का दरवाजा खुला था तो मुझे लगा कि शायद तुम लोग गलती से इसे खुला छोड़ कर कहीं चले गए हो.”

राहुल ने कहा, “वो कमरे का दरवाजा इसलिए खुला रख छोड़ा है क्योंकि कमरे का दरवाजा खुला रहने से कमरे में हवा अच्छी आती थी.”

मैंने कहा, “शान नहीं दिखाई दे रहा है.”

राहुल ने कहा, “वो ट्यूशन गया है.”

मैंने फिर राहुल के अंडरवियर पर नजर डालते हुए पूछा, “इस तरह क्यों पड़े हो? कम से कम पैंट पहन कर रहना चाहिए ना. कोई देखेगा तो क्या सोचेगा?”

राहुल ने कुछ शर्माते हुए कहा, “वो आंटी जी, बहुत गरमी है न इसलिए थोड़ी हवा ले रहा था. मुझे क्या पता कि कोई लेडी इस रूम में आ जाएगी?”

मैंने जल्दीबाजी में उसके अंडरवियर पर एक गहरी नजर डाली और वापस मुड़ गई. मुझे उसके अंडरवियर के अंदर उसके बड़े लंड का अंदाजा हो गया था.

जब मैं अपने फ्लोर पर आई तो मेरी नजर के सामने अभी राहुल का लंड घूम रहा था. रात को जब गांड में मोमबत्ती डाल कर गांड की चुदाई कर रही थी तो मुझे फिर से दोपहर वाली घटना याद आ गई और मुझे लगा कि अगर राहुल का लंड इस मोमबत्ती की जगह होता तो कितना मज़ा आता.

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अगले दिन जब मेरे पति ऑफिस जा रहे थे तो बोले, “आज मीटिंग है. हो सकता है कि रात के नौ बजे से पहले ना आ पाऊं.”

मैं भी अपने घरेलू कामों में व्यस्त हो गई. दिन के एक बजे तक घर का सारा काम काज निपटा कर आराम करने बेड पर चली गई. आज भी अच्छी खासी गरमी थी. मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और नंगे ही बेड पर लेट गई. एक हाथ मेरी चूची पर था और एक हाथ से अपनी चूत के बाल को खींच रही थी. अचानक मुझे गांड में खुजली महसूस होने लगी. मुझे राहुल के लंड के बारे में ख्याल आ गया. मुझे लगा कि यदि किसी तरह से राहुल के लंड से अपनी गांड मरवा लूं तो मज़ा आ जाए. सोचते सोचते मुझे गर्मी चढ़ गई और बेड पर ही अपनी चूत में उंगली डाल कर मुठ मार ली. लेकिन गांड की खुजली अभी समाप्त नहीं हुई थी. मैंने रिस्क लेने की ठान ली और सोचा पहले देखूंगी कि राहुल राजी होता है कि नहीं. सोच कर मैंने दो बजे कपड़े पहने और नीचे वाले फ्लोर पर गई. मुझे पता था कि शान ट्यूशन पढ़ने गया होगा. आज नीचे का कमरे का दरवाजा लगा हुआ था. मैंने किवाड़ी खटखटाया. अंदर से राहुल निकला और प्रश्नवाचक निगाहों से मेरी तरफ देखने लगा.

मैंने कहा – राहुल, जरा ऊपर आ कर देखो ना, मेरा टीवी नहीं चल रहा है.

राहुल ने बिना कोई और सवाल किए मेरे साथ ऊपर आ गया. जैसे ही हम दोनों ऊपर पहुंचे, मैंने जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया और चिटकनी लगा दी. दरवाजे के बंद होते ही कमरे में एक अजीब सी खामोशी छा गई. राहुल ने टीवी ऑन किया तो टीवी तुरंत चलने लगा.

वो बोला – आंटीजी टीवी तो चल रहा है.

मैं बोली – अरे हाँ ये तो चलने लगा. लेकिन पता नहीं क्यों अभी थोड़ी देर पहले ये नहीं चल रहा था. खैर तुम थोड़ी देर यहीं बैठो और देखना कि ये फिर से बंद हो जाता है कि नहीं.

राहुल ने झट से रिमोट हाथ में लिया और क्रिकेट मैच लगा कर देखने लगा. उसकी आंखें स्क्रीन पर टिकी हुई थीं लेकिन मैं उसके चेहरे और शरीर को गौर से देख रही थी.

इधर मैंने अपने पति को फोन लगाया और पूछा कि शाम में आते समय सब्जी लाएंगे कि नहीं?

