Bete ke dost ki mummy sex story: यह सत्य कहानी अभी 6 अप्रैल 2014 की है जब मैं मेरे लड़के को JEE कि एक्जाम दिलाने पास के सहर में ले कर जाने वाला था।
जब सुबह 7 बजे घर से निकला तो एक चौराहे पर मेरे लड़के का दोस्त भी अपनी माँ के साथ मिला। मैंने सोचा कि सिर्फ लड़का ही जाएगा एक्जाम देने पर जब दोनों मिले तो मेरा लड़का आगे की सीट से उतर गया और दोस्त की मम्मी को बोला कि “आंटी आप आगे की सीट पर बैठ जाइए मैं और अंकित पीछे बैठ जाते हैं।” तो दोस्त की माँ आगे की सीट में बैठ गईं और बैठते समय मेरे से हाथ मिलाने को आगे बढ़ाया। मैंने भी हाथ बढ़ा दिया पर जैसे ही उनसे हाथ मिलाया ऐसा लगा जैसे पूरे शरीर में करंट लग गया हो। उनके हाथ बहुत ही मुलायम, नरम और गर्म थे। इतने में उन्होंने कार का दरवाजा लगाया तो मैंने कार स्टार्ट की और चल दिए।
उन मेडम की उम्र करीब 35-38 के आसपास होगी। गोरे रंग की थीं, हल्के हरे-केसरिया रंग की साड़ी और केसरिया रंग का ब्लाउज पहने रखा था। कलाइयों में मैच करती चूड़ियाँ पहनी थीं। खुल्ले बाल कंधों पर लहरा रहे थे। इस उम्र में भी मोटापा उनके पास नहीं फटका था। उनका जिस्म एकदम फिट और आकर्षक था पर बूब्स बड़े-बड़े, भरे-पूरे और मादक थे। वे बड़े मादक अंदाज में तिरछी नजर से कभी-कभी मेरी तरफ देखतीं। कुछ देर में मैंने ड्राइविंग ग्लास को ऐसा सेट कर दिया कि उनका चेहरा साफ दिखने लगा। मेरा ध्यान मुख्य रूप से कार ड्राइविंग पर था।
कुछ देर बाद टोल नाका आया तो उन्होंने खुद ही अपनी छोटी सी पर्स को अपने ब्लाउज से स्तनों के पास से निकाला और मुझे देने लगीं। मैंने मना कर दिया तो उन्होंने जबरदस्ती मेरे हाथ में 100 रुपये का नोट रख दिया। मैंने टोल नाका में पेमेंट किया और आगे बढ़ गए। मैंने मेन मिरर ग्लास में देखा तो उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया था और ब्लाउज का ऊपरी हिस्सा थोड़ा खुल गया था। उनके सेक्सी बूब्स आंशिक रूप से दिखने लगे थे। उन गोल, भरे हुए स्तनों को देखते-देखते एक्जाम सेंटर पहुँच गया। 8 बजकर 20 मिनट पर बच्चे और मैं मेडम के साथ कार से नीचे उतर गए। दोनों बच्चे एक साइड में जाकर अपने कोर्स और एक्जाम के बारे में बातें करने लगे।
तो मैं और वे मेडम एक पेड़ के नीचे खड़े होकर बातें करने लगे। जान-पहचान में सबसे पहले उनका नाम पूछा तो पता चला कि मेडम का नाम ‘पूनम खत्री’ है। पति के बारे में पूछा तो बताया कि वे दुबई में जॉब करते हैं और तीन-तीन साल में एक बार ही आते हैं। मैंने पूछ लिया कि आपका समय कैसे पास होता है तो वे उदास होकर बोलीं, “बस समय काट रही हूँ।” बातें करते-करते 9 बज गए। बच्चे एक्जाम सेंटर में अंदर चले गए और हम दोनों कार में जाकर बैठ गए और बातें करने लगे। मैंने FM रेडियो लगा दिया और अपने सैमसंग गैलेक्सी में वीडियो सॉन्ग देखने लगा।
