जीजा ने साली की चूत को बस में ही मसला

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Sleeper bus sex story: मेरा नाम सुनील है, और ये बात कुछ ३-४ साल पहले की है। मेरी वाइफ मायके जाने के लिए जिद करने लगी इसलिए मैं सोचा उसे छोड़ के आ जाते हैं। वैसे भी मुझे बाहर की बिरियानी खाना था, घर का दाल खाते खाते मैं थक चुका था। मैं सोचा चलो मुझे थोड़ी सी घर में शांति मिलेगी।

मेरी ससुराल में मेरा ससुर और उनकी बेटी और उसका बेटा और बेटे की पत्नी अंजलि थी। अंजलि इस कहानी का असली किरदार है। अंजलि एक बहुत ही कामुक लड़की थी, उसकी काफी अरसे से बहुत सारे लड़कों के साथ चक्कर था जो मुझे बाद में पता चला। और देखने में एकदम टाइट माल थी।

अब मैं कहानी को और बढ़ाता हूं। मैं मेरी बीवी को वहाँ छोड़कर दूसरे दिन वापस आने वाला था और अंजलि का मायका भी मेरे शहर में ही था। तो मेरे बड़े साले ने कहा कि जीजा जी अगर आपको कोई प्रॉब्लम ना हो तो अंजलि को भी अपने साथ ले जाओ तो मुझे वहां तक उसे छोड़ने नहीं आना पड़ेगा। तो मैंने हाँ कर दी और दूसरे दिन हमारी रात की बस थी और हमें स्लीपर कोच में सीट मिली थी।

हम लोग ट्रेवल्स के ऑफिस पर आ गए और बस रात को एक बजे की थी तो हम लोग बस में चढ़ गए। पहले मैंने अंजलि से कहा कि तुम पहले चढ़ जाओ और उस टाइम उसने फिटिंग वाला सलवार सूट पहना था और वो मुझसे छोटी है इसलिए मैं उसे तुम कहता हूं, तो मैंने उसे बर्थ पर चढ़ने में मदद की।

अब तक मेरे मन में कोई ख्याल नहीं था, लेकिन जैसे ही मैंने उसे बर्थ पर चढ़ने में मदद की तो मेरा हाथ उसके कूल्हों को टच हुआ। उसकी कूल्हों की नरम और गोलाई मेरी हथेली पर ऐसे महसूस हुई जैसे कोई मुलायम मक्खन का टुकड़ा हो, गर्म और लचीला। मेरे शरीर में एक तेज करंट सा दौड़ गया, मेरी रीढ़ की हड्डी तक झनझना उठी और मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। उस स्पर्श से मेरे लंड में हल्की सी सिहरन हुई, लेकिन मैंने खुद को संभाला और फिर मैं भी बर्थ में चढ़ गया। बस हाईवे पर आते ही उसकी लाइट ऑफ हो गई।

फिर अंजलि ने मुझे कहा कि जीजू आपको सोना है तो सो जाओ, मुझे नींद नहीं आती है, मैं बैठी हूं। तो मैं सो गया और फिर आधे घंटे के बाद जब मेरी आंख खुली तो मैंने देखा कि अंजलि भी सीधी होकर सो गई है। फिर मैंने आंख खोलकर देखा तो उसका दुपट्टा साइड में पड़ा था और उसके दोनों बूब्स उसकी सांस के साथ ऊपर उठते थे। हर सांस के साथ उसके 36 साइज के बूब्स धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रहे थे, सलवार सूट के ऊपर से उनकी गोलाई और निप्पल की हल्की उभरी हुई आकृति साफ दिख रही थी। फिर अचानक से मुझे छींक आई और एकता उठी तो वो मेरी तरफ पीठ करके सो गई, मैं तो उसे ही देखता रह गया, लेकिन कुछ कर नहीं पाया।