पति ने जवाब दिया – आज शाम को नहीं आ पाऊंगा. कम से कम नौ बजे ही जाऊंगा.

सुन कर मैं निश्चिंत हो कर फोन रख दी. अब मेरे मन में राहत की एक लहर दौड़ गई थी.

मैंने राहुल से कहा – तुम जाना नहीं, मैं तुम्हारे लिए कोल्ड ड्रिंक लाती हूं.

मैंने दो कोल्ड ड्रिंक बनाए. ठंडी बोतलों से निकलती ठंडक मेरे हाथों को छू रही थी. मैं उसके बगल में जा कर बैठ गई. हमारी जांघें एक दूसरे को हल्के से छू रही थीं.

और कहा – कोल्ड ड्रिंक पियो ना.

उसने कोल्ड ड्रिंक उठाया और धीरे धीरे पीने लगा. मैं उसके लंड के बारे में सोच कर उत्तेजित हो गई. मेरी सांसें तेज हो रही थीं. मैंने जोरों की अंगड़ाई ली जिससे मेरी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरक गया और मेरी भारी चूचियां बाहर की ओर उभर कर आ गईं. राहुल ने एक नजर मेरी चूचियों की तरफ डाली. उसकी नजर कुछ देर तक वहीं अटकी रही फिर वह जल्दी से क्रिकेट देखने लगा.

मैंने सोचा कि शुरुआत कहां से करूं?

मैंने कहा – राहुल तुम्हारी उम्र कितनी है?

राहुल – बाईस साल.

मैंने कहा – एकदम जवान हो. लेकिन मैं तो तुम्हें बच्चा समझ रही थी.

राहुल सिर्फ थोड़ा मुस्कुराया. उसकी मुस्कान में शर्म और उत्तेजना दोनों झलक रहे थे.

मैंने फिर कहा – अब तो तुम्हें शादी कर लेनी चाहिए.

राहुल बोला – बड़ा हो गया हूं लेकिन शादी के लायक बड़ा नहीं हुआ हूं आंटी जी.

मैंने कहा – क्यों? मैंने तो कल देखा था तुम्हारा? अच्छा खासा बड़ा लग रहा था.

राहुल ने मेरी तरफ आश्चर्य की भाव से देखा और कहा – क्या देखा था आपने?

मैंने कहा – वो जो कि तुम अंडरवियर में थे ना तो मैंने ऊपर से ही देख कर तुम्हारे लिंग का साइज का अंदाजा लगा लिया था. अच्छा बड़ा है.

राहुल का चेहरा शर्म से लाल हो गया. वो जल्दी जल्दी कोल्ड ड्रिंक पीने लगा. उसकी गर्दन तक लालिमा फैल गई थी.

मैंने उसका हाथ थाम लिया और कहा – हड़बड़ाते क्यों हो? आराम से पियो न.

वो बोला – आंटी जी, आप बहुत ही बोल्ड हैं.

मैंने कहा – राहुल, एक काम करो ना प्लीज. जरा मेरे बेड रूम में आओ ना. जरा मेरी हेल्प कर दो ना.

राहुल बोला – चलिए.

मैं उसे लेकर अपने बेड रूम में आ गई और दरवाजे को अच्छी तरह से बंद कर दिया. कमरे में हल्की सी महक और गर्मी थी. फिर उसे अपने साथ अपने बेड पर बिठाया और धीरे से उसके लंड पर हाथ रखा और कहा – मुझे एक जगह खुजली हो रही है और मुझे तुम्हारी जरूरत है. क्या तुम मेरी खुजली मिटा दोगे?

राहुल कोई बच्चा नहीं था. वो भी समझ गया था कि मैं क्या कहना चाहती हूं.

फिर भी बोला – कहां खुजली हो रही है?

मैंने उसकी आंखों में वासना की आग को देखा और झट अपनी साड़ी उतार दी. बिना समय लगाए अपना पेटीकोट भी उतार दिया. लगे हाथ अपना ब्लाउज भी खोल दिया. सिर्फ तीस सेकंड में मैं उसके सामने ब्रा और पैंटी में थी. मैं उसका हाल देखना चाहती थी. वो एकटक मेरी चूचियों को देख रहा था. अब मैंने और देर नहीं की और अपनी ब्रा भी उतार दी. अब मेरी चुचियां बाहर आजाद थीं.

मैंने उसका हाथ पकड़ा और अपनी चूची पर रख दिया. और कहा – इसे दबाओ ना.