इतने में पूनम खत्री का लड़का आया और बैग में से 12वीं का ओरिजिनल प्रवेश पत्र निकालकर जाते समय बोला, “अंकल स्कूल वाले अंदर नहीं ले रहे हैं।” मैं जल्दी से अंकित के साथ चला गया और करके वापस आया तो देखा कि पूनम मेरे मोबाइल को अपने हाथ में लेकर बड़े चाव से एक वीडियो देख रही थीं। वीडियो देखने के बाद बोलीं, “बहुत मस्त वीडियो है आपके पास तो।” मैंने बोला कौन सी है जो आपको अच्छी लगी तो पहले तो वे शरमाईं पर जब मैंने उनसे आग्रह किया तो बोलीं, “ये वाली।” मैंने उस वीडियो को देखा तो वो वीडियो पोर्न फिल्म की थीं। मैं पहले शरमाया और फिर बोला आपको कहाँ से मिल गए ये तो बोलीं ढूँढ लिया और उसमें से एक वीडियो मुझे दिखाया जिसमें एक औरत घोड़े से चुद रही थी और बोलीं, “ऐसी भी औरतें हैं।” मैंने बोला हाँ हैं ना तभी तो इसमें दिख रही हैं।
कुछ देर बातें करने के बाद पूनम बोलीं, “चलिए कहीं बाहर चलते हैं यहां घुटन हो रही है बहुत भीड़ है।” एक्जाम सेंटर पर करीब 300 लोग इधर-उधर फैले हुए थे। मैंने बोला किधर चलूँ तो पूनम बोलीं कि मैं बताती हूँ आप यहाँ से तो चले। मैंने कार स्टार्ट की और स्कूल के गेट से बाहर निकले तो पूनम ने कहा कि सिटी से बाहर की तरफ चलते हैं जहाँ सुकून से बातें कर सकूँ। तो मैं सिटी से करीब 15 किलोमीटर बाहर आ गया और एक घने पेड़ की छाया में कार खड़ी कर दी। कार से उतरकर कार के ऑल्ट में कार की सीट का कवर रखकर दोनों नीचे बैठ गए और बातें करने लगे। पूनम वो पोर्न फिल्में देखे जा रही थीं चाव से। उनकी साड़ी का पल्लू पास से गिर गया था। उनके मस्त-मस्त उन्नत उरोज दिख रहे थे। मेरे नसों में उत्तेजना बढ़ती जा रही थी पर कोई बहाना नहीं मिल रहा था कि पूनम को किस करूँ।
तब दिमाग में एक आइडिया आया। मैं आलस भरी जम्हाई फाड़-फाड़ कर लेने लगा तो पूनम बोलीं कि थक गए हो क्या। मैंने हाँ किया तो पूनम बोलीं आप लेट जाएँ। तो मैं पूनम के पास लेट गया और पूनम पोर्न फिल्में देखती रहीं। पर तकिया नहीं होने के कारण लेटते नहीं बन रहा था तो पूनम ने कहा कि मेरी जाँघों में सर रख लीजिए। तो मैंने पूनम की जाँघों पर सर रखकर लेट गया। पूनम की नरम-नरम, गर्म जाँघों पर मुझे बहुत अच्छा लगने लगा। कुछ देर में मैंने पूनम की गोद में सर रख लिया और आराम से लेट गया। कुछ देर में पूनम झुकीं तो उनके बूब्स मेरे गाल से टकराए। तो मैंने बूब्स को किस कर लिया और हाथ से दबा दिया। पूनम बोलीं ये क्या कर रहे हो कोई देख लेगा। तब भी मैं नहीं माना और पूनम के बूब्स को दबाता रहा।
तो पूनम उठीं और कार के पीछे सीट में जाकर बैठ गईं। तो मैं भी सीट कवर उठाया और कार के अंदर जाकर AC ऑन कर दिया। कार के विंडो में लगे पर्दे लगा दिए। आगे की दोनों सीटों को पूरा आगे कर दिया जिससे पीछे की सीट के लिए खूब जगह हो जाए। और पूनम के पास जाकर पीछे की सीट पर बैठ गया और पूनम को किस करने लगा। बूब्स को दबाने लगा। पूनम भी मुझे किस करने लगीं। कुछ देर में पूनम के ब्लाउज के सभी हुक खोल दिए और पूनम की चुचियों को चूसने लगा। पूनम प्यार से मेरे सर पर हाथ घुमाने लगीं। मैं पूनम के गाल और होंठों को भी चूसने लगा। पूनम के होंठों को अपने दाँतों से हल्के-हल्के काटता तो बदले में पूनम भी मेरे होंठों को काटतीं। यह क्रम बहुत देर तक चला।