फिर थोड़ी देर के बाद मैं भी अंजलि की पीठ की तरफ मुंह करके सो गया। फिर बस जैसे ही ब्रेक मारती या गड्ढे में जाती तो मेरा शरीर अंजलि को टच हो जाता और मैं पागल सा हो जाता। हर झटके में मेरी छाती उसकी पीठ से सट जाती, मेरी जांघें उसके निचले हिस्से से रगड़ खातीं और मेरी गोद में उसकी गोल गांड बिल्कुल चिपक जाती। मैंने मौके का फायदा उठाया और उसके ज्यादा करीब सो गया। मेरा लंड तनकर पूरा 8.5 इंच का हो गया था, वो सख्त और लोहे जैसा खड़ा होकर अंजलि की गांड को सीधे टच कर रहा था।

मेरी नींद उड़ चुकी थी और मैं तो आंख बंद करके मजे ले रहा था, हर बार बस के हिलने पर मेरी हथेली अनजाने में उसके कूल्हों पर दब जाती और उसकी गर्मी मेरी उंगलियों तक पहुंच रही थी। फिर अचानक मुझे नींद आ गई और थोड़ी देर के बाद जब आंख खुली तो अंजलि का दबाव मेरी तरफ बढ़ गया था। उसकी गांड मेरे लंड से एकदम चिपक गई थी, मैं महसूस कर रहा था कि उसकी नरम गांड की गहराई मेरे सख्त लंड पर दबाव डाल रही है। मेरे लंड के पानी से टोपा भी गीला हो गया था, गर्म और चिपचिपा प्रीकम मेरी ट्राउजर के अंदर फैल रहा था और लंड की नोक पर लगातार टपक रहा था।

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फिर मैंने सोचा कि अंजलि तो नींद में है, तो मैं सीधा लेट गया और मेरी ट्राउजर पैंट में तंबू बना हुआ था। फिर उतने में अंजलि भी मेरी तरफ मुंह करके सो गई और मैं भी लेटा हुआ था और मेरी आंख फिर लग गई।

फिर थोड़ी देर के बाद मेरा हाथ उसके 36 साइज के बूब्स को टच हुए और उसका कोई जवाब नहीं आया, तो मैं जैसे तैसे उसे दबा देता था और उतने में होटल आया तो मैं ऐसे ही सीधा होकर सोने का नाटक करने लगा और भूल गया कि मेरा तंबू बहुत बड़ा है।

उस स्पर्श में उसके नरम और भारी बूब्स की गर्मी मेरी हथेली के अंदर पूरी तरह फैल गई। सलवार सूट के पतले कपड़े के ऊपर से भी उनकी गोलाई और लचक साफ महसूस हो रही थी। मेरी उंगलियां अनजाने में ही उनकी निचली सतह को हल्का दबा रही थीं और हर बार बस के हल्के झटके में वे और भी मजबूती से मेरी हथेली में दब जाते थे। अंजलि अभी भी गहरी नींद में लग रही थी। उसकी सांसें धीमी और नियमित थीं। लेकिन मेरे अंदर तो आग लग चुकी थी।

उतने में बस होटल के पास रुक गई। मैंने तुरंत सीधा होकर लेटने का नाटक शुरू कर दिया। मैं जानबूझकर आंखें बंद किए हुए था। लेकिन मैं भूल गया था कि मेरी ट्राउजर पैंट में मेरा लंड पूरी तरह खड़ा होकर तंबू बना चुका था। वह 8.5 इंच का सख्त और मोटा लंड कपड़े को ऊपर की ओर उभार रहा था। अंजलि धीरे से उठी। उसकी आंखें सीधे मेरे उस उभरे हुए तंबू पर टिक गईं। वह कुछ पल तक बिना पलक झपकाए उसे देखती रही। उसकी नजर में हैरानी और एक अजीब सी चमक थी। फिर उसने धीरे से मेरे कंधे को हिलाया और मुझे उठाने की कोशिश की।