वो मेरी चूची दबाने लगा. मुझे मज़ा आने लगा. मैंने एक हाथ उसके पैंट पर रखा. अंदर उसका लंड फनफना रहा था.

मैंने कहा- अपने कपड़े खोलो ना.

उसने बिना एक पल भी गंवाए अपनी शर्ट उतार दी. उसकी चौड़ी छाती और कसी हुई मांसपेशियां सामने आ गईं. फिर उसने अपनी पैंट का बटन खोला और जिप नीचे खींची. पैंट और अंडरवियर को एक साथ नीचे सरकाते हुए उसने दोनों को पैरों से पूरी तरह उतार दिया. अब वो मेरे सामने पूरी तरह नंगा खड़ा था. उसका लंड ७ इंच से कम का नहीं था. मोटा, लंबा और पूरी तरह खड़ा हुआ लंड सीधा ऊपर की ओर तना हुआ था. उसकी नसें फूली हुई दिख रही थीं और सिर पर चमकदार मोती जैसा पानी चमक रहा था.

मैंने आगे बढ़कर उसके लंड को अपने नरम हाथ में लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी. मेरी उंगलियां उसके मोटे लंड की गर्मी और कठोरता को महसूस कर रही थीं. मैंने ऊपर नीचे रगड़ते हुए उसके लंड को और सख्त बनाया. उसने भी मेरी पैंटी में हाथ डाला. उसकी गर्म उंगलियां मेरी चूत की ऊपरी सतह को छूते ही मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई. वह मेरी चूत को सहलाने लगा. उसकी उंगलियां मेरी चूत की फूलियों के बीच में घूम रही थीं और मेरे रस को फैला रही थीं. फिर उसने मेरी पैंटी को दोनों हाथों से पकड़कर मेरी चूत से नीचे खिसका दिया. अब मेरी चूत पूरी तरह नंगी और साफ साफ दिख रही थी. मेरी चूत देखते ही उसके लंड में तूफान मचने लगा. वह फड़क उठा और और भी मोटा हो गया.

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उसने मुझे पलंग पर लिटा दिया. मेरी पीठ बिस्तर से लगते ही उसने मेरी जांघों को फैलाया और अपना मुंह मेरी चिकनी चूत पर रख दिया. उसने अपनी गर्म और नम जीभ से मेरी चूत की ऊपरी फूलियों को चाटना शुरू किया. फिर उसने जीभ को अंदर घुसा दिया और मेरे चूत का नमकीन स्वाद लेने लगा. वह जोर जोर से चूस रहा था. उसकी जीभ मेरी चूत के अंदर बाहर घूम रही थी और हर कोने को चाट रही थी. मेरी आंखें बंद थीं. कहां मैं ३८ साल की और कहां मुझसे १६ साल छोटा सिर्फ २२ साल का था. लेकिन ऐसा लग रहा था कि मानो वही ३८ साल का अनुभवी मर्द हो और मैं २२ साल की कुंवारी लड़की. थोड़ी देर में मेरे चूत में से गर्म पानी निकलने लगा. मैं सिसकारी भरने लगी. “आह्ह्ह… राहुल…” मेरी आवाज कमरे में गूंज रही थी. वो मेरी चूत के पानी को लपलपाते हुए चाट रहा था. उसका मुंह मेरे रस से भीग गया था.

अब वो मेरे ऊपर चढ़ आया. उसने मेरी भारी चुचियों को दोनों हाथों से दबाया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगा. पहले एक चूची का गुलाबी चुंबक मुंह में लेकर जोर से चूसा. फिर दूसरी. उसका हर अंदाज निराला था. मुझे याद आ गया जब मेरे पति जवान थे तब शादी के बाद वो भी इसी प्रकार सेक्स करते थे. चूची चूसते चूसते वो और ऊपर चढ़ा और मेरी ओठों को अपने गर्म ओठों से चूसने लगा. उसकी जीभ मेरे मुंह के अंदर घुस गई और मेरी जीभ से खेलने लगी. उधर नीचे उसके फनफनाते हुए लंड मेरी चूत की फूलियों से रगड़ खा रहा था. लंड का गर्म सिर मेरी चूत पर बार बार दबाव डाल रहा था.

मैंने अपनी दोनों टांगों को ऊपर कर के आजू बाजू फैला कर अपनी चूत का मुंह खोलते हुए राहुल को निमंत्रण देते हुए कहा- राहुल, देर ना करो, और मेरी चूत में अपना लंड डालो.