पूनम चुदाने के लिए तैयार हो गईं और पैंट के ऊपर से मेरे लंड को टटोलने लगीं। तो मैंने पूनम की साड़ी को जाँघों तक खिसकाया और जाँघों को सहलाने लगा। इधर पूनम मेरे पैंट के बेल्ट को खोलने लगीं। तो मैंने पैंट की बेल्ट और हुक को खोलकर चड्डी सहित नीचे खिसका दिया। पूनम मेरे खड़े लंड को हाथ से पकड़कर हिलाने लगीं। मैं पूनम की साड़ी को पूरा उठा लिया और पूनम की पैंटी को उतार दिया और चूत को सहलाने लगा। उधर पूनम मेरे लंड के साथ खेल रही थी। मैं झुककर पूनम की चूत चाटने लगा। तो कुछ ही पल में पूनम संभोग के मिलन के लिए तड़प उठीं। तो मैंने अपनी दोनों टांगों को नीचे कर दिया और पूनम को उठकर खड़ी कर दिया। तो पूनम मेरे लंड को अपनी चूत में घुसेड़ लिया और मेरे कंधों पर अपना हाथ रखकर मेरे से चिपक गई और अपने चूतड़ों को मेरे लंड पर घिसने लगी।
मैं पूनम की चूतड़ को पकड़ कर आगे पीछे करने लगा। पूनम का वजन ज्यादा नहीं था इसलिए बड़ी आसानी से उसे चोद रहा था। मेरे दोनों हाथ उनकी नरम, गोल और भरी हुई चूतड़ों को मजबूती से थामे हुए थे। हर जोरदार धके पर उनकी चूत मेरे मोटे और खड़े लंड को पूरी तरह निगल लेती। पूनम की गर्म, भीगी हुई चूत की दीवारें मेरे लंड को कसकर दबा रही थीं। हर बार जब मैं अंदर जाता तो एक चिकनी, गीली चू-चू की आवाज निकलती। पूनम अपनी जीभ मेरे मुंह में डालकर चूसती जाती। मैं भी उनकी मुलायम, गीली जीभ को अपने होंठों से चूसने लगा। हम दोनों की सांसें एक-दूसरे के मुंह में मिल रही थीं।
मैंने अपनी गति तेज कर दी और जल्दी-जल्दी पूनम के चूतड़ों को हिलाने लगा। मेरे कूल्हे बार-बार उनकी जांघों से टकरा रहे थे। पूनम के मुंह से उफ्फ… उफ्फ… आह… आह… आह… सी… सी… स्स्स्स्स… आआआ… आआआ… अहह्ह्… ह्ह्ह्ह्… आअह्ह्… आह की लगातार आवाजें निकलने लगीं। उनकी आवाजें कार के अंदर गूंज रही थीं। मुझे डर लग रहा था कि कहीं कोई आ न जाए इसलिए मैं जल्दी से पूनम को निपटाना चाहता था। मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी और तेज-तेज धक्के देने शुरू कर दिए। मेरे लंड की नोक हर बार उनकी चूत की गहराई तक जा रही थी। पूनम की चूत से रस निकलकर मेरे लंड और जांघों को गीला कर रहा था।
मुश्किल से पांच मिनट में ही हम दोनों ढेर हो गए। मेरा गर्म वीर्य उनकी चूत के अंदर छूटने लगा और कुछ बाहर निकलकर मेरी जांघों पर बहने लगा। पूनम की देह सिहर रही थी। उनकी आंखें बंद थीं और मुंह से हल्की-हल्की आहें निकल रही थीं। मैंने पूनम को जल्दी से उठाया और सीट पर बिठा दिया। पूनम ने अपने पेटीकोट से चूत को साफ किया। सफेद रस और उनका चूत का रस मिलकर पेटीकोट पर लग गया। फिर उन्होंने अपनी पैंटी को पहन लिया। मैं भी जल्दी-जल्दी अपनी पैंट को पहन लिया। दोनों कार से बाहर आ गए।
