लेडी बॉस को चोदकर माँ बना दिया

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Shadi shuda boss ki chudai kahani- Sex story: हाय मेरा नाम जनक है। ये स्टोरी आज से एक साल पहले की है जब मेरा जॉब एक एमएनसी में लगा था। निडर और दबंग होने के कारण मैं किसी से नहीं डरता था और इस वजह से मेरी दोस्ती बहुत लोगों के साथ हो गई थी।

मेरी बॉस जो कि एक फीमेल थी वो अक्सर मुझ पर नोट करती थी। मैं सभी से हंसी-मजाक किया करता था। धीरे-धीरे मेरी बॉस भी मेरी तरफ अट्रैक्ट होने लगी और मुझे बोलने लगी कि तुम आखिर क्या हो। तुम्हारे आते ही ऑफिस का माहौल बदल गया। सब लोग एक दूसरे के साथ कितने खुश रहते हैं और मजाक करते रहते हैं।

धीरे-धीरे वो मुझे पसंद करने लगी। एक दिन उसने मुझे आई लव यू बोल दिया। मुझे कुछ समझ में नहीं आया और मैंने भी बोला कि इवनिंग में रिप्लाई करूंगा। मेरी बॉस एक शादीशुदा औरत थी। उसकी शादी को चार साल हो चुके थे।

मैंने सोचा कि क्या रिप्लाई करूं और फाइनली मैंने आई लव यू तो बोल दिया। धीरे-धीरे हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताने लगे और नाइट में फोन सेक्स भी करने लगे। अब मुझे लगने लगा था कि मुझे उसके साथ सेक्स करना चाहिए। लेकिन मैंने पहले कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था।

एक सैटरडे नाइट मैंने फोन सेक्स करते-करते कहा कि मैं रियल में तुम्हें फक करना चाहता हूं। पहले तो उसने ना कर दी लेकिन फिर मान गई। संडे को मैंने उसको फोन किया तो उसने बोला कि उसके हसबैंड बारह बजे ऑफिस के काम से बाहर चले जाएंगे तब तुम आ जाना।

बारह पंद्रह पर उसका फोन आया कि तुम आ जाओ। मैं बोला कि मैं तीस मिनट में पहुंच जाऊंगा तो उसने बोला कि ठीक है तब तक मैं भी बाथ ले लेती हूं और रेडी हो जाती हूं। तीस मिनट के बाद जब मैं उसके घर पहुंचा तो उसने गेट खोला। वो नहाकर जस्ट निकली थी और उसके गीले बाल खुले हुए थे।

मैं उसके रूम में चला गया और उसने गेट बंद कर लिया। अब मेरा दिल जोर से धड़क रहा था क्योंकि ये मेरा पहला सेक्स एक्सपीरियंस था। मैंने उसको हग किया तो वो भी मुझे लिपट गई और मैंने उसको उठाकर बेड पर लिटा दिया और उसके बूब्स सहलाने लगा।

थोड़ी देर में मैंने उसकी साड़ी और उसके पेटीकोट को निकाल दिया और उसकी चूत के आस-पास हाथ फेरने लगा। फिर मैंने उसके ब्लाउज को ओपन कर दिया और उसके गोरे-गोरे बूब्स को व्हाइट सिल्की ब्रा में देखकर और मस्त हो गया।

मैंने उसकी ब्रा भी ओपन कर दी और पेटीकोट को ओपन करने लगा कि एकदम से उसने बोला कि नहीं बस यहीं तक आगे नहीं।

उसकी आवाज में हल्का सा विरोध था लेकिन उसकी सांसें तेज और गर्म हो चुकी थीं। मैंने उसके चेहरे को देखा जहां आंखें आधी बंद थीं और होंठ थोड़े खुले हुए थे। मैं जानता था कि शुरुआत में हर औरत नए मर्द को ना कह देती है इसलिए मैंने धीरे से उसके गाल पर हाथ फेरा और बोला कि आज मैं पूरी तरह तुम्हारे अंदर समाना चाहता हूं।

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मेरी आवाज में दृढ़ता थी। एक झटके में मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। साड़ी का कपड़ा सरकते हुए नीचे खिसक गया और उसकी गोरी जांघें पूरी तरह नंगी हो गईं। उसने ब्लैक पैंटी पहनी हुई थी जो उसकी चूत की आकृति को साफ उभार रही थी। पैंटी का कपड़ा पहले से ही थोड़ा गीला हो चुका था।