राहुल ने अपने लंड को पकड़ा और मेरी चूत पर घुसाने की कोशिश करने लगा. लेकिन बच्चू यहीं मात खा गया. उसे पता ही नहीं चल रहा था कि असली छेद किधर है. मैंने उसकी समस्या को समझा और उसके लंड को पकड़ कर अपनी चूत की सही छेद के मुंह पर रख दिया. उसने सड़ाक से अपने लंड को मेरे चूत में घुसेड दिया. मेरा चूत तो टाइट नहीं था लेकिन उसके मोटे लंड की वजह से संकरा हो गया था. पूरा ७ इंच का मोटा लंड एक झटके में मेरी चूत में अंदर तक चला गया. पहले तो वो रुक कर अपने लंड से मेरे चूत के अंदर का अहसास लेने लगा. उसका लंड मेरी चूत की दीवारों को फैलाए हुए था. फिर दो मिनट तक रुकने के बाद उसने चुदाई प्रारंभ की. उफ्फफ्फ्फ क्या चुदाई की उसने. मेरी चूत की तो हालत खराब कर दी. हर धक्के के साथ उसके लंड का सिर मेरी चूत के सबसे अंदर तक टकरा रहा था. हैरतअंगेज बात तो ये थी कि पांच मिनट तक लगातार तेज चुदाई के बाद भी उसके लंड से पानी नहीं निकल रहा था. जबकि मेरी चूत ने दूसरी बार पानी छोड़ना चालू कर दिया. गर्म रस उसके लंड को और चिकना बना रहा था. पांच मिनट और चुदाई करने के बाद उसके धक्के तेज होने लगे. अब वो झड़ने वाला था.

मैंने कहा- चूत में माल मत गिरा देना.

लेकिन उत्तेजना में उसने कुछ नहीं सुना और कस कर अपना लंड मेरे चूत में दबाया और माल मेरे चूत में ही गिराने लगा. मैंने कोशिश की कि उसके लंड को किसी तरह से अपने चूत से निकाल दूं लेकिन उसने इतनी कस के मेरी चूत में लंड डाल रखा था कि मैं कुछ ना कर सकी. और चुपचाप उसका माल को अपनी चूत में गिरने दिया. एक मिनट के बाद उसने मेरे चूत से लंड निकाला तो मैंने देखा कि उसका लंड का माल मेरे चूत में से निकल कर मेरे गांड की दरार से बहते हुए बिस्तर पर जा गिरा है. फिर देखा अभी भी उसका लंड उसी तरह खड़ा है. मैंने भी अभी थकी नहीं थी.

मैंने उसके लंड को पकड़ कर कहा- शाबाश राहुल, तुम कमाल के खिलाड़ी हो. मज़ा आ गया. मेरा एक और काम करो न.

वो बोला – क्या?

मैंने कहा- मेरी गांड की खुजली मिटा दो ना राजा.

वो बोला – ठीक है. किस स्टाइल में गांड मरवाएंगी आप? मेरे लंड के ऊपर बैठ कर या खड़े खड़े या डॉगी स्टाइल में?

मैं ज्यादा आश्चर्यचकित नहीं थी कि उसे इतना सब कैसे पता.

सिर्फ मैंने इतना कहा – तुम्हें किस स्टाइल में मारने आता है?

वो बोला- आज तक तो मैंने कभी मारा नहीं लेकिन इंटरनेट पर देख कर जानता हूं.

मैंने कहा – मुझे सबसे अच्छा डॉगी स्टाइल ही लगता है. क्योंकि इसमें दर्द भी होता है और दर्द का मज़ा भी आता है.

उसने कहा- ठीक है.

उसने मुझे खड़े खड़े ही आगे जमीन पर झुक जाने को कहा. मैं जमीन पर खड़े हो कर अपने टांगों को सीधा रखते हुए आगे बेड पर झुक गई. इससे मेरी गांड का छेद राहुल को साफ साफ दिखने लगा. उसने मेरी गांड के छेद में उंगली लगाई. उसके उंगली लगाते ही मेरी गांड, और चूत से लेकर चूची तक सिरहन दौड़ गई. उसने धीरे से मेरी गांड के छेद में उंगली डाली और चारों तरफ घुमाया. इससे मेरे गांड का छेद कुछ खुल गया. अब उसने दोनों हाथों का अंगूठा मेरे गांड के छेद में डाला और उसे फैला दिया. मुझे उसकी इस हरकत से बहुत मज़ा आया. जब कोई आपके हरेक अंग से प्यार करे तो सेक्स का आनंद ही अलग हो जाता है. अब उसने दोनों अंगूठों से मेरी गांड के छेद को फैला कर अपने लंड को उसकी मुंह पर लेते आया. लेकिन अभी भी उसे संशय हो रहा था क्योंकि मेरे गांड का छेद उसके लंड के मोटाई के अनुपात में कम ही चौड़ा था.