बाहर दूर-दूर तक कोई नहीं दिखाई दे रहा था। मेरी सांस में सांस आई। मैंने फिर से पैंट को ठीक से सेट करके पहन लिया। पूनम को भी बोला कि साड़ी ठीक से पहन लो। पूनम ने भी साड़ी को ठीक से पहन लिया और पल्लू को अपनी छाती पर व्यवस्थित कर लिया। फिर दोनों खड़े-खड़े बातें करने लगे। तब तक घड़ी में 10 बजकर 30 मिनट हो गए। मैंने पूनम को बोला कि चलो यहां से कोई आ न जाए। पूनम बोली ठीक है। दोनों कार में बैठे और एक्जाम सेंटर के सामने एक छोटे से होटल में बैठ गए। एक-एक पेप्सी लिया और स्कूल के अंदर हो गए। वहां कार में ढेर सारी बातें कीं।
मैंने पूनम से बोला कि मजा नहीं आया। पूनम बोली हां। मैंने बोला कि कैसे मजा आए तो पूनम बोली कि अंकित ट्यूशन के लिए जाता है। उस समय घर में कोई नहीं रहता। आप आ जाना। मैं बोला ठीक है। बहुत देर तक बातें करते रहे। फिर 12 बजकर 40 मिनट पर बच्चे बाहर आ गए। तो हम वापस अपने शहर आ गए। मैंने पूनम का मोबाइल नंबर ले लिया।
10 अप्रैल 2014 को पूनम से बात की तो पूनम बोली अंकित 11:30 पर ट्यूशन जाता है और 4 बजे तक आता है। आप दोपहर में आ जाओ। गर्मी में सुनसान रहता है। तो मैंने बोला ठीक है आता हूं। ऑफिस से निकल लिया कुछ बहाने करके। अपनी कार को एक दोस्त के घर छोड़कर पास ही पूनम के घर दोपहर में 12 बजे पहुंच गया।
पूनम मेरा इंतजार कर रही थीं। दरवाजे पर खड़ी होकर। पूनम ने एक हल्का गाउन पहन रखा था जो उनके जिस्म पर एकदम फिट बैठा था। गाउन के पतले कपड़े से उनका पूरा शरीर साफ झलक रहा था। उनके भरे हुए बूब्स, पतली कमर और गोल चूतड़ों की बनावट स्पष्ट दिख रही थी। मैं जैसे ही पहुंचा पूनम ने गेट में ताला लगा दिया बाहर से। जिससे कोई समझे कि घर में कोई नहीं है। फिर जल्दी से घर के अंदर आ गईं और मुख्य दरवाजा भी लगा लिया। तब तक मैं शानदार और महंगे सोफे पर बैठ गया।
कुछ देर में पूनम एक ग्लास में शरबत बनाकर लाईं और मुझे दिया। खुद भी पिया। पास ही बैठकर बातें करने लगीं। तो मैं पूनम को खींच लिया अपनी गोद में। किस करने लगा। पूनम भी जोर-जोर से किस करने लगीं। मैं पूनम के बूब्स को दबाने लगा। तो वे बोलीं आपको जल्दी है क्या। मैंने कहा नहीं। तो बोलीं ठीक है आराम से बैठिए। अंकित तो 5 बजे के पहले नहीं आएगा। फिर मेरे पास से उठीं और किचन में घुस गईं। मैं भी पीछे-पीछे किचन में घुस गया। पूनम को पीछे से पकड़कर बूब्स को दबाने लगा। तो बोलीं रुक जाओ ना नहीं तो दूध उफान कर बाहर गिर जाएगा। मैंने बोला दूध की तरह मुझे भी उफान आ रहा है। तो बोलीं रुकिए संभालिए अपने आप को। मजे से करेंगे। तब मैं पूनम को छोड़ दिया।
तो पूनम बोलीं आप बैठिए कमरे में आती हूं। तो मैं आगे के रूम में आकर बैठ गया। तो 10 मिनट बाद पूनम एक-एक ग्लास दूध लाईं और बोलीं लीजिए फिर खाना खाएंगे इसके बाद। तो मैंने और पूनम ने एक साथ एक-एक ग्लास दूध पी लिया। दूध का स्वाद कुछ ऐसा था जैसे उसमें कुछ मिलाया गया हो। फिर कुछ देर बातें कीं और पूनम ने खाना परोसा। दोनों डाइनिंग टेबल पर खाना खाए। तब तक दोपहर के 1 बजकर 20 मिनट हो गए।
खाना खाकर दोनों लिविंग रूम के सोफे में बैठकर बातें करने लगे। मैं पूनम को किस करने लगा। पूनम भी मुझे किस करतीं और मेरे शरीर पर हाथ घुमातीं। तब मेरे लंड में तनाव बनने लगा। ऐसा लग रहा था कि लंड पैंट से बाहर आ जाएगा। पूनम की आंखें लाल-लाल होने लगीं। पूनम मादक अंदाज में बोलीं “चलिए बेडरूम में यहां गर्मी लग रही है।” तो हम दोनों बेडरूम में आ गए। बेडरूम में AC चल रहा था। रूम नॉर्मल टेम्परेचर में था।