मैं जानबूझकर सोने की एक्टिंग करता रहा। मेरी सांसें भारी थीं। लेकिन अंदर से मैं उसकी प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा था। अंजलि फिर भी मेरे तंबू को देखती रही। उसकी नजर बार बार वहां अटक जाती थी। उसकी होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई। उतने में मैंने आंखें खोलीं और उससे पूछा कि क्या हुआ? क्या देख रही हो? तो वो मुस्कुराई और शरमा गई और कहा कि कुछ नहीं नीचे उतरो होटल आ गई है।

फिर हम लोग नीचे उतरे और वापस चढ़ते वक्त उसने मुझसे कहा कि जीजू मैं आपको मिस कॉल दूं, तभी आप ऊपर आना। मैं सोच में पड़ गया और ओके कहकर नीचे ही खड़ा रह गया। फिर 7-8 मिनट के बाद मिस कॉल आया और मैं बस में चढ़ गया और मैंने उससे कुछ पूछा नहीं और कहा कि अब सीधा 2 घंटे के बाद अपने शहर पहुंचेंगे तो तुम सो जाओ।

अंजलि सो गई थी और मैं उसका रूप निहार रहा था, और मन में बहुत सारे ख्याल आ रहे थे। पर सेक्स का दबाव इतना था कि मैं कुछ सोच नहीं पाया। फिर मैं हिम्मत करके साइड से उसकी बूब्स को टच करने लगा। फिर वो कुछ नहीं बोली। मैं फिर उसके निप्पल को सलवार के ऊपर से ही सहलाने लगा। थोड़ी देर बाद मुझे लगा कि सब कुछ करने देगी। फिर मैं उसके बूब्स को दबाने लगा। उसने झट से मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे देखने लगी। मेरी फटने लगी। मैं बोला – सॉरी। वो बोली, जैसे ही मैं सो गई, तुम शुरू हो गए। मैं बोला – अंजलि प्लीज, अब नहीं होगा। ये कहा कर मैं सीट से उठा। तो वो मेरा हाथ पकड़ कर बोली – बैठो आराम से। फिर ५ मिनट के बाद फिर से बोली – क्यों डर गए? मैं तो मजाक कर रही थी और मुझे एक नॉटी सी स्माइल दे दी। फिर अपना पैर मेरे पैर पर रख दी। मैं उसके बूब्स को दबाने लगा।

अंजलि – अहः अहः अहः ऊऊओ ह्म्म्म… कितना अच्छा दबाते हो. और दबाओ… जोर से दबाओ… प्लीज हाहाह अहः अहः अहः… सुनील.. ये सब कहाँ से सीखे. ऊऊओग्ग्ग्ग ऊफोफ्फ्फ्फ़… उईई माँ… और दबाओ ना….

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उसकी आवाज में एक मीठी कराहट थी जो बस के शोर में भी साफ सुनाई दे रही थी। मैंने उसके बूब्स को दोनों हाथों से पूरी ताकत से दबाया। मेरी उंगलियां उनके नरम मांस में धंस रही थीं। निप्पल अब पूरी तरह सख्त होकर सलवार के कपड़े को ऊपर उठा रहे थे। मैंने उन्हें उंगलियों से घुमाया और हल्का सा खींचा भी। अंजलि की सांसें तेज हो गईं। उसकी छाती ऊपर नीचे होने लगी।

फिर उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और सलवार को थोड़ा ऊपर उठा दिया। और मैं उसको जमकर दबाने लगा। वो मेरा पैंट के अंदर हाथ डालकर लंड को हिलाने लगी। अंजलि – मस्त लंड है तुम्हारा. मेरी ननद रानी भरपूर इसका फायदा लेती होगी, आज मैं लूंगी और कहकर फिर हंस पड़ी। अंजलि – क्यों मुझे नहीं दोगे? मैं – बट कैसे? अंजलि – मेरे घर आकर एक रात मुझे जमकर चोदना जब कोई नहीं रहेगा। फिर वो हिला-हिला कर मेरा पानी निकाल दी और उसको हाथ में लेकर चाट गई। तुम्हारा तो हो गया. लेकिन मैं प्यासी ही रह गई। फिर हम उस दिन रात को पहुंच गए पर हम दोनों मिल के ठीक किया कि आज रात वो मेरे घर रुकेगी और सुबह होते ही वो अपने मायके चली जाएगी। वो मुझे सीधे ही बेडरूम में ले गई और मेरा लंड निकाल कर लंड चूसने लगी। फिर उसने मुझे जोर से हग किया। फिर उसने मेरे परफ्यूम की तारीफ की। मैं बोला – वाइल्ड स्टोन. इट्स हैपन. वो उसकी सलवार फट से निकाली और नंगी हो गई। मुझे भी नंगा कर दिया। पागल जैसे चूसने लगी।