उसने कहा- लगता है कि मेरा लंड इसमें नहीं जा पाएगा. जबरदस्ती करने पर आपके गांड को नुकसान पहुंच सकता है.

मैंने पीछे देखते हुए कहा- मेरे गांड की चिंता मत करो. तुम लंड डालो.

उसने ऐसा ही किया. उसने जोर लगा कर अपना लंड मेरे गांड की छेद में डाल दिया. उसका लंड मेरे पति के लंड से कुछ तो मोटा था लेकिन मेरा गांड भी कोई कमजोर नहीं था. मैं दांत पर दांत बैठा कर हर दर्द सह गई. पहले उसके लंड का मोटा सिर मेरे गांड के संकरे छेद को जोर से दबा रहा था. फिर एक तेज धक्के के साथ उसने पूरा लंड मेरे गांड में एक बार में ही घुसेड दिया. मेरे मुंह से एक लंबी सिसकारी निकल गई. तेज जलन और दबाव के साथ-साथ एक अनोखा आनंद भी शरीर में फैलने लगा. उसने अपने पूरे लंड को मेरे गांड में एक बार में डाल दिया. अब उसने मेरी कमर पर अपने हाथ की पकड़ मजबूत बनाई और मेरे गांड की चुदाई चालू कर दी.

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मुझे तो जैसे जन्नत नसीब हो रहा था. ऐसा लग रहा था कि मेरे गांड की वर्षों की खुजली राहुल आज ही मिटा देगा. दो मिनट में ही मेरी गांड का छेद उसके मोटे लंड के आगे पूरी तरह चौड़ा हो गया. हर धक्के के साथ उसके लंड की नसें मेरी गांड की दीवारों को रगड़ रही थीं. मुझे इतना आनंद तो अपने पतिदेव से भी कभी प्राप्त नहीं हुआ. राहुल ने मेरी कमर पर से हाथ हटा कर मेरी चुचियों को थाम लिया. एक तरफ वो मेरी गांड की भापुर चुदाई कर रहा था दूसरी तरफ वो मेरी चुचियों को भी जोर जोर से दबा रहा था. उसकी उंगलियां मेरी चुचियों के निप्पलों को मल रही थीं जिससे मेरे पूरे शरीर में करंट सा दौड़ रहा था.

दस मिनट तक वो इसी तरह से मेरी गांड मारता रहा. उसके हर धक्के के साथ कमरे में चुटकी बजाने जैसी आवाजें गूंज रही थीं. दस मिनट के बाद उसका लंड अंदर ही अंदर फड़कने लगा और माल निकलना शुरू हुआ. उसने अपना पूरा लंड मेरी गांड में घुसेड दिया और स्थिर हो कर माल मेरी गांड में गिरा दिया. गरम गरम वीर्य की मोटी धार मेरी गांड के अंदर छूट रही थी. जब सारा माल निकल गया तो उसने मेरे गांड से अपना लंड निकाला. मैं धीरे धीरे अपने गांड के छेद को छूती हुई उठ खड़ी हुई. मेरा गांड का छेद अभी भी पूरी तरह से खुला हुआ था और हल्का सा सिकुड़ रहा था. मेरी गांड से राहुल का रस निकल कर मेरी जांघों से होता हुआ जमीन पर गिर रहा था. गर्म और चिपचिपा वीर्य मेरी जांघों को भिगो रहा था.

मैंने राहुल के लंड को हाथ में लिया और उसे सहलाते हुए कहा- थैंक्स राहुल.

फिर मैंने कपड़े से अपनी गांड और बुर से निकल रहे माल और पानी को पोछा. राहुल मेरे बेड पर चित्त हो कर लेट गया. मैंने कपड़े से उसके लंड को भी साफ किया. फिर कपड़े को एक तरफ फेंक कर उसके सीने पर अपनी चूची दबाते हुए उसके ऊपर लेट गई और अपनी चूत को उसके लंड में घसते हुए बोली- राहुल, आज मज़ा आ गया. तुम्हें कैसा लगा?

राहुल बोला- मुझे भी अच्छा लगा.