बेडरूम में जाते ही पूनम को गोद में उठा लिया और बेड पर बिठा दिया। पूनम का वजन मुश्किल से 50-55 किलो होगा जबकि मैं 85 किलो का हूं। पर मेरी ऊंचाई 6 फीट 1 इंच है। 48 साल की उम्र में भी एकदम फिट हूं। गेहुआ रंग है। भरे-भरे लाल-लाल गाल। बड़ी-बड़ी आंखें और खूब स्मार्ट लगता हूं। मेरी खूबसूरती को ही देखकर पूनम इतनी जल्दी कार में चुदाने के लिए तैयार हो गई थी।
उस दिन मैं पूनम को किस करने लगा। पूनम ने मुझे अपनी तरफ खींचकर बेड पर गिरा दिया और मेरे ऊपर चढ़ गई। अपनी नशीली, भरी हुई आवाज में बोली, “आज बहुत परेशान करूंगी तुझे। तैयार है न?” तो मैंने बोला, “जितना मर्जी आए जुल्म कर लो पर बाद में ये नहीं कहना कि बहुत सताया।” और इतना कहने के बाद पूनम मेरे कपड़े उतारने लगी। तो मैंने खुद ही अपने सभी कपड़े उतार दिए और पूरी तरह नंगा हो गया।
पूनम ने मेरे मोटे और लंबे लंड को अपनी नरम, गर्म उंगलियों से पकड़ लिया। उसे धीरे-धीरे हिलाने लगी। इधर-उधर घुमाती हुई कुछ बड़बड़ाई। मैंने पूछा, “क्या हुआ? क्या कह रही हो?” तो बोली, “कुछ नहीं।” मैंने बोला, “बताओ ना।” कुछ नहीं बोली और झुककर मेरे लंड को चाटने लगी। अपनी गीली, गर्म जीभ निकाल-निकालकर लंड की नोक से लेकर नीचे तक चाटने लगी। मैं गर्म पड़ने लगा। मेरा लंड आज कुछ ज्यादा ही खूंखार, मोटा और तना हुआ लग रहा था। उसकी नसें फूलकर साफ दिख रही थीं।
मैंने भी पूनम की गाउन को ऊपर से निकाल दिया। जैसे ही गाउन उतरा, पूनम के मस्त-मस्त, भरे हुए बूब्स बाहर आ गए। उनके गुलाबी-गुलाबी निप्पल सख्त होकर खड़े थे। मैं लपककर उन बूब्स को मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। अपनी जीभ से निप्पल को घुमाते हुए चूसता रहा। पूनम को बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी क्लीन, गुलाबी चूत को चाटने लगा। मेरी जीभ उनकी चूत की फांकों को अलग करके अंदर तक घुसने लगी। उनकी मीठी, गर्म चूत का रस मेरी जीभ पर फैल रहा था।
दो मिनट की चूत चटाई में ही पूनम आग की तरह भभककर जलने लगी। उसने मुझे नीचे गिराते हुए मेरे ऊपर चढ़ गई। बेड में तकिए के नीचे से कोहिनूर कंडोम निकाला, जिसमें बाहर से खुरदुरा था। उसे मेरे लंड पर चढ़ा दिया। फिर लंड को अपनी भीगी हुई चूत में धीरे-धीरे डाल लिया। पूरी तरह अंदर लेते हुए मेरे ऊपर लेट गई और अपनी चूत को मेरे लंड के साथ तेजी से घिसने लगी। मैं भी लंड का जोरदार थोकड़ मारने लगा।
कुछ ठोकरों के बाद ही मैंने पूनम को नीचे गिरा दिया। फिर मैं पूनम को लंड के ठोकरों की बौछार कर दिया। पूनम के मुंह से उ उ उ उ… आ आ आ आह… आह… आह… आ आ आ आह… अहा अहा… सी सी सी… स्स्स्स्स्स्स्स… आआ आ आआआ आ आआ आआह् ह्ह्ह्ह् ह्ह्ह् की तेज आवाजें आने लगीं। पूनम अपनी दोनों आंखें बंद करके मजे से चुदा रही थी। जोर-जोर से बड़बड़ा रही थी, “और… और… और जोर जोर से चोदो मेरे राजा… बहुत दिन बाद आज चुदा रही हूं… तीन साल हो गए… इस तरह चुदाई मारो… मारो… छोड़ दो आज… फाड़ डालो इसे।” वह बहुत कूदती थी। बाकी नौजवानों को देखकर मैं और जोर-जोर से चोदने लगा।