उसके मुंह में मेरे लंड की गर्मी और नमी का अहसास अनोखा था। उसकी जीभ लंड की नोक पर घूम रही थी। वह पूरी ताकत से चूस रही थी। उसके गाल अंदर की ओर धंस रहे थे। 10 मिनट के बाद मेरे लंड का उसके मुंह में निकल गया, मेरा दूसरा टाइम था। मैं अंजलि को बेड में लेटा कर उसकी बूब्स चूसने लगा। क्या माल थी वो. परफेक्ट साइज बूब्स थे और टाइट भी। अंजलि – मेरी चूत चाटो ना जीजा जी. मैंने उसकी चूत को देखा. एकदम क्लीन शेव थी ब्राउन चूत. पहले टाइम मना कर दिया. फिर वो बोली – मैं साफ की हूं. तुम चाटो ना. फिर मैंने उसकी चूत को हनी डालकर चाटा। अहहाह अहः अहः वो… ऊईई माँआआ ऊह्ह्ह्हो होहोह हाहाहा वो पूरा मजा ले रही थी।

अंजलि – अहहाह अहः उफ्फ्फ्फ़… क्या चूसते हो तुम.. ऐसे तो सिर्फ ब्लू फिल्म में ही दिखाते हैं. उईइ म्मम्मम अममामा उईईई माँआआअ.. मेरी जान.. खा जाओ मेरी चूत को… मैं तो पूरी पागल हो जाऊंगी.. अब चोद भी दो मुझे… चोदो मुझे… पूरा रूम उसकी आवाज से गूंज रहा था।

उसकी चीखें और कराहटें कमरे की दीवारों से टकराकर वापस लौट रही थीं। मैंने अपनी जीभ को और भी गहरी तक उसके क्लिटोरिस पर घुमाया। हनी की मीठी चिपचिपाहट उसके गर्म और गीले रस के साथ मिलकर मेरे मुंह में एक अनोखा स्वाद भर रही थी। उसकी चूत की नरम पंखुड़ियां मेरी जीभ के इर्द गिर्द कांप रही थीं। हर बार जब मैं जोर से चूसता तो अंजलि की कमर ऊपर उठ जाती और उसकी जांघें मेरे सिर को कसकर दबा लेतीं। उसकी उंगलियां मेरे बालों में उलझ गई थीं और वह बार बार मुझे और गहराई में धकेल रही थी।

अब मैं अपने लंड को उसकी चूत में घिसने लगा। क्या गरम चूत थी अंजलि की. वो सिर्फ आंखें बंद करके मजा ले रही थी। मेरे मोटे लंड का सिरा उसके क्लिटोरिस पर ऊपर नीचे रगड़ खा रहा था। उसकी चूत से निकलता गर्म और चिपचिपा रस मेरे लंड को पूरी तरह भीगा रहा था। हर घिसने पर एक हल्का चिकचिकाता आवाज उठ रही थी। अंजलि की सांसें तेज और अनियमित हो चुकी थीं। उसकी छाती जोर जोर से ऊपर नीचे हो रही थी और उसके निप्पल पूरी तरह सख्त होकर खड़े थे।

फिर मैंने अचानक से लंड पेल दिया और वो चिल्लाने लगी। अंजलि – अहहाह अहः माँ.. उईई माँ ऊहोहोहोह हूहोह्ह, चोद दिया रे, मैं तो मर गई, कितना अंदर डाल दिया. अहहाह अहः आहाहाह..