मैंने अपनी उंगलियों को धीरे से उसकी जांघों के अंदरूनी हिस्से पर फेरा। उसकी त्वचा नरम और गर्म थी। फिर मैंने धीरे से उसकी चूत को सहलाना शुरू किया। मेरी उंगलियां ब्लैक पैंटी के ऊपर से ही उसके क्लिटोरिस पर दबाव डाल रही थीं। उसकी सांसें और तेज हो गईं। उसका शरीर हल्का सा कांपने लगा।

अब वो और मदहोश हो गई। उसकी आंखें पूरी तरह बंद हो गईं और मुंह से हल्की सी आह निकलने लगी। उसने अपनी पैंटी को दोनों हाथों से नीचे सरकाया और पूरी तरह उतारकर फेंक दिया। उसकी चूत अब बिल्कुल नंगी थी। गुलाबी और थोड़ी सूजी हुई।

उसने अपना हाथ बढ़ाया और मेरे लंड को थाम लिया। उसकी उंगलियां मेरे मोटे और पूरी तरह खड़े लंड के चारों ओर कसकर बंद हो गईं। उसने बोली कि कितना मोटा और गरम है तुम्हारा लंड। उसकी आवाज में वासना साफ झलक रही थी।

फिर उसने मेरे लंड को अपनी चूत की गीली और गर्म सतह पर रखकर धीरे-धीरे रगड़ना शुरू कर दिया। मेरे लंड का सिरा उसकी चूत की फांकों के बीच फिसल रहा था। उसका रस मेरे लंड को चिकना बना रहा था। हर रगड़ के साथ वो हल्का सा कांप रही थी और उसकी सांसें भारी होती जा रही थीं।

मैंने भी अब मौका देखकर अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया।

मेरा लंड उसकी गीली और गरम चूत की फांकों को धीरे-धीरे चीरता हुआ अंदर प्रवेश कर रहा था। उसकी चूत का संकरा रास्ता मेरे मोटे लंड को पूरा निगल नहीं पा रहा था। बस आधा ही घुसा था कि वो अचानक बोली, “जानू धीरे… दर्द होता है।” उसकी आवाज में दर्द और वासना दोनों का मिश्रण था। उसकी भौंहें सिकुड़ गई थीं और आंखें कसकर बंद हो गई थीं।

मैं रुक गया। उसके चेहरे को चूमते हुए उसके गालों पर हल्के-हल्के किस किए। फिर मैंने बहुत धीरे-धीरे अपना कूल्हा आगे बढ़ाया। इंच-दर-इंच मेरे मोटे लंड ने उसकी चूत को फैलाते हुए पूरा अंदर समा लिया। अब मेरी जांघें उसकी जांघों से सट गई थीं। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थी। गर्म, नम और मांसल दीवारें हर तरफ से दबाव बना रही थीं।

फिर मैंने उसकी चूत में झटके मारने शुरू कर दिए। पहले धीमे और गहरे झटके, फिर धीरे-धीरे तेज। हर झटके के साथ उसके बूब्स ऊपर-नीचे हिल रहे थे। वो अपनी गर्दन को इधर-उधर घुमाने लगी। मुंह से “आह्ह्ह… उफ्फ…” जैसी मदहोश आवाजें निकलने लगीं। उसकी जबान बाहर निकलकर अपने लिप्स पर फेरने लगी। उसका चेहरा वासना से लाल हो चुका था।

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अचानक वो बोली, “बस अब और नहीं।” उसने मुझे धक्का दिया और तेजी से उठकर बाथरूम में चली गई। लेकिन मैं अभी पूरी तरह ठंडा नहीं हुआ था। मेरा लंड अभी भी सख्त खड़ा था और उसकी चूत के रस से चमक रहा था।

थोड़ी देर बाद वो वापस आई और अपनी पैंटी तथा ब्रा पहनकर पेटीकोट पहनने लगी। मैंने तुरंत उसके हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और बोला कि मैं भी डिस्चार्ज होना चाहता हूं। वो समझ गई कि मैं उसकी चूत के अंदर ही डिस्चार्ज होना चाहता हूं। उसने एक पल सोचा और फिर बोली, “अब कंडोम लगा लो।”

वो अलमारी की तरफ गई। अपने हसबैंड के परचेज किए हुए कंडोम पैकेट में से एक कंडोम निकाला। वापस आकर उसने अपने नरम हाथों से मेरे लंड को पकड़ा। मेरे लंड पर कंडोम को सावधानी से चढ़ा दिया। उसकी उंगलियां मेरे लंड को सहलाती रहीं।