पूनम दस मिनट तक चुदाने के बाद स्खलन होने की कगार पर आ गई। तो मैंने चुदाई की स्पीड कम कर दी। पूनम बोली, “मारो… बहुत अच्छा लग रहा है।” पर मैं कुछ बातें करने लगा जिससे उसका ध्यान बट जाए। ताकि मैं इसे दूसरे तरीके से चोद सकूं। क्योंकि इसका वजन कम है। इसे उठा-उठाकर हवा में लहरा-लहराकर मजे से चोदा जा सकता है। और मेरी चाल कामयाब रही।
तब मैंने पूनम को बोला कि बेड के किनारे के पास आओ। मैं भी बेड से नीचे आ गया। पूनम की दोनों टांगों को पकड़कर ऊपर कर दिया। लंड पेलते हुए पूनम को उठा लिया। उसकी दोनों टांगों को अपने कंधे पर रख लिया। पूनम ने अपने दोनों हाथों को मेरे गले में डाल लिया। मैंने पूनम की पीठ में हाथ रखकर मजबूती से पकड़ लिया और हवा में झूला-झूला कर चोदने लगा। पूनम बड़े मजे के साथ हवा में झूलने लगी। बीच-बीच में पूनम मेरे मुंह से अपना मुंह जोड़ लेती और मेरी जीभ व होंठों को चूसती।
पूनम का वजन कम होने से मैंने उसे खूब देर तक चुदाई की। पूनम इतना उत्तेजित हो गई कि ऐसा लगता था कि मेरी जीभ को खींचकर अपने मुंह में हमेशा के लिए ले लेगी। पर मैं भी तबीयत से पूनम की चुदाई करने लगा। पूनम के मुंह से उ उ उ उ… आ आ आ आह… आह… आह… आ आ आ आह… अहा अहा… सी सी सी… स्स्स्स्स्स्स्स… आआ आ आआआ आ आआ आआह् ह्ह्ह्ह् ह्… की जोर-जोर से आवाजें निकलने लगीं। वह मेरे से चिपककर ढीली पड़ गई। मैं समझ गया कि पूनम झर चुकी है।
तब मैंने पूनम को नीचे उतार दिया। तो पूनम मेरे खड़े लंड को देखकर बोली, “ये रिलैक्स नहीं हुआ क्या?” तो मैंने बोला नहीं। तो पूनम बोली, “आओ कर लो रिलैक्स।” और लेट गई। तो मैंने बोला नहीं, मैं इसे ठंडा कर लेता हूं। एक घंटे बाद फिर से कर लेंगे। तो पूनम तैयार हो गई और मेरे पास ही नंगी होकर लेटी रही। गंदी-गंदी बातें करने लगी।
मैंने पूनम से पूछा कि कैसे रह पाती हो बिना चुदाई करवाए। तो पूनम हंसते हुए बोली, “बैंगन।” किस दिन काम आएगा। तो मैंने पूछा कि बैंगन से करती हो। तो बोली कि हां, क्या करूं और कोई चारा नहीं। तो मैंने पूछ लिया कैसे करती हूं बैंगन से। तो बोली कि लंबा और मोटा सा बैंगन लाती हूं। उसके ऊपर कंडोम लगाकर अपनी फुद्दी की भूख मिटाती हूं। फिर मैंने पूछा कि दूध में क्या दिया था। तो बोली कि एक कैप्सूल आती है। ओ [पति का नाम लिया] लाते थे। तो हम दोनों दूध में डालकर पी लेते थे। एक घंटे बाद दोनों मस्त मजा लेते थे चुदाई।
फिर मैंने पूनम से पूछा कि और किसी से चुदाया आज तक। तो बोली नहीं, पति और आप। मैंने बोला झूठ बोलती हो। तो बोली नहीं, आप ही हो जो पहली नजर में पसंद आ गए। बहुत देर तक बातें करते-करते मैं फिर से पूनम को प्यार करने लगा। तो पूनम गर्म पड़ने लगी। तो पूनम की चूत को चाटने लगा और फिर पूनम की चूत की चुदाई का सिलसिला किया जो आज तक लगातार चालू है।