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मेरा 8.5 इंच का मोटा और सख्त लंड एक झटके में पूरी तरह उसके अंदर समा गया। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर जकड़ रही थीं। अंदर की गर्मी और नमी इतनी ज्यादा थी कि मुझे लगा जैसे कोई गर्म और मुलायम मखमल का ट्यूब मेरे लंड को निगल रहा हो। अंजलि की आंखें चौड़ी हो गईं। उसका मुंह खुला रह गया और वह लगातार चीख रही थी। मैंने एक पल रुककर उसे महसूस किया। फिर धीरे धीरे पेलना शुरू किया। हर थ्रस्ट पर उसकी चूत से एक जोरदार चपाक चपाक की आवाज निकल रही थी।

मेरा लंड अंदर उसकी चूत की गहराई को छू रहा था। वो मजे लेकर चुदवा रही थी। अंजलि– अब तक कहाँ था मेरे राजा. चोद मुझे… और जोर से चोदो.. पूरा पेल डाल. अहः अहहाह अहः ऊफोफोफ़ फोफोफो.. फाड़ दे मेरी चूत को आज. मैं – साली रांड.. इतना चोदूंगा, कि याद रखेगी. ले साली.. ले मेरा लंड.

मैंने अपनी गति तेज कर दी। मेरे कूल्हे जोर जोर से आगे पीछे हो रहे थे। हर बार पूरा लंड बाहर निकालकर फिर से एकदम जड़ तक धकेल देता। अंजलि की चूत अब पूरी तरह फैल चुकी थी और मेरे लंड को चूस रही थी। मैंने एक हाथ से उसके बूब्स को मसलना शुरू किया और दूसरे हाथ से उसकी चूत के ऊपर वाले हिस्से को रब करने लगा। मेरी उंगलियां उसके क्लिटोरिस पर तेजी से घूम रही थीं। अंजलि की जांघें कांपने लगीं। उसकी कमर बार बार ऊपर उठ रही थी और मेरे हर थ्रस्ट के साथ वह और जोर से चिल्ला रही थी।

मैं उसको पेलता रहा और हाथ से चूत को रब भी करता रहा। ३० मिनट के बाद उसका पानी छूट गया। उसका पूरा शरीर अचानक सख्त हो गया। उसकी चूत की दीवारें मेरे लंड को बार बार सिकोड़ने लगीं। एक गर्म और पतला रस की धार मेरे लंड के चारों ओर फूट पड़ी। अंजलि की आंखें उलट गईं और वह जोर जोर से कांपती रही। फिर भी मैं उसको चोदता रहा। ५ मिनट के बाद, मेरा भी छूटने वाला था। मैंने कहा – मेरा निकल जाएगा. अंजलि – अंदर ही निकाल दो।

मेरे लंड में एक तेज झनझनाहट हुई। मैंने आखिरी बार पूरा लंड जड़ तक धकेला और फिर गर्म गर्म वीर्य की मोटी धारें उसके चूत के अंदर फूट पड़ीं। हर स्पर्म की धार उसके गर्भाशय तक पहुंच रही थी। अंजलि की चूत मेरे लंड को और भी कसकर निचोड़ रही थी जैसे हर बूंद को पी लेना चाहती हो। मैंने पूरी तरह खाली होने तक अंदर ही रहकर उसे भर दिया। फिर मैंने उसकी चूत को भर दिया और मैं बेड पर लेटा रहा और उस रात मैंने उसको दो बार और चोदा और बाद में उसने बताया, और इसी तरह से मेरी बीवी की उस दिन जमके पेली। और अंजलि भी खुश थी, फिर सुबह मैं उसको उसके मायके छोड़ आया। और उसी बीच में मैं उससे और भी कई बार मिलता रहा, और इसी तरह जब भी मेरी पत्नी मायका जाती थी तो अंजलि भी मेरे पास आ जाती थी मायका जाने के बहाने।

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