और इसके बाद मैंने फिर उसकी चुदाई शुरू की। अब वो पहले से ज्यादा मदहोश हो गई थी। उसकी चूत अब और भी गीली और ढीली हो चुकी थी। मैं तेज-तेज झटके मार रहा था। वो अपनी गर्दन को जोर-जोर से इधर-उधर घुमा रही थी। उसकी आंखें बंद थीं और मुंह से लगातार कराहें निकल रही थीं। उसने अपने दोनों हाथ ऊपर उठाकर अपने बालों में फेरने लगी।

और मुझे बोलने लगी जानू जोर से और जोर से।

उसकी आवाज में पूरी वासना भरी हुई थी। वो अपनी कमर उठा-उठाकर मेरे हर झटके का जवाब दे रही थी। अब मुझे भी शरारत सूझी और मैंने जल्दी से कंडोम अपने लंड से निकालकर फेंक दिया। फिर मैंने अपना मोटा, गरम और चिपचिपा लंड उसकी चूत में एक तेज झटके में पूरी तरह फिट डाल दिया। उसकी चूत अब पहले से ज्यादा गीली और ढीली हो चुकी थी। मेरे लंड ने उसके अंदर तक पहुंचकर उसे पूरी तरह भर दिया।

मैंने उसकी चूत को जोर-जोर से चोदना शुरू कर दिया। हर झटका गहरा और तेज था। मेरी जांघें उसकी जांघों से जोरदार टकरा रही थीं। कमरे में चप-चप की आवाज गूंज रही थी। उसके बूब्स तेजी से हिल रहे थे। वो अपनी आंखें बंद करके जोर-जोर से कराह रही थी।

पंद्रह-बीस मिनट बाद वो हांफते हुए बोली, “बस करो जानू।” उसका चेहरा पसीने से तर था और सांसें फूल रही थीं। तो मैंने बोला कि बस पांच मिनट और। और मैं फिर उसकी चूत को चोदने लग गया। मेरे झटके और भी तेज हो गए थे। वो बोली, “प्लीज अंदर कोई बदमाशी मत करना। चाहो तो मेरी कमर पर निकाल देना।”

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लेकिन मैं कहां रुकने वाला था। मेरी रफ्तार बढ़ती गई। अचानक मेरे लंड में तीव्र खुजली हुई और मैंने अपना पूरा गरम-गरम और ढेर सारा वीर्य उसकी चूत के गहरे अंदर छोड़ दिया। मोटी-मोटी धारें उसके अंदर फूट रही थीं। उसकी चूत मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थी।

वो बोली, “कर दी ना अंदर बदमाशी।” उसकी आवाज में आश्चर्य और संतोष दोनों थे। वो जल्दी से उठी और बाथरूम में भाग गई। थोड़ी देर बाद वो वापस आई तो उसकी आंखों में एक अजीब चमक थी। उसके चेहरे पर मेरे लिए एक अपनापन और प्यार था। वो आकर मुझसे लिपट गई और हम बेड पर साथ लिपटकर सो गए।

क्योंकि ये मेरा फर्स्ट एक्सपीरियंस था तो मैंने उससे पूछा कि क्या मैं तुम्हें सैटिस्फाई कर पाया। तो वो बोली कि शादी के चार साल हो गए लेकिन आज पहली बार इतनी सैटिस्फाई हुई हूं। वरना मेरे हसबैंड तो बस पांच मिनट अपनी मस्ती करते हैं और डिस्चार्ज हो जाते हैं। लेकिन तुमने मुझे आज पूरी तरह सैटिस्फाई किया है। तुम जो चाहो आज मुझसे मांग सकते हो।

तो मैं बोला कि तो मैं तुम्हें प्रेग्नेंट करना चाहता हूं और तुम्हें हमेशा चोदना चाहता हूं। कुछ समय चुप रहने के बाद उसने मुझे ओके बोल दिया। फिर तो हम जब उसका हसबैंड बाहर होता हम चुदाई करते थे। उसे भी मुझे चोदकर बड़ा मजा आता था।

वो खुद ही सेक्स के अलग-अलग आसन मुझे बताती थी और उन आसनों में अपनी चूत को मस्त चुदवाती थी। और कुछ समय बाद उसने मुझे बताया कि वो प्रेग्नेंट है। नौ महीने के बाद उसने हमारे बच्चे रणबीर को जन्म दिया और उसके कहने के मुताबिक वो बिलकुल मेरे जैसा दिखता है।

हम आज भी सेक्स करते हैं जब मौका मिले। लेकिन अब कंडोम से करते हैं क्योंकि वो अब दोबारा प्रेग्नेंट होना नहीं चाहती।

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