मैंने कहा – कल फिर आओगे ना?

वो बोला – हाँ.

घड़ी पर नजर डाली तो साढ़े तीन बजने वाले थे.

राहुल ने कहा- अब मुझे चलना चाहिए. चार बजे शान वापस आ जाता है.

मैंने कहा- ऐसे कैसे जा सकते हो? पहले कॉफी पियो.

मैंने अपने रूम का दरवाजा खोला और नंगे ही किचन चली गई क्योंकि मैंने घर के सारे खिड़की और दरवाजे पहले ही बंद कर रखे थे. राहुल और अपने लिए झट से काफी बनाई और फ्रीज से ताजी मिठाइयां और नमकीन निकाली. और कॉफी और नाश्ता लेकर अपने बेड रूम में वापस आई. राहुल अभी भी नंगा ही बेड पर लेटा हुआ था. मैंने उसे उठने को कहा. तो उठ कर सोफे पर बैठ गया. मैं नंगी ही उसके गोद में उसके लंड पर बैठ गई और बोली – तुम दूसरा काम करो मैं तुम्हें खिलाती हूं. मैं उसे मिठाई व नमकीन खिला रही थी और वो मेरी चूची और चूत को सहला रहा था. काफी और नाश्ता खत्म करते करते पंद्रह मिनट बीत गए. इन पंद्रह मिनट में राहुल का लंड फिर से तनतना गया. मैंने उसके लंड को पकड़ कर उसकी आंखों में देखा. उसने मुझे सोफे के नीचे जमीन पर लिटाया और मेरी चूची में अपना सर डाला और मेरी चूत में अपना लंड. इस बार घातक स्पीड में मेरी चुदाई की. पांच मिनट में ही कम से कम पांच सौ बार उसने अपने लंड को मेरी चूत में घुसाया और निकाला. मैं तो दूसरे मिनट ही झड़ गई थी. उसकी घातक गेंदबाजी ने मेरे होश फाख्ता कर दिए. पांच मिनट बीतते बीतते उसका ओवर समाप्त होने को आया. उसने फिर से कस के लंड को मेरी चूत में डाला और माल गिराने लगा. इस बार माल गिरते ही वो तुरंत खड़ा हुआ और बाथरूम जा कर अपना लंड साफ किया. तब तक मैं यूं ही बेसुध जमीन पर पड़ी रही. मेरे सामने उसने अपने कपड़े पहने. मैं यूं ही नंगी लेटी हुई उसे देख रही थी. जब उसने अपने शर्ट का आखिरी बटन लगाया तो मैं किसी तरह खड़ी हुई. मेरे चूत, चूची और गांड तीनों में दर्द का अहसास हो रहा था. और बदन भी टूट रहा था. लेकिन ये दर्द भी उतना ही मजा दे रहा था जितना किसी शराबी को एक बोतल शराब का नशा मजा देता है. मैं उठ कर आलमारी के पास आई और आलमारी से एक हजार रुपये का पांच नोट निकाला और राहुल की जेब में रखने लगी.

राहुल बोला- नहीं नहीं, ये किसलिए? मुझे ये नहीं चाहिए.

मैं उससे लिपटते हुए बोली- ये मेरे प्रेम का उपहार है मेरे राहुल. प्लीज इनकार मत करो. ये तो वही पैसे हैं जो तुम मेरे मकान में रहने का किराया देते हो. अब जब तुम मेरे दिल में बस गए हो तो मकान में रहने का किराया मैं तुमसे कैसे ले सकती हूं?

पहले तो वो मना करता रहा. लेकिन जब मैं उसे अपनी नंगी गिरफ्त से छोड़ने को राजी नहीं हुई तो उसने फिर कुछ नहीं बोला. मैंने उसकी जेब में वो नोट रखे और उसे अपनी नंगी गिरफ्त से आजाद कर दिया. तीन बजकर पचपन मिनट हो चुके थे. राहुल झट से मेरे कमरे से बाहर निकल गया. और मैं उसके पीछे पीछे उसी हालत में ड्राइंग रूम तक आई और घर का दरवाजा अंदर से बंद किया और बाथरूम में जा कर बाथ टब में जा कर पानी में जो लेटी और बीते हुए आनंददायक पलों को याद करते करते कब शाम हो गई कुछ पता ही ना चला.

आज मेरी गांड की खुजली मिट चुकी थी. राहुल ने अपना वादा निभाया और अक्सर मेरी इच्छानुसार आ कर मेरी गांड और चूत की खुजली मिटाता रहता है.

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